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16/10/2026

मंत्री पुत्र का निर्दलीय नामांकन: सत्ता की पकड़ पर सवाल, संगठन की ताकत की परीक्षा

बेटे को चुनावी मैदान में उतरने से नहीं रोक पाए मंत्री खर्रा? भाजपा के टिकट और अनुशासन पर उठे सवाल

मंत्री पुत्र का निर्दलीय दांव, राजस्थान की सियासत में उबाल!

पिता रोक नहीं पाए या पर्दे के पीछे कोई राजनीतिक रणनीति? नामांकन के बाद उठे पहचान, पद और संगठन से नजदीकी के सवाल

🖋 तेजाराम लाडणवा
राजस्थान सरकार में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बड़े बेटे दुर्गा सिंह खर्रा ने सीकर जिले की श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड संख्या 19 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया है। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। दुर्गा सिंह ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की नाराजगी को फैसले की वजह बताते हुए भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहने की बात कही है।

लेकिन सवाल कई हैं। क्या मंत्री अपने बेटे को निर्दलीय चुनाव लड़ने से नहीं रोक पाए, या यह फैसला पूरी तरह बेटे का व्यक्तिगत निर्णय है? क्या स्थानीय नाराजगी ही इसकी वजह है, या इस कदम से दुर्गा सिंह को अलग राजनीतिक पहचान दिलाने का रास्ता भी खुल सकता है?

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठता है कि क्या निर्दलीय नामांकन के बाद प्रदेश के बड़े नेताओं का ध्यान आकर्षित करने और संगठन में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर बन सकता है? क्या भविष्य में किसी संगठनात्मक जिम्मेदारी या बोर्ड में पद मिलने की संभावना को लेकर भी चर्चाएं होंगी? हालांकि, ऐसी किसी पूर्वनियोजित रणनीति, आश्वासन या मंत्री की सहमति की पुष्टि करने वाले तथ्य फिलहाल सामने नहीं हैं।

एक तरफ दुर्गा सिंह का भाजपा के प्रति निष्ठा जताना और दूसरी तरफ निर्दलीय चुनाव लड़ना चर्चा का विषय है। क्या यह स्थानीय संगठन से असंतोष का परिणाम है या पिता की राजनीतिक भूमिका से अलग स्वतंत्र रास्ता चुनने का फैसला? इन सवालों का जवाब संबंधित पक्षों की स्पष्ट प्रतिक्रिया से ही मिल सकता है।

फिलहाल नामांकन वापस लेने की स्थिति नहीं है और दुर्गा सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चर्चा में हैं। ऐसे में इस घटनाक्रम को किसी तय राजनीतिक योजना का परिणाम मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि मंत्री पुत्र के एक फैसले ने स्थानीय संगठन, पारिवारिक राजनीति और भविष्य की राजनीतिक पहचान को लेकर बहस छेड़ दी है।

राजकुमारी बाई की अनूठी पहल: जनप्रतिनिधियों का सम्मान कर मेड़ता के चौमुखी विकास के लिए देंगी आशीर्वादशहर के हर सुख-दुख मे...
15/10/2026

राजकुमारी बाई की अनूठी पहल: जनप्रतिनिधियों का सम्मान कर मेड़ता के चौमुखी विकास के लिए देंगी आशीर्वाद
शहर के हर सुख-दुख में परिवार की सदस्य बनकर खड़ी रहती हैं राजकुमारी बाई, मानव सेवा से लेकर मूक पशु-पक्षियों की सेवा तक निभा रहीं जिम्मेदारी
16 अक्टूबर को किन्नर समाज की गादीपति राजकुमारी बाई एवं उनकी टीम की ओर से नवनिर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पार्षदों का सम्मान समारोह और स्नेह भोज

