31/05/2026
खान सर ने तंज कसते हुए कहा— "तुम पढ़ाओ, तलवे कैसे चाटे जाते हैं।"
अब इस एक लाइन ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी है। समर्थक कह रहे हैं कि यह उन लोगों पर कटाक्ष है जो सत्ता के सामने सवाल पूछने के बजाय सिर्फ तारीफों के पुल बांधते हैं।
वहीं आलोचकों का कहना है कि एक शिक्षक को ऐसी भाषा से बचना चाहिए और अपनी बात संयम से रखनी चाहिए।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या आज के दौर में सच बोलने वालों और सत्ता की तारीफ करने वालों के बीच की लड़ाई इतनी बढ़ चुकी है कि शिक्षा के मंच से भी ऐसे तीखे बयान सुनाई देने लगे हैं?
आपकी राय क्या है?
क्या खान सर का बयान एक जायज़ राजनीतिक व्यंग्य है, या फिर एक शिक्षक की मर्यादा के खिलाफ?
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