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क्या आप जानते हैं कि आपकी कार के डैशबोर्ड पर एक ऐसा बटन है जो आपके परिवार के हंसते-खेलते जीवन को उजड़ने से बचा सकता है? ज...
30/05/2026

क्या आप जानते हैं कि आपकी कार के डैशबोर्ड पर एक ऐसा बटन है जो आपके परिवार के हंसते-खेलते जीवन को उजड़ने से बचा सकता है? जी हां, मैं बात कर रहा हूँ TRC यानी ट्रेक्शन कंट्रोल (Traction Control) की। बड़े दुख के साथ मुझे, बल्लू मेकेनिक को यह कहना पड़ रहा है कि हमारे देश में 99% ड्राइवरों को यह पता ही नहीं होता कि इस बटन का कब और कैसे इस्तेमाल करना है। लोग लाखों की कार तो खरीद लेते हैं, लेकिन उसमें छुपे इस जीवन रक्षक देवदूत की अहमियत से अनजान रहते हैं, जिससे कई बार हंसते-खेलते परिवार सड़क हादसों का शिकार हो जाते हैं।

​आपकी गाड़ी के टायर जब सड़क पर अपनी पकड़ खोने लगते हैं, तो यह TRC ही है जो उसे फिसलने से बचाता है। एक मैकेनिक होने के नाते, मैंने कई ऐसी गाड़ियां देखी हैं जो सिर्फ इसलिए खाई में गिर गईं या पलट गईं क्योंकि ड्राइवर ने सही समय पर इस फीचर का सही इस्तेमाल नहीं किया था। मैं, बल्लू मेकेनिक, आज आपको बहुत ही आसान शब्दों में समझाऊंगा कि यह कैसे काम करता है और कब इसे ऑन या ऑफ रखना है, ताकि कभी किसी मां का बेटा या किसी बच्चे का पिता सड़क पर अपनी जान न गंवाए।

​🧐 आखिर क्या है यह TRC और यह कैसे आपकी जान बचाता है?
​जब आप तेज बारिश, कीचड़ या मोड़ पर गाड़ी चलाते हैं, तो कभी-कभी कार का कोई एक टायर हवा में या गीली सतह पर होने के कारण बहुत तेजी से घूमने लगता है (स्लिप होने लगता है)। ऐसे में गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट सकती है। यहाँ पर आपकी कार का कंप्यूटर और TRC एक्टिव होता है। आपके सफर को सुरक्षित बनाने के लिए, बल्लू मेकेनिक आपको बताना चाहता है कि TRC तुरंत उस फिसलने वाले टायर की स्पीड को कम कर देता है और इंजन की ताकत को बाकी टायरों में बांट देता है, जिससे आपकी कार सड़क से चिपक कर चलती है और आप एक भयानक हादसे से बच जाते हैं।

​✅ इसे कब चालू (ON) रखना है? (हमेशा ऑन रखें)
​99% मामलों में आपको अपनी कार का ट्रेक्शन कंट्रोल हमेशा ON ही रखना चाहिए। चाहे आप हाईवे पर 100 की स्पीड में हों, चाहे अचानक आपके सामने कोई मोड़ आ जाए, या फिर तेज बारिश में सड़क पर पानी भरा हो। आपके बच्चों और परिवार की सलामती के लिए, बल्लू मेकेनिक आपको सख्त सलाह देता है कि इस बटन को कभी बिना वजह बंद न करें। जब यह ऑन रहता है, तो यह बैकग्राउंड में एक फरिश्ते की तरह काम करता है और गाड़ी को स्किड (skid) होने से रोकता है।

​🛑 सबसे बड़ा सस्पेंस: इसे बंद (OFF) कब करना है?
​अब आप सोच रहे होंगे कि अगर यह इतना जरूरी है, तो कंपनी ने इसे बंद करने का बटन क्यों दिया है? तो सुनिए, जब आपकी कार गहरे कीचड़, रेत, या बर्फ में पूरी तरह फंस जाए, तब आपको TRC को OFF करना पड़ता है। अपनी बरसों के तजुर्बे से, बल्लू मेकेनिक आपको समझा रहा है कि कीचड़ में फंसे होने पर अगर TRC ऑन रहेगा, तो वह टायरों को घूमने ही नहीं देगा क्योंकि उसे लगेगा कि टायर फिसल रहे हैं, और आपकी कार वहीं धंस जाएगी। उस वक्त TRC ऑफ करके एक्सीलेटर दबाने से टायर पूरी ताकत से कीचड़ को फेंकते हुए गाड़ी को बाहर निकाल लेते हैं। गाड़ी बाहर निकलते ही इसे तुरंत फिर से ऑन कर लें।

