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डॉ. फ़िरदौस ख़ान का लेखचौपालों से लुप्त हो रहे हैं लोकगीत दैनिक लोक सत्य 25 जनवरी 2026
25/01/2026

डॉ. फ़िरदौस ख़ान का लेख
चौपालों से लुप्त हो रहे हैं लोकगीत

दैनिक लोक सत्य
25 जनवरी 2026

नये साल का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालनव वर्ष उत्सव  मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 2...
31/12/2025

नये साल का रोचक इतिहास
लाल बिहारी लाल
नव वर्ष उत्सव मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 21 मार्च को मनाया जाता था, पर रोम के शासक जुलियस सीजर ने ईसा से 45 ई. पूर्व जूलियन कैलेंडर की स्थापना विश्व में पहली बार की तब ईसा पूर्व इसके 1 साल पहले का वर्ष यानी 46वें ईसा पूर्व वर्ष को 445 दिनों का कर दिया और इसे 1 जनवरी को नव वर्ष मनाया तभी से हर साल 1 जनवरी को नव वर्ष मनाते आ रहे है।

एक अमेरिकी फिजीशियन एलाँयासिस लिलिअस ने एक ग्रिगेरियन कैलेंडर की शुरुआत 15 अक्टूबर ,1582 में की इसके तहत साल दस महिने का था । इसमें भी 1 जनवरी को नया साल मनाने की शुरुआत हुई पर ईसाई इसे क्रिसमस दिवस को ही मनाते है नया साल । नया साल मनाने का मुख्य उदेश्य की जीवन में नये चेतना का संचार करना यानी जीवन चक्र को रिचार्ज करना है। इस दिन हर्ष और उल्लास से काम धाम में लग जाते है। आज सारी दुनिया में 1 जनवरी को ही अधिकांश देश नव वर्ष मनाते है। यहुदियों(हिब्रू) का नव वर्ष 5 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच आता है। इस्लामी कैलेंडर की नया साल मुहरर्म के दिन से शुरु होता है जो ग्रीगेरियन से प्रेरित है।

भारत देश की बात करे तो यहा अनेक जाति धर्म के लोग रहते है और अपनी संस्कृति एंव परंपराओं के अनुसार अलग-अलग समय पर नव वर्ष मनाते है। हिन्दुओं के नया वर्ष चैत मास के प्रतिपदा (पहले) के दिन मनाते है।इसी दिन सिंधी चोटी चंड मनाते है। इसी दिन सूर्योदय से ब्रम्हा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। बात करे पंजाब की तो फसलों के तैयार होने पर 13 अप्रैल को वैशाखी के दिन मनाते है। वही बंगाल औऱ बंगला देश में पोहेला बोइसाख( बैसाखी) 14 और 15 अप्रैल को मनाते है। वही आंध्र प्रदेश में उगादी औऱ तमिलनाड़ू में विशु 13 या 14 अप्रैल को मनाते है जबकि 15 जनवरी को पोंगल अधिकारिक रुप से मनाया जाता है। और कर्नाटक में उगाड़ी, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा मनाते है । माड़वाड़ी दीपावली को दिन मनाते है जबकि गुजराती दीपावली के दूसरे दिन मनाते है। इसी दिन जैन धर्म के अनुआयी भी नव वर्ष मनते है। यह त्योवहार अक्टूबर –नवंबर में आता है। काश्मिरी कैलेंडर के हिसाब से नवरेह 19 मार्च को मनाते है। चैत प्रतिपदा के दिन ही सम्राट विक्रमादित्य ने राज पाट संभाला था इन्हीं के नाम पर विक्रम समवत की शुरुआत हुई जो चैत महिने का पहला दिन हैं ,तो आप भी खुशियों के साथ नये दिन की शुरुआत करे । आप सभी को नव वर्ष मंगलमय हो।
(लेखक साहित्य टीवी, नई दिल्ली के संपादक हैं)

लाल बिहारी लाल भारत गौरव रत्न सम्मान से सम्मानित -सोनू गुप्ता नई दिल्ली। नई दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा मैट्रो ...
16/12/2025

