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भारत में रहते हुए भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। अन्य देशों की जीवनशैली को बिना विचार किए अप...
25/07/2026

भारत में रहते हुए भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। अन्य देशों की जीवनशैली को बिना विचार किए अपनाने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर समाज और परिवार व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

भारतीय संस्कृति के बारे में लंबे समय तक भ्रम फैलाया गया कि हमारी परंपराएं गलत हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा सांस्क...
25/07/2026

भारतीय संस्कृति के बारे में लंबे समय तक भ्रम फैलाया गया कि हमारी परंपराएं गलत हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा सांस्कृतिक आधार अत्यंत प्रबल और प्रत्यक्ष है। हमें अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। एकता ही सत्य है और विविधता के बीच एकात्म भाव भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है।

आज इनका करें पुण्य स्मरण...
25/07/2026

आज इनका करें पुण्य स्मरण...

बात निकली है तो...आस्था की आड़ में खड़े किए गए अवैध ढांचों की पहचान कर उन्हें हटाने का काम शुरू हुआ है।कुछ लोगों को इससे...
25/07/2026

बात निकली है तो...

आस्था की आड़ में खड़े किए गए अवैध ढांचों की पहचान कर उन्हें हटाने का काम शुरू हुआ है।

कुछ लोगों को इससे परेशानी हो रही है, विदेशी फंडिंग, संदिग्ध गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क की बहुआयामी परतें भी एक-एक कर खुल रही हैं।

पढ़िए पाञ्चजन्य का नवीन अंक...

भोजशाला - ज्ञान की निरंतरता का प्रतीकप्रशांत पोळग्यारहवीं शताब्दी, भारत के इतिहास का संधिकाल है। इस्लामी आक्रमण प्रारंभ ...
25/07/2026

भोजशाला - ज्ञान की निरंतरता का प्रतीक

प्रशांत पोळ
ग्यारहवीं शताब्दी, भारत के इतिहास का संधिकाल है। इस्लामी आक्रमण प्रारंभ हो चुके थे। पूरा गांधार (अफगानिस्तान), मुल्तान, पंजाब का कुछ हिस्सा इस्लामी शासन के अंतर्गत आ चुका था। यहां इस्लामी शासक राज कर रहे थे। किंतु फिर भी, 80% से ज्यादा भारत, हिन्दू रीति-रिवाज, सनातन परंपराओं को निर्भीकता के साथ निभा रहा था। महमूद गजनवी ने मथुरा, कन्नौज और सोमनाथ पर आक्रमण किए थे। सोमनाथ को लूटा भी था। किंतु वह गुजरात पर राज न कर सका। वहां अभी भी सोलंकी राजवंश का ही राज था।
मालवा के राजा भोज इन्हीं दिनों, राज्य व्यवस्था के आदर्श निर्माण कर रहे थे। सन् 1010 में उनका राज्याभिषेक हुआ और अगले 45 वर्ष उन्होंने राज किया। यह सारा समय मालवा के लिए स्वर्णिम काल था। राजा भोज स्वत: ज्ञान के प्रेमी थे। कला के साधक थे।

Dr. Hedgewar dedicated his life to the service of the nation - V. Bhagaiyya JiRanchi. Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS),...
25/07/2026

Dr. Hedgewar dedicated his life to the service of the nation - V. Bhagaiyya Ji

Ranchi. Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS), Vikramaditya Nagar, Ranchi Mahanagar, organized a "Yuva Samvad" (Youth Dialogue) programme at the auditorium of Sarala Birla University. More than 1,000 participants, including students, academicians, advocates, doctors, scientists, entrepreneurs and members of the business community from Tatisilwai and nearby areas, attended the programme with enthusiasm.

सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी“युगानुकूल मातृत्व” पर विश्वमांगल्य सभा क...
25/07/2026

सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, बिना मातृत्व के संभव नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी

“युगानुकूल मातृत्व” पर विश्वमांगल्य सभा की प्रबोधन बैठक संपन्न

नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026।
विश्वमांगल्य सभा की “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि मातृत्व विषय पर मुझे बोलने के लिए कहना यह अपने आप में एक विरोधाभास है। एक तरह इस पर एकाधिकार महिलाओं का है, इस पर पुरुषों का बोलना ठीक नहीं है। इस विषय पर विश्वमांगल्य सभा द्वारा व्यापक चर्चा हो गई है, और इस विषय में अपना दृष्टिकोण क्या है, अपनी परंपरा क्या है, आज के युग में कैसे चलना आदि के बारे में भी पुराने समय से बहुत सारा चिंतन हुआ है। स्वामी विवेकानंद जी, गांधी जी, रविंद्र नाथ ठाकुर जी आदि ने समग्रता से चिंतन करके हमारे सामने विचार रखे हैं।

अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन / बलिदान दिवस 25 जुलाईशासन ने अनशन तुड़वाने का बहुत प्रयास किया; पर वे अडिग रहे और 84 दिन बाद 2...
25/07/2026

अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन / बलिदान दिवस 25 जुलाई

शासन ने अनशन तुड़वाने का बहुत प्रयास किया; पर वे अडिग रहे और 84 दिन बाद 25 जुलाई, 1944 को जेल में ही उन्होंने शरीर त्याग दिया। जेलकर्मियों ने रात में ही उनका शव एक कंबल में लपेट कर भागीरथी और भिलंगना नदी के संगम स्थल पर फेंक दिया।

"कोई भी बड़ा कार्य अनेक छोटी-छोटी बातों की चिंता करने से होता है। इसलिए सब छोटी-छोटी बातों का अध्ययन हम लोगों को ध्यान द...
25/07/2026

"कोई भी बड़ा कार्य अनेक छोटी-छोटी बातों की चिंता करने से होता है। इसलिए सब छोटी-छोटी बातों का अध्ययन हम लोगों को ध्यान देकर करना चाहिए। जितने भी महापुरुष हुए हैं, उन्होंने कभी किसी वस्तु या काम को छोटा मानकर उसकी उपेक्षा नहीं की"

- श्री गुरुजी

तुलसी राम सुदीठि तें, निबल होत बलवान।बैर बालि सुग्रीव के, कहा कियो हनुमान॥ - तुलसीदास
25/07/2026

तुलसी राम सुदीठि तें, निबल होत बलवान।
बैर बालि सुग्रीव के, कहा कियो हनुमान॥

- तुलसीदास

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