18/11/2021
समाजवादी पार्टी 2012 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 224 विधायकों के साथ लखनऊ पहुँची थी। तब मीडिया ने इस जीत का श्रेय युवा अखिलेश यादव की नई सोच व रणनीति को दिया था। हफ्ते भर अखिलेश यादव की सूझबूझ भरी सोच के गुणगान किए। ऑस्ट्रेलिया की पढ़ाई का जिक्र भी किया गया। कि कैसे स्मार्ट बने।
2012 के चुनाव में भाजपा अस्त-व्यस्त पड़ी थी। कांग्रेस का कोई वजूद न था। जबकि बसपा के शासन को लोग देख चुके थे। अजित सिंह के पास इतना राजनीतिक बाहुबल न था। कि अकेले दम पर लखनऊ पहुँच जाए। बिखरे विपक्ष में शिपाल यादव और मुल्लायम सिंह यादव ने साइकिल दौड़ा दी और लखनऊ पहुँच गए।
यूपी की राजनीति में असली भूचाल तब आया। जब नरेंद्र मोदी के चाणक्य अमित शाह कानूनी वजह से प्रवास पर थे। इस पूरे प्रवास के वक्त अमित शाह ने यूपी को करीब से देखा।
इसका नतीजा 2014 लोकसभा चुनावों में सपा, बसपा, आरएलडी, कांग्रेस व अन्य क्षेत्रीय दलों ने देखा। ज्यादातर तो जीरो रहे। क्योंकि शाह ने कुछ छोड़ा ही नहीं था।
अमित शाह के इस तीर को राजनीतिक विश्लेषकों व विपक्षी दलों ने तुक्का करार दिया था। लेकिन इस तीर के बाद अखिलेश यादव की ऑस्ट्रेलियाई पढ़ाई के गुण दिखने शुरू हो चुके थे।
2017 विधानसभा और 2019 लोकसभा चुनावों ने तो अखिलेश यादव की सोच, समझ, ज्ञान, सबके धागें खोलकर रख दिए। इससे इनके दिमाग का बैलेंस गड़बड़ा गया। दिमाग का लबों पर कोई कंट्रोल न रहा।
तभी तो भाजपाई वैक्सीन, वैक्सीन के बारे में अजीबोगरीब अफवाहें फैलाने में अव्वल रहे। अभी तो हालात इतने बुरे हो चले है। खेतों की मेड, कच्ची सड़कों के क्रेडिट लेने निकल रहे है। कि ये सपा के शासन में बनाई गई थी।
समझ नहीं आ रहा है। कैसे बयान दे। जिससे कोर वोटर और हिन्दू दोनों खुश रहे और 2022 में साइकिल की सवारी करे। लेकिन लबों पर बिल्कुल बस नहीं है। अभी संतो को चिलमजीवी कह दिया। कभी नौकरशाहों को धमकाते नजर आते है। कि लिस्ट बन रही है। सरकार में लौटने पर सबको देखा जाएगा।
2017 में राहुल गांधी और 2019 में बुआ का साथ लेने के बाद भी कोई फायदा न हुआ। अब बेचैन है। कि कैसे लखनऊ में धमक लौटे। सैफई उत्सव शुरू हो। राजशाही रुतबा पुनः मिले।
तो बीते दिनों अखिलेश यादव ने समाजवादी परफ्यूम लांच किया कर दिया। शायद वोटर को बस करके वोट डलवाए जाएंगे।
2012 का इंटेलिजेंट युवा राजनेता आज भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा पप्पू बनने की राह पर निकल पड़ा है। राहुल गांधी को कोसों पीछे छोड़ दिया है। 2022 में सत्ता न मिली। तो यकीनन अखिलेश यादव भारतीय राजनीति के सबसे बड़े पप्पू होंगे।
मोदी-शाह-योगी जी न जाने क्या क्या करवाएंगे?