14/09/2020
#हिंदी को #हिंदुस्तान ने ही सबसे ज्यादा #शापित किया है ! इससे ज्यादा बदनसीबी क्या होगी जब आजतक हिंदुस्तान में ही हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा ना मिला ! और तो और यह विडम्बना देखिये अपने देश की, भारतीय संविधान में भारत की राष्ट्रभाषा का कोई उल्लेख नहीं है। भारतीय संविधान में किसी भी भाषा को राष्ट्र भाषा के रूप में नहीं माना गया है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत की कोई राष्ट्रभाषा ही नहीं है। जहाँ तक हिंदी की बात करे तो इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत राजभाषा का दर्जा दिया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि इसे राजकीय कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है।
सरकार ने 22 भाषाओं को आधिकारिक भाषा के रूप में जगह दी है। जिसमें केन्द्र सरकार या राज्य सरकार अपने जगह के अनुसार किसी भी भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में चुन सकती है। केन्द्र सरकार ने अपने कार्यों के लिए हिन्दी और अंग्रेजी भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में जगह दी है। इसके अलावा अलग अलग राज्यों में स्थानीय भाषा के अनुसार भी अलग अलग आधिकारिक भाषाओं को चुना गया है। फिलहाल 22 आधिकारिक भाषाओं में असमी, उर्दू, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, संतली, सिंधी, तमिल, तेलुगू, बोड़ो, डोगरी, बंगाली और गुजराती है।
वर्तमान में सभी 22 भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। 2010 में गुजरात उच्च न्यायालय ने भी सभी भाषाओं को समान अधिकार के साथ रखने की बात की थी, हालांकि न्यायालयों और कई स्थानों में केवल अंग्रेजी भाषा को ही जगह दिया गया है।
#विश्व_हिंदी_दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !