31/05/2026
काल के मकड़जाल में जब केहू फंसेला,
छटपटाहत में लात अपने मुड़ी पर पड़ेला।
तमाशबीन ह दुनिया; हर केहू तमाशा देखेला,
केकरा ऊपर का बीतल केहू ना सोंचेला।
का करबऽ अनिल बाबु; केहू ना बुझेला,
दुनियादारी ह; फुटले लोल के सब केहू कुँचेला।
(सोंचला के गरज नइखे, इ पहेली बुझल बा।
दिमाग ढेर मत लगाईं रउए ऊपर लिखल बा।)
😆😆😆