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एक आदमी की "गाड़ी" गांव के क़रीब ख़राब हो गई, उसने सोचा कि गांव से किसी से मदद लेता हूँ। वह जैसे ही गांव में दाख़िल हुआ त...
23/06/2025

एक आदमी की "गाड़ी" गांव के क़रीब ख़राब हो गई, उसने सोचा कि गांव से किसी से मदद लेता हूँ। वह जैसे ही गांव में दाख़िल हुआ तो उसने देखा एक बूढ़ा शख़्स चारपाई पर बैठा है और उसके क़रीब "मुर्गियां" दाना चुग रही हैं। उन मुर्गियों में एक ”बाज़” का बच्चा भी है जो मुर्गियों की तरह दाने चुग रहा है। वह हैरान हुआ और अपनी गाड़ी को रोक कर उस बूढ़े शख़्स से कहने लगा कि "ये कैसे "ख़िलाफ़-ए-क़ुदरत" मुमकिन हुआ कि एक "बाज़" का बच्चा ज़मीन पर मुर्गियों के साथ दाने चुग रहा है?

तो उस बूढ़े शख़्स ने कहा- "दरअसल ये बाज़ का बच्चा सिर्फ़ एक दिन का था, जब ये पहाड़ पर मुझे गिरा हुआ मिला, मैं इसे उठा लाया ये ज़ख्मी था मैंने इसको मरहम पट्टी करके इसको मुर्गी के बच्चों के साथ रख दिया, जब इसने पहली बार आंखे खोली तो इसने ख़ुद को मुर्गी के चूजों के दरमियान पाया। ये खुद को मुर्गी का चूज़ा समझने लगा और दूसरे चूजों के साथ-साथ इसने भी दाना चुगना सीख लिया।

इस दाना शख़्स ने गांव वाले से दरख़्वास्त की कि "ये बाज़ का बच्चा मुझे दे दें तोहफ़े के तौर पर या इसकी क़ीमत ले लें, मैं इस पर तहक़ीक़ करना चाहता हूं। गांव वाले ने बाज़ का बच्चा इस दान शख़्स को तोहफ़े के तौर पर दे दिया। ये अपनी गाड़ी ठीक करवा कर अपने घर आ गया। वह रोज़ाना बाज़ के बच्चे को छत से नीचे फेंक दिया करता, मगर बाज़ का बच्चा मुर्गी की तरह अपने परों को सुकड़ कर गर्दन उसमें छुपा लेता था। वह रोज़ाना बाज़ के बच्चे को अपने सामने टेबल पर बिठाता और कहता "तू बाज़ का बच्चा है, मुर्गी का नही अपनी पहचान कर" इस तरह उसने कई दिन तक अरबी, फ़ारसी , उर्दू , पश्तो समेत लगभग हर ज़बान में इस बाज़ के बच्चे को कहा कि "तू बाज़ का बच्चा है मुर्गी का नही, अपनी पहचान कर"

आख़िरकार वह दाना शख़्स एक दिन बाज़ के बच्चे को लेकर एक बुलंद तरीन पहाड़ पर चला गया और उसे कहने लगा, "ख़ुद को पहचानने की कोशिश करो तुम बाज़ के बच्चे हो" और इस शख़्स ने ये कहकर बाज़ के बच्चे को पहाड़ की बुलंदी से नीचे फेंक दिया। बाज़ का बच्चा डर गया और उसने मुर्गी की तरह अपनी गर्दन को झुका कर पैरों को सुकड़ लिया और आंखे बंद करली, थोड़ी देर बाद उसने आंखे खोली तो उसने देखा कि ज़मीन तो अभी बहुत दूर है, तो उसने अपने पर फडफ़ड़ाएं और उड़ने की कोशिश करने लगा।

जैसे कोई आप को दरिया में धक्का दे दे तो आप को तैरना नहीं भी आता तो भी आप हाथ पांव मारेंगे, थोड़ी ही देर में वह अपने आप को बेलेंस करने लगा क्योंकि बाज़ में उड़ने की सलाहियत खुदा ने रखी हुई है। थोड़ी ही देर में वह ऊंचा उड़ने लगा। वह ख़ुशी से चीखने लगा और ऊपर और ऊपर जाने लगा, कुछ ही देर में वह इस दाना शख़्स से भी ऊपर निकल गया और नीचे निगाहें करके उसका एहसान मंद होने लगा।

