Nainital Mania

Nainital Mania Software Engineer hone ke bawajood bhi mera dil Uttarakhand ke itihaas ki taraf zyada khinchta hai.
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15 अगस्त 1947 जब Nainital ने पहली बार आजादी का नया सूरज देखा ✅अंग्रेजों ने जिस Nainital को अपने नियम-कायदों और अनुशासन क...
14/08/2026

15 अगस्त 1947 जब Nainital ने पहली बार आजादी का नया सूरज देखा ✅

अंग्रेजों ने जिस Nainital को अपने नियम-कायदों और अनुशासन के साथ बसाया था, 15 August 1947 को उसी शहर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई थी...14 August की रात से ही नैनीताल में जश्न शुरू हो चुका था। देर रात तक मशाल जुलूस, आतिशबाजी और देशभक्ति के नारों से पूरा शहर गूंजता रहा। करीब ढाई-तीन बजे तक लोग आजादी का जश्न मनाते रहे।

और फिर 15 August की सुबह ✅
सुबह होते ही लोग Mall Road पर जुलूस की शक्ल में निकल पड़े। इतनी भीड़ थी कि कहीं तिल रखने तक की जगह नहीं थी। हर तरफ खुशी, नाच-गाना और एक ही आवाज सुनाई दे रही थी...

"अब वतन आजाद है!" 🇮🇳

जिस नैनीताल में अंग्रेजों के समय भारतीयों को Upper Mall Road पर चलने तक की इजाजत नहीं थी, उसी Mall Road पर आज हजारों भारतीय आजादी का जश्न मना रहे थे....उस समय नैनीताल तत्कालीन United Provinces की ग्रीष्मकालीन राजधानी था। अंग्रेजों के Government House और Secretariat भी यहीं थे। अंग्रेजों के दौर में भारतीयों के लिए कई तरह की पाबंदियां थीं। Flats मैदान में बच्चों के खेलने पर रोक थी और अंग्रेजों के खास खेलों व कार्यक्रमों में भारतीयों की भूमिका अक्सर सिर्फ दर्शक या तालियां बजाने तक सीमित रहती थी।

इसलिए 15 August 1947 का दिन Nainital के लोगों के लिए सिर्फ आजादी का दिन नहीं था, बल्कि पुरानी पाबंदियों के खत्म होने का दिन भी था।

सुबह CRST Inter College के बच्चों ने Mall Road होते हुए Tallital Government High School तक जुलूस निकाला। वहां Headmaster Harish Chandra Pant ने बच्चों को 15 अगस्त 1947 की तारीख अंकित स्मृति-चिह्न और राष्ट्रीय ध्वज प्रदान किए।

उन्होंने बच्चों से कहा कि देश आजाद हो गया है, लेकिन अब देश को जाति और धर्म से ऊपर उठकर एक रखने और उसके निर्माण की जिम्मेदारी हमारी है।

इसके बाद Municipality में Chairman Rai Bahadur Jasaunt Singh Bisht की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ। Banke Lal Kansal ने Khan Bahadur Abdul Qayum को पीतल का तिरंगा बैज लगाया। फिर Chairman ने Union Jack उतारकर तिरंगा फहरा दिया। 🇮🇳

वहीं Flats मैदान में ADM Arif Ali Shah ने परेड की सलामी ली। कार्यक्रम में Manohar Lal Sah, Shyam Lal Verma और Sitawar Pant सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

यानी जिस शहर में कभी अंग्रेजों का राज और उनके नियम चलते थे, उसी नैनीताल में 15 अगस्त 1947 को हर जाति, हर धर्म और हर वर्ग के लोग एक साथ आजादी का जश्न मना रहे थे।

नैनीताल के लिए 15 अगस्त 1947 सिर्फ एक तारीख नहीं थी...
यह उस शहर की आजादी थी, जिसने वर्षों तक अंग्रेजी हुकूमत को अपनी आंखों के सामने देखा था। 🇮🇳

15 August के दिन nainital में क्या हुआ था उसकी पूरी वीडियो आप इस link में जाकर देख सकते है - https://www.youtube.com/watch?v=cLKQYXO1dew&t=461s

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13/08/2026

15 August 1947 को नैनीताल में क्या हुआ था? | Untold History of Nainital जो आपने पहले कभी नहीं सुनी 😱

क्या आपने कभी सोचा है कि 1947 में आजादी के समय नैनीताल कैसा दिखाई देता होगा? क्या भारतीयों को ब्रिटिशकालीन नैनीताल की हर जगह जाने की अनुमति थी? Upper Mall Road, Nainital Club, Capital Cinema, Churches और Schools में भारतीयों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता था? और आखिर नैनीताल में अंग्रेजों का प्रभाव कैसे खत्म हुआ?

