06/06/2026
संयुक्त मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 सम्पन्न, किसानों की आय बढ़ाने पर दिया गया जोर
प्रयागराज। मोती लाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज (एमएनएनआईटी) के एम.पी. हॉल में प्रयागराज, वाराणसी एवं विंध्याचल मण्डल की संयुक्त मण्डलीय खरीफ उत्पादकता समीक्षा गोष्ठी-2026 का आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि प्रमुख सचिव (कृषि) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके उपरांत कृषि मंत्री ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत एमएनएनआईटी परिसर में पौधरोपण किया तथा विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि में आत्मनिर्भरता ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी। उन्होंने कहा कि खरीफ गोष्ठियों का उद्देश्य किसानों के सुझाव प्राप्त करना, उनकी समस्याओं को सुनना और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शासन स्तर से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता पर निराकरण कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि कर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाया जा रहा है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती, फसल चक्र अपनाने, फार्मर रजिस्ट्री कराने और कम पानी वाली दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
प्रमुख सचिव (कृषि) ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है, इसलिए जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
गोष्ठी में किसानों ने सिंचाई, बिजली, सोलर पंप, केसीसी, प्राकृतिक खेती, बीज, मंडी व्यवस्था और फसल सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं रखीं, जिनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत कई किसानों को ड्रोन, कस्टम हायरिंग सेंटर, बीज मिनीकिट, आईपीएम किट एवं कृषि यंत्रों पर अनुदान का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम में वाराणसी, विंध्याचल एवं प्रयागराज मण्डल के आयुक्त, जिलाधिकारी, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, जनपदों के मुख्य विकास अधिकारी तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।