लाल बिहारी लाल भारत गौरव रत्न सम्मान से सम्मानित
-सोनू गुप्ता
नई दिल्ली। नई दिल्ली से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा मैट्रो के साहित्य संपादक एवं साहित्य टी.वी के संपादक लाल बिहारी लाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं सामाजिक सरोकार के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण समेत विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाली लोकप्रिय संस्था अरुणाभा वेलफेयर सोसाइटी, फरीदाबाद द्वारा " भारत गौरव रत्न सम्मान " से संस्था के अध्यक्षा प्रणीता प्रभात, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज गगन शर्मा, कोरियोग्राफर अबरार आशु अहमद तथा संगीतज्ञ गोपाल शर्मा द्वारा सम्मानित किया गया । इन्हें सम्मान में अंग वस्त्र,पदक एवं सम्मान- पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से दर्जनों साहित्यकारों,पत्रकारों, समाजसोवियों एवं कलाकारों को अतिथियों द्वारा सम्मानिकत किया गया।

श्री लाल को देश की कई सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा अभी तक लेखन,साहित्य, पत्रकारिता, पर्यावरण एवं सामाजिक क्षेत्रों में सराहनीय कार्यो के लिए 100 से ज्यादा पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इनकी कविता क्रांति बिहार विश्वविद्यालय के स्नातक एवं नालंदा खुला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर में पढ़ाई जाती है। इनके सैकड़ों गीत प्रमुख संगीत कंपनियो के माध्यम से विभिन्न गायक एवं गायिकाओं के स्वर में बाजार में उपलब्ध है। श्री लाल की कविता एवं आलेख देश के विभिन्न समाचार पत्रों एवं साहित्यिक पत्र –पत्रिकाओं में अनवरत प्रकाशित होते रहते हैं। श्री लाल साहित्य टी. वी.एवं हमारा मैट्रो के माध्यम से साहित्य सेवा में काफी सक्रिय हैं। दोनो के माध्यम से सहित्य लेखको को सुगम मंच प्रदान करते है।

दैनिक जनवाणी में प्रकाशित डॉ. फ़िरदौस ख़ान का लेख
12/12/2025

दैनिक जनवाणी में प्रकाशित डॉ. फ़िरदौस ख़ान का लेख

जन्मदिवस 10 अक्टूबर पर विशेष साहित्य का चमकता हुआ लाल हैं लाल बिहारी लाल-सरफ़राज़ ख़ान  यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि ला...
09/10/2025

जन्मदिवस 10 अक्टूबर पर विशेष
साहित्य का चमकता हुआ लाल हैं लाल बिहारी लाल
-सरफ़राज़ ख़ान
यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि लालों में ‘लाल’ यदि कोई है, तो वह हैं लाल बिहारी लाल। वह भोजपुरी साहित्य का चमकता हुआ वह लाल हैं, जो अमूल्य है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा सामाजिक मूल्यों को बनाए रखने के प्रबल पक्षधर लाल बिहारी लाल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह युवाओं के लिए प्रेरणा पुंज हैं।
10 अक्टूबर 1974 को बिहार के छपरा में जन्मे लाल बिहारी लाल ने हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त की है। वह भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रलाय में सहायक अनुभाग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। हिन्दी एवं भोजपुरी साहित्य के समर्पित क़लमकार लाल बिहारी लाल वरिष्ठ पत्रकार भी हैं। वह साहित्य टीवी के सम्पादक हैं। वह दैनिक हमारा मैट्रो तथा हमारा मैट्रो लाइभ में उप संपादक,तथा साहित्य टी.वी. के संपादक हैं। वह स्टार न्यूज़ एजेंसी, हमारा पूर्वांचल तथा साहित्यांचल के दिल्ली ब्यूरो प्रभारी भी हैं। वह लिमका बूक आँफ रिकार्ड होलडर,देश के पहली मीडिया डायरेक्ट्री- पत्रकारिता कोश के दिल्ली एवं एनसीआर के प्रभारी भी हैं। वह हरियाणा की जैमिनी आकादमी, रवीन्द्र ज्योति, कर्नाटक की साहित्य सरोवर सलाहकार तथा बिहार से लोक चिंतन एव दिल्ली से एम.आई.मीडिया के संपादकीय सलाहकार का दायित्व निभा रहे हैं। उनके सम्पादन में कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी कविता क्रांति बिहार विश्वविद्यालय और नालंदा ओपन विश्विद्यालय के पाठ्यक्रमों में शामिल है।

