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11/06/2026

आंधी-तूफान बना काल! जेके सीमेंट फैक्ट्री में ड्यूटी कर रहे गार्ड की दर्दनाक मौत |

एक हादसा, उजड़ गया परिवार! 4 साल की बेटी के सिर से उठा पिता का साया|

अलीगढ़ के जवां थाना क्षेत्र में स्थित जेके सीमेंट फैक्ट्री में आंधी-तूफान के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया।

बताया जा रहा है कि ड्यूटी पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड इंद्रजीत चेक पोस्ट के नीचे दब गए। हादसे के बाद उन्हें आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इंद्रजीत की मौत के साथ ही एक परिवार की खुशियां भी उजड़ गईं। पीछे रह गई हैं उनकी पत्नी और महज 4 साल की मासूम बेटी, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया।

हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह हादसा टाला जा सकता था?

क्या आंधी-तूफान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे? क्या कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सभी मानकों का पालन किया जा रहा था?

एक पल में चली गई एक जिंदगी, और पीछे छोड़ गई कई अनुत्तरित सवाल...
आपकी नजर में इस हादसे की जिम्मेदारी किसकी है?

क्या ऐसे मामलों में सिर्फ मुआवजा काफी है, या जवाबदेही भी तय होनी चाहिए?

फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मदद का आश्वासन दिया गया है, लेकिन एक परिवार का सहारा खोने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फैक्ट्री में सुरक्षा इंतज़ाम पूरी तरह दुरुस्त थे?

अगर थे, तो ड्यूटी पर तैनात एक कर्मचारी की जान आखिर कैसे चली गई?

क्या इस हादसे की जिम्मेदारी तय होगी, या फिर एक और मौत फाइलों में दबकर रह जाएगी?

आप क्या सोचते हैं, इस पूरे मामले में जवाबदेही किसकी बनती है?

11/06/2026

अपनों पर ही फर्जी मुकदमों का आरोप, न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित!

जमीन की जंग या मुकदमों की साजिश? अलीगढ़ के पीड़ित ने लगाए गंभीर आरोप!

क्या किसी को झूठे मुकदमों में फंसाकर उसकी जमीन छीनी जा सकती है?

अलीगढ़ की खैर तहसील के उदयगढ़ी गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित का आरोप है कि पुराने जमीनी विवाद के चलते उसे बार-बार फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है।

उसका कहना है कि पहले भी उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई, जबकि जिस घटना का आरोप लगाया गया, उस समय वह घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था।

पीड़ित का आरोप है कि लगातार मुकदमे दर्ज कराकर उस पर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि वह डर जाए और अपनी जमीन के अधिकार की लड़ाई छोड़ दे।

इतना ही नहीं, पीड़ित का यह भी आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने कुछ भाजपा युवा नेताओं के सहयोग से उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया है।

अब हालात ये हैं कि पीड़ित न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। उसका कहना है कि अगर आरोप झूठे हैं तो निष्पक्ष जांच हो और सच जनता के सामने आए।

आखिर बार-बार मुकदमों का सामना कर रहे इस पीड़ित को कब मिलेगा न्याय?

कब होगी आरोपों की निष्पक्ष जांच?

और अगर आरोप सही हैं तो दोषियों पर कब होगी कार्रवाई?

फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।

अब सुनिए, पीड़ित ने खुद क्या कहा...

11/06/2026

अलीगढ़ की सियासत में आज जो हुआ, उसने सबको हिला दिया… और थोड़ा हंसा भी दिया!

सोचिए जरा…
एक तरफ हाथों में पोस्टर, चेहरे पर गुस्सा, और ज़ोर-ज़ोर से नारे…
“किसानों के सम्मान में PDA मैदान में…!

“कुर्सी बचाने की खातिर लाठी बरसा रहे…!”
सब कुछ ठीक चल रहा था… प्रदर्शन पूरे जोश में था…

लेकिन तभी माहौल ने ऐसा पलटा मारा कि पूरा सिस्टम ही हिल गया!

भीड़ में अचानक से आवाज़ गूंजती है
“समाजवादी पार्टी मुर्दाबाद!”

अब सवाल ये है…
ये नारा बाहर वालों ने लगाया…
या फिर जो अंदर थे, वो भी भूल गए कि वो किसके साथ खड़े हैं?

वीडियो में साफ दिख रहा है—
सपाई जोश में नारे भी लगा रहे हैं… और पोस्टर भी अपने ही खिलाफ इशारा कर रहे हैं!

अब सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं—
ये विरोध प्रदर्शन था या “कन्फ्यूजन प्रोग्राम”?

