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NayaIndia नया इंडियाः बेबाक और बेधड़क।मौजूदा वक़्त में नया इंडिया हिंदी पत्रकारिता का बेमिसाल दीया! Nobody understands and covers Indian politics like Naya India.
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Naya India presents a fresh and refreshing approach to Hindi journalism with its frank, hard-hitting opinions and unique ideas about the stories that matter most in India. With its frank, fearless analysis and unabashed news and views on Indian politics, it is quite a hit among the Hindi elite class and decision makers like politicians, bureaucrats, and academicians. We do not have any attachment

or enmity with anyone. In the politics of saffron, red, green, or blue, Naya India stands above all presenting in depth, non partisan news and analysis above malice. In its 13th year now, NAYA INDIA has created a niche among the Hindi readers with an intellect essence which they had been missing.

भारत बारह साल पहले मनुष्य की इंसानी गरिमा बनाने वाली सरकारों में सांस लेता था! 2014 से सब बदलना शुरू हुआ। प्रधानमंत्री म...
10/06/2026

भारत बारह साल पहले मनुष्य की इंसानी गरिमा बनाने वाली सरकारों में सांस लेता था! 2014 से सब बदलना शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मोदी का 125-130 करोड़ लोगों को मुफ्तखोर, लाभार्थी, भुखमरा, परजीवी और आश्रित आबादी बनाने का महाअभियान शुरू हुआ। एक रात उनका ऐलान था, लोग अपनी कमाई अपने घर, अपनी जेब में नहीं रखेंगे। और नोटबंदी। लोग बैंकों के आगे कतार में खड़े हुए। तब से अनपढ़, गरीब लोग भी जनधन के बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, पेटीएम आदि के भोक्ता कॉकरोच हैं, जिनका नाम लाभार्थी भी है। सोचें और अनुमान लगाएं, आज 145 करोड़ लोगों में कितने लाभार्थी, परजीविता की जिंदगी जीते हुए हैं। सरकार लोगों के खातों में पांच सौ, हजार, दो हजार रुपए का धर्मादा दे रही है। सो, एक तरफ गौशालाएं आबाद हुईं, वहीं कम से कम 110 करोड़ लोगों की भीड़ की परजीवी जिंदगी जीती नई किस्म का जन्मांतरण हुआ। और अब दुनिया में भारत का कॉकरोच फिनॉमिना हल्ला! ताजा ही खबरें हैं कि वैश्विक पर्यटन में थाईलैंड, वियतनाम जैसे देशों में भी यह लगा हुआ है कि नो स्मोकिंग, नो इंडियन। अचानक किसी एयरपोर्ट, किसी जगह ऐसा भंगड़ा, ऐसी उछलकूद के वीडियो बनते हैं जैसे अमीरी से फूले कॉकरोच ही भारत की पहचान हों। मानो यह होड़ कि वे नई प्रजाति के जीव हैं! देखो, देखो हमारा नाच-गाना!

✍🏼पढ़िए हरि शंकर व्यास गपशप ➡️ https://www.nayaindia.com/opinion/harishankar-vyas/analysis/cockroach-janata-party-modi-government-2/517200.html?amp=1

जयप्रकाश से लेकर वीपी सिंह का बोफोर्स पर झूठ और फिर अन्ना हजारे के नकली आन्दोलन तक किसी को पता नहीं था कि इसके पीछे कौन ...
10/06/2026

जयप्रकाश से लेकर वीपी सिंह का बोफोर्स पर झूठ और फिर अन्ना हजारे के नकली आन्दोलन तक किसी को पता नहीं था कि इसके पीछे कौन है और कौन इतनी सारी व्यवस्थाएं जुटा रहा है।

ऐसे ही उस समय जब देश का युवा और छात्र राहुल गांधी के साथ खड़ा हुआ है अचानक एक पार्टी का पैदा हो जाना और बड़े तामझाम के साथ शनिवार 6 जून को उसके जन्तर मन्तर पर कार्यक्रम की तैयारी से अभी तक किसी के समझ में नहीं आया है कि इसके पीछे कौन है?

2014 में या उससे पहले 2013 में दिल्ली में नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल क्या बिना अन्ना के आन्दोलन के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बन सकते थे?… जब देश का युवा और छात्र राहुल गांधी के साथ खड़ा हुआ है अचानक एक पार्टी का पैदा हो जाना और बड़े तामझाम के साथ शनिवार 6 जून को उसके जन्तर मन्तर पर कार्यक्रम की तैयारी से अभी तक किसी के समझ में नहीं आया है कि इसके पीछे कौन है?

✍🏼पढ़िए शकील अख़्तर कॉलम ➡️ https://www.nayaindia.com/opinion/columnist/cockroach-janata-party-2/517145.html?amp=1

10/06/2026

🎞️ एलआईसी के पैसे को ऐसे डुबोना?

10/06/2026

🎞️एलआईसी के पैसे को ऐसे डुबोना?

