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कलावती तिवारी जी के निधन की खबर बेहद दुखद और हृदय को व्यथित करने वाली है। वे केवल राज्य के एक सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंद...
13/09/2026

कलावती तिवारी जी के निधन की खबर बेहद दुखद और हृदय को व्यथित करने वाली है। वे केवल राज्य के एक सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकारी पूरन तिवारी जी की पत्नी नहीं थीं, बल्कि स्वयं उस संघर्ष, उस त्याग और उस सादगी की प्रतिमूर्ति थीं, जिसने तिवारी जी के संघर्ष को जमीन पर टिकाए रखा।

एक आंदोलनकारी का जीवन अक्सर बाहर सड़कों पर दिखता है, पर उस आंदोलन को घर के अंदर संभालने वाली शक्ति का नाम ही कलावती जी जैसी माताएँ /बहनें होती हैं। तिवारी जी जब राज्य के हक के लिए, समाज के हक के लिए बाहर लड़ रहे होते थे, तब घर, परिवार और आते-जाते साथियों को संभालने का पूरा जिम्मा कलावती जी ने अपने कंधों पर ले रखा था।

मेरा कई बार उनके घर जाना और रहना हुआ है। मुझे याद है, उनकी आत्मीयता और दिल बहुत बड़ा था। कोई भी साथी, चाहे कितनी भी रात को पहुँचे, उनके चेहरे पर कभी शिकन नहीं देखी। एक माँ/ बहन की तरह चाय-पानी, खाना, और वही पहाड़ी आत्मीयता – राम सिंह जी खाना खा के जाना।” उस घर में मेहमान नहीं, परिवार के सदस्य की तरह महसूस होता था।

आज जब वे चली गई हैं, तो ऐसा लग रहा है जैसे उस आंगन की एक आत्मा ही चली गई हो। तिवारी जी के संघर्षों की सबसे मजबूत साथी, उनकी सबसे बड़ी हिम्मत चली गई। एक कार्यकर्ता के लिए अपने साथी को खोना कितना कठिन होता है, इसे शब्दों में कहना मुश्किल है।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और पूरन तिवारी जी सहित समस्त परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
नैनीताल समाचार परिवार की श्रद्धांजलि !
राम सिंह

राम सिंह कलावती तिवारी जी के निधन की खबर बेहद दुखद और हृदय को व्यथित करने वाली है। वे केवल राज्य के एक सामाजिक कार्य...

13/09/2026

#हिमालय लूटेरो के विरोध में तिब्बती समाज के लोगों ने भारत मंडपम के बाहर तिब्बती यूथ कांग्रेस और स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत ने प्रोटेस्ट किया।
"Xi Jinping = Genocide" का बैनर लेकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने का विरोध किया...

12/09/2026

दिल्ली -मसूरी गाँधी चौक के पास जंगल में माइनिंग पहाड़ पेड़ काटे जा रहे
उधर दिल्ली में दुनिया के पेड़ों को बचाने का नाटक जारी है ...

मुख्य सवाल यह उठता है कि आखिर यह बीमारी लाइलाज क्यों है? इसका जवाब हमारी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में छिपा है—हम ‘तमाशे’ क...
12/09/2026

मुख्य सवाल यह उठता है कि आखिर यह बीमारी लाइलाज क्यों है? इसका जवाब हमारी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में छिपा है—हम ‘तमाशे’ के आदी हो चुके हैं और ‘दीर्घकालिक बीमारी’ से आंखें मूंद लेते हैं। चकाचौंध भरी आपदाएं और तत्काल राहत के पैच-वर्क नेताओं को चटपट दृश्यमान श्रेय और सुर्खियां देते हैं। इसके विपरीत, जमीन पर सुधारात्मक और सतत काम करना अदृश्य, कठिन और राजनीतिक रूप से ‘बेस्वाद’ होता है। एक अनहोनी को टाल देना कभी सुर्खी नहीं बनता, वह केवल एक शांत और सुरक्षित मंगलवार देकर गुजर जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों और नगर निगमों के प्रतिनिधियों को भी यह बात अच्छी तरह समझ आ चुकी है कि अदृश्य और जटिल समस्याओं को सुलझाने के बजाय तात्कालिक राजनीतिक प्राथमिकताओं को पूरा करना ही उनकी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी है। सिद्धांत रूप में, दिखावटी और चमकदार उपलब्धियां हमेशा उस खामोश और मुश्किल सुधार पर भारी पड़ती हैं जो असल में ज्यादा जरूरी होता है।