तो दाना शख़्स ने कहा, "ऐ बाज़ मैने तुझे तेरी शनाख्त दी है, अपने पास से कुछ नहीं दिया ये कमाल और सलाहियतें तेरे अंदर मौजूद थी, मगर तू बेख़बर था। यही मामला हम लोगो के साथ है, हमारी एक ख़ास शिनाख्त है, हम एक ख़ास उम्मत के रकान हैं। हम एक ऐसी क़ौम से हैं जिसने सारी दुनिया पर "हुकूमत" की है। हमारे अंदर "रब्बुल इज़्ज़त" ने बेपनाह सलाहियतें रखी हैं।

मगर मसला ये है कि हमारे इर्दगिर्द बेशुमार मुर्गियां हैं, जिनमे हमारे टीवी चैनल, अख़बारात और कुछ ख़ास लोग भी शामिल हैं। जो हमको मुसलसल बताते हैं कि हम बाज़ के बच्चे नही मुर्गियो के बच्चे हैं। जो बताते हैं कि तुम "सुपर पावर" नहीं हो, सुपर पावर कोई और है। जो मुसलसल ये बताते हैं तुम बहादुर और ताक़तवर नहीं हो बल्कि बुज़दिल हो, कमज़ोर हो, जो कुछ नही कर सकते।

"अगर आज हम अपने आप को पहचान लें, तो हम बहूत कुछ कर सकते हैं"

फूल का शाख पे आना भी बुरा लगता है तू नहीं है तो जमाना भी बुरा लगता है ऊब जाता हूँ खामोशी से भी कुछ देर के बाद देर तक शोर...
22/06/2025

फूल का शाख पे आना भी बुरा लगता है
तू नहीं है तो जमाना भी बुरा लगता है

ऊब जाता हूँ खामोशी से भी कुछ देर के बाद
देर तक शोर मचाना भी बुरा लगता है

इतना खोया हुआ रहता हूँ ख्यालों में तेरे
पास मेरे तेरा आना भी बुरा लगता है

जायका जिस्म का आंखों में सिमट आया है
अब तुझे हाथ लगाना भी बुरा लगता है

मैंने रोते हुए देखा है अली बाबा को
बाज औकात खजाना भी बुरा लगता है

अब बिछड़ जा कि बहुत देर से हम साथ में हैं
पेट भर जाए तो खाना भी बुरा लगता है

न्याजुद्दीन अहमद सिद्दीकी

17/06/2025

ताऊ ने तो मौज कर दी ।
#डांस

16/06/2025

हरदोई में रात को पेट्रोल पंप पर एक बुज़ुर्ग मुस्लिम व्यक्ति को घेरकर जिस तरह से पेट्रोल पंप कर्मचारी गुंडई कर रहे थे ऐसे में कोई क्या करे ? कर्मचारी जब मार पीट पर उतारू हो गए और लड़की के बाप को धक्का दिया तो उस लड़की से बाप की बेइज़्ज़ती बर्दाश्त नहीं हुई फिर उसने पिस्टल निकाला लेकिन फ़िर भी उसने फ़ायर नहीं किया । इस मामले में क़ानून बेशक अपना काम करेगा लेकिन गलती किसकी है और ये नौबत क्यूँ आई ये भी देखने वाली बात है ।
जब बात बाप पर आएगी तो डरने का नहीं है, किसी से भी भीड़ जाना है।
#हरदोई

" भैया, परसों नये मकान पे हवन है। छुट्टी (इतवार) का दिन है। आप सभी को आना है, मैं गाड़ी भेज दूँगा।" छोटे भाई लक्ष्मण ने ब...
16/06/2025

