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 #मध्यप्रदेश की राजधानी  #भोपाल के आंबेडकर मैदान में आदिवासी महिलाएं पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी ...
05/09/2026

#मध्यप्रदेश की राजधानी #भोपाल के आंबेडकर मैदान में आदिवासी महिलाएं पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं। सरकार के लिए नौकरी देना या खत्म करना शायद एक सरकारी आदेश भर हो सकता है, लेकिन वनवासी अंचलों से आईं इन पेसा मोबिलाइजर्स युवतियों के लिए यह 4 हजार रुपए की नौकरी केवल रोजी-रोटी नहीं बल्कि उनका आत्मसम्मान और परिवार का सबसे बड़ा सहारा थी। दुर्गम गांवों में तमाम अभावों के बावजूद पढ़ाई पूरी कर समाज के बीच काम करने की उम्मीद संजोने वाली ये बेटियां अब अपने भविष्य को लेकर गहरे संकट में हैं।

#नौकरी छीने जाने के बाद अपनी आवाज हुक्मरानों तक पहुंचाने के लिए ये महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर खुले आसमान के नीचे धरने पर डटी हुई हैं। उनका कहना है कि मानदेय भले ही मामूली था, लेकिन इससे उन्हें अपने समुदाय में बदलाव लाने और आत्मनिर्भर बनने का गौरव हासिल हुआ था। अचानक सेवा समाप्त किए जाने से उनके सामने जीवन यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है। वे सरकार से बहाली और न्याय की गुहार लगा रही हैं, लेकिन अभी तक शासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल सका है।

#भोपालNews

 #मध्यप्रदेश में छात्रों और शिक्षक अभ्यर्थियों के बाद अब 9300 जनसेवा मित्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवा...
05/09/2026

#मध्यप्रदेश में छात्रों और शिक्षक अभ्यर्थियों के बाद अब 9300 जनसेवा मित्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष जनसेवा मित्र संगठन ने धरना देकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस वादे को पूरा करने की मांग की, जिसमें जनसेवा मित्रों की सेवा निरंतर जारी रखने की बात कही गई थी। सवाल यह है कि जब सरकार के लिए इन युवाओं की सेवाएं चुनाव से पहले जरूरी थीं, तो चुनाव के बाद इन्हें अचानक क्यों हटा दिया गया और आज तक इनकी बहाली क्यों नहीं की गई?

सबसे बड़ा सवाल मौजूदा भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी उठ रहा है। #जनसेवा_मित्रों का आरोप है कि 9300 पहले से प्रशिक्षित और योजनाओं पर काम कर चुके युवाओं का भविष्य अधर में छोड़कर अब मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम के तहत 4865 नए युवाओं की भर्ती की जा रही है। यदि सरकार को युवाओं की सेवाओं की जरूरत है, तो पहले से काम कर चुके जनसेवा मित्रों को मौका क्यों नहीं दिया जा रहा? भर्ती की गाइडलाइन, चयन प्रक्रिया और इसकी पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का सरकार क्या जवाब देगी?

जनसेवा मित्रों का कहना है कि सरकार पहले 9300 युवाओं को रोजगार का भरोसा देकर उनके साथ अन्याय कर चुकी है और अब नई भर्ती के जरिए हजारों युवाओं को फिर अस्थायी रोजगार का सपना दिखाया जा रहा है। ऐसे में सवाल सिर्फ 9300 जनसेवा मित्रों की बहाली का नहीं, बल्कि सरकार की युवा रोजगार नीति और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता का भी है। धरने के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की गई कि नई भर्ती से पहले पुराने जनसेवा मित्रों की सेवा बहाल की जाए और सरकार पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब दे।

 #मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक दिवस पर बड़ा ऐलान किया है। ...
05/09/2026

#मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक दिवस पर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में TET परीक्षा ऑफलाइन कराई जाएगी। इस घोषणा को परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और को लेकर लंबे समय से असमंजस में चल रहे शिक्षकों के लिए अहम माना जा रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान भी दिया गया।

#मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। TET को ऑफलाइन कराने का फैसला ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद TET की अनिवार्यता और परीक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षकों के बीच चर्चा तेज है। केंद्र सरकार ने भी बताया है कि TET योग्यता हासिल करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई गई है और पात्र शिक्षकों को अवसर देने के लिए परीक्षा नियमित रूप से कराने की अपेक्षा की गई है। अब CM के ऑफलाइन परीक्षा के ऐलान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऑफलाइन TET कब से और किस प्रक्रिया के तहत आयोजित होगी?