असली बदलाव तब आता है जब नीतियां केवल तात्कालिक आपदा प्रबंधन से हटकर मूल कारणों के खात्मे पर केंद्रित हो जाती हैं। जैसा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में जापानी इंसेफेलाइटिस (चमकनी बुखार) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में लड़ी गई लड़ाई से स्पष्ट होता है। दशकों तक सरकारें हर मानसून में बच्चों की मौत पर केवल अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने और शोर मचाने तक सीमित रहीं—यह तमाशा हर साल दोहराया जाता था। असली फर्क तब आया जब सरकार ने इस ‘दमकल संस्कृति’ को छोड़कर बुनियादी और अदृश्य मोर्चों पर काम शुरू किया: जैसे बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान, ग्रामीण स्वच्छता सुधार और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था। जब ध्यान मरने वाले बच्चों को इमर्जेंसी वार्ड में बचाने से हटकर बीमारी के मूल कारणों को खत्म करने पर गया, तब जाकर उस महामारी पर काबू पाया जा सका।

हमारे शहरों को भी आज इसी वैचारिक कायाकल्प की जरूरत है। जोनल कानूनों को दुरुस्त करना, इमारतों की नींव का आडिट (audit) करना, सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम को सुधारना और भ्रष्ट अधिकारियों को दंडित करना; शायद फोटो-ऑप या फीता काटने के काम नहीं आ सकता। लेकिन ठीक वैसे ही जैसे एक अदृश्य टीके से लाइलाज बीमारी को हराया जाता है, शहरों की नसों में फैले इस सड़न को खत्म करने के लिए हमें सिस्टम के उस अदृश्य और उबाऊ अंग को मजबूत करना होगा- “बूंद-बूंद से सागर भरने” जैसा है।..महेश पन्त

महेश पन्त शहरी आपदाओं का हमारे देश में एक त्रासद और चिरपरिचित क्रम बन चुका है। दिल्ली के सत्य निकेतन या सैदुलहजाब .....

12/09/2026

न्यू UK महिला मंच का ऐलान बाहरी भू माफिया
पूँजीपतियों को भगाओ राज्य बचाओ
जल जंगल जमीन बचाओ उत्तराखंड बचाओ ........
सरकारी विभागों की जमीनों को भू-माफियाओं और पूँजीपतियों के हाथों बेचने का खेल बंद करो ... धामी सरकार जमीन माफिया बन गई ?
मूलवासियों के जल जंगल जमीन की नीलामी क्यों ?
आज 7 हज़ार बीघा जमीन क्यों नीलाम हो रही ?
आने वाला भविष्य बर्बादी पर क्यों खड़ा हैं ?

10/09/2026

happy birthday आओ खेलें कट्म-कट्टा...

देश की हालत अट्टा-बट्टा
रूस अमेरिका का सट्टा-बट्टा
हम-तुम साला उल्लू पट्टा
अपने हिस्से घाटा-घाटा
देश को गिरवी रख,
अडानी-अंबानी का मुनाफा
आज़ादी का खेल तमाशा
आओ खेलें कट्म-कट्टा
***गिर्दा **

“बस एक हादसा चाहिए शासन-प्रशासन की सक्रियता के लिए”  दिल्ली के सत्य निकेतन में उस पांच-मंजिला इमारत के गिरने की ही बात क...
10/09/2026

“बस एक हादसा चाहिए शासन-प्रशासन की सक्रियता के लिए”

दिल्ली के सत्य निकेतन में उस पांच-मंजिला इमारत के गिरने की ही बात करें जिसमें छात्रों के लिए ‘पी.जी.’ चलाया जा रहा था तो हादसे के तत्काल बाद दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर एम.सी.डी., डी.डी.ए., दिल्ली पुलिस, डी.यू., फायर सर्विस और न जाने कितने विभागों के झंडाबरदार सक्रिय हो गए. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को आँखों देखा हाल के लिए नया मसाला मिल गया.

पता चला कि इमारत के मालिकों के पास पी.जी.चलाने के लिए एम.सी.डी. की अनुमति नहीं थी, कोई बिल्डिंग प्लान भी नहीं था और तो और फायर सर्विस का एन.ओ.सी. भी नहीं था. एक जर्जर इमारत थी और अपेक्षाकृत कम किराये पर ठिकाने की तलाश कर रहे विद्यार्थियों की विवशता थी. सात की मौत हो गयी, पांच-सात गंभीर रूप से घायल हैं.

हादसा हो गया झंडाबरदार सक्रिय हो गए आदेश हो गया कि चार से अधिक मंजिल वाली अनधिकृत, नियमविरुद्ध इमारतों और ख़ास तौर पर पी.जी. भवनों की जाँच और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाये. (चार या कम मंजिल वाले जर्जर भवनों का क्या?) एस.ई. से लेकर जे.ई. तक के कुछ इन्जीनियरों का निलंबन हो गया, उन्हें भी मालूम है यह प्रशासनिक कार्रवाई है. देर सबेर बहाली हो ही जानी है. रुचिकर यह जानना भी हो सकता है कि इन्हीं निलम्बितों में से दो बड़े साहब मालवीयनगर के होटल अग्निकांड में भी चर्चा में आये थे. उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय के वी.सी. को हड़का लिया. इलेक्ट्रोनिक मीडिया इलाके की गलियों में कैमरा लेकर खोजी पत्रकारिता करने लगा कि कैसी अंधेरी गलियाँ हैं, कितने अँधेरे कमरे हैं और कैसी कैसी जर्जर इमारतें हैं. तीन गिरफ्तारियां भी हो ही गयीं. अब और क्या चाहिए सारे झंडाबरदार मंच पर हैं और नाटक जारी है.

ऐसा केवल दिल्ली में ही नहीं होता. ऐसे तमाम हादसे पूरे देश में हमारे आस-पास होते रहते हैं और यहाँ भी शासन-प्रशासन को हादसे का इंतज़ार करता है सक्रिय होने के लिए. सड़क दुर्घटना में कुछ एक की मौत के बाद अतिक्रमण हटाये जाते हैं मगर कुछ समय बाद वही ढाक के तीन पात और एक नए हादसे का इंतज़ार.

रमदा 1990 में रिलीज हुई फिल्म “आशिकी” के एक बड़े हिट गाने का बड़ा हिट अंतरा है 'बस एक सनम चाहिए आशिकी के लिए'. इसमें थोड़....

नंदा राजजात को लेकर दो केंद्रीय बिंदु रहे हैं। एक नौटी और दूसरा कुरूड़। कुरूड़ से जुड़े लोग हमेशा आरोप लगाते रहे हैं कि नौट...
08/09/2026

नंदा राजजात को लेकर दो केंद्रीय बिंदु रहे हैं। एक नौटी और दूसरा कुरूड़। कुरूड़ से जुड़े लोग हमेशा आरोप लगाते रहे हैं कि नौटी को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि कुरूड़ को अपेक्षित महत्व नहीं दिया जाता है। उनका आरोप है कि नौटी से सिर्फ एक छंतोली यात्रा में शामिल होती है, जबकि कुरूड़ नंदाधाम से मां नंदा की डोली का प्रस्थान होता है। इस तरह के आरोप प्रत्यारोप और खींचतान हर बार चलती रहती है। इस बार यह इसलिए अधिक विभाजनकारी हो गई क्योंकि राजजात समिति ने यात्रा को एक साल आगे बढ़ा दिया।

कुरूड़ वालों ने इसे एकतरफा निर्णय बताते हुए बड़ी जात इसी साल निकालने का निर्णय ले लिया। अब 5 सितंबर 2026 से कुरूड़ से बड़ी जात कैलाश के लिए निकल पड़ी है।

बड़ी जात कुरूड़ के आयोजकों ने पहले 26 पड़ावों वाली बड़ी जात की घोषणा करते हुए कार्यक्रम भी जारी कर दिया था, जो कुरूड़ से निकलने वाली जात के पड़ावों को निर्धारित करती है। 5 सितंबर को कुरूड़ से शुरू हुई यात्रा 30 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा में हवन यज्ञ के साथ समापन होने का कार्यक्रम तय किया गया था। बाद में कुछ और कार्यक्रम भी जारी किए गए, जिनमें घोषित किया गया कि बड़ी जात वेदनी बुग्याल पड़ाव तक जाएगी, उसके बाद आली बुग्याल होते हुए वापसी के लिए प्रस्थान करेगी। इससे असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। 5 सितंबर को यात्रा प्रारंभ हुई है, तो यात्रा के साथ दो चौसिंग्या खाड़ू भी चल रहे हैं। स्वाभाविक है खाड़ू का विसर्जन होमकुंड में ही होगा। वेदनी से आप उन्हें विसर्जित नहीं कर सकते। इसलिए अब तय माना जा रहा है कि यात्रा पूर्व घोषित अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही चलेगी। कमेटी से जुड़े लोगों ने भी इस बात को दोहराया है।

कुरूड़ में जब 5 सितंबर 2026 को यात्रा प्रारंभ हुई, वहां एक दो दिन पहले से ही बड़ी संख्या में बाहर से लोगों का आना शुरू हो गया। सैकड़ों की संख्या में लोग कुरूड़ पहुंच गए थे। शासन-प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं हो पाई थी। इसलिए बड़ी जात समिति को उनके रहने खाने की व्यवस्था करने में पसीने छूट गए। कुरूड़ में अमूमन राजजात के दौरान जितने लोग जुटते हैं, इस बार जुटने वालों की संख्या अपेक्षा से कहीं अधिक थी। इतनी भीड़ कुरूड़ में कभी नहीं देखी गई।
चूंकि नंदा राजजात समिति ने जिला प्रशासन और शासन को बता दिया था कि राजजात 2027 में होगी, इसलिए शासन प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई। अब जिस तरह भीड़ जुट रही है, उससे यह बात साफ हो गई है कि यदि शासन-प्रशासन सक्रिय नहीं हुआ तो हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं। कुरूड़ बड़ी जात समिति ने जिला प्रशासन को इसकी सूचना दे दी है। क्योंकि इस बार मौसम अधिक खराब है, सितंबर तक लगातार बारिश हो रही है, उच्च हिमालयी क्षेत्र में तो हालात और खराब होंगे, कीचड़ से रास्तों की हालत ज्यादा खराब हो जाएगी। इसलिए शासन-प्रशासन के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। प्रशासन के सहयोग और देखरेख के बिना उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं।
शंकर सिंह भाटिया

