AWARA

AWARA अपनों ने जो नाम दिया, सबने वही पुकारा है ।
खुशनसीब हूँ मैं बहुत, नाम मेरा आवारा है ।

31/05/2026

काल के मकड़जाल में जब केहू फंसेला,
छटपटाहत में लात अपने मुड़ी पर पड़ेला।
तमाशबीन ह दुनिया; हर केहू तमाशा देखेला,
केकरा ऊपर का बीतल केहू ना सोंचेला।
का करबऽ अनिल बाबु; केहू ना बुझेला,
दुनियादारी ह; फुटले लोल के सब केहू कुँचेला।

(सोंचला के गरज नइखे, इ पहेली बुझल बा।
दिमाग ढेर मत लगाईं रउए ऊपर लिखल बा।)

😆😆😆

19/05/2026
13/05/2026

मुड़ीये पर बईठल बिल्ला बा
(26 मई 2013)
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काट- काट के चाटऽता
कि चाट-चाट के काटऽता।
हमरा ना बुझाईल अभीन ले
कि केंगान - केंगान काटऽता।
का हो भगवान! का तहार लीला बा,
मुड़ीये पर बईठल बिल्ला बा।

भईल फज़ीहत; नाक कटाईल;
सब तरकारी एके भाव बेचाईल।
आन्हर हऊअ कि बहीर हो गईलऽ,
हमरे घेंत रेंतत रह गईलऽ।
का हो भगवान! का तहार लीला बा,
मुड़ीये पर बईठल बिल्ला बा।

केतनों करवा लीं हम दवाई
ई बेमारी कबहुँ ना जाई।
आगे कुँआ पीछे खाई,
ना बुझाईल कि कहवाँ जाईं।
का हो भगवान! का तहार लीला बा,
मुड़ीये पर बईठल बिल्ला बा।

चाँद पत्थरों का,तारे पत्थरो के, यह ज़मीं पत्थरों की, ये घर पत्थरों के,ताजमहल पत्थरों का,नयायालय पत्थरों का,पत्थरों के मन्...
10/05/2026

चाँद पत्थरों का,
तारे पत्थरो के,
यह ज़मीं पत्थरों की,
ये घर पत्थरों के,
ताजमहल पत्थरों का,
नयायालय पत्थरों का,
पत्थरों के मन्दिरों में बैठा
भगवान भी है पत्थरों का।

गली मोहल्ले पत्थरों के,
शहर के शहर पत्थरों के,
पत्थरों के ढेर में दबी
इंसानियत भी है पत्थरों सा।

देखते- देखते पत्थरों को
आँखें भी हैं पथरा गईं।
कुछ न भाया इस जहां में,
दिलो दिमाग भी हैं पथरा रहे।
जंग-ए-जिन्दगी में
मैं बढ़ुं कैसे!
लगता है युं कि
पैर भी हैं अब पथरा रहे।

('मैली किताब' से उद्धृत)

04/05/2026

बात - बात पर बात बदलते, हर बात अजब विराला है।
समय- समय पर रूप बदलते; हर रुप गजब निराला है।।
न ईमान है; न जुबान है, हर मुस्कान बड़ा विषैला है।
रहना बचकर दोस्तों ,न जाने; अगला कौन निवाला है।।

वाह रे प्रभु !        तेरी लीला अपरम्पार है,रंगमंच है तेरी दुनिया;        सिर्फ होता यहाँ व्यापार है।मर्जी नफरत, मर्जी य...
02/05/2026

वाह रे प्रभु !
तेरी लीला अपरम्पार है,
रंगमंच है तेरी दुनिया;
सिर्फ होता यहाँ व्यापार है।
मर्जी नफरत, मर्जी यारी,
हैं कलाकार बड़े; कारोबारी।
कुछ याद करें; कुछ भूल जायें,
हैं रंग बदलते पारा - पारी।
दूर रहें तो जान के प्यासे;
पास निभाते मीठी यारी,
हे प्रभु! तेरी दुनिया कैसी;
समझ न सका दुनियादारी।

21/04/2026

सकून मिलता है बहुत, जब कोई मिर्च छिड़कता है।
शुक्रगुजार हूँ मैं आपका, आप जी भर छिड़कते हैं।।

उन लोगों को भी धन्यवाद जिनकी वजह से मेरे कविता संग्रह में एक और कड़ी जुड़ गयी।
05/04/2026

उन लोगों को भी धन्यवाद जिनकी वजह से मेरे कविता संग्रह में एक और कड़ी जुड़ गयी।

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