05/09/2026
#मध्यप्रदेश की राजधानी #भोपाल के आंबेडकर मैदान में आदिवासी महिलाएं पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं। सरकार के लिए नौकरी देना या खत्म करना शायद एक सरकारी आदेश भर हो सकता है, लेकिन वनवासी अंचलों से आईं इन पेसा मोबिलाइजर्स युवतियों के लिए यह 4 हजार रुपए की नौकरी केवल रोजी-रोटी नहीं बल्कि उनका आत्मसम्मान और परिवार का सबसे बड़ा सहारा थी। दुर्गम गांवों में तमाम अभावों के बावजूद पढ़ाई पूरी कर समाज के बीच काम करने की उम्मीद संजोने वाली ये बेटियां अब अपने भविष्य को लेकर गहरे संकट में हैं।
#नौकरी छीने जाने के बाद अपनी आवाज हुक्मरानों तक पहुंचाने के लिए ये महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर खुले आसमान के नीचे धरने पर डटी हुई हैं। उनका कहना है कि मानदेय भले ही मामूली था, लेकिन इससे उन्हें अपने समुदाय में बदलाव लाने और आत्मनिर्भर बनने का गौरव हासिल हुआ था। अचानक सेवा समाप्त किए जाने से उनके सामने जीवन यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है। वे सरकार से बहाली और न्याय की गुहार लगा रही हैं, लेकिन अभी तक शासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल सका है।
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