07/08/2026
गुरुजी के शिष्य ही बने अपने गुरु की प्रेरणा, शिष्यों ने कराया CMA का रजिस्ट्रेशन, फिर सुनाई सफलता की सबसे बड़ी खुशखबरी
30 वर्षों तक हजारों विद्यार्थियों को दी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अब गुरु ने भी सीएमए जून 2026 परीक्षा उत्तीर्ण कर रचा प्रेरणादायक इतिहास
#डॉ_रामानुज
#गयाजी (संदृ) । कहते हैं कि एक शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी उसके विद्यार्थी होते हैं। जब वही विद्यार्थी अपने गुरु की सफलता के सहभागी बन जाएं, तो यह गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे सुंदर और प्रेरणादायक उदाहरण बन जाता है। ऐसा ही प्रेरक प्रसंग सामने आया है, जहाँ डॉ. रवि कुमार अग्रवाल ने सीएमए (कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंसी) जून 2026 की प्रतियोगिता परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर एक नई उपलब्धि अपने नाम दर्ज की। उनकी इस सफलता की सबसे खास बात यह रही कि इस पूरी यात्रा में उनके अपने शिष्यों ने ही उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. अग्रवाल पिछले 30 वर्षों से, वर्ष 1996 से लगातार, वाणिज्य (कॉमर्स) विषय के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उनका मुख्य कार्य शिक्षण है और उन्होंने अपने समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्ट मार्गदर्शन से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा है। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज देश के विभिन्न राज्यों में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA), कंपनी सेक्रेटरी (CS), बैंकिंग, कॉरपोरेट जगत तथा विभिन्न सरकारी सेवाओं में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।
इस सफलता की कहानी को और भी विशेष बनाता है एक भावुक प्रसंग। वर्षों पहले जिन विद्यार्थियों को डॉ. अग्रवाल ने पढ़ाया था, उन्हीं सफल शिष्यों ने अपने गुरु से आग्रह किया कि वे भी सीएमए की प्रतियोगिता परीक्षा दें। केवल प्रेरित ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने स्वयं अपने गुरु का सीएमए परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया। शिष्यों का विश्वास था कि जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने सफलता प्राप्त की है, वे स्वयं भी इस परीक्षा में निश्चित रूप से सफल होंगे।
इसके बाद डॉ. अग्रवाल ने अपनी व्यस्त शिक्षण दिनचर्या के बीच अध्ययन जारी रखा और पूरी निष्ठा के साथ परीक्षा दी। जब जून 2026 का परिणाम घोषित हुआ, तब भी एक अत्यंत भावुक क्षण सामने आया। सबसे पहले उनके एक शिष्य ने ही अपने गुरु को फोन कर कहा—"गुरुजी, आपका CMA का रिजल्ट आ गया है। हार्दिक बधाई! अब आप भी CMA बन गए हैं।" यह सुनकर डॉ. अग्रवाल भावुक हो उठे। उनके लिए यह केवल परीक्षा में सफलता का क्षण नहीं था, बल्कि वर्षों की तपस्या और अपने शिष्यों के विश्वास का सम्मान भी था।
डॉ. अग्रवाल का मानना है कि शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि उसके विद्यार्थियों की सफलता होती है। उन्होंने सदैव अपने छात्रों को केवल परीक्षा की तैयारी ही नहीं कराई, बल्कि ईमानदारी, अनुशासन, मेहनत और नैतिक मूल्यों का भी पाठ पढ़ाया। यही कारण है कि उनके अनेक शिष्य आज बड़े कॉरपोरेट संस्थानों, प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थाओं और सरकारी विभागों में अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली से समाज और अपने गुरु का नाम रोशन कर रहे हैं।
शिक्षा जगत के लोगों का कहना है कि यह घटना गुरु-शिष्य संबंधों की अनूठी मिसाल है। जहां सामान्यतः गुरु अपने शिष्यों को आगे बढ़ाते हैं, वहीं यहां शिष्यों ने अपने गुरु को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया और उनकी सफलता के सहभागी बने। यह केवल एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की कहानी नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, समर्पण और गुरु-शिष्य के अटूट रिश्ते की प्रेरणादायक गाथा है।
डॉ. रवि कुमार अग्रवाल की इस उपलब्धि पर उनके पूर्व एवं वर्तमान विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए यह संदेश है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और एक सच्चा शिक्षक जीवनभर विद्यार्थी बना रहता है।