24/11/2025
मैं आज आपको एक ऐसी कहानी शेयर कर रहा हु, जो मेरे पहली ठुकाई की है, मेरे पडोश में एक लड़की रही थी रिंकी, मैं मैं अक्सर उसके घर जाता था, वो अभी जवान की दहलीज पे थी मैं भी ज्यादा बड़ा नहीं मुझे उस समय किसी को पेलने का मन करता था इस वजह से मैंने उसके घर और भी ज्यादा जाना सुरु कर दिया, उसके घर बाले समझते थे की दोनों दोस्त है इस्सवजह से पढाई लिखे के बारे में डिसकस करते होंगे, पर मेरा इरादा कुछ और था|
रिंकी एक माध्यम कद काठी की लड़की थी, जैसे की ताजा खीरा हो, बिलकुल खच खच, मुझे बहुत ही पसंद थी, वो सम्ब्ली थी पर बड़ी ही मस्त दिखती थी, उसका संतरा बड़ा नहीं था पर जितना था मजेदार था, चलती थी तो मानो हिरणी भी सरमा जाये और किसी के तरफ देख ले तो सावन बरस जाये, पीछे से अगर आप देख लेते तो मुह से हाय के अलावा कुछ भी नहीं निकालता आप तो ठीक रहते पर सामान बेचारा खड़ा होके भी कुछ नहीं कर पाता, मैंने खुद कितने बार मार के काम चलाया.
एक दिन की बात है मैं उसके घर गया वो घर में अकेली थी उसके घर वाले कही बाहर गए थे शाम को आते गर्मी का दिन था, सब लोग अपने अपने घरों में थे, कोई धुप की वजह से बाहर नहीं निकल रहा था, मैं उसके घर गया तो वो बोली आज मम्मी पापा और दादी तीनो कही गए है रिश्तेदार के यहाँ वो लोग शाम को पांच बजे तक आएगा, मुझे कुछ उम्मीद जगी की हो सकता है आज मैं अपने ज़िंदगी का पहली ठुकाई का या तो यों कहिये की पहली बार किसी लड़की को छूने का मौक़ा मिल जाये क्यों की आज तक किसी लड़की को छुआ ही नहीं था वासना की नज़र से. मैंने बैठ गया और बोला “रिंकी आज मैं तुमसे कुछ मागूंगा” बोली क्या “मैंने कहा अगर दोगी तो बोलो, अरे बोलो तो सही क्या चाहिए.
मैंने कहा ऐसे क्या बोलना अगर नहीं दी तो, मैंने मन ही मन सोच लिया था की अगर मामला बिगड़ेगा तो बोल दूंगा मैंने अचार माँगा था, तो वो बोली देने लायक होगा तो जरूर दूंगी, मैंने कहा पक्का हां पर देने लायक होगा तो अगर कुछ गलत बोलोगे तो नहीं. मैं समझ गया की वो समझ चुकी है तो क्यों ना डायरेक्ट ही बोल दिया जाये, मैंने कहा पेलने दोगी? बोली नहीं नहीं ये तो गलत बात है, मैं नहीं दूंगी, मैंने कहा कुछ भी नहीं होगा, बस एक बार बस एक बार फिर मैं कभी नहीं कहुगा, वो बोली नहीं नहीं किसी को पता चल जायेगा, मैंने कहा माँ कसम मैं किसी को नहीं बोलुँगा, वो बोली नहीं ये सब गलत है, मैंने कहा रिंकी कुछ भी गलत नहीं है प्लीज एक बार फिर कभी भी नहीं मांगूगा,
वो मान गयी, बोली ठीक है बस एक बार मैंने कहा ठीक है. वो पहले मैं दरवाजा के पास आके देखा कोई बाहर तो नहीं है, चारो तरफ झाकने के बाद वो अंदर आये और पलंग पर लेट गयी, मेरी तो साँसे फूल रही थी, क्यों की ये काम ज़िंदगी में पहली बार करने जा रहा था डर लग रहा था, पर ख़ुशी भी थी, मेरे पुरे शरीर में करंट दौड़ रहा था, मैं अंदर गया वो लेटी थी, मैंने उसको किश कर लिया, मैंने पहली बार किसी लड़की को इतने करीब से देखा,
कहानी जारी रहेगी
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