इस वीडियो में हम आपको लेकर चलेंगे ब्रिटिशकालीन नैनीताल से लेकर 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक सुबह तक की पूरी कहानी।

ब्रिटिश शासन के दौरान नैनीताल में अंग्रेजों के लिए बनाई गई विशेष व्यवस्थाओं, भारतीयों पर लगाए गए सामाजिक प्रतिबंधों और Upper Mall Road तथा Lower Mall Road के अंतर से लेकर कुमाऊँ परिषद की स्थापना और कुली बेगार आंदोलन तक की कहानी इस वीडियो में दिखाई गई है।

30 सितंबर 1916 को नैनीताल में कुमाऊँ परिषद की स्थापना हुई, जिसमें पंडित गोविंद बल्लभ पंत, हरगोविंद पंत और बद्रीदत्त पांडे जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद कुमाऊँ में अंग्रेजी शासन की नीतियों के खिलाफ राजनीतिक और सामाजिक चेतना मजबूत होती गई।

बागेश्वर में कुली बेगार प्रथा के विरोध ने इस आंदोलन को नई दिशा दी और पहाड़ के लोगों ने ब्रिटिश सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी शुरू की।

फिर आया 1929, जब महात्मा गांधी पहली बार नैनीताल पहुंचे। गांधीजी को सुनने के लिए हजारों लोग एकत्र हुए और नैनीताल में स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा मिली। इसके बाद सविनय अवज्ञा आंदोलन, प्रभात फेरियां, विदेशी कपड़ों की होली और जनसभाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को और मजबूत किया।

इसके बाद 1942 का Quit India Movement यानी भारत छोड़ो आंदोलन नैनीताल तक पहुंचा। शहर में जुलूस, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन होने लगे। ब्रिटिश प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर कार्रवाई की और नैनीताल के महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस व्यवस्था कड़ी कर दी।

1945-46 के दौरान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा और भारत में स्वतंत्रता आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया। नैनीताल भी इस राजनीतिक उथल-पुथल से अछूता नहीं रहा।

और फिर आई 14 अगस्त 1947 की रात...नैनीताल में मशाल जुलूस, देशभक्ति के गीत और आजादी का उत्सव शुरू हो गया। लोग पूरी रात जागते रहे और अगले दिन 15 अगस्त 1947 को Mallital Flats पर स्वतंत्र भारत का तिरंगा शान से लहराया।

वह पल कैसा रहा होगा जब आजादी की पहली किरण नैनीझील पर पड़ी होगी?

इस वीडियो में हम यह भी जानेंगे कि आजादी के बाद नैनीताल में रह गए अंग्रेजों का क्या हुआ, Jim Corbett और अन्य ब्रिटिश परिवारों ने नैनीताल में क्यों रहना जारी रखा और 1950 से 1980 के बीच नैनीताल से ब्रिटिश आबादी धीरे-धीरे कैसे गायब होती गई।

🇮🇳 यह सिर्फ नैनीताल की कहानी नहीं है, बल्कि उस दौर की कहानी है जब एक पूरा शहर ब्रिटिश शासन से निकलकर स्वतंत्र भारत का हिस्सा बना।

अगर आपको Nainital History, British Nainital, Uttarakhand History और Indian Independence History से जुड़ी ऐसी ऐतिहासिक कहानियां पसंद हैं तो:

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और इस Independence Day अपने घर पर तिरंगा जरूर लगाएं। 🇮🇳

1970 के दशक तक Bollywood वालो की पहली पसंद नैनीताल  होती थी ✅:दोस्तों अगर आपने 1950, 1960 और 1970 का जमाना देखा है तो आप...
11/08/2026

1970 के दशक तक Bollywood वालो की पहली पसंद नैनीताल होती थी ✅:

दोस्तों अगर आपने 1950, 1960 और 1970 का जमाना देखा है तो आप बहुत भाग्यशाली हो क्योकि ये जमाना अंग्रेज़ो के बाद सबसे अच्छा माना जाता है क्योकि तब नैनीताल को इतिहास का सबसे स्वर्णिम काल कहते है ऐसा इसीलिए क्योकि वो नैनीताल और आज का नैनीताल में धरती आसमान जितना फर्क है.

अंग्रेजो के चले जाने के बाद नैनीताल अपने Hill Station के लिए पुरे देश में famous था इसीलिए Bollywood फिल्म निर्माताओ की होड़ यहाँ shooting करने में लग जाती थी, शायद हर 2-3 सालो में यहाँ फिल्मो की shooting होती थी और वो हिट भी जाती थी.

