05/11/2025
विशेष कैदी मुद्रा : लंदन की नीलामी में 250 ब्रिटिश पाउंड में बिका योल कैम्प में छ्पा एक आन्ना का नोट
विनोद भावुक। धर्मशाला
दूसरे विश्व युद्ध के दिनों में शांत कांगड़ा घाटी में स्थित योल कैंप एक ऐसा नाम था जो ब्रिटिश भारत में प्रिजनर ऑफ वॉर (POW) की दुनिया से जुड़ा हुआ था। यहीं पर 1941 से 1945 के बीच, युद्धबंदियों के लिए विशेष कैदी मुद्रा (Prisoner-of-War Money) छापी जाती थी।
हाल ही में ऐसी ही एक दुर्लभ मुद्रा ‘1 आन्ना, योल कैंप 25’ लंदन की एक अंतरराष्ट्रीय नीलामी में 250 ब्रिटिश पाउंड में बिकी। यह नोट बैंगनी और पीले रंग की छपाई में है, जिसमें पीछे की तरफ कुछ नहीं लिखा गया। विशेषज्ञ इसे ‘Campbell 5323’ के नाम से पहचानते हैं।
बंदी शिविर के भीतर उपयोग होने वाली करन्सी
योल कैंप उस दौर में ब्रिटिश साम्राज्य का एक बड़ा बंदी शिविर था, जहां इटालियन, जर्मन और जापानी युद्धबंदी रखे गए थे। उन्हें बाहर की आर्थिक व्यवस्था से काटने के लिए अलग मुद्रा दी गई, जिसे सिर्फ कैंप के भीतर ही उपयोग किया जा सकता था।
यह मुद्रा असली रुपये की जगह, केवल सामान खरीदने या आदान-प्रदान में काम आती थी। यानी यह करन्सी कैदियों की एक ‘सीमित अर्थव्यवस्था’ थी। यह मुद्रा असली रुपये नहीं थी और सिर्फ कैदी ही प्रयोग करते थे।
आज यह एक आन्ना का नोट न केवल इतिहास की धरोहर है, बल्कि एक प्रतीक है उस दौर का जब युद्ध के बीच भी प्रशासन, अनुशासन और नियंत्रण की सीमाएँ कागज पर खींच दी जाती थीं। एक आन्ना का यह नोट ब्रिटिश भारत की जंग की कहानी कहता है।
यह दुर्लभ नोट अब संग्राहकों के बीच एक इतिहास का जीवंत टुकड़ा बन चुका है, जो बताता है कि योल का यह छोटा-सा कैम्प, कभी वैश्विक युद्ध के नक्शे पर एक अहम बिंदु था। यहाँ सालों विदेशी युद्धबंदी रखे गए थे।