भक्ति, आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता की नगरी मेड़ता में किन्नर समाज की गादीपति राजकुमारी बाई अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। शहर में किसी परिवार पर सुख आए या दुख की घड़ी हो, सामाजिक आयोजन हो या जरूरतमंद को संबल देने का अवसर, राजकुमारी बाई और उनकी टीम लोगों के बीच पहुंचकर आत्मीयता के साथ अपनी भागीदारी निभाती हैं। यही वजह है कि उनके प्रति लोगों में श्रद्धा और अपनत्व का भाव देखने को मिलता है। अब राजकुमारी बाई ने मेड़ता के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान के लिए विशेष समारोह आयोजित करने की पहल की है। इस आयोजन का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को आशीर्वाद देने के साथ मेड़ता के उज्ज्वल भविष्य और चौमुखी विकास की कामना करना है।
राजकुमारी बाई के आशीर्वाद के लिए हवेली में उमड़ते हैं श्रद्धालु
मेड़ता स्थित किन्नर समाज की हवेली में राजकुमारी बाई का आशीर्वाद लेने के लिए मेड़ता शहर ही नहीं, बल्कि जिले और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचने वाले लोगों में गहरी श्रद्धा देखने को मिलती है। राजकुमारी बाई जब शहर की गलियों से गुजरती हैं, तो अनेक लोग उनका अभिवादन कर आशीर्वाद लेते हैं।
उनकी पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सहभागिता भी उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण पक्ष है। शहर के लोगों के साथ आत्मीय संबंध बनाए रखना, जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहना और सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।
इंसानों के साथ बेजुबान जीवों से भी विशेष प्रेम
राजकुमारी बाई की सेवा भावना का दायरा मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है। वे पशु-पक्षियों और अन्य बेजुबान जीवों के प्रति भी संवेदनशील रहती हैं। गौमाता की सेवा के साथ विभिन्न पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी और चुग्गे की व्यवस्था करने जैसे कार्यों में भी रुचि लेती हैं।
उनकी इस भावना में जीव मात्र के प्रति करुणा और संवेदना का संदेश छिपा है। सामाजिक जीवन में जहां जरूरतमंदों की सहायता और लोगों के सुख-दुख में भागीदारी महत्वपूर्ण है, वहीं बेजुबान जीवों की देखभाल भी सेवा का अहम रूप है। राजकुमारी बाई की गतिविधियों में इन दोनों पक्षों की झलक देखने को मिलती है।
जनप्रतिनिधियों का सम्मान, मेड़ता के विकास की मंगलकामना
मेड़ता नगर पालिका के नवनिर्वाचित बोर्ड के गठन के बाद शहरवासियों की निगाहें अब विकास कार्यों पर टिकी हैं। शहर की आधारभूत सुविधाओं में सुधार, बेहतर सड़कें, पेयजल व्यवस्था और ऐतिहासिक कुंडल सरोवर का विकास जैसे विषय स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं में शामिल हैं।
इसी भावना के साथ किन्नर समाज की गादीपति राजकुमारी बाई की ओर से नगर पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षदों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के सम्मान का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में राजकुमारी बाई एवं उनकी टीम जनप्रतिनिधियों का अभिनंदन कर उन्हें मेड़ता के विकास, जनसेवा और जनअपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए शुभकामनाएं देंगी।
कामना यही रहेगी कि नया नगर पालिका बोर्ड शहर में बेहतर सड़कें, सुचारु पेयजल व्यवस्था, कुंडल सरोवर का विकास और अन्य नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए मेड़ता को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करे।
मीराबाई की नगरी को विकास के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की कामना
मेड़ता की पहचान भक्त शिरोमणि मीराबाई की भक्ति और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी हुई है। मीराबाई ने अपनी भक्ति से देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान बनाई। इसी तरह मेड़ता का नगर पालिका बोर्ड भी विकास कार्यों, जनसेवा और बेहतर नागरिक सुविधाओं के माध्यम से शहर को नई पहचान दिलाए, ऐसी अपेक्षा की जा रही है।
राजकुमारी बाई की ओर से आयोजित सम्मान समारोह का संदेश भी इसी भावना से जुड़ा है कि जनप्रतिनिधि जनता की उम्मीदों को समझें और शहर के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर काम करें। शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को सहेजते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हो, ताकि मेड़ता प्रदेश में विकास की दृष्टि से अपनी अलग पहचान बना सके।
16 अक्टूबर को जांगिड़ भवन में होगा सम्मान समारोह
किन्नर समाज की गादीपति राजकुमारी बाई एवं उनकी टीम की ओर से शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे मेड़ता सिटी में सोनला भेरूजी मंदिर के सामने स्थित जांगिड़ भवन में जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह एवं स्नेह भोज आयोजित किया जाएगा।
समारोह में मेड़ता नगर पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष कंचन देवी, उपाध्यक्ष, सभी नवनिर्वाचित पार्षदों एवं जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। आयोजन के माध्यम से उनका अभिनंदन करने के साथ मेड़ता के विकास और शहरवासियों की खुशहाली की मंगलकामना की जाएगी।
राजकुमारी बाई की यह पहल सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और जनसेवा की भावना को सामने लाती है। समारोह के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को यही संदेश दिया जाएगा कि जनता ने उन्हें शहर की जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए मेड़ता के विकास, नागरिक सुविधाओं और प्रत्येक वार्ड की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देना ही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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मेड़ता रोड के प्रकाश चंद जांगिड़ का शिक्षा जगत में बढ़ा मान, जिलाध्यक्ष बनने पर हुआ भव्य सम्माननिर्विरोध जिलाध्यक्ष निर्...
15/10/2026

मेड़ता रोड के प्रकाश चंद जांगिड़ का शिक्षा जगत में बढ़ा मान, जिलाध्यक्ष बनने पर हुआ भव्य सम्मान
निर्विरोध जिलाध्यक्ष निर्वाचित होने पर शिक्षकों ने माला और साफा पहनाकर किया अभिनंदन, शिक्षा जगत में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलने पर दी बधाई
🖋 तेजाराम लाडणवा
मेड़ता सिटी
मेड़ता रोड के मूल निवासी एवं जांगिड़ समाज के गौरव प्रकाश चंद जांगिड़ को राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित होने पर सम्मानित किया गया। राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय जारोड़ा खुर्द के विद्यालय स्टाफ एवं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भुणास की ओर से आयोजित सम्मान कार्यक्रम में शिक्षकों ने माला और साफा पहनाकर उनका अभिनंदन किया तथा नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रकाश चंद जांगिड़ ने शिक्षा विभाग में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिलाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन को शिक्षा जगत में उनके प्रति शिक्षकों के विश्वास और संगठनात्मक नेतृत्व की जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। उनके निर्वाचन पर शिक्षकों में खुशी का माहौल रहा।
इस अवसर पर सुरेश सांगवा, महेंद्र खोजा, ओमप्रकाश मीणा, बादलराम चौधरी, सहदेव इनाणिया, सुमन सिरोही, नीलू, नसीम बानो पठान, सविता मीणा, रामपुत्री, पप्पुराम एवं विक्रम सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने प्रकाश चंद जांगिड़ को बधाई देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।
प्रकाश चंद जांगिड़ ने जताया आभार
सम्मान से अभिभूत जिलाध्यक्ष प्रकाश चंद जांगिड़ ने सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और शिक्षक हितों के लिए कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।