🙏​गाड़ी सिर्फ लोहे का डिब्बा नहीं है, इसके अंदर आपका पूरा संसार बैठता है। जब कोई हादसा होता है, तो सिर्फ गाड़ी नहीं टूटती, बल्कि एक पूरा परिवार बिखर जाता है। मैं, बल्लू मेकेनिक, हाथ जोड़कर आप सभी से गुजारिश करता हूँ कि कार के इन फीचर्स को खिलौना न समझें, इन्हें सीखें और सुरक्षित ड्राइव करें। इस जानकारी को अपने हर उस दोस्त और रिश्तेदार के साथ शेयर करें जिनकी जान आपके लिए कीमती है, क्योंकि आपका एक शेयर किसी की जिंदगी बचा सकता है।
By: Ballu Mechanic

28/05/2026
28/05/2026

केरल सरकार ने हज यात्रा पर जा रहे केरल के मुस्लिमों के लिए एक बड़ा सा हज किट मुफ्त में दिया है।

केरल के हज यात्री उस किट को दिखा रहे हैं और आप देख कर चौंक जाएंगे की जरूरत का कोई ऐसा सामान नहीं जिसे केरल सरकार ने नही दिया हो।

शीशा कंघी तेल क्रीम पाउडर तो छोड़िए गर्मी में चेहरे पर वॉटर मिस्ट करने का सिस्टम भी दिया है, पानी ठंडा रखने वाला बोतल दिया है, तोलिया दिया है, चादर दिया है, छाता दिया है, चप्पल दिया है और तो और वहां
शैतान पर पत्थर फेंकने के लिए पत्थर न खोजना पड़े इसलिए पत्थर की पोटली तक दिए हैं !
यदि किसी राज्य की राज्य सरकार ने हिंदुओं को तीर्थ यात्रा पर जाने के पहले इस तरह का पूरा किट बनाकर मुफ्त में दे दिया तो तत्काल धर्मनिरपेक्षता आत्महत्या कर लेगी ???
इसे कहते है कथित धर्मनिरपेक्षता का राजनीतिक मॉब-लिंचीग ?*

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केरल सरकार ने हज यात्रा पर जा रहे केरल के मुस्लिमों के लिए एक बड़ा सा हज किट मुफ्त में दिया है। केरल के हज यात्री उस किट...
28/05/2026

केरल सरकार ने हज यात्रा पर जा रहे केरल के मुस्लिमों के लिए एक बड़ा सा हज किट मुफ्त में दिया है।

केरल के हज यात्री उस किट को दिखा रहे हैं और आप देख कर चौंक जाएंगे की जरूरत का कोई ऐसा सामान नहीं जिसे केरल सरकार ने नही दिया हो।

शीशा कंघी तेल क्रीम पाउडर तो छोड़िए गर्मी में चेहरे पर वॉटर मिस्ट करने का सिस्टम भी दिया है, पानी ठंडा रखने वाला बोतल दिया है, तोलिया दिया है, चादर दिया है, छाता दिया है, चप्पल दिया है और तो और वहां
शैतान पर पत्थर फेंकने के लिए पत्थर न खोजना पड़े इसलिए पत्थर की पोटली तक दिए हैं !
यदि किसी राज्य की राज्य सरकार ने हिंदुओं को तीर्थ यात्रा पर जाने के पहले इस तरह का पूरा किट बनाकर मुफ्त में दे दिया तो तत्काल धर्मनिरपेक्षता आत्महत्या कर लेगी ???
इसे कहते है कथित धर्मनिरपेक्षता का राजनीतिक मॉब-लिंचीग ?* @

ईद पर "सेव एनिमल्स" वाले कहाँ हो?साल भर ज्ञान:  "दिवाली पर पटाखे मत चलाओ, कुत्ते डरते हैं"  "होली पर रंग मत फेंको, जानवर...
28/05/2026

ईद पर "सेव एनिमल्स" वाले कहाँ हो?

