15/05/2026
बलरामपुर के होनहार शायर अरमान रज़ा बलरामपुरी ने डीडी उर्दू के राष्ट्रीय मंच पर बिखेरा अपनी शायरी का जादू
बलरामपुर/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगर बलरामपुर की सरज़मीं ने समय-समय पर अनेक साहित्यकारों, शायरों और बुद्धिजीवियों को जन्म दिया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जिले के युवा और प्रतिभाशाली शायर अरमान रज़ा बलरामपुरी ने राष्ट्रीय दूरदर्शन चैनल डीडी उर्दू के लोकप्रिय कार्यक्रम "कवि हाज़िर है" में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति देकर न केवल अपने परिवार और गुरुजनों का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे बलरामपुर को गौरवान्वित कर दिया।
नगर के पुरैनिया तालाब, नगर पालिका रोड, बलरामपुर निवासी अरमान रज़ा बलरामपुरी ने इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में अपनी देशभक्ति से ओत-प्रोत रचना "हिंदुस्तान हमारा है" प्रस्तुत की। यह गीत भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, एकता, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम की भावना से परिपूर्ण है। उनकी प्रस्तुति ने वहां उपस्थित दर्शकों, कार्यक्रम के निर्माताओं तथा साहित्य प्रेमियों का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग 3 मई को नई दिल्ली स्थित दूरदर्शन केंद्र में हुई, जबकि इसका प्रसारण 16 मई, शनिवार, शाम 8 बजे राष्ट्रीय चैनल डीडी उर्दू पर किया जाएगा। यह प्रसारण देशभर के करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा, जिससे बलरामपुर के इस युवा शायर की आवाज़ राष्ट्रीय स्तर पर गूंजेगी।
पहली बार राष्ट्रीय मंच पर पहुंचने की खुशी
राष्ट्रीय टेलीविजन पर पहली बार अपनी प्रस्तुति देने के बाद अरमान रज़ा बलरामपुरी ने खुशी और भावुकता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का एक यादगार और गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें डीडी उर्दू जैसे प्रतिष्ठित मंच से आमंत्रण मिला तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि उनकी शायरी को राष्ट्रीय स्तर पर इतना सम्मान मिलेगा।
उन्होंने कहा—
“डीडी उर्दू के मंच से अपनी रचना प्रस्तुत करना मेरे लिए एक सपना सच होने जैसा है। यह सिर्फ मेरी सफलता नहीं, बल्कि मेरे माता-पिता, मेरे उस्ताद और पूरे बलरामपुर की दुआओं का परिणाम है।”
माता-पिता और उस्ताद को दिया सफलता का श्रेय
अरमान रज़ा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और साहित्य के प्रति उनके जुनून को समझा। इसके साथ ही उन्होंने अपने उस्ताद डॉ. शम्सुर्रहमान शम्स का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. शम्सुर्रहमान शम्स ने न केवल उन्हें शायरी के बारीक पहलुओं से परिचित कराया, बल्कि हमेशा बेहतर लिखने और अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया।
“हिंदुस्तान हमारा है” ने जीता दिल
कार्यक्रम में प्रस्तुत उनकी रचना “हिंदुस्तान हमारा है” भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश देती है। गीत में देश की मिट्टी से मोहब्बत, आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव की भावना झलकती है।
गीत के बोलों ने दर्शकों के दिलों को छू लिया और तालियों की गूंज से सभागार गूंज उठा। कार्यक्रम के संचालकों ने भी उनकी प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे बेहद प्रभावशाली और प्रेरणादायक बताया।
बलरामपुर के लिए गर्व का क्षण
अरमान रज़ा ने कहा कि डीडी उर्दू जैसे राष्ट्रीय मंच से बलरामपुर का नाम गूंजना अपने आप में एक बेहद सुखद और गर्व का अनुभव है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही मंच और अवसर की होती है।
उनकी इस उपलब्धि से बलरामपुर के साहित्यकारों, शिक्षकों, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने उन्हें बधाइयाँ देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अरमान रज़ा बलरामपुरी की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साहित्य, कविता और शायरी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है—यह उन्होंने साबित कर दिखाया है।
साहित्यिक पृष्ठभूमि
अरमान रज़ा बलरामपुरी लंबे समय से उर्दू और हिंदी साहित्य से जुड़े हुए हैं। उनकी रचनाओं में देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, इंसानी रिश्ते और मोहब्बत की गहरी अनुभूति देखने को मिलती है। वे स्थानीय मुशायरों और कवि सम्मेलनों में नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं।
स्थानीय साहित्यकारों ने दी बधाई
जिले के अनेक साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अरमान रज़ा को इस उपलब्धि पर बधाई दी। सभी ने कहा कि उनकी सफलता ने बलरामपुर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है और यह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है।
प्रसारण की जानकारी
कार्यक्रम: कवि हाज़िर है
चैनल: डीडी उर्दू
प्रस्तुति: “हिंदुस्तान हमारा है”
प्रसारण तिथि: 16 मई, शनिवार
समय: शाम 8:00 बजे
निष्कर्ष
बलरामपुर की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। अरमान रज़ा बलरामपुरी ने अपनी मेहनत, लगन और शायरी के दम पर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो छोटे शहरों से निकलकर भी राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है। डीडी उर्दू पर उनकी प्रस्तुति न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे बलरामपुर के लिए सम्मान और गर्व का विषय है।