27/08/2026
राजकीय महाविद्यालय नारायणगढ़ का पुस्तकालय विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन और अकादमिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र
लगभग 26 हजार पुस्तकों के साथ हिंदी, पंजाबी एवं अंग्रेजी के समाचार पत्र-पत्रिकाएं भी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध
नारायणगढ़, 27 अगस्त। हिंद दस्तक
राजकीय महाविद्यालय नारायणगढ़ में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें अध्ययन के लिए अनुकूल एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध करवाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसी उद्देश्य से महाविद्यालय पुस्तकालय को विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों के लिए ज्ञानवर्धन, अध्ययन, पठन-पाठन एवं अकादमिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया है। पुस्तकालय में विद्यार्थियों के लिए शांत एवं अध्ययन-अनुकूल वातावरण उपलब्ध है, जहां विद्यार्थी नियमित रूप से बैठकर अपनी पढ़ाई करते हैं और विभिन्न विषयों की पुस्तकों, संदर्भ सामग्री तथा अन्य शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठा रहे हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य रोहित कुमार ने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शिक्षण संस्थान का महत्वपूर्ण अंग होता है। कक्षा में प्राप्त ज्ञान को और अधिक व्यापक बनाने में पुस्तकों एवं संदर्भ सामग्री की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे नियमित रूप से पुस्तकालय में अध्ययन करें तथा वहां उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का अधिक से अधिक सदुपयोग करें।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित होने से उनके ज्ञान में वृद्धि होने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व एवं विचार क्षमता का भी विकास होता है।
पुस्तकों के रख-रखाव एवं रिकॉर्ड का नियमित संधारण
जूनियर लाइब्रेरियन कुलकेतन ने बताया कि विद्यार्थी अपने खाली समय का सदुपयोग करते हुए पुस्तकालय में बैठकर अध्ययन कर सकते हैं। पुस्तकालय में विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न विषयों की पर्याप्त पुस्तकें एवं संदर्भ सामग्री उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को पुस्तकालय की सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों को व्यवस्थित रखने, उनके वर्गीकरण एवं रिकॉर्ड के नियमित संधारण पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। पुस्तकालय में कार्यरत अनिल कुमार, रिस्टोरर, कुसुम एवं अमरजीत, लैब अटेंडेंट द्वारा पुस्तकों के उचित रख-रखाव एवं पुस्तकालय से संबंधित व्यवस्थाओं में सहयोग किया जा रहा है।
लगभग 26 हजार पुस्तकों का संग्रह-
महाविद्यालय पुस्तकालय में विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लगभग 26 हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं। पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ संदर्भ पुस्तकें, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं एवं अन्य शैक्षणिक विषयों से संबंधित अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। विद्यार्थी अपनी आवश्यकता एवं रुचि के अनुसार इन पुस्तकों का उपयोग कर रहे हैं।
पुस्तकालय में उपलब्ध सामग्री का लाभ केवल नियमित कक्षाओं के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थी अपनी परीक्षाओं की तैयारी, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट एवं अन्य अकादमिक गतिविधियों के लिए भी संदर्भ पुस्तकों का उपयोग कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को विषयों को गहराई से समझने तथा पाठ्यक्रम से इतर ज्ञान प्राप्त करने में भी सहायता मिलती है।
समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं से समसामयिक जानकारी-
पुस्तकालय में विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों के लिए हिंदी, पंजाबी एवं अंग्रेजी भाषा के विभिन्न समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं भी नियमित रूप से उपलब्ध रहती हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को देश-दुनिया की घटनाओं, शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, सामाजिक विषयों तथा समसामयिक घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं का नियमित पठन विद्यार्थियों में सामान्य ज्ञान बढ़ाने के साथ-साथ उनकी भाषा एवं अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करने में भी सहायक है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी यह सामग्री विशेष रूप से उपयोगी है।