Madhumati, Shagoon, Bheegi Raat, Gumrah, Waqt और Kati Patang जैसी फिल्मो के के साथ Masoom कौन भूल सकता है. उसके बाद फिर आधुनिक जगत की फिल्मे जैसे Sirf Tum, Koi Mil Gaya, Baaz और Vivah जैसी फिल्मो को हर कोई याद करता है.

नैनीताल अपने जमाने का सबसे खूबसूरत और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल रहा है जिसकी जितनी भी तारीफ करे वो भी कम है लेकिन अफसोस अब वो नैनीताल आज नहीं है जिसे हम कबके खो चुके है.

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अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल की कुछ Famous Personalities ✅:दोस्तों ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल के कुछ पुराने लोग ऐसे थे...
10/08/2026

अंग्रेजो के जमाने में नैनीताल की कुछ Famous Personalities ✅:

दोस्तों ब्रिटिशकाल के दौरान नैनीताल के कुछ पुराने लोग ऐसे थे जो नैनीताल के प्रारंभिक काल से लेकर आजादी के बाद तक रहे, कुछ लोगो ने अंग्रेजो के जमाने में ऐतिहासिक कार्य किये तो कुछ आजादी के बाद नैनीताल के प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई...आइये कुछ विशेष लोगो के बारे में जानते है.

1. Shyam Lal Shah✅: नैनीताल में सबसे पुराने लोगो में से गिने जाने वाले एक भारतीय जिनकी 1840 में सबसे पहली कपड़ो की दुकान खुली.

2. Moti Ram Shah ✅: ये नैनीताल के शिल्पकार कहे जाते है क्योकि इन्होने ही अंग्रेजो के जमाने में कई European Building को बनाने में मदद की, इसके अलावा 1843 में इन्होने तल्लीताल में बहुत पुराने नयनादेवी मंदिर जो आज के Post Office के समीप था उसको स्थानांतरिक करके मल्लीताल में पुराने Boathouse के पास स्थापित किया.

3. Banke Lal Shah ✅:ये Alka Hotel के मालिक थे, इन्होने नैनीताल में सबसे पहले दुर्गादेवी मेले की शुरुवात की.

इसके अलावा बाकी लोगों के बारे में जानने के लिए इन तस्वीरों पर क्लिक करके देखिए, जहां आपको उनके जीवन और नैनीताल में उनके योगदान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाएगी।

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अंग्रेजो के जमाने का पुराना नैनीताल, Nainital During British Era ✅ब्रिटिशकाल के दौरान का नैनीताल वर्तमान नैनीताल से काफी...
09/08/2026

अंग्रेजो के जमाने का पुराना नैनीताल, Nainital During British Era ✅

ब्रिटिशकाल के दौरान का नैनीताल वर्तमान नैनीताल से काफी अलग हुआ करता था, अंग्रेजो ने नैनीताल को London की तरह विकसित किया था और नैनीताल का प्रशासन भी England की तरह चलता था.

उस दौर में जितने भी भारतीय थे अधिकांश अंग्रेजी बोलना सीख गए थे क्योकि अंग्रेजो ने अंग्रेजी शिक्षा पर काफी जोर दिया था. अंग्रेज़ लोग अपने जमाने के हिसाब से काफी आधुनिक और शिक्षित थे वो सभी से पढ़ने के लिए कहते थे और धार्मिक आडंबरो और कुरूतियो से दूर रहने के लिए कहते थे.

उम्मीद करता हूँ कि नैनीताल की यह 1905 से लेकर 1945 तक की फोटोज आपको पसंद आयेगी।

Hope you enjoy these photos of Nainital from 1905 to 1945.
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1880 से लेकर 1930 के जमाने का अनोखा नैनीताल, Nainital at its Golden Days ✅Many historians believe that 1880 से 1947 के ब...
05/08/2026

1880 से लेकर 1930 के जमाने का अनोखा नैनीताल, Nainital at its Golden Days ✅

Many historians believe that 1880 से 1947 के बीच का समय नैनीताल के इतिहास का स्वर्णिम काल माना जाता है। इस दौरान नैनीताल केवल एक खूबसूरत पहाड़ी नगर नहीं रहा, बल्कि Education, Tourism, Trade, Administration और Social Life का एक प्रमुख केंद्र बन चुका था। भारत ही नहीं, विदेशों तक नैनीताल की पहचान बन गई थी और हर साल बड़ी संख्या में British Officials, Tourists और Prominent Families यहां आते थे।

हालांकि, British Nainital आज के Nainital से बिल्कुल अलग था। उस समय पूरे शहर का संचालन British Administration और उनके बनाए नियमों के अनुसार होता था। शहर की योजना, Cleanliness, Traffic, Construction और Public Welfare पर विशेष ध्यान दिया जाता था। वहीं आज का नैनीताल भारतीय प्रशासन के अधीन है, जहां परिस्थितियां, चुनौतियां और प्रशासनिक प्राथमिकताएं समय के साथ बदल चुकी हैं।

This is why a clear historical difference is visible between Nainital during the British period and the Nainital of today.