" भैया, परसों नये मकान पे हवन है। छुट्टी (इतवार) का दिन है। आप सभी को आना है, मैं गाड़ी भेज दूँगा।" छोटे भाई लक्ष्मण ने बड़े भाई भरत से मोबाईल पर बात करते हुए कहा।
" क्या छोटे, किराये के किसी दूसरे मकान में शिफ्ट हो रहे हो ?"
" नहीं भैया, ये अपना मकान है, किराये का नहीं ।"
" अपना मकान", भरपूर आश्चर्य के साथ भरत के मुँह से निकला।
"छोटे तूने बताया भी नहीं कि तूने अपना मकान ले लिया है।"
" बस भैया ", कहते हुए लक्ष्मण ने फोन काट दिया।
" अपना मकान" , " बस भैया " ये शब्द भरत के दिमाग़ में हथौड़े की तरह बज रहे थे।
भरत और लक्ष्मण दो सगे भाई और उन दोनों में उम्र का अंतर था करीब पन्द्रह साल। लक्ष्मण जब करीब सात साल का था तभी उनके माँ-बाप की एक दुर्घटना में मौत हो गयी। अब लक्ष्मण के पालन-पोषण की सारी जिम्मेदारी भरत पर थी। इस चक्कर में उसने जल्द ही शादी कर ली कि जिससे लक्ष्मण की देख-रेख ठीक से हो जाये।
प्राईवेट कम्पनी में क्लर्क का काम करते भरत की तनख़्वाह का बड़ा हिस्सा दो कमरे के किराये के मकान और लक्ष्मण की पढ़ाई व रहन-सहन में खर्च हो जाता। इस चक्कर में शादी के कई साल बाद तक भी भरत ने बच्चे पैदा नहीं किये। जितना बड़ा परिवार उतना ज्यादा खर्चा।
पढ़ाई पूरी होते ही लक्ष्मण की नौकरी एक अच्छी कम्पनी में लग गयी और फिर जल्द शादी भी हो गयी। बड़े भाई के साथ रहने की जगह कम पड़ने के कारण उसने एक दूसरा किराये का मकान ले लिया। वैसे भी अब भरत के पास भी दो बच्चे थे, लड़की बड़ी और लड़का छोटा।
मकान लेने की बात जब भरत ने अपनी बीबी को बताई तो उसकी आँखों में आँसू आ गये। वो बोली, " देवर जी के लिये हमने क्या नहीं किया। कभी अपने बच्चों को बढ़िया नहीं पहनाया। कभी घर में महँगी सब्जी या महँगे फल नहीं आये। दुःख इस बात का नहीं कि उन्होंने अपना मकान ले लिया, दुःख इस बात का है कि ये बात उन्होंने हम से छिपा के रखी।"
इतवार की सुबह लक्ष्मण द्वारा भेजी गाड़ी, भरत के परिवार को लेकर एक सुन्दर से मकान के आगे खड़ी हो गयी। मकान को देखकर भरत के मन में एक हूक सी उठी। मकान बाहर से जितना सुन्दर था अन्दर उससे भी ज्यादा सुन्दर। हर तरह की सुख-सुविधा का पूरा इन्तजाम। उस मकान के दो एक जैसे हिस्से देखकर भरत ने मन ही मन कहा, " देखो छोटे को अपने दोनों लड़कों की कितनी चिन्ता है। दोनों के लिये अभी से एक जैसे दो हिस्से (portion) तैयार कराये हैं। पूरा मकान सवा-डेढ़ करोड़ रूपयों से कम नहीं होगा। और एक मैं हूँ, जिसके पास जवान बेटी की शादी के लिये लाख-दो लाख रूपयों का इन्तजाम भी नहीं है।"
मकान देखते समय भरत की आँखों में आँसू थे जिन्हें उन्होंने बड़ी मुश्किल से बाहर आने से रोका।
तभी पण्डित जी ने आवाज लगाई, " हवन का समय हो रहा है, मकान के स्वामी हवन के लिये अग्नि-कुण्ड के सामने बैठें।"
लक्ष्मण के दोस्तों ने कहा, " पण्डित जी तुम्हें बुला रहे हैं।"
यह सुन लक्ष्मण बोले, " इस मकान का स्वामी मैं अकेला नहीं, मेरे बड़े भाई भरत भी हैं। आज मैं जो भी हूँ सिर्फ और सिर्फ इनकी बदौलत। इस मकान के दो हिस्से हैं, एक उनका और एक मेरा।"
हवन कुण्ड के सामने बैठते समय लक्ष्मण ने भरत के कान में फुसफुसाते हुए कहा, " भैया, बिटिया की शादी की चिन्ता बिल्कुल न करना। उसकी शादी हम दोनों मिलकर करेंगे ।"
पूरे हवन के दौरान भरत अपनी आँखों से बहते पानी को पोंछ रहे थे, जबकि हवन की अग्नि में धुँए का नामोनिशान न था From Braj bhushan ji

14/06/2025

ईरान ने इजराइल की राजधानी तेल अवीव में दिवाली मनाना शुरू किया

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