13/05/2021
बिहार में फिर मिल गए मौसेरे भाई,
हलचल की दस्तक हर धड़कन - हर जुबां पे हैं। किसी को अपने खोने का दु:ख, तो किसी को सरकारी उलझनों में पड़ने का। और कोविड- 19 रूपी मृत्यु शनै: शनै: मानवोः की आयु चट कर ही रही है।
डाॅक्टरों की उपचार से मरीज ठीक होकर घर लौट रहे हैं, डाॅक्टर की अपनी स्थिति विकट है। मांग कर रहे हैं, मानदेय और वर्किंग आॅवर की। खैर सरकार की चुप्पी खल रही है, सरकारी प्रदर्शन के विकट हाल भिन्न माध्यमों से लोगों को मिल रही थी। लोगों में भय बढ़ रहा था, लेकिन घर में रहने के नाम पर, तो बहुतों की मजबूरी थी बाहर निकलना।
कुछ लोग घर से बाहर आए, उन्हें ना घर में डर था और ना बाहर निकलना मजबूरी। वह तो उन्मुक्त भाव से लोगों की मदद करने को आए थे। खाना, दवा, आॅक्सीजन सिलेंडर इत्यादि की हरसंभव - हरस्तर पर मदद करने। करने लगे तो समाज के अन्य को भी बोध हुआ , हमें भी करनी चाहिए। बहुत तो व्यक्ति को सेवा का प्रतीक बताने लगे, यह बात सरकार को खल गई। कारवाई हुई, जेल भेज दिए गए। और सेवा कार्य ठप्प। और जो लोग अपने स्तर से प्रयास कर रहे थे, उनके लिए चेतावनी लगवा दी गई ( बाकी जानकारी फोटो में हैं)
मौसैरे भाई यानि कि पक्ष और विपक्ष,
पक्ष की कारवाई - विपक्ष की चुप्पी के बीच जब कुछ पार्टी के कार्यकर्ताओं की दबिश बढ़ने लगी, बोलने लगे कि यह अन्याय है, तो पक्ष - विपक्ष तीन - तेरह करके अपने कार्यकर्ताओं को ही दबारने लगे। अबतक एंबुलेंस को ड्राईवर नहीं मिली है, उम्मीद है कि वह अगले साल बालू ढुलाई में नजर आए। लेकिन वह जीवंत आज युवाओं का हीरो, सब वर्ग का चहेता बन चुका हैं- नाम पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन है।
आभार
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