अमित टाक परिवार की मेजबानी में भव्य संत समागम एवं जनप्रतिनिधि सम्मान समारोहसंत-महात्माओं के सान्निध्य में गूंजा सेवा, पर...
15/10/2026

अमित टाक परिवार की मेजबानी में भव्य संत समागम एवं जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह
संत-महात्माओं के सान्निध्य में गूंजा सेवा, परोपकार और मानवता का संदेश
टाक परिवार ने राजस्थानी परंपरा से किया संतों, नगर पालिका अध्यक्ष एवं नवनिर्वाचित पार्षदों का अभिनंदन
🖋 तेजाराम लाडणवा
मेड़ता सिटी के घटेला ढाणी रोड स्थित श्रीकिशन जी की ढाणी में गुरुवार को टाक परिवार की ओर से भव्य संत समागम एवं जनप्रतिनिधि अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। भाजपा नेता एवं युवा समाजसेवी अमित टाक के संयोजन में आयोजित इस समारोह में विभिन्न संप्रदायों के संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। समारोह में संतों के आशीर्वचन के साथ जनप्रतिनिधियों का राजस्थानी परंपरा के अनुरूप सम्मान किया गया।
कई संप्रदायों के संत-महात्माओं का रहा सान्निध्य
समारोह में दादू संप्रदाय नरेना पीठाधीश्वर आचार्य ओमप्रकाश दास महाराज, अखिल भारतीय रामस्नेही संप्रदाय रेन पीठाधीश्वर आचार्य सज्जन राम महाराज, मेड़ता रामधाम श्री देवल के उत्तराधिकारी संत रामनिवास शास्त्री महाराज, मेड़ता दादू छतरी आश्रम के हरिनारायण महाराज, कमल दास महाराज, कुचेरा के सुखदेव महाराज तथा मेड़ता किन्नर समाज की गादीपति राजकुमारी बाई सहित अनेक संत-महात्माओं का सान्निध्य रहा।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संजय कुमार मालवीय,
टॉक महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष कन्हैयालाल टॉक, मेड़ता नगर पालिका अध्यक्ष कंचन देवी, अध्यक्ष प्रतिनिधि राजेंद्र सांखला, बुटाटी धाम समिति अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़, नागौर जिला गौशाला संघ अध्यक्ष रामजीवण डांगा सहित अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समारोह के संयोजक अमित टाक एवं टाक परिवार की ओर से आगंतुक संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों एवं अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मेड़ता नगर पालिका अध्यक्ष कंचन देवी, अध्यक्ष प्रतिनिधि राजेंद्र सांखला तथा सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को साफा पहनाकर एवं माला पहनाकर सम्मानित किया गया। वहीं संत-महात्माओं का पारंपरिक तरीके से शॉल, श्रीफल एवं माला भेंट कर बहुमान किया गया।
समारोह में राजस्थानी संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। संतों के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और जनप्रतिनिधियों के सम्मान की भावना प्रमुखता से दिखाई दी।
संतों ने दिया परोपकार, सेवा और मानवता का संदेश
संत समागम में संत-महात्माओं ने अपने आशीर्वचनों में परोपकार, सेवा, सद्भाव और मानवता को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। नरेना पीठाधीश्वर आचार्य ओमप्रकाश दास महाराज, रामस्नेही संप्रदाय रेन पीठाधीश्वर आचार्य सज्जन राम महाराज एवं संत रामनिवास शास्त्री महाराज ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में सदैव परोपकार करते रहना चाहिए। संत-महात्माओं का सान्निध्य मिलना जीवन का बड़ा सौभाग्य है। मनुष्य को दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए तथा किसी की आत्मा को कष्ट पहुंचाने से बचते हुए जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
संतों ने कहा कि समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना मजबूत करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। सेवा और परोपकार के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने दी कानून संबंधी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संजय कुमार मालवीय ने उपस्थित लोगों को कानून एवं विधिक सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। उन्होंने लोगों को विधिक जानकारी के प्रति जागरूक रहने तथा जरूरत पड़ने पर उपलब्ध विधिक सहायता सेवाओं का लाभ उठाने के बारे में अवगत कराया।
सामाजिक सरोकारों के साथ धार्मिक आयोजनों में सक्रिय है टाक परिवार
भाजपा नेता एवं युवा समाजसेवी अमित टाक की ओर से आयोजित इस संत समागम एवं जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का संदेश दिया गया। टाक परिवार की मेजबानी में आयोजित कार्यक्रम में संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।
समारोह के माध्यम से संतों के प्रति श्रद्धा, जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मान तथा समाज में सेवा, सहयोग और सद्भाव की भावना को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
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नागौर में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का भरोसेमंद केंद्र बना श्री हरिराम हॉस्पिटलडॉ. प्रवीण प्रजापत की विशेषज्ञता के साथ एक ह...
15/10/2026

