27/08/2025
महज़ 3 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार स्केट पहने — वो भी अपनी बड़ी बहन स्वराली को देखकर। दोनों बहनें घंटों स्केटिंग करतीं, गिरतीं, उठतीं, लेकिन रुकती नहीं थीं।
आज, सालों की मेहनत और लगन के बाद, 17 साल की श्रेयसी जोशी ने इतिहास रच दिया है — वो भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं जिसने एशियन रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप में क्लासिक स्लैलम कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है।
स्केटिंग के साथ श्रेयसी का रिश्ता कोई नया नहीं। अब तक वो 10 बार की नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं। 6 साल की उम्र में पहला मेडल जीतने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। धीरे-धीरे उन्होंने स्लैलम स्केटिंग की बारीकियाँ सीखीं — एक ऐसी कैटेगरी जिसमें बैलेंस, गति और कला का खूबसूरत मेल होता है।
श्रेयसी की स्केटिंग सिर्फ़ खेल नहीं, एक जुनून है। वो कहती हैं, “स्केटिंग ने मुझे सिखाया कि गिरने से डरना नहीं है, बस दोबारा खड़ा होना आना चाहिए।”
2017 में, जब वो सिर्फ़ 12 साल की थीं, उन्होंने वर्ल्ड रोलर गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उसके बाद उन्होंने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन किया।
अब, दक्षिण कोरिया में जीता गया ये गोल्ड मेडल इस बात का सबूत है कि भारतीय बेटियाँ चाहे जिस मैदान में उतरें, जीत उनकी ही होती है। श्रेयसी की कहानी एक प्रेरणा है — उन सभी बच्चों के लिए जो अपने सपनों को लेकर गंभीर हैं, और उन माता-पिता के लिए जो अपने बच्चों को उड़ान भरने की आज़ादी देते हैं।