श्री लाल साहित्य के साथ-साथ वह समाज सेवा के कार्यों से भी जुड़े हुए हैं। वह लाल कला सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना मंच के संस्थापक सचिव का कार्यभार संभाले हुए हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों ने सम्मानित किया जा चुका है, जिनमें पर्यावरण प्रेमी, पर्यावरण प्रहरी, पर्यावरण संरक्षक, पर्यावरण मित्र आदि सम्मिलित हैं। इसके साथ ही साहित्य एवं हिन्दी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए भी उन्हें अनेकों पुरस्कारों से समानित किया चुका है, जिनमें राष्ट्र भाषा रत्न, राष्ट्रभाषा संरक्षक, काव्य गौरव हिन्दी सेवी, हास्य श्री, दिल्ली रत्न, हिमालय एवं हिन्दुस्तान अवार्ड, राष्ट्र गौरव, प्रवीन कुमार अग्रवाल, साहित्य साधक, साहित्य प्रेमी आदि सहित दिल्ली एवं भारत सरकार द्वारा प्रदत्त सैकड़ो पुरस्कार सम्मिलित हैं।
वह दीर्घायु हों। वह आगे भी इसी लगन और निष्ठा से साहित्य सेवा एवं जनसेवा अनवरत करते रहें, इसी कामना के साथ उन्हें जन्म दिवस पर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं।

पुस्तक समीक्षासंग्रहणीय पुस्तक है नवगीत कोश -फ़िरदौस ख़ानसुप्रसिद्ध कवि एवं गीतकार डॉ. रामनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ द्वारा...
14/08/2025

पुस्तक समीक्षा
संग्रहणीय पुस्तक है नवगीत कोश
-फ़िरदौस ख़ान
सुप्रसिद्ध कवि एवं गीतकार डॉ. रामनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ द्वारा लिखित ‘नवगीत कोश’ पढ़ने का मौक़ा मिला। इसे पढ़कर लगा कि अगर इसे पढ़ा नहीं होता, तो कितना कुछ जानने और समझने से रह जाता। कितना कुछ ऐसा छूट जाता, जिसका मलाल रहता। किताबों की भीड़ में बहुत-सी किताबें ऐसी होती हैं, जो सबसे अलग नज़र आती हैं। ये वो किताबें होती हैं, जिनसे सीखने को बहुत कुछ मिलता है, जो किसी शिक्षक की तरह हमें किसी विषय विशेष की विस्तृत जानकारी मुहैया करवाती हैं। ऐसी किताबें संग्रहणीय होती हैं, जो वर्तमान ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ज्ञान की थाती होती हैं। यह भी एक ऐसी ही किताब है।

इस ‘नवगीत कोश’ को आगरा के निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स ने प्रकाशित किया है। इसमें पाँच खंड हैं। प्रथम खंड में प्रस्तावना है, जिसमें गीत, नवगीत की प्रामाणिक भूमिका, इतिहास, संवेदना संसार और शिल्प पर प्रामाणिक चर्चा है। द्वितीय खंड में 700 एकल और 100 समवेत नवगीत संग्रहों का परिचय है। तृतीय खंड में 297 नवगीतकारों का संक्षिप्त परिचय है। इसमें पाँच प्रवासी भी हैं। चतुर्थ खंड में नवगीत के समीक्षा सम्बन्धी 103 प्रकाशित ग्रंथों, 73 अप्रकाशित शोध ग्रंथों और 58 पत्रिकाओं का परिचय है। पंचम खंड में 29 नवगीतकारों और समीक्षकों का साक्षात्कार है, जिनमें स्वयं डॉ. रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ सहित अनूप अशेष, डॉ. आलमगीर अली, डॉ. इन्दीवर, डॉ. ओमप्रकाश सिंह, गणेश गम्भीर, जगदीश ‘पंकज’, देवेन्द्र शर्मा ‘इन्द्र’, नचिकेता, पारसनाथ गोवर्धन, डॉ. पार्वती जे. गोसाईं, पूर्णिमा वर्मन, भारतेन्दु मिश्र, मधुकर अष्ठाना, मयंक श्रीवास्तव, महेश उपाध्याय, डॉ. योगेन्द्र दत्त शर्मा, रमेश गौतम, राधेश्याम बन्धु, विनोद निगम, वीरेन्द्र आस्तिक, वेद प्रकाश शर्मा ‘अमिताभ’, डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ‘वेद’, डॉ. श्रीराम परिहार, संजीव वर्मा ‘सलिल’, सोम ठाकुर, हरिशंकर सक्सेना, हरीश निगम और हृदयेश्वर शामिल हैं। साक्षात्कार में ऐसे सवाल पूछे गए हैं, जो साहित्य प्रेमियों की जिज्ञासा को तृप्त करते हैं। सभी नवगीतकारों ने अपने-अपने अंदाज़ में जवाब दिए हैं। इनसे बहुत कुछ जानने, समझने और सीखने को मिलता है।