विपक्षी पार्टियां सरकार से लड़ने के लिए कितना सुविधानजक रास्ता चुनती हैं इसकी मिसाल ‘इंडिया’ ब्लॉक की सोमवार, आठ जून को ...
10/06/2026

विपक्षी पार्टियां सरकार से लड़ने के लिए कितना सुविधानजक रास्ता चुनती हैं इसकी मिसाल ‘इंडिया’ ब्लॉक की सोमवार, आठ जून को हुई बैठक है। इस बैठक में विपक्षी पार्टियों के बीच पांच प्रस्तावों पर सहमति बनी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। इनमें से दो मुद्दे तो विपक्षी गठबंधन के अंदर आपसी तालमेल से जुड़े हैं। बैठक में यह तय किया गया कि हर दो महीने में ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक होगी। इस लिहाज से अगली बैठक के लिए आठ अगस्त का दिन तय किया गया। आठ अगस्त को हैदराबाद में अगली बैठक होगी। इसके अलावा एक सहमति इस पर बनी कि संसद के मानसून सत्र में विपक्ष की सभी पार्टियां हर दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले बैठक करेंगी। यह पहले से भी होता था। सुबह 10 बजे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चैम्बर में विपक्ष की बैठक होती थी। इसलिए इसमें कुछ नया नहीं है।

✍🏼पढ़िए अजीत द्विवेदी कॉलम ➡️ https://www.nayaindia.com/opinion/ajeet-dwivedi/current-affairs/india-bloc-meeting-opposition/517435.html?amp=1

सबका हैरान होना स्वभाविक है। सचमुच सवाल है कि कैसे एक पन्द्रह-सोलह साल का बच्चा दिग्गज महान तेज गेंदबाजों को बेधड़क छक्क...
09/06/2026

सबका हैरान होना स्वभाविक है। सचमुच सवाल है कि कैसे एक पन्द्रह-सोलह साल का बच्चा दिग्गज महान तेज गेंदबाजों को बेधड़क छक्के-चौके मार रहा है।

खास उन्नीसवें आईपीएल में बंगलोर ने गुजरात को फाइनल में हराकर लगातार दूसरी बार खिताब जीता। लेकिन राजस्थान के शुरुआती बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का ही जयगान होता रहा। वे चमके, और सभी को चमकाते रहे। सारा गुणगान सूर्यवंशी की प्रतिभा, क्षमता और वैभव का ही गाया गया। क्रिकेट प्रेमी सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर वैभव सूर्यवंशी किस मिट्टी के बने हैं? इस मार्च में पन्द्रह साल पूरे करने वाले वैभव की अद्भुत, अकल्पनीय प्रतिभा व क्षमता का रहस्य क्या है? क्या सूर्यवंशी में भी ईश-अंश है?

धरोहर मान लिए गए सूर्यवंशी शारीरिक व मानसिक तौर पर सुदृढ़, निडर व परिपक्क ही लगे। शुरुआती दौर में देखने पर लगता था कि वैभव खास लप्पेबाज हैं जो किस्मत के भरोसे खेलना चाहते हैं। गेंद को बस उठाकर या उड़ाकर ही मारना चाहते हैं। मगर उनमें लगातार लड़कपन की लय से भरा आत्मविश्वास झलकता था।

✍🏼पढ़िए संदीप जोशी कॉलम ➡️ https://www.nayaindia.com/opinion/columnist/vaibhav-suryavanshi-batting/517209.html?amp=1

भारत आज उस श्राप का मारा है, जो न पीछे देखता है और न आगे! वह वर्तमान को कॉकरोच अवस्था में जीता है! सोचें, भारत सरकार और ...
09/06/2026

भारत आज उस श्राप का मारा है, जो न पीछे देखता है और न आगे! वह वर्तमान को कॉकरोच अवस्था में जीता है! सोचें, भारत सरकार और उसके मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अवस्था पर। खुद ने कथित फर्जी डिग्रियों के कॉकरोच पैदा किए और अब उन्हीं को निपटाने की चिंता में खपे हुए है। जबकि उन्हीं की कमान में बहुसंख्यकों की परजीवी भीड़ का भारत निर्माण है।

और यह भीड़ अगले 75 वर्षों में एकदम से घटेगी। मात्र पचहत्तर वर्षों में 165-170 करोड़ लोगों की संख्या (इतिहास की सर्वाधिक युवा आबादी भी) का रिकॉर्ड बनेगा तो उसके मात्र पचास वर्षों में आबादी इतनी तेजी से घटेगी कि सन् 2100 में भीड़ सौ करोड़ की संख्या से नीचे होगी।

हां, तब गांव-कस्बों-शहरों-महानगरों में बच्चों के चेहरे, उनकी आवाज़ कम सुनाई देगी। उनकी जगह पराश्रित, दारुण अवस्था में भटकते बूढ़ों की भीड़ होगी। स्कूल बंद होते हुए और उनकी जगह वृद्ध देखभाल केंद्र खुलते हुए। न काम करने वाले हाथ, न बुद्धि और न मेहनतकश युवा। तब डिग्रियां लिए युवा कॉकरोच क्या करते हुए होंगे? मंदिरों में कीर्तन, सरकार से जेबखर्च की खैरात की जिंदगी और न शादी, न यौन जीवन, न संतान। हां, संभव है तब अधिकांश मुस्लिम चेहरे काम करते मिलें। वे सब काम जिन्हें वर्ण और वर्ग के चक्कर में हिंदुओं की जातियों ने करना लगभग बंद कर दिया है उन्हे मुस्लिम आबादी ही करते हुए होगी।

✍🏼पढ़िए हरि शंकर व्यास कॉलम ➡️ https://www.nayaindia.com/opinion/harishankar-vyas/view/after-just-75-years-india-is-old/517318.html?amp=1

06/06/2026

🎞️ विपक्ष का एजेंडा क्या होगा?

06/06/2026

🎞️विपक्ष का एजेंडा क्या होगा?

06/06/2026

🎞️ बंगाल में विपक्ष भी भाजपा ही

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