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12/01/2026

दरवाज़े पर आम के पत्ते (Toran) क्यों लगाते हैं? 🍃🤯 त्यौहारों पर दरवाजे पर आम के पत्ते (Mango Leaves) क्यूँ लगाते हैं? 🤔 इसका Scientific Reason ये है कि Mango leaves तोड़ने के बाद भी Oxygen release करते हैं. Bheed-bhaad वाले माहौल में ये एक 'Natural Air Purifier' का काम करते हैं और हवा को साफ़ रखते हैं. ये हमारी संस्कृति का साइंस है! 🚩

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डायबिटीज और हाइपरटेंशन है, तो ये पोस्ट आपके लिए बहुत जरुरी है... यानी दातून करना भूल चुके हो...तो वापसी कीजिये...…आसुरी ...
11/01/2026

डायबिटीज और हाइपरटेंशन है, तो ये पोस्ट आपके लिए बहुत जरुरी है...

यानी दातून करना भूल चुके हो...तो वापसी कीजिये...…

आसुरी संस्कृति की हर बात, जो प्रगतिशील ओर विकास का दिखावा करती है, वास्तव मेँ विनाश ही है!

सन 1990 से पहले कितने लोगों को डायबिटीज़ होता था? कितने लोग हाइपरटेंशन से त्रस्त थे? नब्बे के दशक के साथ हर घर में एक डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर का रोगी आ गया, क्यों? बहुत सारी वजहें होंगी, जिनमें हमारे खानपान में बदलाव को सबसे खास माना जा सकता है।

बदलाव के उस दौर में एक चीज बहुत ख़ास थो जो खो गयी, पता है ना क्या है वो? दातून गाँव देहात में आज भी लोग दातून इस्तमाल करते दिख जाएंगे लेकिन शहरों में दातून पिछड़ेपन का संकेत बन चुका है।

गाँव देहात में डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के रोगी यदा कदा ही दिखेंगे या ना के बराबर ही होंगे। वजह साफ है, ज्यादातर लोग आज भी दातून करते हैं। तो भई, डायबिटीज़ और हाइ ब्लड प्रेशर के साथ दातून का क्या संबंध, यही सोच रहे हो ना?..तो आज आपका दिमाग हिल जाएगा..और फिर सोचिएगा, हमने क्या खोया, क्या पाया?

ये जो बाज़ार में टूथपेस्ट और माउथवॉश आ रहे हैं ना, 99.9% सूक्ष्मजीवों का नाश करने का दावा करने वाले, उन्हीं ने सारा बंटाधार कर दिया है।

ये माउथवॉश और टूथपेस्ट बेहद स्ट्राँग एंटीमाइक्रोबियल होते हैं और हमारे मुंह के 99% से ज्यदा सूक्ष्मजीवों को वाकई मार गिराते हैं। इनकी मारक क्षमता इतनी जबर्दस्त होती है कि ये मुंह के उन बैक्टिरिया का भी खात्मा कर देते हैं, जो हमारी लार (सलाइवा) में होते हैं और ये वही बैक्टिरिया हैं जो हमारे शरीर के नाइट्रेट (NO3-) को नाइट्राइट (NO2-) और बाद में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में बदलने में मदद करते हैं।

जैसे ही हमारे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ये मैं नहीं कह रहा, दुनियाभर की रिसर्च स्ट्डीज़ बताती हैं कि नाइट्रिक ऑक्साइड का कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।

जर्नल ऑफ क्लिनिकल हायपरेटेंस (2004) में 'नाइट्रिक ऑक्साइड इन हाइपरटेंशन' टाइटल के साथ छपे एक रिव्यु आर्टिकल में सारी जानकारी विस्तार से छपी है और नाइट्रिक ऑक्साइड की यही कमी इंसुलिन रेसिस्टेंस के लिए भी जिम्मेदार है।

समझ आया खेल?
नाइट्रिक ऑक्साइड कैसे बढ़ेगा जब इसे बनाने वाले बैक्टिरिया का ही काम तमाम कर दिया जा रहा है? ब्रिटिश डेंटल जर्नल में 2018 में तो बाकायदा एक स्टडी छपी थी जिसका टाइटल ही ’माउथवॉश यूज़ और रिस्क ऑफ डायबिटीज़’ था।

इस स्टडी में बाकायदा तीन साल तक उन लोगों पर अध्धयन किया गया जो दिन में कम से कम 2 बार माउथवॉश का इस्तमाल करते थे और पाया गया कि 50% से ज्यादा लोगों को प्री-डायबिटिक या डायबिटीज़ की कंडिशन का सामना करना पड़ा।

अब बताओ करना क्या है?
कितना माउथवॉश यूज़ करेंगे?
कितने टूथपेस्ट लाएंगे सूक्ष्मजीवों को मार गिराने वाले?