नारे सरकार के खिलाफ थे या खुद अपनी ही पार्टी के खिलाफ?

और सबसे बड़ा सवाल… क्या अब राजनीति में भी “ऑटो-पायलट मोड” चल रहा है?

मामला इतना वायरल हो गया है कि लोग कह रहे हैं—
“आज तो विरोध भी अपना रास्ता भूल गया!”

वीडियो देख हर कोई बस एक ही बात बोल रहा है—
“भाई ये अलीगढ़ है… यहां राजनीति नहीं, पूरा कॉमेडी शो चल रहा है!”

11/06/2026

"जब कोई बेटा देश की रक्षा करते हुए वीरता की नई मिसाल गढ़ता है, तो सिर्फ उसका परिवार ही नहीं, पूरा क्षेत्र गर्व से सिर ऊंचा कर लेता है... और जब उस वीर सपूत को देश के सर्वोच्च वीरता सम्मानों में शामिल 'शौर्य चक्र' से सम्मानित किया जाए, तो स्वागत भी ऐतिहासिक होना तय है।"

अलीगढ़ के बेसवा में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां महामहिम राष्ट्रपति से 'शौर्य चक्र' प्राप्त कर लौटे वीर सपूत राम गोयल के स्वागत में पूरा क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंग गया।

जैसे ही राम गोयल अपने गृह क्षेत्र बेसवा पहुंचे, सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, गाजे-बाजे और भारत माता की जय के नारों के बीच पूरे कस्बे में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

देश सेवा में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देने वाले राम गोयल को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा देश के प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान 'शौर्य चक्र' से सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि के बाद पहली बार अपने क्षेत्र पहुंचने पर ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया।

भव्य विजय जुलूस के दौरान युवाओं में अपने स्थानीय नायक को देखने और उनसे प्रेरणा लेने का विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूरा क्षेत्र अपने वीर सपूत की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित नजर आया।

इस अवसर पर राज्य मंत्री रघुराज सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष शरद महेश्वरी, पूर्व जिला अध्यक्ष विष्णु गोयल, अजय गोयल, विजय गोयल, राधेश्याम गोयल, अशोक गोयल, भारत गोयल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

राम गोयल की यह उपलब्धि केवल बेसवा या अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

11/06/2026

गभाना टोल पर फिर पकड़ी गई पशुओं से ठूंस-ठूंस कर भरी गाड़ी, आखिर कब रुकेगा मूक पशुओं पर अत्याचार?

पशु क्रूरता की भयावह तस्वीर! ठूंस-ठूंस कर भरी गईं भैंसें, कई के टूटे मिले सींग

गभाना टोल पर एक बार फिर ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिन्होंने हर पशु प्रेमी को झकझोर कर रख दिया है।

आरोप है कि जिस गाड़ी में सीमित संख्या में भैंसों को ले जाया जाना चाहिए, उसी में करीब 30 से 40 भैंसों को ठूंस-ठूंस कर भर दिया गया था।

वायरल तस्वीरों में कई भैंसों के सींग टूटे हुए दिखाई दे रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर इन बेजुबान पशुओं के साथ इतनी क्रूरता करने की हिम्मत बार-बार कहां से आ रही है?

आरोप है कि यह पशु कट्टीघर ले जाए जा रहे थे। गाड़ी के अंदर का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया। पशुओं को खड़े रहने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मुनाफे की इस दौड़ में बेजुबान पशुओं के साथ क्रूरता कब तक होती रहेगी?

अगर आरोप सही हैं तो आखिर कट्टीघरों तक पशुओं को पहुंचाने के लिए इस तरह के अमानवीय तरीके क्यों अपनाए जा रहे हैं?

हैरानी की बात यह है कि ऐसी घटनाएं कोई पहली बार सामने नहीं आई हैं।

इससे पहले भी पशुओं से भरी कई गाड़ियां पकड़ी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अगर रोजाना ऐसी गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं तो आखिर जिम्मेदार विभाग इन्हें रोकने में असमर्थ क्यों नजर आ रहे हैं?

क्या विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं? या फिर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है?

लोगों का दावा है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में पशुओं से भरे वाहन इसी तरह गुजरते हैं। यदि ऐसा है तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है या फिर कहीं कोई सांठगांठ इस पूरे खेल को संरक्षण दे रही है?

हर बार वाहन पकड़ा जाता है, हर बार कार्रवाई की बात होती है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही तस्वीरें सामने आ जाती हैं। आखिर कार्रवाई का डर किसे नहीं है?