नागौर में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का भरोसेमंद केंद्र बना श्री हरिराम हॉस्पिटल
डॉ. प्रवीण प्रजापत की विशेषज्ञता के साथ एक ही छत के नीचे सर्जरी, हड्डी, मूत्र रोग व फिजियोथेरेपी की सुविधाएं
नागौर। बेहतर स्वास्थ्य, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और अनुभवी चिकित्सकीय टीम—इन तीनों का समन्वय नागौर के श्री हरिराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में देखने को मिलता है। गौरव पथ स्थित यह अस्पताल विभिन्न चिकित्सा सेवाओं के साथ मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जाना जाता है। अस्पताल की जानकारी के अनुसार यहां सामान्य सर्जरी से लेकर हड्डी, मूत्र रोग, सामान्य चिकित्सा और फिजियोथेरेपी जैसी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल की सार्वजनिक सूचीबद्ध जानकारी भी इसके नागौर स्थित गौरव पथ-अजमेरी गेट क्षेत्र में होने की पुष्टि करती है।

डॉ. प्रवीण प्रजापत—सर्जरी के क्षेत्र में प्रमुख नाम
अस्पताल की टीम में डॉ. प्रवीण प्रजापत, सामान्य एवं दूरबीन विधि सर्जन प्रमुख रूप से शामिल हैं। अस्पताल के प्रचार सामग्री में उनके नाम के साथ 30 हजार से अधिक जटिल ऑपरेशन का अनुभव बताया गया है। उनकी विशेषज्ञता में दूरबीन विधि से सर्जरी, पित्त की पथरी, हर्निया, बवासीर, फिशर, फिस्टुला, पाइल्स तथा बड़ी आंत एवं गुदा रोगों की सर्जरी जैसी सेवाएं शामिल हैं।
डॉ. प्रवीण प्रजापत को लेकर उपलब्ध चिकित्सकीय प्रोफाइल भी उन्हें सामान्य सर्जन के रूप में दर्ज करती है और उनके श्री हरिराम हॉस्पिटल में कार्य अनुभव का उल्लेख करती है।

घुटना प्रत्यारोपण से लेकर खेल चोटों तक विशेषज्ञ उपचार
अस्पताल में डॉ. एल.एस. राठौड़, अस्थि रोग विशेषज्ञ घुटना प्रत्यारोपण, कूल्हा प्रत्यारोपण, फ्रैक्चर एवं जोड़ संबंधी समस्याओं, रीढ़ की समस्याओं तथा खेल चोटों से जुड़े उपचार की सेवाएं देते हैं। अस्पताल की सामग्री में उनके नाम के साथ 500 से अधिक घुटना प्रत्यारोपण का अनुभव दर्शाया गया है।
मूत्र रोगों के लिए विशेषज्ञ सेवाएं
मूत्र रोग विभाग में डॉ. धर्मवीर चौधरी तथा डॉ. रुचिर एरॉन की विशेषज्ञ सेवाएं बताई गई हैं। यहां गुर्दे की पथरी, मूत्र मार्ग संक्रमण, गुर्दे की पथरी की लेजर सर्जरी, प्रोस्टेट संबंधी समस्याएं, मूत्राशय के रोग तथा अन्य मूत्र संबंधी समस्याओं के उपचार की सुविधा उपलब्ध बताई गई है।
सामान्य रोगों के उपचार से फिजियोथेरेपी तक
डॉ. घनश्याम जाखड़ सामान्य चिकित्सक के रूप में सामान्य एवं जटिल रोगों के उपचार के साथ हृदय, मधुमेह, रक्तचाप, संक्रमण और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं पर चिकित्सा सेवाएं देते हैं। वहीं डॉ. राकेश गोदारा फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में चोटों और जोड़ों के दर्द, रीढ़ एवं गर्दन के दर्द, स्पोर्ट्स इंजरी, ऑपरेशन के बाद की फिजियोथेरेपी तथा लकवा पुनर्वास जैसी सेवाओं से जुड़े हैं।
एक ही परिसर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार
श्री हरिराम हॉस्पिटल की खासियत केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों तक सीमित नहीं है। अस्पताल की जानकारी के अनुसार यहां—
मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर
दूरबीन विधि एवं आधुनिक शल्य उपकरण
डिजिटल एक्स-रे एवं सोनोग्राफी
24 घंटे आपातकालीन सेवाएं
आईसीयू एवं उच्च निर्भरता इकाई
फार्मेसी
पैथोलॉजी लैब
कम्प्यूटरीकृत सामान्य एवं निजी कक्ष
अनुभवी एवं सहयोगी स्टाफ
स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण
जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
कैशलेस उपचार की सुविधा भी
अस्पताल की प्रचार सामग्री में ईसीएचएस, आरजीएचएस, मां योजना तथा विभिन्न टीपीए के माध्यम से कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। अस्पताल की एक ऑनलाइन सूचीबद्ध जानकारी में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से संबद्धता का भी उल्लेख मिलता है; हालांकि मरीजों को उपचार से पहले वर्तमान पात्रता और योजना की स्वीकृति अस्पताल से सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।
नागौर में चिकित्सा सुविधा को नई पहचान देने की दिशा में प्रयास
आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, अलग-अलग विशेषज्ञताओं और मरीजों को एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराने की सोच के साथ श्री हरिराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर नागौर में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। खास तौर पर डॉ. प्रवीण प्रजापत की सर्जरी विशेषज्ञता अस्पताल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
पता : 64 सैनिक बस्ती, गौरव पथ, नागौर, राजस्थान–341001
संपर्क : 9214176595

