29/06/2026
आपने कभी सोचा है कि भारत के वस्त्र कभी पूरी दुनिया में अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध थे?
'16वीं से 18वीं शताब्दी के मध्य वस्त्र उद्योगों का विकास' भारतीय वस्त्र परंपरा के उस स्वर्णिम युग का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है, जब मलमल, चंदेरी, जामदानी, ब्रोकेड, पटोला और इक्त जैसे वस्त्र अपनी अद्वितीय बुनावट, रंगों और शिल्पकला के कारण विश्वभर में प्रतिष्ठित थे।
यह पुस्तक वस्त्रों के इतिहास के साथ ही बुनाई, रंगाई, ब्लॉक प्रिंटिंग और जरी कढ़ाई जैसी पारंपरिक तकनीकों के माध्यम से उस युग के कारीगरों की अद्भुत दक्षता, रचनात्मकता और भारतीय शिल्प विरासत को भी सामने लाती है।
यदि आपकी रुचि भारतीय इतिहास, संस्कृति, हस्तशिल्प, वस्त्र परंपरा या शोधपरक अध्ययन में है तो यह पुस्तक आपके संग्रह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है.
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