मूक पशु न बोल सकते हैं और न ही अपनी तकलीफ बयां कर सकते हैं, लेकिन वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो उनकी पीड़ा साफ बयान कर रहे हैं।

अब जरूरत सिर्फ गाड़ी पकड़ने की नहीं, बल्कि उन लोगों और पूरे नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई की है जिन पर पशुओं के साथ कथित क्रूरता के आरोप लगते रहे हैं।
आखिर पशुओं को इस हालत में पहुंचाने का जिम्मेदार कौन है?

अगर पशु कट्टीघर ले जाए जा रहे थे तो रास्ते में हो रही इस क्रूरता पर जवाबदेही किसकी है?

आखिर विभाग बार-बार ऐसी घटनाओं को रोकने में नाकाम क्यों दिखाई दे रहे हैं?

अब देखना होगा कि इस मामले में सिर्फ औपचारिक कार्रवाई होती है या फिर ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो भविष्य में पशुओं के साथ इस तरह के व्यवहार पर रोक लगा सके।

11/06/2026

दिनभर की मेहनत... और घर लौटते वक्त लूट! अलीगढ़ में मजदूर को घेरकर पीटा, जेब से मजदूरी के पैसे भी छीने |

अलीगढ़ में कानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल!
दिनभर मजदूरी कर अपने घर लौट रहे एक युवक को रास्ते में घेर लिया गया।

आरोप है कि युवक को रास्ते में शाहरुख, अनीस निवासी मूवी समेत कई अज्ञात लोगों ने घेर लिया और उसके साथ जमकर मारपीट की। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने न सिर्फ उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसकी मजदूरी के रुपये भी छीन लिए।

हैरानी की बात ये है कि पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। वायरल हो रहे वीडियो में कुछ लोग युवक के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जिन लोगों पर हमला करने का आरोप है, उनके खिलाफ पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके हौसले बुलंद हैं।

बताया जा रहा है कि मामला थाना रोरावर क्षेत्र के नीवरी गांव का है, जहां इस घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है।

सवाल यह उठ रहा है कि अगर दिनभर की मेहनत कर घर लौट रहा व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी आखिर भरोसा किस पर करे?

घटना के बाद पीड़ित ने थाना में आरोपियों के खिलाफ तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है।

अब देखने वाली बात होगी कि वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस आरोपियों पर क्या कार्रवाई करती है और पीड़ित को न्याय कब तक मिलता है।

क्या पुलिस आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कर कानून का डर कायम कर पाएगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर बताएं।

11/06/2026

रील का नशा या पुलिस को खुली चुनौती...?

कुछ सेकंड की वायरल रील के लिए, क्या जान को दांव पर लगाना जरूरी है...?

अलीगढ़ की सड़कों पर कुछ युवाओं को न कानून का डर है, न किसी मासूम की जान की परवाह...

सोशल मीडिया पर कुछ लाइक्स, व्यूज़ और फॉलोअर्स बटोरने की चाह में खुलेआम स्टंटबाजी की जा रही है।

कहीं चलती कार की खिड़की से बाहर निकलकर रील बनाई जा रही है... तो कहीं बाइक पर सवार युवक सड़क को स्टूडियो समझकर वीडियो शूट कर रहे हैं।

ना अपनी सुरक्षा की परवाह...
और ना ही सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जिंदगी की फिक्र...

बस एक ही मकसद...
रील वायरल होनी चाहिए...!

अगर अचानक ब्रेक लग जाए...
अगर बाइक फिसल जाए...
अगर सामने कोई बच्चा या बुजुर्ग आ जाए...
तो फिर जिम्मेदार कौन होगा...?

रील खत्म होते ही लाइक्स गिने जाएंगे...
लेकिन अगर हादसा हो गया तो उसकी कीमत कौन चुकाएगा?

सवाल ये है कि अगर इनकी एक गलती किसी मासूम की जान ले ले, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा...?

क्या सोशल मीडिया की चकाचौंध इतनी बड़ी हो गई है कि लोगों को कानून और सुरक्षा की परवाह ही नहीं रही?

अलीगढ़ में लगातार सामने आ रहे ऐसे वीडियो पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। आखिर कब रुकेगी ये सड़क पर होने वाली 'हवाबाजी'?

अब देखना होगा कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई होती है या फिर सड़कों पर यूं ही मौत को चुनौती देकर रीलें बनती रहेंगी...

आपकी राय क्या है...?

रील बनाने के लिए जान जोखिम में डालना कितना सही है...?

