20/02/2026
“जब तक अन्याय है, तब तक संघर्ष है!”
साथियों,
आज हम यहाँ केवल पोस्ट को पढ़ने नहीं, बल्कि एक संकल्प लेने आए हैं।
संकल्प — अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का।
संकल्प — समानता के लिए लड़ने का।
सामाजिक न्याय कोई किताब का अध्याय नहीं, यह ज़मीन की हकीकत है।
जब किसी गरीब का हक़ छीन लिया जाता है — वह सामाजिक अन्याय है।
जब किसी महिला की आवाज़ दबाई जाती है — वह सामाजिक अन्याय है।
जब जाति और धर्म के नाम पर भेदभाव होता है — वह सामाजिक अन्याय है।
और याद रखिए —
अन्याय सहना भी अपराध है!
हमारे संविधान ने हमें समानता का अधिकार दिया है।
B. R. Ambedkar ने चेतावनी दी थी कि यदि सामाजिक समानता नहीं होगी, तो लोकतंत्र खोखला हो जाएगा।
तो आज सवाल यह है —
क्या हम चुप बैठेंगे?
क्या हम डर कर पीछे हटेंगे?
नहीं!
हम आवाज़ उठाएँगे —
हम सच के साथ खड़े होंगे —
हम हर भेदभाव के खिलाफ लड़ेंगे —
क्योंकि न्याय माँगा नहीं जाता, छीनना पड़ता है —
संविधान के दायरे में, कानून के रास्ते से, एकजुट होकर!
आज हमें नफरत की राजनीति नहीं, बराबरी की नीति चाहिए।
हमें दया नहीं, अधिकार चाहिए।
हमें वादे नहीं, न्याय चाहिए।
आइए मिलकर नारा लगाएँ —
✊ “समानता हमारा अधिकार है!”
✊ “न्याय बिना विकास नहीं!”
✊ “जब तक अन्याय है, तब तक संघर्ष है!”
✊ “संविधान ज़िंदा है, ज़िंदा रहेगा!”
साथियों,
जब अंतिम पंक्ति में खड़ा इंसान भी सम्मान से जी सकेगा —
तभी हमारा समाज सच्चे अर्थों में महान कहलाएगा।
आइए, हाथ उठाइए और संकल्प लीजिए —
हम सामाजिक न्याय की इस मशाल को बुझने नहीं देंगे!
जय संविधान!
जय समानता!