09/03/2026
An Inspiring post
Cut-n-paste Gyan
पूर्वांचल(यूपी-बिहार )के यादवों के लिए एक महत्वपूर्ण पोस्ट..
कल एक ओबीसी समाज के सोशल मीडिया हैंडल ने पोस्ट किया था कि क्रांति करना और बिहार बंद करना यादवों से सीखो।
ऐसे पेज एडमिन को बता देना चाहते हैं कि यादवों के बच्चों ने एक चीज सीख लिया है अपने बुजुर्गों से कि उन्हें अब ज्यादा क्रांति नहीं करनी है।
यादवों को अब हर बात में क्रांति नहीं करनी है, ओबीसी/दलित समाज के सत्ता हथियाने के रास्ते को साफ करने के लिए।
यादवों को हर मामले में घसीटना बंद कीजिए, क्रांति करना है तो अपने दम पर कीजिए। यादव के बुजुर्गों ने सामाजिक न्याय स्थापित करने के लिए बहुत ज्यादा बलिदान दे चुके हैं जिसके परिणाम में उनके बच्चों को आज नव सामंती का नाम ओबीसी/दलितों ने ही दिया है।
अब यादव युवाओं को इन फालतू क्रांति से बाहर आ जाना चाहिए।
यादवों को कोई जरूरत नहीं किसी को मुगल पूत कहने का और ब्रह्मेश्वर मुखिया या अन्य किसी नेता को गाली देने का..
यादवों को किसी ब्राह्मण को पोंगा, पंडा आदि शब्द से संबोधित नहीं करना चाहिए, हमारे आराध्य इस सनातन धर्म के प्रमुख स्तंभो में से एक हैं।
हमें न किसी पंथ, मत व समुदाय आदि से दिक्कत है न किसी अन्य किसी जाति, वंश आदि से।
यादवों को किसी से दिक्कत नहीं है भगवान कृष्ण ने सबको सम्मान देना सिखाया है।
यादवों को हर जगह,हर बात में मोर्चा लेने की जरूरत नहीं है। जो जैसा किया उसको वैसी सजा मिली, जो जैसा करेगा उसको वैसी सजा मिलेगी, बात समाप्त!
अन्य किसी को हर मामले में यादवों को घसीटकर रिच बढ़ाने की चाल बंद होनी चाहिए, यादवों की संख्या इसलिए नहीं है कि लोग हर मामले में जोड़कर अपनी रिच बढ़ाएं।
यादवों को लड़ाई, झगड़े, गाली, गलौज में घसीटकर अपनी रोटी सेंकने वाले चालाक लोमड़ियों को यादव समाज पहचान रहा है।
यादव अब न ब्राह्मण को गाली देगा, न भूमिहारों को न अपने सबसे पहले मित्र राजपूतों को।
सबका अपना नेता है, हम सबके समाज के नेताओं का सम्मान करते हैं।
यादव युवाओं को बताने की जरूरत है कि यादव, ब्राह्मण व राजपूत समाज में बहुत सामाजिक सौहार्द रहा है, लालूजी ऐसे ही तमाम मंत्रालय राजपूतों को नहीं देते थे। नेताजी ऐसे ही जनेश्वर जी का पैर नही छूते थे।
वीपी सिंह, अर्जुन सिंह, चंद्रशेखर, बाबा रघुवंश प्रसाद सिंह , जगदानंद सिंह, ब्रज भूषण तिवारी, बेनी प्रसाद वर्मा,भगवती सिंह, कुँवर रेवती रमन सिंह यहां तक सुब्रह्मण्य स्वामी ने भी आपके लालू प्रसाद व मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री बनाने और उनके कार्यकाल को सफल बनाने में बहुत बड़ा रोल अदा किया है, सम्मान कीजिए उनके और उनके लोगों का..
हर किसी के पोस्ट पर गाली देने से कुछ हासिल नहीं होगा।
वरना चालाक लोमड़ियां आपको और आपके समाज को लठैत बताकर स्वयं मलाई खाती रहेंगी और कुर्सी का खेल खेलती रहेंगी।
आज हर समाज का अपना एक नेता है, कोई भी समाज आज कमज़ोर नहीं है वो अपनी लड़ाई लड़ने के लिए सक्षम है। जिसे सक्षम बनाने में आपके लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कब तक हर किसी के लिए ढाल बनोगे और अपना नाम गुंडा, लठैत व नव सामंती आदि में लिखवाओगे ?
यादवों के बच्चों को अब क्रांति करनी है तो शिक्षा के क्षेत्र में करेगा, नेतागिरी से दूर सरकारी संस्थाओं में अपनी जगह बनाने में क्रांति करेगा, होम गार्ड , चपरासी से लेकर IAS तक की दूरी तय करेगा।
ठेकेदारी करेगा, बिजनेस करेगा लेकिन ऐसे जातीय लड़ाइयों से सौ कोस दूर रहेगा।
यादवों के पास अपना नेता है, उसे खुद नेता नहीं बनना है और न हीं किसी को बनाने के लिए अपना युवा अवस्था बर्बाद करेगा।
मजबूत लाठी यानी ताक़त यादवों को पुरखों की देन है, अब जमाना लैपटॉप यानी शिक्षा का है तो परचम वहां लहराइयेगा।
यादवों या अन्य किसी भी समाज के बाकी क्रांतिकारी साथियों, बड़े बुजुर्गों, भाई बहनों आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि यादवों के नए बच्चों को बख्श दीजिए, उन्हें अपनी रिच के लिए, अपने राजनीतिक लाभ के लिए बरगलाना बंद करिए, इनके खून में पुरखों का बहुत ज्यादा गरम खून दौड़ता है, इनको क्रांति की सबसे ज्यादा चूल होती है, उस चूल का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए बंद कीजिए।
ऐसे नेताओं का यादव बच्चे पुरजोर विरोध करें जो उसे किसी समाज से लड़ाने, नफ़रत या वैमनस्यता फैलाने के लिए बोले या लिख वाते हों।
जय हिन्द जय भारत।
।।जय श्री कृष्ण।।
-साभार