11/06/2026

एक ही गोदाम... दूसरी बार आग... और फिर पूरे इलाके में हड़कंप! आखिर कब रुकेगा ये खतरा?

अलीगढ़ में एक बार फिर आग ने मचाया तांडव!
देहली गेट थाना क्षेत्र के खैर रोड स्थित लाल मस्जिद के पास उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक कबाड़ गोदाम में अचानक भीषण आग भड़क उठी।

देखते ही देखते आग की लपटें आसमान छूने लगीं और साथ में बनी दूध डेरी भी इसकी चपेट में आ गई।

चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया, लोग अपने घरों और दुकानों से सामान लेकर बाहर भागने लगे।

मौके पर चीख-पुकार मच गई... किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर आग पर काबू कैसे पाया जाए।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित किया गया।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिस गोदाम में पहले भी आग लग चुकी है, उसी जगह पर दोबारा इतना बड़ा हादसा कैसे हो गया?

क्या सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही बरती जा रही है?

क्या पहले की घटना से कोई सबक नहीं लिया गया?

फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है...
अगर एक ही गोदाम में बार-बार आग लग रही है, तो आखिर जिम्मेदार कौन है?

11/06/2026

अलीगढ़ में मिट्टी में दबा मिला चौकीदार का शव, खनन माफियाओं पर हत्या की आशंका से हड़कंप!

अलीगढ़ में अवैध मिट्टी खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर से लेकर देहात तक कई इलाकों में लगातार धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन के बीच एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है।

महुआखेड़ा थाना क्षेत्र के बोरना नई बस्ती इलाके में एक चौकीदार का शव मिट्टी में दबा हुआ मिलने से सनसनी फैल गई।

बताया जा रहा है कि चौकीदार की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर उसके शव को जमीन में दफन कर दिया गया।

स्थानीय लोगों में आक्रोश है और कई लोग इस वारदात को अवैध खनन माफियाओं से जोड़कर देख रहे हैं, जिनका नेटवर्क इलाके में लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस फिलहाल हर एंगल से जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मामले में अब तक 4 संदिग्धों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ जारी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

वहीं, इलाके में लगातार चल रहे अवैध मिट्टी खनन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर प्रशासन की निगरानी के बावजूद यह खेल कैसे बेखौफ जारी है?

अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या चौकीदार की मौत की असली वजह सामने आएगी?

क्या खनन माफियाओं के इस नेटवर्क पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी?

और सबसे अहम बात—
क्या प्रशासन अब भी ऐसे मामलों में मौन धारण किए रहेगा या सख्त एक्शन लेकर इस पूरे खेल पर लगाम लगाएगा?

11/06/2026

अलीगढ़ से लेकर नोएडा-कानपुर तक... UP Police भर्ती परीक्षा में मचा हड़कंप, फर्जी अभ्यर्थी गिरफ्तार और अफवाहबाजों पर FIR!

क्या इस बार यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में नकल माफिया की कमर टूट गई है?

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के बीच बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सिर्फ नकल करने वालों पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाकर भर्ती प्रक्रिया को बदनाम करने वालों पर भी पुलिस और भर्ती बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया है।

पिछले तीन दिनों में 19 FIR दर्ज की गई हैं और 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

नोएडा, अलीगढ़ और कानपुर के परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक E-KYC मैच न होने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए परीक्षा देने पहुंचे कई अभ्यर्थियों को रंगे हाथ पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि कुछ लोग फर्जी आधार कार्ड और दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।

वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर भी बड़ा एक्शन हुआ है। भर्ती बोर्ड की शिकायत पर लखनऊ के हुसैनगंज थाने में यूट्यूब चैनल "शुभम मित्तल" और कई इंस्टाग्राम हैंडल्स के खिलाफ IT Act और नए सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो वायरल किए जा रहे थे।

सवाल ये है कि क्या अब भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा और अफवाहों का खेल खत्म होगा?

यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में इस बार सिर्फ परीक्षा केंद्रों पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की दुनिया में भी निगरानी तेज है।

सरकार और भर्ती बोर्ड साफ संदेश दे चुके हैं—नकल हो या अफवाह, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

अगर भर्ती प्रक्रिया को बदनाम करने वाले और फर्जी तरीके से नौकरी पाने की कोशिश करने वाले ऐसे ही पकड़े जाते रहे, तो शायद पहली बार युवाओं को लगेगा कि मेहनत का हक अब सच में मेहनत करने वालों को ही मिलेगा।

नकल माफिया पर वार, अफवाहबाजों पर प्रहार... लेकिन क्या यही है पारदर्शी भर्ती की असली शुरुआत?



















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