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अंग्रेजो का नैनीताल में आखिरी समय, Nainital Early 1940's ✅दोस्तों 1944 आते-आते नैनीताल में अंग्रेजी हुकूमत की पकड़ ढीली ...
04/08/2026

अंग्रेजो का नैनीताल में आखिरी समय, Nainital Early 1940's ✅

दोस्तों 1944 आते-आते नैनीताल में अंग्रेजी हुकूमत की पकड़ ढीली पड़ने लगी थी। पूरे देश में आज़ादी की लहर तेज़ हो चुकी थी और उसका असर कुमाऊँ की वादियों तक साफ़ दिखाई देने लगा था। नैनीताल ही नहीं, बल्कि अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों में भी आज़ादी का जोश चरम पर था। जगह-जगह सभाएँ होने लगीं, क्रांतिकारी गतिविधियाँ बढ़ने लगीं और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज़ बुलंद होने लगी।

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि ऊधम सिंह नगर (तत्कालीन तराई क्षेत्र) से भी बड़ी संख्या में लोग नैनीताल पहुँचकर जुलूस और रैलियाँ निकालते थे। इसकी वजह साफ़ थी। उस समय नैनीताल पूरे कुमाऊँ में अंग्रेजों का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक केंद्र (Hub) था। यहाँ ब्रिटिश अधिकारी, बड़े व्यापारी और अंग्रेज परिवार बड़ी संख्या में रहते थे।

1947 तक नैनीताल में लगभग 40,000 अंग्रेज निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने यहाँ luxurious bungalows, luxurious hotels, churches, schools, clubs और अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए थे। गर्मियों में तो नैनीताल किसी छोटे से अंग्रेजी शहर जैसा दिखाई देता था।

लेकिन इतिहास ने करवट ली क्योकि 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होते ही अधिकांश अंग्रेज भारत छोड़ने लगे। कहा जाता है कि नैनीताल से लगभग 98% अंग्रेज आज़ादी के समय तक जा चुके थे। जो कुछ परिवार बचे, वे भी 1948 तक धीरे-धीरे यहाँ से चले गए। केवल बहुत कम संख्या में ब्रिटिश नागरिक भारत में रहे, जिनमें से कुछ को English-medium schools के प्रतिष्ठित विद्यालयों और अन्य संस्थानों के संचालन के लिए भारतीय सरकार ने अस्थायी रूप से कार्य जारी रखने की अनुमति दी।

हालाँकि इतिहास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह स्वीकार करना होगा कि आधुनिक नैनीताल की बुनियादी पहचान अंग्रेजी शासन के दौरान ही विकसित हुई। पहाड़ों को काटकर सड़कें बनाना, नैनीताल तक बिजली पहुँचाना, काठगोदाम तक रेलवे लाना, शानदार drainage system तैयार करना, व्यवस्थित बाज़ार बसाना, churches, schools, hospitalsऔर खूबसूरत colonial buildings बनाना, यह सब उसी दौर की देन है।

यही कारण है कि इतिहासकार अक्सर कहते हैं कि ब्रिटिश काल का नैनीताल अपनी साफ़-सफाई, अनुशासित नगर व्यवस्था और वास्तुकला के कारण आज के नैनीताल से बिल्कुल अलग और बेहद आकर्षक दिखाई देता था। आज भी मॉल रोड, पुराने होटल, चर्च और अनेक ऐतिहासिक इमारतें उस दौर की कहानी सुनाती हैं।

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03/08/2026

Garhwal Panwar Kings Real Photos | 1690 से 1947 तक गढ़वाल के पंवार शासक की आज Real Photos को देखिये ✅

इस Short Video में पहली बार देखिए 1698 से 1949 तक गढ़वाल और टिहरी रियासत पर शासन करने वाले सभी पंवार शासकों की Real Photos..इन दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से जानिए कि पंवारवंश के राजा कैसे दिखते थे, किस तरह के शाही वस्त्र पहनते थे, उनका व्यक्तित्व कैसा रहा होगा और उनका राजसी जीवन कैसा दिखाई देता होगा।

Step back in time and witness realistic portraits of every Panwar king who ruled Garhwal and the British Tehri Kingdom between 1698 and 1947. Discover how these legendary rulers may have appeared, the majestic clothing they wore, their royal presence, and what life in the Panwar court might have looked like.