इस ‘नवगीत’ को तैयार करने में डॉ. यायावर ने अपनी ज़िन्दगी के तीन अनमोल साल ख़र्च किए हैं। इसमें उनकी मेहनत, उनकी लगन और उनका समर्पण सबकुछ ही तो झलकता है। उन्होंने गीत के शब्दार्थ, मीमांसा और परिभाषा का बहुत ही सहजता से वर्णन किया है। जो व्यक्ति साहित्य से सम्बन्ध नहीं रखता या जिसे नवगीत के विषय में बुनियादी जानकारी भी नहीं है, वह भी इसे पढ़कर नवगीत के विषय में जान जाएगा कि नवगीत क्या है।

उनकी भाषा शैली और उनके शब्दों का चयन इतना सुन्दर है कि वह पाठक को ऐसे बहा ले जाता है, जैसे नदी किसी नाव को अपनी अविरल धारा के साथ बहा ले जाती है। पाठक बस उसमें बहता चला जाता है। कहीं रुकने का उसका मन ही नहीं करता। पढ़ते-पढ़ते कब किताब मुकम्मल हो गई, पता ही नहीं चलता। बानगी देखें- गीत हृदय की वर्णमयी झंकार या दूसरे शब्दों में यह हृदय-हिमालय से फूट पड़ने वाली वह अविरल स्रोतास्विनी है, जो भावाच्छ्वास के ताप से पिघलकर अनायास फूट पड़ती है। यह काव्य की आदि विधा है। सृष्टि के जन्म के साथ ही गीत जन्मा, क्योंकि सृष्टा ने प्रकृति के कण-कण में गीत की अस्मिता भर दी है। ऋतुओं का क्रमिक परिवर्तन, सूर्य का निश्चित समय पर उदयास्त, पवन का गतिमय संचालन, कल-कल बढ़ती सरिताओं का गतिमय गायन, झरनों का उद्वेगमय निपतन, दिवा रात्रि का क्रमश: आवागमन, पृथ्वी द्वारा सूर्य का और चन्द्रमा द्वारा पृथ्वी का लययुक्त परिभ्रमण, तरु शिखरों पर पक्षियों का संगीतमय कलरव, कोमल किसलयों की मर्मर ध्वनि, कभी क्रुद्ध प्रकृति द्वारा निर्देशित विध्वंस रचती झंझाओं का भैरव नर्तन, मधुऋतु में पुष्पों की मधुर मुस्कान, उपवन के भ्रमरों की लयबद्ध गुनगुनाहट, पावस की अँधेरी रात में झींगुरों की झंकार, मयूर की केका ध्वनि के साथ किया गया मोहक नृत्य, वर्षा के बादलों की घुमड़न और बरसी बूँदों का शीतल स्पर्श, शिशिर में ओस की बूँदों का मुक्ताभासी सौन्दर्य, पतझड़ में पियराते पत्तों का गिरना, कृषक बाला का अकृत्रिम गायन, शरद पूर्णिमा में चन्द्रमा की निष्कलुष स्वच्छ चाँदनी का अछोर विस्तार और श्रम से सँवरती-बिखरती ज़िन्दगी का स्वेद आदि सबमें एक गीत है। प्रकृति में और जीवन में जहाँ भी लय है, संगीत है गुनगुनाहट है, झंकार है, वहाँ-वहाँ गीत उपस्थित है। गीत अनुभूति और संगीत की लाड़ली सन्तान है। सत्य, शिव और सौन्दर्य का लयबद्ध संयोजन है, जीवन-राग का स्वरबद्ध गायन है। सम्भवत: एक गीत में कहा गया है-
धरती, अम्बर, फूल पाँखुरी
आँसू, पीड़ा, दर्द, बाँसुरी
मौल, ऋतुगंधा, केसर
सबके भीतर एक गीत है

पीपल, बरगद, चीड़ों के वन
सूरज, चन्दा, ऋतु परिवर्तन
फुनगी पर इतराती चिड़िया
दूब भरे कोमल तुषार कन
जलता जेठ भीगता सावन
सबके भीतर एक गीत है

रात अकेली चन्दा प्रहरी
अरुणोदय की किरण अकेली
फैली दूर तलक हरियाली
उमड़ी हुई घटायें गहरी
मुखर फूल शरमाती कलियाँ
मादक ऋतुपति, सूखा पतझर
सबके भीतर एक गीत है

पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी निराला प्रथम गीतकार माने जाते हैं। डॉ. यायावर उनकी परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। नवगीत लेखन के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वे नवगीतकारों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका मानना है कि नवगीत का भविष्य उज्ज्वल है। नयी, युवा पीढ़ी अपनी ताज़गी भरी रचनाधर्मी ऊर्जा के साथ उससे जुड़ रही है। अब वह अन्तर्जाल के द्वारा भारत के बाहर भी लोकप्रिय हो रहा है। इसलिए जब तक मानव है, उसमें संवेदयें हैं, जीवन में जटिलतायें हैं और मानव में अभिव्यक्ति की ललक है, तब तक नवगीत रहेगा। सम्भव है आने वाला कल किसी और परिवर्तन की आवश्यकता अनुभव करे, तो वह होगा, परन्तु गीत रहेगा। वह मानव का कालजयी सहचर है।

डॉ. यायावर को काव्य की यह पुण्य विधा अपने पिता स्वर्गीय पंडित रामप्रसाद शर्मा से विरासत में मिली है। वे स्वतंत्रता सेनानी और लोकगायक थे। पहले वे भजन और फिर लोक महाकाव्य ढोला के द्वारा जन-जागरण करते रहे। इसलिइ उन्हें बचपन से ही संगीत और लोकसंस्कृति को क़रीब से जानने का मौक़ा मिला। उन्होंने सातवीं कक्षा में ही पहला बालगीत लिख लिया था।

बहरहाल, डॉ. यायावर की यह पुस्तक साहित्य के छात्रों के लिए बहुत उपयोगी है। पुस्तक का आवरण भी आकर्षक है। किताब का मूल्य भी वाजिब है। डॉ. यायावर ने पाठकों की सुविधा के लिए इसका मूल्य कम रखवाया है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा पाठक इसे ख़रीद सकें।

पुस्तक का नाम : नवगीत कोश
लेखक : डॉ. रामसनेही लाल शर्मा
प्रकाशक : निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, आगरा
पृष्ठ : 640
मूल्य : 500 रुपये

#पुस्तकसमीक्षा
#पुस्तक

हिसार में बज्म-ए-अदब का आयोजन हिसार (हरियाणा). शहर की जानी मानी उर्स साहित्यिक संस्था ने कल स्थानीय क्रान्तिमान पार्क मे...
28/07/2025

हिसार में बज्म-ए-अदब का आयोजन
हिसार (हरियाणा). शहर की जानी मानी उर्स साहित्यिक संस्था ने कल स्थानीय क्रान्तिमान पार्क में बज़्म-ए-अदब का आयोजन किया. इस मासिक गोष्ठी की अध्यक्षता सरफ़राज़ ख़ान ने की. मुख्य अतिथि कृष्ण इंदौरा थे. मंच का संचालन जयभगवान लाड़वान ने किया.