बाऊसा से मिली जीवदया और सेवा की विरासत को परिवार ने रखा जीवंतसेठ केसरीमलजी बुरड़ के छठे पुण्यस्मरण पर श्री गुरु सौभाग्य ...
14/10/2026

बाऊसा से मिली जीवदया और सेवा की विरासत को परिवार ने रखा जीवंत
सेठ केसरीमलजी बुरड़ के छठे पुण्यस्मरण पर श्री गुरु सौभाग्य मदन गौशाला में 800 से अधिक गौमाताओं की सेवा का संकल्प, गौमाताओं को लगाया लापसी का भोग
पिता के पुण्य स्मरण को बनाया जीवसेवा का प्रेरणादायी अवसर, बुरड़ परिवार ने गौवंश संरक्षण के लिए दिए 5,11,111 रुपये
🖋 तेजाराम लाडणवा
देवगढ़
पुण्यात्माओं की सच्ची स्मृति केवल शब्दों और तस्वीरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके बताए सेवा, संस्कार और परोपकार के मार्ग पर चलकर उसे जीवंत रखा जाता है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए श्री गुरु सौभाग्य मदन गौशाला प्रवासी समिति, देवगढ़ के संस्थापक एवं समाजसेवी सेठ साहब केसरीमलजी सा बुरड़ के छठे पुण्यस्मरण पर बुरड़ परिवार ने गौसेवा और जीवदया का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
14 अक्टूबर 2026 को सेठ केसरीमलजी बुरड़ के पावन स्मरण के अवसर पर श्री गुरु सौभाग्य मदन गौशाला, देवगढ़ में 800 से अधिक गौमाताओं की सेवा एवं संरक्षण का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर गौमाताओं के लिए लापसी के मीठे भोग की व्यवस्था की गई। गौवंश के संरक्षण और सेवा के निमित्त 5,11,111 रुपये की राशि प्रदान कर परिवार ने अपने पूर्वजों के सेवा-संस्कारों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
बाऊसा के संस्कारों को साकार कर रहा बुरड़ परिवार
सेठ केसरीमलजी बुरड़ ने अपने जीवन में समाजसेवा, दानशीलता, जीवदया और परोपकार की जो प्रेरणा दी, उसे उनका परिवार निरंतर आगे बढ़ा रहा है। उनके पुण्यस्मरण पर आयोजित यह सेवा कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि का आयोजन नहीं, बल्कि गौवंश के संरक्षण और असहाय जीवों की सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक बना।
परिवार की श्रीमती शकुंतलादेवी बुरड़, प्रकाश-आरती बुरड़, आदिति बुरड़, वैभव बुरड़ सहित समस्त बुरड़ परिवार शिक्षा, जीवदया और सामाजिक सेवा जैसे कार्यों में निरंतर सहयोग प्रदान करता रहा है। परिवार की ओर से वर्षभर विभिन्न अवसरों पर आर्थिक सहयोग देकर सेवा गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है।
800 से अधिक गौमाताओं की सेवा का संकल्प, लापसी का लगाया भोग
पुण्यस्मरण के अवसर पर गौशाला में गौमाताओं के लिए लापसी के मीठे भोग का आयोजन किया गया। परिवारजनों ने गौमाताओं की सेवा कर उनके संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर गौशाला में जीवदया के निमित्त आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया।
गौसेवा के इस आयोजन ने समाज को यह प्रेरणा दी कि पूर्वजों की पुण्यतिथि को जरूरतमंदों की सहायता, पशु-पक्षियों के संरक्षण और जनकल्याण के कार्यों से जोड़कर अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।
समाजसेवा में अग्रणी है बुरड़ परिवार
प्रकाशजी बुरड़ सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए सेवा कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं। वे ऑल इंडिया श्वेतांबर जैन कॉन्फ्रेंस, कर्नाटक के अध्यक्ष तथा मेवाड़ जैन बीसा ओसवाल संघ, कर्नाटक-बेंगलुरु से जुड़े हैं। परिवार का व्यावसायिक प्रतिष्ठान आनंद इंटरप्राइजेज, बेंगलुरु में है।
देवगढ़ से बेंगलुरु तक सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े बुरड़ परिवार ने गौसेवा के माध्यम से यह संदेश दिया कि संपन्नता की वास्तविक सार्थकता जरूरतमंदों और मूक प्राणियों के काम आने में है।
एक प्रेरणादायी पहल, जो दूसरों को भी सेवा के लिए करेगी प्रेरित
आज जब गौवंश संरक्षण और बेसहारा पशुओं की देखभाल समाज के सामने महत्वपूर्ण विषय हैं, ऐसे में पुण्यस्मरण के अवसर पर गौशाला को सहयोग देना अनुकरणीय पहल है। इससे न केवल गौमाताओं की सेवा को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि समाज के अन्य परिवारों और भामाशाहों को भी जीवदया के कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
सेठ केसरीमलजी बुरड़ की स्मृति में आयोजित यह सेवा कार्यक्रम संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी जीव के जीवन में सुख और सुरक्षा का कारण बने। बुरड़ परिवार ने गौसेवा के माध्यम से अपने बाऊसा के संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए समाज के समक्ष सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की।

