12/11/2025
क्यों X फैक्टर रहे नीतीश कुमार?
क्यों मैंने 170 सीट का प्रेडिक्शन मैंने किया?
क्यों बीजेपी और राजद पर जनता ने भरोसा नहीं किया?
दरअसल जब चुनाव की बात हो रही है और नीतीश रिटर्न पर मुहर लग रहा है तो ये बात तुक्के में नहीं है । आप ऐसे समझिए कि हर गाँव और पंचायत में नीतीश कुमार डायरेक्ट लायलिस्ट ऐसे बने और ये लोग बने, जिनकी आजीविका और सम्मान बराबर मिलता रहा। ये लोग थे-
1. ममता दीदी -
2. विकास मित्र -
3. न्याय मित्र - संख्या
4. तालीमी मरकज -
5. शिक्षा सेवक -
7. रात्रि प्रहरी -
8. स्वक्षता ग्राही - स्वक्षता प्रवेक्षक
9. पंचायत रोजगार सेवक
10. पंचायत तकनीकी सेवक
11. ग्राम कचहरी सचिव
12. किसान सलाहकार
इनमें बड़ा रोल उन शिक्षा मित्र और बाद में
बीपीएससी शिक्षकों का है जहाँ नीतीश कुमार की सरकार ने ऐतिहासिक नियुक्तियां का प्रावधान करवाया.
इसके अलावा जीविका दीदी को दस हज़ार देने से पहले उन्हें संगठित और स्वावलंबी बनाने में नीतीश की भूमिका कोई कैसे भूल सकता है।
कोई ये कैसे भूल सकता है कि प्रजापति, कारपेंटर शर्मा, ठाकुर शर्मा, चंद्रवंशी, चौहान, बिंद, कालवार, नोनिया, साव, साहू, जमादार, विश्वकर्मा जैसे ईबीसी जातियों को
संवैधानिक सुरक्षा देकर मुखिया, पंचायत समिति, जिला पार्षद, प्रमुख और मेयर, चेयर मैन जैसे पदों पर सुशोभित कराया।
एस सी जातियों में आरक्षण के ज़रिए पंचायत और नगर पंचायत के ज़रिए हर ताक़तवर पदों पर जगह दिलाया, चाहे वो मांझी हो, चौधरी हो, रविदास हो, पासवान हो या कोई अन्य समाज.
जिन समाजों का मैं जिक्र कर रहा हूँ, उन समाज के लोग बड़ी खुद्दारी से कहते हैं कि चाहे वो 90 के पहले हो या 90 के बाद उनका अचीवमेंट यहां तक सीमित था कि वे वोट देना ही उपलब्धि समझते थे और नीतीश एरा ने
वोट देने की उपलब्धि से लाकर उन्हें मुखिया और प्रमुख बनाया. आप इसे सामान्य बात समझ सकते हैं लेकिन ये ऐतिहासिक और तारीखी बात है |
कोई ये कैसे भूल सकता है कि जिस बिहार में महिलाओं की नौकरी सपने या मिथ जैसी लगती थी वहाँ नीतीश मॉडल ने बिहार पुलिस से लेकर, शिक्षा, स्वास्थ्य में में ऐतिहासिक बहाली की।
राजद का अतीत और भाजपा के वर्तमान नेतृत्व फ़िलहाल बिहार के मतदाताओं का भरोसा अब तक नहीं हासिल कर सका है।
बहुत किंतु परंतु के बाद भी नीतीश सिंगल लार्जेस्ट पार्टी मुझे इस चुनाव में दिखते हैं