👉 TET ऑफलाइन कराने के फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या इससे अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी? कमेंट में बताइए।

 #मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के 20 वर्षीय युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ इन दिनों अपनी अनोखी मुह...
05/09/2026

#मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के 20 वर्षीय युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ इन दिनों अपनी अनोखी मुहिम को लेकर चर्चा में हैं। जिस #अजनार_नदी में कभी प्लास्टिक, कचरे और गंदगी का अंबार लगा था, उसे साफ करने का बीड़ा बिट्टू ने खुद उठाया। 26 जनवरी 2026 से शुरू हुआ उनका यह अभियान धीरे-धीरे एक मिशन बन गया। शुरुआत में कुछ दोस्त साथ आए, लेकिन बाद में बिट्टू ने अकेले ही नदी में उतरकर सफाई का काम जारी रखा। महीनों की मेहनत के बाद नदी की तस्वीर बदलने लगी और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।

#बिट्टू की इस पहल की चर्चा अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची है। मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात कर उनके पर्यावरण संरक्षण के प्रयास की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। बिट्टू की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े अभियान या संसाधनों का इंतजार करने के बजाय अपने स्तर पर शुरुआत की और लगातार मेहनत से लोगों का ध्यान नदी संरक्षण की ओर खींचा। इससे पहले उद्योगपति आनंद महिंद्रा भी बिट्टू के प्रयास की सार्वजनिक रूप से तारीफ कर चुके हैं।

रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर बुधवार शाम करीब 5 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। गुढ़ थाना क्षेत्र के बदवार स्टैंड के...
02/09/2026

रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर बुधवार शाम करीब 5 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। गुढ़ थाना क्षेत्र के बदवार स्टैंड के पास यात्रियों से भरी बस और बल्कर की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि #बस सड़क किनारे पानी से भरे गहरे गड्ढे/खाई में जा गिरी और बल्कर भी अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों के साथ पुलिस और प्रशासन की टीमों ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। बस में करीब 40 यात्री सवार होने की जानकारी सामने आई है।

दुर्घटना में देर रात तक 5 यात्रियों की मौत और 21 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें संजय गांधी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज #रीवा में उपचार के लिए भेजा गया है। हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी की। रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा के भी घटनास्थल पर पहुंचने की जानकारी है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे, इसलिए प्रशासन की अंतिम पुष्टि को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।

हादसे पर #मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपये की सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही घायलों के बेहतर और निःशुल्क उपचार के निर्देश प्रशासन को दिए गए हैं। फिलहाल पुलिस हादसे के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है। बारिश और सड़क पर फिसलन को भी दुर्घटना की संभावित वजह बताया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

 #मध्यप्रदेश में चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सरकार ने शिकंजा कस दिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण...
02/09/2026

#मध्यप्रदेश में चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सरकार ने शिकंजा कस दिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने 1 सितंबर को जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में कोई भी चीनी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेगा और किसी भी स्टॉक को प्राप्ति की तारीख से 30 दिन से ज्यादा समय तक भंडारित नहीं किया जा सकेगा। सभी डीलरों के लिए भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करना अनिवार्य किया गया है। सरकार ने नियमों के पालन के लिए सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।

#सरकार का मकसद चीनी की कृत्रिम कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाकर बाजार में पर्याप्त आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है। वहीं, थोक उपभोक्ताओं—जैसे हलवाई, मिठाई निर्माता, शीतल पेय और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भी स्टॉक की सीमा तय की गई है और उन्हें अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर #चीनी रखने की अनुमति है। हालांकि, इसी बीच केंद्र सरकार ने 15 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक सामान्य चीनी डीलरों की देशव्यापी स्टॉक सीमा 4 हजार से घटाकर 2 हजार क्विंटल करने का फैसला किया है। ऐसे में आगे मध्य प्रदेश में लागू सीमा को लेकर केंद्र के नए आदेश के अनुरूप स्थिति देखना महत्वपूर्ण होगा।

एक जैसे अंदाज में मोहन-शिवराज… क्या कहते हैं आप?
30/08/2026

एक जैसे अंदाज में मोहन-शिवराज… क्या कहते हैं आप?