14/10/2026
नागौर जिला परिषद चुनाव में मेड़ता की दो सीटों पर सियासी महासंग्रामवार्ड 12 में विधायक पुत्र को टिकट नहीं, वार्ड 15 में प...
14/10/2026

नागौर जिला परिषद चुनाव में मेड़ता की दो सीटों पर सियासी महासंग्राम

वार्ड 12 में विधायक पुत्र को टिकट नहीं, वार्ड 15 में पूर्व विधायक पर भाजपा का दांव; पांचाराम इंदावड़ और सुखराम मेघवाल की जीत से खुल सकती है जिला प्रमुख की राह

जाट मतदाताओं का रुख, एससी-एसटी वोटों का समीकरण और भाजपा की अंदरूनी एकजुटता—दोनों सीटों पर कई सियासी इम्तिहान

🖋 तेजाराम लाडणवा

नागौर जिला परिषद की 37 सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रत्याशी मैदान में उतरने के साथ मेड़ता विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 और 15 सियासी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। इन सीटों पर मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों की जीत-हार का नहीं, बल्कि नेताओं के प्रभाव, सामाजिक समीकरणों, पार्टी के भीतर संभावित नाराजगी और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं का भी है। वार्ड 12 में भाजपा ने विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल के पुत्र को टिकट नहीं देकर उद्योगपति नाथूराम बावरी पर भरोसा जताया, जबकि वार्ड 15 में पूर्व विधायक सुखराम मेघवाल को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस से अलग होकर आरएलपी में पहुंचे पांचाराम इंदावड़ की उम्मीदवारी ने वार्ड 12 के मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

वार्ड 12 : विधायक पुत्र को टिकट नहीं, अब नाथूराम बावरी को जीत दिलाने की चुनौती

पांचाराम इंदावड़ के सामने पुरानी राजनीतिक छवि बदलने और जाट मतदाताओं का भरोसा जीतने का अवसर

वार्ड 12 में भाजपा से उद्योगपति नाथूराम बावरी, कांग्रेस से रामनिवास मेघवाल और आरएलपी से पांचाराम इंदावड़ मैदान में हैं। इस सीट पर भाजपा विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल के पुत्र को टिकट मिलने की चर्चा थी, लेकिन पार्टी ने उनकी दावेदारी स्वीकार नहीं की और नाथूराम बावरी को उम्मीदवार बनाया। अब राजनीतिक हलकों में सवाल है कि विधायक अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में कितने मतदाताओं को जोड़ पाएंगे और टिकट नहीं मिलने से यदि समर्थकों में कोई नाराजगी है, तो उसे किस तरह दूर करेंगे।

पांचाराम इंदावड़ कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर आरएलपी का दामन थाम लिया। वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं, सामाजिक संगठनों में प्रदेश स्तर पर पदाधिकारी रहे हैं और समाज के बड़े अधिवेशनों के आयोजन में भी उनकी भूमिका बताई जाती है। एससी-एसटी मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ को भी उनकी उम्मीदवारी का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। कांग्रेस ने इस सीट पर रामनिवास मेघवाल को प्रत्याशी बनाया है। इस तरह मेघवाल समाज के दो प्रत्याशी आमने-सामने हैं, जबकि भाजपा ने नाथूराम बावरी पर दांव लगाया है।

पढ़ा-लिखा नेतृत्व या पारंपरिक राजनीतिक पकड़—पांचाराम के सामने असली परीक्षा

पांचाराम इंदावड़ की उम्मीदवारी का एक पहलू जाट समाज के मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता भी है। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में यह धारणा सामने आती रही है कि कुछ मतदाता ऐसे प्रतिनिधि को प्राथमिकता देते हैं, जिस पर उनका सीधा प्रभाव बना रहे, जबकि पढ़े-लिखे और अपने विवेक से निर्णय लेने वाले नेतृत्व को लेकर कभी-कभी संदेह भी व्यक्त किया जाता है। हालांकि, इसे पूरे जाट समाज की सोच मानना उचित नहीं होगा। समाज के भीतर मतदाताओं की पसंद अलग-अलग हो सकती है और अंतिम निर्णय स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशी के व्यवहार, व्यक्तिगत संबंधों तथा राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

पिछले चुनाव में पांचाराम को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के पीछे उनकी पढ़ाई-लिखाई या स्वतंत्र निर्णय लेने की छवि को कारण मानने की चर्चा हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि के बिना इसे हार का वास्तविक कारण नहीं कहा जा सकता। इस बार उनके सामने अपनी पुरानी राजनीतिक छवि से आगे बढ़कर मतदाताओं का विश्वास जीतने की चुनौती है।

आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का समर्थन और पार्टी से जुड़े युवाओं का संभावित रुझान पांचाराम के लिए अवसर बन सकता है। यदि वे युवाओं के साथ-साथ जाट समाज के विभिन्न वर्गों और अन्य मतदाताओं के बीच भी भरोसा कायम कर पाते हैं, तो उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ सकती है। इससे उनके आगे के राजनीतिक सफर को भी मजबूती मिलने की संभावना बनेगी। लेकिन क्या इस बार मतदाता उनकी शैक्षणिक योग्यता और सामाजिक सक्रियता को ताकत के रूप में देखेंगे, या पुरानी राजनीतिक धारणाएं प्रभावी रहेंगी—यह चुनाव परिणाम ही बताएगा।

एससी-एसटी मतों पर नजर, विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल के सामने भी सवाल

वार्ड 12 में भाजपा प्रत्याशी नाथूराम बावरी की जीत के लिए विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सवाल यह है कि क्या विधायक एससी-एसटी सहित विभिन्न वर्गों के मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में जोड़ पाएंगे? वहीं, कांग्रेस के रामनिवास मेघवाल और आरएलपी के पांचाराम इंदावड़ की मौजूदगी से मेघवाल समाज के मतों का रुख भी चुनावी चर्चा का विषय है।

क्या विधायक पुत्र को टिकट नहीं मिलने की संभावित नाराजगी को पीछे छोड़कर भाजपा प्रत्याशी के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे? क्या पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर मैदान में उतरेंगे? और क्या आरएलपी का समर्थन पांचाराम इंदावड़ को मजबूत चुनौती देने में मदद करेगा? इन सवालों का जवाब प्रचार, जनसंपर्क और मतदान के दौरान सामने आएगा।

यदि पांचाराम जीतते हैं, तो आरएलपी में उनका राजनीतिक कद बढ़ सकता है और जिला प्रमुख पद की संभावित दौड़ में उनका नाम भी चर्चा में आ सकता है। हालांकि, इस पद का फैसला जिला परिषद में दलों की संख्या, समर्थन और आगे बनने वाले राजनीतिक समीकरणों से तय होगा।

वार्ड 15 : पूर्व विधायक सुखराम मेघवाल पर भाजपा का भरोसा

कांग्रेस के पुरखाराम भंवरिया के सामने सीट बचाने की चुनौती, रामेश्वर छाबा की भूमिका पर भी निगाहें

वार्ड 15 में भाजपा ने मेड़ता के पूर्व विधायक सुखराम मेघवाल को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने वर्तमान जिला परिषद सदस्य एडवोकेट पुरखाराम भंवरिया को दोबारा टिकट देकर भरोसा जताया है, जबकि आरएलपी से विनय कुमार मैदान में हैं। पिछले चुनाव में पुरखाराम भंवरिया ने जीत दर्ज की थी। अब उनके सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है, जबकि सुखराम मेघवाल के लिए जीत हासिल करना राजनीतिक वापसी का महत्वपूर्ण अवसर होगा।

इस सीट पर भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव रामेश्वर छाबा को टिकट नहीं मिलने का मुद्दा भी चर्चा में है। छापा को विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के करीबी नेताओं में गिना जाता है। वे पहले भी जिला परिषद चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उस समय कांग्रेस के पुरखाराम भंवरिया से हार गए थे। इस बार भाजपा ने छाबा के बजाय पूर्व विधायक सुखराम मेघवाल को उम्मीदवार बनाया है।

अब सवाल है कि युवा नेता रामेश्वर छाबा टिकट नहीं मिलने की संभावित नाराजगी को पीछे छोड़कर पार्टी प्रत्याशी के लिए पूरी ताकत से जुटेंगे या उनकी भूमिका सीमित रहेगी। संगठन में उनकी सक्रियता और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए उनकी भूमिका पर निगाहें बनी रहेंगी। हालांकि, उनकी वास्तविक रणनीति को लेकर बिना पुष्टि कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

सुखराम मेघवाल की जीत से जिला प्रमुख की दौड़ में नाम आने की चर्चा

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले सुखराम मेघवाल की जीत से जिला प्रमुख पद की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो सकती हैं। लेकिन जिला प्रमुख पद की दावेदारी केवल एक सीट जीतने से तय नहीं होगी। जिला परिषद में किस दल को कितनी सीटें मिलती हैं, किसे कितना समर्थन मिलता है और चुनाव के बाद क्या राजनीतिक समीकरण बनते हैं—यही अंतिम तस्वीर तय करेंगे।

यदि पुरखाराम भंवरिया दोबारा जीतते हैं, तो कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल रहेगी और भाजपा के लिए यह परिणाम राजनीतिक चुनौती बन सकता है। वहीं, सुखराम मेघवाल की जीत भाजपा के लिए पूर्व विधायक की वापसी के साथ जिला स्तर पर नए समीकरणों की संभावना भी पैदा कर सकती है।

दो सीटें, कई सवाल : मेड़ता की राजनीति किस करवट बैठेगी?