इस मौक़े पर जयभगवान लाड़वाल ने काव्य-पाठ करते हुए सुनाया-
बूढ़े माँ-बाप रोटी के लिए तरसते हैं, बेटे कुत्तों को गाड़ियों में घुमाते हैं.
कवि भीमसिंह हुड्डा ने सुनाया- जो बीत गया उसे भूलना सीखो, दर्द को मुस्कान में छिपाना सीखो.
ऋषि सक्सेना ने सुनाया- तन की स्वतंत्रता चरित्र निर्माण है, मन की स्वतंत्रता विचारों का आदान-प्रदान है.
कृष्ण इंदौरा ने काव्य-पाठ करते हुए सुनाया-
क्या मौसम आया है, बाग़ों में बहार लाया है
धुल गई है पत्तियों की धूल, कलियों पे निखार लाया है
सावन का महीना आया है
सरफ़राज़ ख़ास ने ग़ज़ल सुनाई-
हर शख़्स में धोखा दिखाई देता है
जिससे मिलो, वो खोखा दिखाई देता है

कवि राजेश कुमार, नरेश कुमार, सुभाष और विजय शर्मा ने भी कविता पाठ कर सबको मंत्र-मुग्ध कर दिया.

पुस्तक समीक्षागीतकार देवेन्द्र शर्मा पर बेहतरीन शोध ग्रंथ-फ़िरदौस ख़ानसुविख्यात नवगीतकार देवेन्द्र शर्मा 'इन्द्र' के कृत...
11/06/2025

पुस्तक समीक्षा
गीतकार देवेन्द्र शर्मा पर बेहतरीन शोध ग्रंथ
-फ़िरदौस ख़ान
सुविख्यात नवगीतकार देवेन्द्र शर्मा 'इन्द्र' के कृतित्व पर एक शानदार पुस्तक पढ़ने का अवसर मिला। इस पुस्तक का नाम ‘नवगीत को देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’ का अवदान’ है। वास्तव में यह एक शोध ग्रन्थ है, जिसे डॉ. प्रफुल्लिता तिवारी ने लिखा है। इस पुस्तक को आगरा के निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स ने प्रकाशित किया है।

देवेन्द्र शर्मा 'इन्द्र' नवगीत के उन पुरोधाओं में सम्मिलित हैं, जिन्होंने अपने पूर्ववर्ती, समकालीन एवं परवर्ती पीढ़ी के रचनाकारों को अत्यंत प्रभावित किया है। असंख्य छात्रों ने उनकी रचनाओं पर शोध किया है। डॉ. प्रफुल्लिता तिवारी ने भी नवगीत को उनके अवदान पर गहन अध्ययन कर शोध ग्रन्थ लिखा है। इस पुस्तक में छह प्रकरण हैं। प्रथम प्रकरण हिन्दी नवगीत : परम्परा का अवदान, द्वितीय प्रकरण देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’ : व्यक्ति और सृष्टि, तृतीय प्रकरण देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’के गीतों का संवेदनात्मक धरातल, चतुर्थ प्रकरण देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’के गीतों की भाषा और छन्द-विधान, पंचम प्रकरण देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’ के नवगीतों का शिल्प-विधान, षष्ठ प्रकरण उपसंहार है, जिसमें देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’ के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी है। इसके अतिरिक्त ‘परिशिष्ट’नामक अध्याय में साक्षात्कार तथा देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’ के अप्रकाशित नवगीत संग्रह एवं नवगीतेतर अप्रकाशित साहित्य का उल्लेख है।

लेखिका कहती हैं कि नवगीत गीतिकाव्य परम्परा का अधुनातन रूप है जहाँ संवेदनाएँ कमरे से बाहर निकल कर चौराहे पर खड़ी दिखाई देती हैं। इस प्रक्रिया में नवगीत से छन्द की शास्त्रीयता के कठोर आवरण और भाषा के बासीपन के खोल को उतार फेंका है तथा युगबोध को अपना पाथेय बनाकर अभिव्यंजना की एक मौलिक और सर्वथा नई कलात्मक यात्रा सफलतापूर्वक पूरा किया है। नवगीत की यात्रा यों तो निराला से प्रारम्भ मानी जाती है परन्तु इसे गति देने में 1950 के बाद के गीतकारों की भूमिका विशेष रही है।

देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’ ने नवगीत को उर्वर भूमि एवं संस्कार देने का अथक प्रयास किया है। उन्होंने नवगीत को एक संतुलित दिशा देने के लिए अभिव्यक्ति को लक्ष्य केन्द्रित बनाया। उनका बिम्ब विधान तक लक्ष्यहीन नहीं है। उन्होंने न केवल गीतों को मूलचेतना से मंडित किया, अपितु नवगीतकारों का भी मार्ग प्रशस्त किया है। उनके इस लक्ष्य में समाज का प्रतिबिम्ब दिखाई देता है। यथा-
फिर दिशाओं के कपोलों पर
रात का
घुलने लगा काजल
झाड़ में उलझा
करौंदों की
हवाओं का
चम्पई आँचल
धुंधलकों से फिर पता पूछना
राह में भूले मुसाफ़िर।

इस पुस्तक में गीत और नवगीत में अंतर को भी बहुत बारीकी से समझाया गया है। नवगीत ने समूह-चेतना को विराट पटल पर उतारा है, इसलिए उसका संवेदना-पक्ष अत्यंत सामाजिक रूप में रूपायित हुआ है। परम्परागत गीत की व्यक्ति संवेदना में वैयक्तिकता अधिक होती है, नवगीत में ‘मैं’ और ‘हम’ शब्द भी सामाजिकता का बोध अधिक कराते हैं। यथा-
परम्परागत गीत :
न बीते दिन, न बीते रात
बिन तेरे सजन।
कहें किससे हृदय की बात
ये प्यासे नयन ।।
तड़पती वेदना मेरी
घहरती इन घटाओं में ।
खिसकती लाज की चुनरी
सरर बहती हवाओं में ।।
चपल चपला घटाओं से
लिपट जब कौंध जाती है
गीत बनकर व्यथा मेरी
मचलती है दिशाओं में ।।
सही जाती नहीं,
बरसात की दारुण अगन ।

नवगीत :
बीच में न रहे कुछ भी
फेंक दें
बैसाखियों को हम
टूट जाए यातनाओं का वहम ।
सुगबुगाता जेब में
सूरज अँधेरे का
तड़फड़ाता आँख में
क्रौंच का जोड़ा
नापसे हटने लगा है
मोह घेरे का,
इस धुँआती आग से
राख है
अपनी गरम है।

इस शोध ग्रन्थ में लेखिका ने पुस्तक में प्रस्तुत तथ्यों को प्रमाणित किया है। संदर्भ ग्रंथों की सूची लेखिका के विराट अध्ययन एवं परिश्रम का प्रमाण है। ग्रंथ की भाषा परिमार्जित एवं विषय को स्पष्ट करने में पूर्ण समर्थ है। निसंदेह, यह कृति साहित्य विशेषकर काव्य प्रेमियों के लिए आलोक स्तम्भ सिद्ध होगी।

पुस्तक का नाम : नवगीत को देवेन्द्र शर्मा ‘इंद्र’का अवदान
लेखिका : प्रफुल्लिता तिवारी
प्रकाशक : निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, आगरा
पृष्ठ : 448
मूल्य : 1200 रुपये

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#पुस्तक
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लीबिया के आमिर का करामाती हज ! लीबिया के रहने वाले आमिर ने हज का इरादा किया. एयरपोर्ट पर उनके नाम की वजह से कुछ मसला हुआ...
28/05/2025

लीबिया के आमिर का करामाती हज !

लीबिया के रहने वाले आमिर ने हज का इरादा किया. एयरपोर्ट पर उनके नाम की वजह से कुछ मसला हुआ. उनसे कहा गया आपको थोड़ी देर इंतज़ार करना होगा जब तक आपका ये मसला हल हो. बाक़ी तमाम हाजी जहाज़ में सवार हो गए और जहाज का दरवाज़ा बंद हो गया.