 #निवाड़ी: झांसी-खजुराहो हाईवे पर प्रतापपुरा के पास नाराई चौकी स्थित   चेकिंग पॉइंट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 14...
17/08/2026

#निवाड़ी: झांसी-खजुराहो हाईवे पर प्रतापपुरा के पास नाराई चौकी स्थित चेकिंग पॉइंट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 14-15 अगस्त की दरमियानी रात चेकिंग के दौरान ट्रक को रोकने के प्रयास में तेज रफ्तार दूसरी गाड़ी से भिड़ंत हो गई। हादसे में वाहन क्षतिग्रस्त हुए। आरोप है कि हादसे के बाद RTO का अमला मौके से चला गया।

इस हादसे ने करीब एक महीने पहले ' ' की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। उस दौरान एक ट्रक ड्राइवर ने आरोप लगाया था कि RTO अमला अचानक ट्रक के सामने बैरिकेडिंग लगाकर वाहन रोकता है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। इसी ग्राउंड रिपोर्ट में चेकिंग के नाम पर कथित अवैध वसूली के आरोप भी LIVE कैमरे पर सामने आए थे। मार्च में 'ब्रेकिंग न्यूज़ वाला' ने RTO की कथित गुलाबी पर्ची को लेकर खबर की थी। जुलाई में दोबारा ग्राउंड रिपोर्ट करने पर पर्ची का रंग गुलाबी से नीला मिला, लेकिन आरोप था कि कथित वसूली की व्यवस्था जारी है। इन आरोपों के बावजूद प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल उठे।

जुलाई में जब टीम ने मौके पर मौजूद RTO कर्मचारियों से सवाल-जवाब किए तो कर्मचारियों ने टीम पर बदतमीजी के आरोप लगाए और पुलिस में आवेदन दिया। इसके बाद भी चेकिंग पॉइंट की कार्यप्रणाली पर कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई। अब उसी स्थान पर दोबारा हादसा होने से सवाल खड़े हो रहे हैं कि हाईवे पर चेकिंग के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या वाहनों को रोकने के लिए लगाई जा रही बैरिकेडिंग सुरक्षित है? हादसे के बाद चेकिंग अमला मौके पर क्यों नहीं रहा?

मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सवाल है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग चेकिंग पॉइंट की पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराएगा या नहीं। खासकर यह कि हादसे के समय वाहन रोकने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं और मौके पर मौजूद RTO अमले की क्या भूमिका थी।

 #भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का ट्रायल शुरू हो सकता है। केंद्र सरकार ने दोनों मूल्यवर्ग ...
12/08/2026

#भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का ट्रायल शुरू हो सकता है। केंद्र सरकार ने दोनों मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों को फील्ड ट्रायल के लिए जारी करने की मंजूरी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने #राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए इसकी जानकारी दी।

इन नोटों को BOPP (बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन) जैसी मजबूत सिंथेटिक सामग्री से तैयार किया जाएगा। पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होंगे और पानी, बारिश, पसीने व गंदगी से आसानी से खराब नहीं होंगे।

पॉलीमर #नोटों की लंबी उम्र से बार-बार नोट छापने और पुराने नोटों को नष्ट करने का खर्च भी कम हो सकता है। साथ ही, इनमें मौजूद पारदर्शी विंडो और आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जाली नोटों की रोकथाम में मदद कर सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और न्यूजीलैंड समेत कई देशों में पॉलीमर करेंसी पहले से चलन में है। अब भारत में ₹10 और ₹20 के नोटों से इसका ट्रायल शुरू होने की संभावना है।

 #मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में  #स्वास्थ्य विभाग की आउटसोर्स भर्ती को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकार से...
11/08/2026

#मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में #स्वास्थ्य विभाग की आउटसोर्स भर्ती को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकार से सिर्फ 66 मल्टी टास्क वर्करों के पदों की मंजूरी मिली थी, लेकिन सीएमएचओ कार्यालय से कथित तौर पर 318 लोगों को नियुक्ति दे दी गई। अतिरिक्त नियुक्तियों के लिए शासन की अनुमति और बजट स्वीकृति नहीं होने का भी आरोप है।

मामला सामने आने के बाद तत्कालीन #सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान को निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश में उनके भतीजे जयदीप की भूमिका का भी जिक्र है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि भर्ती के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसों की मांग की गई और जयदीप द्वारा कथित तौर पर पैसों की डील किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

मामला तब खुलना शुरू हुआ जब नियुक्त किए गए कई लोगों को कई महीनों तक वेतन नहीं मिला। इसके बाद अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने #कलेक्टर कार्यालय और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की। कुछ लोगों ने नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपए दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं।

वहीं, आउटसोर्स एजेंसी के संचालक ने कहा है कि विभाग के कहने पर नियुक्तियां की गईं और यदि एजेंसी के लेटरहेड या सील का दुरुपयोग कर अतिरिक्त नियुक्ति पत्र जारी हुए हैं तो यह गलत है। दूसरी ओर, निलंबित सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को निराधार बताया है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि 66 स्वीकृत पदों के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां किसके आदेश पर हुईं और कथित पैसों के लेन-देन में किसकी भूमिका थी।

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