10/06/2026
भारत बारह साल पहले मनुष्य की इंसानी गरिमा बनाने वाली सरकारों में सांस लेता था! 2014 से सब बदलना शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मोदी का 125-130 करोड़ लोगों को मुफ्तखोर, लाभार्थी, भुखमरा, परजीवी और आश्रित आबादी बनाने का महाअभियान शुरू हुआ। एक रात उनका ऐलान था, लोग अपनी कमाई अपने घर, अपनी जेब में नहीं रखेंगे। और नोटबंदी। लोग बैंकों के आगे कतार में खड़े हुए। तब से अनपढ़, गरीब लोग भी जनधन के बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, पेटीएम आदि के भोक्ता कॉकरोच हैं, जिनका नाम लाभार्थी भी है। सोचें और अनुमान लगाएं, आज 145 करोड़ लोगों में कितने लाभार्थी, परजीविता की जिंदगी जीते हुए हैं। सरकार लोगों के खातों में पांच सौ, हजार, दो हजार रुपए का धर्मादा दे रही है। सो, एक तरफ गौशालाएं आबाद हुईं, वहीं कम से कम 110 करोड़ लोगों की भीड़ की परजीवी जिंदगी जीती नई किस्म का जन्मांतरण हुआ। और अब दुनिया में भारत का कॉकरोच फिनॉमिना हल्ला! ताजा ही खबरें हैं कि वैश्विक पर्यटन में थाईलैंड, वियतनाम जैसे देशों में भी यह लगा हुआ है कि नो स्मोकिंग, नो इंडियन। अचानक किसी एयरपोर्ट, किसी जगह ऐसा भंगड़ा, ऐसी उछलकूद के वीडियो बनते हैं जैसे अमीरी से फूले कॉकरोच ही भारत की पहचान हों। मानो यह होड़ कि वे नई प्रजाति के जीव हैं! देखो, देखो हमारा नाच-गाना!
✍🏼पढ़िए हरि शंकर व्यास गपशप ➡️ https://www.nayaindia.com/opinion/harishankar-vyas/analysis/cockroach-janata-party-modi-government-2/517200.html?amp=1