I have written below the names of the real photos of the Panwar rulers.
Fatehpati Shah Real Photo - 1698
Pradeep Shah Real Photo - 1760
Jayakrit Shah Real Photo - 1780
King Pradyumna Shah Real Photo - 1790
King Parakram Shah Real Photo - 1790
Sudarshan Shah - Real Photo
Bhawani Shah Tehri Garhwal - Real Photo
Pratap Shah Tehri Garhwal - Real Photo
Maharaja Kirti Shah - Real Photo
Maharaja Narendra Shah - Real Photo
Maharaja Manvendra Shah - Real Photo
Manujendra Shah - Real Photo

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01/08/2026

Rudrapur बसाने वाले महान चंदराजा Rudra Chand की पूरी कहानी | Akbar ने भी Rudra Chand की शक्ति को सलाम किया ✅

Raja Rudra Chand, चंदवंश के सबसे महान और शक्तिशाली शासकों में गिने जाते हैं। इस वीडियो में जानिए कि कैसे कम उम्र में गद्दी संभालने वाले King Rudra Chand ने कुमाऊँ को मजबूत बनाया, हुसैनखां टुकड़िया (Hussain Khan Tukadia) के आक्रमणों का सामना किया, तराई-भावर पर दोबारा अधिकार स्थापित किया और अपने नाम पर Rudrapur शहर बसाया।

📌: ShaktiSingh Gusai Full Video: https://youtu.be/WyhaY2ustfY

Rudrachand Key Highlights:
✔️ Balokalyan Chand के बाद Rudrachand का Coronation
✔️ Hussain Khan Tukudia History
✔️ Hussain Khan Tukudia (हुसैन खां टुकड़िया) का First Kumaon invasion
✔️ मंदिरों की लूट (Plunder)और विनाश का इतिहास
✔️Hussain Khan Tukudia (हुसैन खां टुकड़िया) का Second Kumaon invasion:
✔️ Rudra Chand और Mughal सैनिक का ऐतिहासिक युद्ध
✔️ रुद्रपुर शहर की स्थापना (History Of Rudrapur)
✔️ Akbar और Rudra Chandके संबंध
✔️ Battle of Nagaur और Chaurasi Mal का फरमान
✔️ Malla Mahal और Rudra Chand's Fort
✔️ रुद्रचंद द्वारा लिखे गए संस्कृत ग्रंथ (Rudra Chand Scripts)
✔️ Sirakot Conquest की रोचक कहानी
✔️ कुमाऊँ के Expansion और Golden Age of the Chand Empire

यदि आपको Uttarakhand, Kumaon, Chand dynasty और Indian History से जुड़े ऐसे ही Factual Videos पसंद आते हैं तो Video को Like करें, अपने दोस्तों के साथ Share करें और Nainital Mania को Subscribe करना न भूलें....जय देवभूमि उत्तराखंड ❤️

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अंग्रेजो के जमाने का है भवाली, Bhowali 1870's ✅दोस्तों अंग्रेजो का भवाली में आगमन 1816 के आसपास हुआ जब अंग्रेजो ने गोरखा...
27/07/2026

अंग्रेजो के जमाने का है भवाली, Bhowali 1870's ✅

दोस्तों अंग्रेजो का भवाली में आगमन 1816 के आसपास हुआ जब अंग्रेजो ने गोरखा शासन को ख़त्म करके संपूर्ण कुमाऊँ और गढ़वाल में ब्रिटिशराज की स्थापना की.

चंद शासनकाल के दौरान भवाली एक घना जंगल हुआ करता था लेकिन नैनीताल से करीब होने के कारण 1870 से ही भवाली को अंग्रेजो ने बसाना शुरू किया। आज तो हम भवाली को व्यस्त और कंक्रीट के जंगल से घिरा देखते है लेकिन अंग्रेजो के जमाने में भवाली एक सुव्यवसित Hill Station हुआ करता था.

ब्रिटिशकाल के दौरान यहाँ अंग्रेजो ने European Style की building बनाई थी, इसके अलावा church, cemetery और TB Sanatoriam की स्थापना भी अंग्रेजो ने ही की.

उस समय का भवाली बहुत सुंदर हुआ करता था जिसकी कुछ पुरानी फ़ोटोज़ को आप देख सकते है.

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