04/09/2026
रेलवे का नेशनल इंस्टीट्यूट उत्सव भवन तालाब में तब्दील।
रेल परिजनों के बच्चें व बाराती करेंगे पानी में डूब लूंगी डांस..
मुंगेर। पूर्व रेलवे क्षेत्र के जमालपुर कारखाना अंतर्गत स्थापित (एन.आई) नेशनल इंस्टीट्यूट की स्थापना जमालपुर कारखाना की स्थापना के 56 वर्ष बाद ब्रिटिश काल में 1918 में की गई थी। जो वर्तमान में दुर्दशा पर आठ-आठ आंसू बहाने को बिवश हैं। आज स्थितियां यह है कि इनका पूरा परिसर तालाब में तब्दील नजर आ रहा है जहां रेल परिजनों के बाराती व बच्चे पानी में डूब कर लूंगी डांस गीत पर जश्न मनाएंगे । नेशनल इंस्टीट्यूट वर्तमान में अब विवाह भवन स्थल के रूप में जाना जाता है। जो पूरी तरह एयर कंडीशन हाॅल हैं। जहाँ अक्सर रेल कर्मचारी व अधिकारी की बैठकें एवं परिजनों की शादी समारोह बहुत ही कम राशि में बुकिंग की सुबिधा उपलब्ध है। किन्तु पानी का उचित निकासी एवं नाले की साफ सफाई नहीं होने से यह स्थल व परिसर आज तालाब का रूप ले चुका जो छायाचित्र में देखा जा सकता हैं।
बतातेंं चलें कि सन् 8 फरवरी 1862 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने जमालपुर लोकोमोटिव वर्कशॉप कारखाना की स्थापना की। और इस वर्कशॉप में कार्यरत हजारों रेल मजदूरों एवं उसके परिजनों व रेल अधिकारियों के लिए मनोरंजन के कई संस्थानों की नींव रखी।जिसमें एनआई (नेशनल इंस्टीट्यूट) का वर्ष 1918 में स्थापना की गई। वहीं सीआई (सेंट्रल इंस्टीट्यूट) का निर्माण भी कराया। एक ओर भारतीय मजदूरों के परिजनों के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट बनाए गए जिसमें वाचनालय, सिनेमाघर सहित खेल विभाग थे। वही अंग्रेज अधिकारियों के मनोरंजन के लिए अलग से सेंट्रल इंस्टीट्यूट सहित जिमखाना, क्वीन हॉस्टल का निर्माण कराया गया। जो भारतीय रेल का एक एतिहासिक धरोहर हैं। आज यह धरोहर रेल अधिकारियों के उपेक्षा पर आठ-आठ आँसू बहा रहा हैं। अंग्रेज भली-भांति जानते थे कि एक स्वच्छ मन में ही स्वास्थ्य जीवन का बास हैं। यदि कर्मियों के कुशलतापूर्वक कार्य लेना हो तो उसे मनोरंजन का साधन मुहैया कराना आवश्यक है। इसके लिए कर्मचारियों के मासिक वेतन से मनोरंजन कर काटा जाता । जो आज तक लागू हैं। सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी बिनोद मंडल कहते हैं कि मुंगेर प्रमंडल के लाखों रेल कर्मचारियों के युवा पलों की यादें समेट रखा हैं। भाजपा सरकार के बारह वर्ष बीत गये। किन्तु आज यह सिनेमाघर 12 वर्षों से तारणहार का बाट जोह रहा हैं। इसका कार्यकाल स्वर्णिम रहा है। एक समय था जब नयागांव एवं बद्दीपाड़ा के युवाओं का दबंग गई चलती थी। और हाऊस फूल सिनेमा के टिकट को लेकर मारामारी हुआ करती। आसपास के बेरोजगार दर्जनों युवाओं को रोजगार प्राप्त था। आसपास के क्षेत्रों में चहलपहल रहा करती। गरीब मजदूर,मेहनतकश, रिक्शा चालकों का देर रात्रि नाईट शो में जमघट लगा रहता और जुवाँ पर जया बहादुरी हेमामालिनी, श्रीदेवी, देवानंद, राजकपूर, दिलीप कुमार,धर्मेन्द्र,अमजद खाँ का फिल्म देखने के बाद मजदूर दिनभर का थकान भूलकर आनंद से विभोर हो जाता। आसपास के क्षेत्रों के दिवारों पर नई फिल्म के पोस्टर चिपकाने के समय लोगों का आकर्षण खींच लेता था। अब ऐसे दिवार वीरांन सा प्रतीत होता हैं। एन आई के दर्जनों अस्थाई कर्मी अपने जवानी को रेल के बाबूओं की सेवा में गुजार दिया। किन्तु रेल स्थाई कर्मी का दर्जा नही दी हैं। कहा जाता है कि 1956 2018 तक का स्वर्णिम काल रहा। यहां के लाइब्रेरी मेंं कई दुर्लभ पांडुलिपि साहित्य की किताब हुआ करती थी। इधर एनआई का पदेन अध्यक्ष मुख्य कारखाना प्रबंधक होते हैंं। जबकि इसके द्वारा नामित एक उपाध्यक्ष एवं उप उपाध्यक्ष रेल के वरीय अधिकारी होते हैंं।
पूर्व सेक्रेट्री ने बताया कि एन आई की स्थापना 1918 में की गई थी। तथा शताब्दी वर्ष 26 नवंबर 2018 को मना बीते लम्हों को रेल अधिकारी द्वारा भुला दिया गया है ।