साल भर ज्ञान:
"दिवाली पर पटाखे मत चलाओ, कुत्ते डरते हैं"
"होली पर रंग मत फेंको, जानवर बीमार होते हैं"
"न्यू ईयर पर शोर मत करो, चिड़ियों को तकलीफ होती है"

बिल्कुल सही है। जानवरों का दर्द समझना चाहिए। 100% समर्थन।

*मगर ईद-उल-अज़हा आते ही ये "जानवर प्रेम" साइलेंट मोड पर क्यों चला जाता है?*

जिस दिन लाखों बे-ज़ुबान क़ुर्बान होते हैं, उस दिन न कोई स्टोरी, न कोई पोस्ट, न कोई कैंडल मार्च। उस दिन एनजीओ की नींद नहीं टूटती।

सीधे 3 सवाल:

1. क्या ईद वाले दिन जानवर, जानवर नहीं रहते? उनकी सांस सस्ती हो जाती है?
2. तुम्हारी दया भी क्या त्यौहार देखकर ऑन-ऑफ होती है?
3. दिवाली पर लेक्चर, ईद पर म्यूट — इसको दोगलापन नहीं तो और क्या कहेंगे?

देखो, किसी के मज़हब से दिक्कत नहीं। सबको अपना त्यौहार मनाने का हक़ है।

दिक्कत सिर्फ उनसे है जो "एनिमल लवर" का बैज सिर्फ तब पहनते हैं जब उनको सूट करता है।

अगर दर्द असली है, तो आवाज़ हर ज़िबह पर उठनी चाहिए।
*नहीं तो मान लो — तुम्हें जानवर से नहीं, नैरेटिव से प्यार है।*

365 दिन एनिमल लवर बनो, सिर्फ ट्रेंडिंग डेज़ पर नहीं।*
क्योंकि दया सेलेक्टिव नहीं होती। या तो होती है, या दिखावा होती है।

्टैंडर्ड्स #सोचो_जरा #सेलेक्टिव_कम्पैशन

hypocrisy bakraeid realanimallover pollution https://www.facebook.com/share/r/1Mj2yV4pVJ/

28/05/2026

ईद पर "सेव एनिमल्स" वाले कहाँ हो?

साल भर ज्ञान:
"दिवाली पर पटाखे मत चलाओ, कुत्ते डरते हैं"
"होली पर रंग मत फेंको, जानवर बीमार होते हैं"
"न्यू ईयर पर शोर मत करो, चिड़ियों को तकलीफ होती है"

बिल्कुल सही है। जानवरों का दर्द समझना चाहिए। 100% समर्थन।

*मगर ईद-उल-अज़हा आते ही ये "जानवर प्रेम" साइलेंट मोड पर क्यों चला जाता है?*

जिस दिन लाखों बे-ज़ुबान क़ुर्बान होते हैं, उस दिन न कोई स्टोरी, न कोई पोस्ट, न कोई कैंडल मार्च। उस दिन एनजीओ की नींद नहीं टूटती।

सीधे 3 सवाल:

1. क्या ईद वाले दिन जानवर, जानवर नहीं रहते? उनकी सांस सस्ती हो जाती है?
2. तुम्हारी दया भी क्या त्यौहार देखकर ऑन-ऑफ होती है?
3. दिवाली पर लेक्चर, ईद पर म्यूट — इसको दोगलापन नहीं तो और क्या कहेंगे?

देखो, किसी के मज़हब से दिक्कत नहीं। सबको अपना त्यौहार मनाने का हक़ है।

दिक्कत सिर्फ उनसे है जो "एनिमल लवर" का बैज सिर्फ तब पहनते हैं जब उनको सूट करता है।

अगर दर्द असली है, तो आवाज़ हर ज़िबह पर उठनी चाहिए।
*नहीं तो मान लो — तुम्हें जानवर से नहीं, नैरेटिव से प्यार है।*

365 दिन एनिमल लवर बनो, सिर्फ ट्रेंडिंग डेज़ पर नहीं।*
क्योंकि दया सेलेक्टिव नहीं होती। या तो होती है, या दिखावा होती है।

्टैंडर्ड्स #सोचो_जरा #सेलेक्टिव_कम्पैशन

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