टिकट की नाराजगी, सामाजिक समर्थन और नेताओं की साख—मतदाताओं के फैसले पर टिकी निगाहें

वार्ड 12 और 15 के चुनाव में तीनों दलों के लिए अलग-अलग चुनौतियां हैं। वार्ड 12 में भाजपा को विधायक के प्रभाव और संगठन की एकजुटता साबित करनी होगी। पांचाराम इंदावड़ को आरएलपी के समर्थन, युवा मतदाताओं के संभावित रुझान और अपनी सामाजिक सक्रियता को वोटों में बदलने की चुनौती होगी। कांग्रेस के रामनिवास मेघवाल भी अपने समाज और क्षेत्र के मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे।

वार्ड 15 में भाजपा के पूर्व विधायक सुखराम मेघवाल, कांग्रेस के मौजूदा जिला परिषद सदस्य पुरखाराम भंवरिया और आरएलपी के विनय कुमार के बीच मुकाबला है। यहां रामेश्वर छाबा की भूमिका और पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर भी राजनीतिक निगाहें रहेंगी।

क्या विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाकर अपने राजनीतिक प्रभाव का संदेश देंगे? क्या पांचाराम इंदावड़ पुरानी धारणाओं को पीछे छोड़कर व्यापक समर्थन जुटा पाएंगे? क्या रामेश्वर छापा पार्टी प्रत्याशी के साथ पूरी ताकत से खड़े होंगे? और क्या सुखराम मेघवाल की जीत जिला प्रमुख पद की संभावनाओं को हवा देगी?

इन सवालों के जवाब फिलहाल चुनावी चर्चाओं में तलाशे जा रहे हैं। असली फैसला मतदाता करेंगे। इतना तय है कि मेड़ता की ये दोनों सीटें नागौर जिला परिषद चुनाव के महत्वपूर्ण मुकाबलों में शामिल हो चुकी हैं और इनके परिणाम जिला परिषद की आगे की राजनीति को समझने में अहम संकेत दे सकते हैं।

अपनों की अनदेखी या सियासी चूक? मेड़ता कांग्रेस के सामने फिर खड़ा हुआ बड़ा सवालपहले सुनील पंवार, अब पांचाराम इंदावड़… टिक...
13/10/2026

अपनों की अनदेखी या सियासी चूक? मेड़ता कांग्रेस के सामने फिर खड़ा हुआ बड़ा सवाल

पहले सुनील पंवार, अब पांचाराम इंदावड़… टिकट की राजनीति कहीं जिला प्रमुख की कुर्सी का गणित न बिगाड़ दे!
🖋 तेजाराम लाडणवा

मेड़तासिटी
राजनीति में चुनाव केवल वोटों से नहीं जीते जाते, बल्कि संगठन की एकजुटता, कार्यकर्ताओं के सम्मान और सही समय पर लिए गए फैसलों से भी जीत की राह बनती है। लेकिन जब टिकट वितरण के सवाल पर अपने ही नाराज होकर अलग रास्ता चुनने लगें, तो राजनीतिक दलों के लिए आत्ममंथन जरूरी हो जाता है। मेड़ता की राजनीति में कांग्रेस के सामने आज ऐसा ही सवाल खड़ा दिखाई दे रहा है। नगर पालिका चुनाव में सुनील पंवार का प्रकरण और अब पांचाराम इंदावड़ का पार्टी छोड़कर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी में शामिल होना क्या महज दो अलग-अलग घटनाएं हैं, या इनके पीछे संगठनात्मक संवाद की कोई साझा चुनौती भी छिपी है?

सुनील पंवार प्रकरण: एक टिकट, कई राजनीतिक सवाल

नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद सुनील पंवार ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उनके समर्थकों का मानना रहा कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय और जनता के बीच पहचान रखने वाले नेता को पार्टी के साथ बनाए रखना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हो सकता था। चुनाव जीतने के बाद भी संगठन के साथ उनकी दूरी की चर्चा रही।

उस समय नगर पालिका के राजनीतिक समीकरण भी दिलचस्प थे। पंवार के साथ निर्दलीय पांच पार्षदों का समर्थन बताया गया था, जबकि कांग्रेस के पास 12 पार्षद थे। भाजपा का स्पष्ट बहुमत था और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण थी। अंततः अध्यक्ष पद भाजपा के खाते में गया।

यहां एक अहम सवाल उठता है—क्या सुनील पंवार को साथ लेकर चलने की पहल होती, तो बोर्ड गठन के समीकरण कुछ अलग हो सकते थे? इसका निश्चित उत्तर देना संभव नहीं है, क्योंकि नगर पालिका की राजनीति में व्यक्तिगत संबंधों, दलगत रणनीति और पार्षदों के फैसलों की भी भूमिका होती है। फिर भी, यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए संगठनात्मक तालमेल पर विचार करने का अवसर जरूर देता है।

पांचाराम इंदावड़ का इस्तीफा: नाराजगी से नई राजनीतिक राह तक

अब पंचायत राज चुनाव से पहले पांचाराम इंदावड़ ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर आरएलपी का दामन थाम लिया है। वर्ष 2008 में मेड़ता विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रहे इंदावड़ ने जिला परिषद वार्ड संख्या 12 से टिकट के लिए आवेदन किया था।

अपने त्यागपत्र में उन्होंने दावा किया कि पांच दिनों तक स्थानीय कांग्रेस नेताओं से संपर्क करन

नागौर - आर एल पी ने जारी की जिला परिषद उम्मीदवारों की सूचि जारी की
13/10/2026

नागौर - आर एल पी ने जारी की जिला परिषद उम्मीदवारों की सूचि जारी की

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