13/01/2026
पहले वे राम को मंदिर ले जाते दिखे, लोगों ने विरोध नही किया.
फिर काशी कॉरिडोर के लिये ऐतिहासिक मंदिर और मूर्तियाँ तोड़ी गईं जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर थीं. जनता चुप रही.
तिरूपति मंदिर में विष्णु की मूर्ति के आगे कुछ इस तरह तस्वीर खिंचवाई कि ख़ुद बाला जी लगें. लोगों ने पसन्द किया.
सोमनाथ यात्रा में शिव रूप धारण किया. लोगों ने तालियाँ बजाईं.
और अब हनुमानजी को पतंग की तरह उड़ा रहे हैं और उनके भक्त लहालोट हैं.
कोई और धर्म होता तब भी क्या उसके धार्मिक अपने ईष्ट के इतने अपमान को पसन्द करते कि कोई ख़ुद को बुद्ध, नानक, ईसा मसीह या मुहम्मद साहब की जगह प्रस्तुत कर दे और वे विरोध न करें?
मगर हिंदू धर्म की उदारता की जय, मोदी जी लगातार ख़ुद को भगवानों की जगह बल्कि उनसे बड़ा प्रस्तुत कर रहे हैं, उनके मंत्री संतरी विधायक उन्हें विष्णु अवतार कह चुके हैं, उनका क़द इतना बड़ा हो गया कि हनुमानजी को पतंग की तरह उड़ा रहे हैं, और भक्त लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.
सच कहूँ तो भक्तों की testing चल रही है कि वे किस हद तक मोदी जी को पूज सकते हैं, किस हद तक अपने ईष्ट का अपमान सहन कर सकते हैं.
मोदी जी ख़ुद भी स्वयं को अवतार और दशरथ का बेटा तो घोषित कर ही चुके हैं, जिस दिन उन्हें यक़ीन हो गया कि उनके प्रति भक्ति पूरी तरह अँधी है, सबकुछ सहन करना सम्भव है, वे दूसरे भगवानों की पूजा करने की जगह अपने मंदिर बनवा देंगे, और सरकारी फ़रमान जारी होगा कि मोदी जी को पूजते हुए लोग अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड करें.
वो दिन दूर नहीं.