अध्ययन के लिए पुस्तकालय का नियमित उपयोग करें विद्यार्थी : रेणु कुमारी
कॉमर्स विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर रेणु कुमारी ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई को केवल कक्षा में होने वाले अध्यापन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। पुस्तकालय में उपलब्ध पाठ्यपुस्तकों एवं संदर्भ पुस्तकों का नियमित अध्ययन विद्यार्थियों की विषय संबंधी समझ को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से वाणिज्य विषय के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अतिरिक्त विभिन्न संदर्भ पुस्तकों, पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों का अध्ययन काफी उपयोगी रहता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों के पास विभिन्न माध्यमों से जानकारी उपलब्ध है, लेकिन पुस्तकों का व्यवस्थित अध्ययन अभी भी ज्ञान को मजबूत एवं स्थायी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। विद्यार्थियों को अपने दैनिक कार्यक्रम में पुस्तकालय में अध्ययन के लिए भी समय निर्धारित करना चाहिए।
पुस्तकालय का उपयोग विद्यार्थियों के अकादमिक विकास में सहायक : संजीव कुमार
इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर संजीव कुमार ने कहा कि इतिहास जैसे विषयों को बेहतर ढंग से समझने के लिए विद्यार्थियों का विभिन्न पुस्तकों एवं संदर्भ सामग्री का अध्ययन करना आवश्यक है। केवल पाठ्यक्रम की पुस्तक पढ़ने के बजाय अलग-अलग लेखकों की पुस्तकों एवं संदर्भ ग्रंथों को पढ़ने से विद्यार्थियों को किसी विषय के विभिन्न पक्षों को समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकालय विद्यार्थियों में अध्ययन एवं शोध की प्रवृत्ति विकसित करने का बेहतर माध्यम है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने खाली समय का उपयोग मोबाइल एवं अन्य अनावश्यक गतिविधियों में करने के बजाय पुस्तकालय में अध्ययन एवं पठन-पाठन के लिए करें। इससे न केवल उनकी शैक्षणिक तैयारी बेहतर होगी, बल्कि उनमें निरंतर सीखने की आदत भी विकसित होगी।
स्टाफ सदस्यों के लिए भी उपलब्ध अध्ययन एवं संदर्भ सुविधा
महाविद्यालय पुस्तकालय में विद्यार्थियों के साथ-साथ स्टाफ सदस्यों के लिए भी अध्ययन एवं संदर्भ सामग्री की सुविधा उपलब्ध है। महाविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य स्टाफ सदस्य अपने फ्री लेक्चर एवं खाली समय में पुस्तकालय में बैठकर अध्ययन, पठन-पाठन तथा अकादमिक कार्य करते हैं। शिक्षक विभिन्न विषयों की नई पुस्तकों, संदर्भ सामग्री, समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं के माध्यम से अपने ज्ञान को अद्यतन रखने का प्रयास करते हैं।
इससे महाविद्यालय में विद्यार्थियों के साथ-साथ स्टाफ सदस्यों के बीच भी पठन-पाठन एवं अध्ययन की संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। शिक्षक स्वयं पुस्तकालय का उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं।
पठन संस्कृति को बढ़ावा देना महाविद्यालय का उद्देश्य
महाविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उनमें नियमित अध्ययन, पठन-पाठन, जिज्ञासा एवं स्व-अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित करना भी है। पुस्तकालय इसी दिशा में विद्यार्थियों को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है, जहां वे शांत वातावरण में अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
महाविद्यालय प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे कक्षाओं के अतिरिक्त समय में पुस्तकालय का उपयोग करें और अपनी रुचि एवं विषय के अनुसार पुस्तकों, संदर्भ सामग्री, समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं का अध्ययन करें। इससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता में वृद्धि होने के साथ-साथ उनके सामान्य ज्ञान, भाषा ज्ञान एवं समसामयिक विषयों की समझ भी बेहतर होगी।
महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि एक समृद्ध पुस्तकालय और नियमित पठन की आदत विद्यार्थी के शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास की मजबूत आधारशिला है। इसी सोच के साथ राजकीय महाविद्यालय नारायणगढ़ में पुस्तकालय की सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।