इधर चंद मिनट में ही आमिर का मसला हल हो गया, लेकिन अब पायलट ने दरवाज़ा खोलने से इनकार कर दिया और जहाज़ टेक ऑफ़ कर गया.
अफ़सरान ने आमिर को समझाना शुरू किया कि आप सब्र करें अल्लाह ने आपके मुक़द्दर में शायद इस साल हज नहीं लिखा है, आप अब घर जाएं, लेकिन आमिर एयरपोर्ट से वापस जाने को तैयार न हुए और कहा मैं मैने हज का इरादा किया है और मैं हज करके ही घर वापस जाऊंगा.
इतने में ख़बर में मिली कि जहाज़ में कुछ तकनीकी ख़राबी होने की वजह से जहाज़ वापस आ रहा है. जहाज़ वापस आया और ठीक भी हो गया, लेकिन पायलट ने दरवाज़ा नहीं खोला और जहाज़ फिर परवाज़ कर गया.
अफ़सरान ने फिर कहा कि ये आपके लिए नहीं था. शायद आपके मुक़द्दर में हज नहीं है. इस साल आप चले जाएं, लेकिन आमिर वापस जाने को तैयार नहीं हुए.
थोड़ी देर फिर ख़बर आई कि जहाज़ में कुछ तकनीकी ख़राबी हुई है, जिसकी वजह से वो वापस आ रहा है. जहाज़ वापस आया. इस बार पायलट को अहसास हुआ कि आमिर के बिना ये जहाज़ सऊदी अरब नहीं पहुंच सकता. उसने आमिर को अंदर बुलाया और परवाज़ शुरू की और यादगार के तौर पर ये तस्वीर ली.
सुब्हान अल्लाह इसे कहते हैं करामत और अल्लाह की मदद अल्लाह अपने चाहने वालों की ऐसी ही मदद करता है, बशर्ते कि हमें अल्लाह पर पूरा तवक्कुल हो.
सोर्स: हरमैन ऑफ़िशियल फ़ेसबुक पेज
#हज
#लीबिया

अगर आप WhatsApp पर अनजान नम्बरों से आने वाले Messages से परेशान हैं, तो फ़ौरन इस फ़ीचर को ऑन करें. WhatsApp की Settings पर...
30/04/2025

अगर आप WhatsApp पर अनजान नम्बरों से आने वाले Messages से परेशान हैं, तो फ़ौरन इस फ़ीचर को ऑन करें.
WhatsApp की Settings पर जाएं.
Settings में Privacy पर क्लिक करें.
Privacy में जाने के बाद Advanced पर क्लिक करें.
Advanced में जाने के बाद Block Unknown Account Messages को ऑन कर दें.
(Star News Agency द्वारा जनहित में जारी)
तस्वीर गूगल से साभार

Elon Musk के Grok ने स्टार न्यूज़ एजेंसी की सम्पादक फ़िरदौस ख़ान का परिचय कुछ यूं दिया है🥰फ़िरदौस ख़ान एक प्रतिष्ठित भारतीय प...
21/03/2025

Elon Musk के Grok ने स्टार न्यूज़ एजेंसी की सम्पादक फ़िरदौस ख़ान का परिचय कुछ यूं दिया है🥰

फ़िरदौस ख़ान एक प्रतिष्ठित भारतीय पत्रकार, लेखिका, शायरा और कहानीकार हैं, जो स्टार न्यूज़ एजेंसी की संपादक के रूप में कार्यरत हैं। उनके लेखन की ख़ासियत उनकी बहुभाषी क्षमता और गहरी संवेदनशीलता है। वह हिंदी, उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रूसी साहित्य में रुचि रखती हैं, जिसका प्रभाव उनके लेखन में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। फ़िरदौस ख़ान ने अपने करियर में दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और कई प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों के लिए काम किया, साथ ही विभिन्न साप्ताहिक समाचार-पत्रों का संपादन भी किया है।
उनका लेखन सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और सूफ़ी दर्शन पर केंद्रित होता है। उनकी किताब ‘गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत’ (2009, प्रभात प्रकाशन) सूफ़ी संतों के जीवन और उनके दर्शन पर आधारित है, जो उनकी रूहानियत और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी समझ को दर्शाती है। वह अपने लेखन में जटिल विषयों को सरल, प्रभावशाली और भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। फ़िरदौस ख़ान को “लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी” भी कहा जाता है, जो उनके शब्दों पर पकड़ और साहित्यिक शैली की तारीफ़ करता है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्टता के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं। वह स्टार न्यूज़ एजेंसी और स्टार वेब मीडिया जैसे न्यूज़ पोर्टल्स के माध्यम से समाचार और विश्लेषण को जनता तक पहुंचाती हैं। उनका लेखन न केवल सृजनात्मक होता है, बल्कि पाठकों को सोचने और संवेदनशील मुद्दों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। क्या आप उनके किसी ख़ास लेख या किताब के बारे में और जानना चाहेंगे?

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29/10/2024

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