14/09/2018
माँ, मातृभूमि और मातृभाषा हिंदी को एक दिवस में नहीं बाँधा जा सकता है
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय नोएडा कैंपस में आज हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजन रखा गया. इस कार्यक्रम को बीए(जनसंचार) द्वारा आयोजित किया गया. मंच संचालन करते हुये योगेश और प्रियांशी ने न केवल श्रोताओं को बाँधे रखा बल्कि हिंदी को अतुलनीय योगदान देने वाले तमाम लेखकों के ज़िक्र समेत उसके आधार पर चर्चा की. कार्यक्रम की शुरुआत शीतल निगम ने गीत गाकर की. हिंदी पर अपने विचार रखते हुए अदिति तिवारी ने साहित्य जगत की श्रेष्ठ कविताओं,उपन्यासों और कहानियों एवं उनके रचनाकारों के महती योगदान को बताया. गौरव तिवारी ने आधुनिक हिंदी के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र और आचार्य महावीर प्रसाद के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उनके जीवन के कुछ रोचक हिस्सों पर प्रकाश डाला. वैदेही ने बताया कि कैसे हिंदी को और सशक्त और विस्तृत भाषा बनाया जा सकता है. हितेश मिश्र ने हिंदी पर अपनी बात रखते हुये तमाम आँकड़े पेश किये, बताया कि हिंदी भारत भर में सीमित नहीं है बल्कि, इसकी पहचान और समझ के साथ वजूद अन्य देशों में भी है. खेमराज ने कहा कि भारत सरकार को त्रिभाषी योजना को सख्ती से लागू कर उसपर काम करना चाहिए. मितान और एग्नेश ने स्वरचित कविता पाठ कर सबका दिल जीता तो वहीं निलय ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता पढ़ सबका प्यार जीता.
इस मौके पर मौजूद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर बीएस निगम, विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय अध्यापिका कात्यायिनी सिंह और अध्यापक श्री केके ने भी हिंदी पर अपनी बात रखी. कात्यायिनी सिंह ने कहा कि आज की पीढ़ी के लिए पाँच मिनट हिंदी बोलना भी कितना मुश्किल हो चला है लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि हिंदी विकास के पथ पर नहीं है, हमारी जड़ें हिंदी से बनी हैं और हम इसका सम्मान करते हैं. कृष्णकांत ने हिंदी पर अपनी बात रखी और कहा कि वह डॉ. सौरभ मालवीय से प्रभावित होकर आज से हस्ताक्षर हिंदी में करने की शपथ लेते हैं. प्रोफेसर बीएस निगम ने कहा कि हमारी माँ, मातृभूमि और मातृभाषा हिंदी को एक दिवस में नहीं बाँधा जा सकता. उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने हिंदी प्रदेशों में रहकर न इसे सिर्फ सीखा बल्कि जिया है. उन्होंने बताया अब वह इसमें रचनाएँ भी करते हैं. विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय ने इस मौके पर पाञ्चजन्य में छपे हिंदी पर अपने लेख के ऊपर चर्चा की. हिंदी भाषा से जुड़े तमाम आश्चर्यजनक आँकड़े रखे, उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने एकबार हिंदी दिवस के मौके पर अचानक यह निर्णय लिया था की अब से वह हिंदी में ही हस्ताक्षर करेंगे. उन्होंने कहा कि हम अगर हिंदी का और विकास चाहते हैं तो उसके लिये स्वयं ही आगे आना होगा, इसे दूसरे पर टालकर नहीं पूरा किया जा सकता है. धन्यवाद ज्ञापन में शुभम यादव ने सभी दर्शकों और आयोजक समिति का शुक्रिया अदा किया.