दांतों की फिक्र करने के चक्कर में आपके पूरे शरीर की बैंड बज रही है। गाँव देहातों में तो दातून का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है और ये दातून मुंह की दुर्गंध भी दूर कर देते हैं और सारे बैक्टिरिया का खात्मा भी नहीं करते।

आदिवासी टूथपेस्ट, टूथब्रश क्या होते हैं, जानते तक नहीं। अब आप सोचेंगे कि दीपकआचार्य ने टूथपेस्ट और माउथवॉश को लेकर इतनी पंचायत कर ली तो दातून के प्रभाव को लेकर किसी क्लिनिकल स्टडी की बात क्यों नही की?

बबूल और नीम की दातून को लेकर एक क्लिनिकल स्टडी जर्नल ऑफ क्लिनिकल डायग्नोसिस एंड रिसर्च में छपी और बताया गया कि स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में ये दोनों जबर्दस्त तरीके से कारगर हैं।

ये वही बैक्टिरिया है जो दांतों को सड़ाता है और कैविटी का कारण भी बनता है। वो सूक्ष्मजीव जो नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं जैसे एक्टिनोमायसिटीज़, निसेरिया, शालिया, वीलोनेला आदि दातून के शिकार नहीं होते क्योंकि इनमें वो हार्ड केमिकल कंपाउंड नहीं होते जो माउथवॉश और टूथपेस्ट में डाले जाते हैं।

विदेशी लोग आज हमारे ही देसी उपायों मनचाहे दामों में बेच रहे,
हमारे देसी उपायों को कॉपी पेस्ट कर उन्हें अपना बना उनका पेटेंट करा रहे

मुद्दे की बात ये है कि अब हमे अपने देसी वस्तुओं के उपयोग और उनकी उपयोगिता को समझना पड़ेगा और उनकी तरफ़ वापसी करनी होगी। एक कहावत है-

बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय।
मोटी दतुअन जे करे, ते घर बैद न जाय।।

जय श्री राम , जय सनातन संस्कृति 🌿

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Sri Kamakshi Ambal Darshanam at Namma Periyava Kovil today on Auspicious Friday..---Sri Kamakshi Ambal Jayanthi at Namma...
08/11/2025

Sri Kamakshi Ambal Darshanam at Namma Periyava Kovil today on Auspicious Friday..
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Sri Kamakshi Ambal Jayanthi at Namma Periyava Kovil
Friday, November 14th 2025 from 6.30pm onwards

Aippasi Pooram - celebrates the divine Āvirbhava of Goddess Kamakshi, the embodiment of wisdom, compassion, and eternal grace.

Special Lotus Trisati Archanai to Sri Kamakshi Ambal.
Also, Devotees will have an opportunity to do Haarathi to Sri Utsavar Kamakshi Ambal on this very auspicious day.

To perform Sankalpam & Kainkaryam to any Poojai Seva at Namma Periyava Kovil, please register at:








शक संवत और विक्रम संवत, दोनों ही भारतीय पारंपरिक कैलेंडर हैं, लेकिन इनमें कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। विक्रम संवत, जो राजा व...
19/08/2025

शक संवत और विक्रम संवत, दोनों ही भारतीय पारंपरिक कैलेंडर हैं, लेकिन इनमें कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। विक्रम संवत, जो राजा विक्रमादित्य के नाम पर है, 57 ईसा पूर्व में शुरू हुआ था और यह सूर्य और चंद्र की गति पर आधारित है. वहीं, शक संवत 78 ईस्वी में शुरू हुआ था और यह मुख्य रूप से सौर गणना पर आधारित है.

विक्रम संवत, हिंदू पंचांग का आधार है और भारत के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य भागों में त्योहारों और व्रतों के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि शक संवत का उपयोग भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में किया जाता है.

*मुख्य अंतर* :-
शुरुआत का समय:-
विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व में शुरू हुआ, जबकि शक संवत 78 ईस्वी में.

आधार:-
विक्रम संवत सूर्य और चंद्र दोनों की गति पर आधारित है, जबकि शक संवत मुख्य रूप से सौर गणना पर आधारित है.

उपयोग:-
विक्रम संवत का उपयोग हिंदू पंचांग के लिए और त्योहारों, व्रतों आदि के लिए होता है, जबकि शक संवत का उपयोग भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में किया जाता है.

नया साल:-
विक्रम संवत में नया साल चैत्र प्रतिपदा से शुरू होता है, जबकि शक संवत में नया साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है.

अंतर:-
विक्रम संवत, अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे है, जबकि शक संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 78 साल पीछे है.

उदाहरण:-
अगर आज अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2025 है, तो:
विक्रम संवत 2025 + 57 = 2082 होगा, शक संवत 2025 - 78 = 1947 होगा.

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