08/03/2026
राख हो जाए दुनिया की चीज़ें,
पर सपनों की लौ बुझती नहीं।
आंधियाँ लाख कोशिश कर लें,
हौसलों की आग रुकती नहीं।
गिरकर जो फिर खड़ा हो जाए,
वही असली खिलाड़ी कहलाता है।
संजू सैमसन की 89 रन की पारी
जज़्बे का वही गीत सुनाता है।
हर शॉट में था विश्वास गहरा,
हर रन में मेहनत की चमक थी।
शतक भले ही दूर रह गया,
पर दिल जीत लेने की दमक थी।
कुछ पारियाँ आँकड़ों से बढ़कर
यादों में कहानी बन जाती हैं,
आज की यह पारी भी देखो
सपनों को फिर से जगा जाती है।
मंज़िल अभी बाकी है साथी,
सफ़र अभी थमा नहीं होता—
चीज़ें भले राख हो जाएँ,
पर सपना कभी राख नहीं होता। ✨