शंकर सिंह भाटिया नंदा की जात को लेकर पूरे उत्तराखंड और उत्तराखंड के बाहर रहने वाले उत्तराखंडियों में एक असमंजस की ...

06/09/2026

नफरत के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान...सामाजिक संगठनों ने कारगी ग्रांट के लोगों से मुलाकात कर नफरतियों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग का आश्वासन दिया...
#देहरादून
उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच ने शुक्रवार को कारगी ग्रांट में मुस्लिम समुदाय के लोगों से मुलाकात की। पिछले दिनों यहां कुछ लोगों ने साम्प्रदायिक नफरत फैलाने का प्रयास किया था। उसके बाद ललित शर्मा नामक एक व्यक्ति ने एक वीडियो जारी कर महिलाओं के खिलाफ बेहद शर्मनाक और अपमानजनक बातें कही थी।

कारगी ग्रांट के लोगों का कहना था कि ललित शर्मा की यदि किसी व्यक्ति से नाराजगी है तो उसके लिए पूरे समुदाय के खिलाफ जहर उगलना किसी भी हालत में उचित नहीं था। यहां लोगों ने सिर्फ नारे लगाकर उसका विरोध किया, जबकि उन लोगों की तरफ से पथराव करने, उनके साथ मौजूद महिलाओं के साथ अभद्र करने जैसे आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। उस दिन के किसी वीडियो में भी पत्थरबाजी या किसी महिला के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की कोई घटना नजर नहीं आ रही है।

लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग भी ललित शर्मा से मिले हुए हैं। ये जमीनों का धंधा करते हैं और अपनी करतूतों को छिपाने के लिए हिन्दू-मुसलमान विवाद खड़ा कर देते हैं। लोगों का कहना था कि ललित शर्मा जिस तरह से बार-बार मुसलमानों के खिलाफ जहर उगल रहा है, उसके बाद भी उस पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि महिलाओं का अपमान किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ललित शर्मा ने महिलाओं के लिए जो शर्मनाक बातें कही हैं, उसके लिए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई में मदद करने के साथ ही अधिकारियों से मिलकर शिकायत की जाएगी और जरूरत पड़ी तो धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा। पुलिस पर दबाव बनाया जाएगा कि ललित शर्मा जिस तरह से बार-बार ऐसी हरकतें कर रहा है, उसे देखते हुए उसे तुरंत जिलाबदर किया जाए।

प्रतिनिधि मंडल ने कारगी ग्रांट और मुस्लिम समुदाय के कई गणमान्य लोगों से मुलाकात की। इनमें मो. जाकिर हुसैन, सरवर, तनवीर, इमरान राणा, शाह नजर, दानिश आदि शामिल थे। प्रतिनिधि मंडली में प्रो. एन. राघवेन्द्र, कमला पंत, विमला कोली, निर्मला बिष्ट, हरिओम पाली, परमेन्द्र सिंह कक्कड़ और त्रिलोचन भट्ट शामिल थे। स्थानीय लोगों के साथ हुई बैठक में तय किया गया कि सोमवार को देहरादून के एसएसपी से मिलकर उन्हें इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा जाएगा। हरिओम पाली ने अफसोस जताया कि बैरागीवाला की घटना को भी ललित शर्मा अन्य लोगों ने साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास किया था। इसके बाद एसएसपी को ज्ञापन देकर इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

कमला पंत ने कहा कि ललित शर्मा नाम का व्यक्ति महिलाओं के पेट में पल रहे बच्चों निकालकर उन्हें मारने तक की घृणित बातें कहता है, फिर भी पुलिस उसके साथ भाईचारा निभा रही है। यह अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि ललित शर्मा के खिलाफ साम्प्रदायिक महौल बिगाड़ने का मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

03/09/2026

रामलीला मैदान की हक़ीकत देख चौक जायेंगे आप शर्म महसूस होगी वो स्टेज जो पॉटी सू सु से भरा और नशे बाजों का अड्डा हैं जहाँ शुद्धिकरण हुआ? Rajiv Lochan Sah

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