29/04/2026
कोटा: 'शिक्षा की नगरी' या 'तनाव का केंद्र'?
कहाँ है शिक्षा-संस्कार-अनुशासन ?
आज फिर एक खबर आई—कोटा के लैंडमार्क सिटी में छात्रों के बीच मारपीट, गर्दन पर कांच लगा और छात्र घायल।
यह सिर्फ एक फिजिकल चोट नहीं है, बल्कि उस मानसिक दबाव और बिगड़ते माहौल का संकेत है जिसमें आज के स्टूडेंट्स जी रहे हैं।
# # # ⚠️ क्या हो रहा है हमारे कोचिंग हब्स में?
कोटा और सीकर जैसे शहर, जो कभी सपनों की उड़ान के लिए जाने जाते थे, अब वहां से अक्सर तनाव, अवसाद और आपसी झगड़ों की खबरें आती हैं।
भारी प्रतिस्पर्धा (Hyper-Competition) 24 घंटे सिर्फ 'नंबरों की दौड़' बच्चों को चिड़चिड़ा और हिंसक बना रही है।
अकेलापन और दबाव: घर से दूर, अपनों से दूर, ये छात्र छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा खो रहे हैं।
सुरक्षा पर सवाल: हॉस्टल्स में छात्रों के बीच इस तरह की हिंसक झड़पें बताती हैं कि वहां अनुशासन और काउंसलिंग की भारी कमी है।
📌 सोचने वाली बात:
क्या हम सिर्फ 'डॉक्टर' और 'इंजीनियर' बनाने की फैक्ट्री चला रहे हैं? एक बेहतर इंसान और एक स्वस्थ मानसिक वातावरण का निर्माण कौन करेगा? अगर शिक्षा के मंदिर में छात्र एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं, तो हमें रुककर अपनी शिक्षा प्रणाली और पेरेंटिंग पर सवाल उठाने की जरूरत है।
> मार्क्स कम आए तो भविष्य फिर संवर सकता है, लेकिन अगर व्यवहार और मानसिक संतुलन बिगड़ गया, तो उसकी भरपाई नामुमकिन है।"
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अभिभावकों और प्रशासन से अपील है कि बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके **Mental Well-being** और उनके आसपास के **Environment** पर भी नजर रखें।