31/10/2025
दुलारचंद यादव के अंतिम यात्रा मे हज़ारो की भीड़ है.. यह चाहते तो शहर जला कर सरकार को घुटनो पर बिठा देते लेकिन नहीं इन्होने अपना कलेजा फार के रोया गाली दिया लेकिन गोली नहीं चलाया किसी का घर नहीं तोड़ा.. लेकिन फिर भी यादव जात बदनाम रहेगा क्यों की यादव हमेसा दुसरो के लिए लड़ता और मरता है..
हम सभी के चाचा भी आज धानुक समाज के मुँहबोले बेटा के लिए जान गवां दिए.. फिर भी हम जातंकवादी हो जाते है.. अरे हम जातंकवादी होते तो अब तक तक गंगा किनारे सिर्फ दुलारचंद चाचा नहीं गंगा किनारे का पूरा शहर शमसान मे बदल देते