02/05/2026
इनके पूर्वजों ने बहुत सालों तक मेहनत कर पाखंड, अंधविश्वास, कुरितियां,का जाल बुना, दलितों को अनपढ़ रखकर राज किया यह इनकी शातिर चालें थी और इनकी सोच थी यह आने वाली पीढ़ियों का भी राशन पानी का इंतजाम करके जाए ओर इनका काम लोगों को मूर्ख बना कर ठगने का चलता रहे ऐसा काम किया ओर अपने आपको श्रेष्ठ बना कर रखा ,आज भी दलित इनके पाखंड अंधविश्वास के खिलाफ कोई बोलता है तो नष्ट कर देते हैं जब 1947 में देश आजाद हुआ ओर संविधान लिखा गया तो इन्होंने देखा कि अब पाखंड से ही काम नहीं चलेगा तो प्रशासन, राजनीति, न्यायपालिका, मीडिया में पकड़ बना ली अब फिर 15 प्रतिशत शातिर लोग 85 प्रतिशत लोगों पर राज़ कर रही है अब तो सब जगह इन्हीं लोगों का बोलबाला है चाहे दलित कितने ही ऊंची पोस्ट पर पहुंच जाए लेकिन रहेगा तो दलित ही एस सी अगर अफसर बन जाए तो कहते हैं चमार बैठा है,अब तो राजनीति में भी खैला हो रहा है जहां थोड़ा सा वीक पोइंट लिखित संविधान में नजर आया खैला कर फिर काबिज हो जाते हैं दलित समाज इनके शातिर दिमाग तक आज तक नहीं पहुंच पाए हैं आज एस सी एस टी ओबीसी के 131 सांसद जो चुनकर संसद में ग ए है वो भी संविधान की बदौलत सांसद चुनकर ग ए है वो यह सोचते हैं हम हमारी काबिलियत से बने हैं अगर बाबा साहेब ने आरक्षित सीटों नहीं रखी होती तो एक सीट पर दलित सांसद नहीं बनता ओर यह बाबा साहेब के करें कराएं पर पानी फेर दिया यह चुनकर जाते हैं आरक्षित सीटों से, ओर इन्हीं लोगों के तलवे चाटते हैं यह चमचागिरी, चाटुकारिता, तलवे चाटने वाला काम ही एस सी एस टी ओबीसी सांसद का रह गया है