18/09/2026
₹25 हजार का चेक बाउंस पड़ा भारी: मुकेश कुमार तेवतिया को एक महीने की जेल, ₹50 हजार जुर्माना
सजा सुनाए जाने के दिन कोर्ट में नहीं हुआ पेश आरोपी, गैर-जमानती वारंट जारी; 60 दिन में शिकायतकर्ता को देना होगा मुआवजा
नई दिल्ली/पलवल। चेक बाउंस के एक पुराने मामले में साकेत कोर्ट, नई दिल्ली ने मुकेश कुमार तेवतिया को एक महीने की साधारण कैद और ₹50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। भुगतान के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।
यह मामला Naval Singh बनाम Mukesh Kumar Tewatia, CT Case No. 10063/2017 से जुड़ा है। इससे पहले अदालत आरोपी को Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत दोषी करार दे चुकी थी। अब 17 सितंबर 2026 को कोर्ट ने सजा के बिंदु पर आदेश पारित किया।
आदेश के अनुसार, मुकेश कुमार तेवतिया को एक महीने की Simple Imprisonment यानी साधारण कैद भुगतनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने उस पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया है। यह राशि शिकायतकर्ता को बतौर compensation दी जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की राशि आदेश की तारीख से 60 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को दी जानी है। यदि मुकदमे के दौरान mediation settlement के तहत दोषी द्वारा कोई रकम पहले ही शिकायतकर्ता को दी गई हो तो उसे इस मुआवजा राशि में समायोजित किया जाएगा।
जुर्माना नहीं दिया तो एक महीने की अतिरिक्त जेल
अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि यदि दोषी ₹50 हजार की जुर्माना राशि का भुगतान नहीं करता है तो उसे एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
यानी मुख्य सजा के तौर पर एक महीने की जेल के अलावा जुर्माना न चुकाने की स्थिति में अतिरिक्त एक महीने की सजा भी हो सकती है।
अदालत में मौजूद नहीं था दोषी, NBW जारी
सजा के आदेश के दिन मुकेश कुमार तेवतिया कोर्ट में उपस्थित नहीं था। आदेश में दर्ज है कि शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता ए.के. अत्री पेश हुए और शिकायतकर्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहा, लेकिन दोषी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ।
इसी कारण अदालत ने दोषी के खिलाफ NBW यानी Non-Bailable Warrants (गैर-जमानती वारंट) जारी करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद वारंट DCP के माध्यम से जारी किए जाएं।
5 जनवरी 2027 को अगली सुनवाई
मामले को अब 5 जनवरी 2027 को अगली कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
अदालत ने यह भी कहा है कि मुकदमे के दौरान यदि दोषी ने किसी अवधि के लिए हिरासत भुगती है तो कानून के अनुसार उस अवधि को वर्तमान सजा में समायोजित किया जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
इस मुकदमे की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। शिकायतकर्ता नवल सिंह का आरोप था कि फरवरी 2017 में उन्होंने मुकेश कुमार तेवतिया को ₹50 हजार का फ्रेंडली लोन दिया था। रकम बैंक के माध्यम से ट्रांसफर की गई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार कर्ज की अदायगी के लिए ₹25-₹25 हजार के दो चेक दिए गए। इनमें से विवादित ₹25 हजार का चेक बैंक में लगाए जाने पर “Funds Insufficient” यानी खाते में पर्याप्त रकम न होने के कारण बाउंस हो गया।
इसके बाद कानूनी नोटिस भेजा गया और भुगतान न होने पर Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई गई।
बचाव में बदले थे बयान
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के अलग-अलग चरणों पर दिए गए बयानों में विरोधाभास पाया था। प्रारंभिक चरण में आरोपी ने कर्ज लेने से इनकार किया था और चेक को कथित तौर पर blank security cheque बताया था।
बाद में धारा 313 CrPC के बयान में उसने ₹50 हजार का कर्ज लेने, चेक जारी करने और उसके बाउंस होने की बात स्वीकार की थी। हालांकि उसने रकम नकद लौटाने का दावा किया, लेकिन अदालत के अनुसार उसके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया गया।
अदालत ने इन्हीं तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को धारा 138 NI Act के तहत दोषी ठहराया था।
आठ साल बाद आया सजा का आदेश
वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह मामला लंबे समय तक अदालत में चला। अब दोषसिद्धि के बाद सजा संबंधी आदेश में अदालत ने एक महीने की जेल और ₹50 हजार जुर्माना लगाया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सजा सुनाए जाने के दिन दोषी की गैरमौजूदगी के कारण उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी कर दिया गया है।