04/01/2026
🏰 बैंगलोर किले का इतिहास
बैंगलोर किला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक है। यह किला दक्षिण भारत के राजनीतिक और सैन्य इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
🔹 किले का निर्माण
बैंगलोर किले का निर्माण 1537 ई. में केंपेगौड़ा प्रथम ने करवाया था। उस समय यह किला मिट्टी (कच्चा किला) से बना हुआ था। केंपेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के अधीन एक सामंत शासक थे और उन्होंने बेंगलुरु शहर की नींव भी रखी।
🔹 पत्थर का किला
बाद में, 1761 ई. में मैसूर के शासक हैदर अली ने इस किले को पत्थरों से दोबारा बनवाया और इसे एक मजबूत दुर्ग में बदल दिया। उनके पुत्र टीपू सुल्तान ने भी किले को और मजबूत किया तथा इसकी रक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाया।
🔹 अंग्रेजों के साथ युद्ध
1791 ई. में तीसरे मैसूर युद्ध के दौरान अंग्रेज सेनापति लॉर्ड कॉर्नवालिस ने बैंगलोर किले पर हमला किया। किले पर भीषण युद्ध हुआ, जिसमें अंग्रेजों ने भारी गोलाबारी के बाद किले पर कब्ज़ा कर लिया। यह युद्ध टीपू सुल्तान के लिए एक बड़ा झटका था।
🔹 किले की बनावट
बैंगलोर किला बहुत मजबूत पत्थरों से बना था। इसमें ऊँची दीवारें, तोपें, खाइयाँ और सुरंगें थीं। किले के अंदर सैनिकों के रहने की जगह, हथियार रखने के कमरे और निगरानी मीनारें बनी हुई थीं।
🔹 वर्तमान स्थिति
आज बैंगलोर किले का केवल कुछ ही हिस्सा सुरक्षित है, जैसे:
दिलखुश महल
किले की कुछ दीवारें
बाकी किले को ब्रिटिश काल में नष्ट कर दिया गया था।
🔹 ऐतिहासिक महत्व
बैंगलोर किला:
टीपू सुल्तान की वीरता और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है
बेंगलुरु के प्रारंभिक इतिहास को दर्शाता है
दक्षिण भारत के सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण साक्ष्य है
✨ निष्कर्ष
बैंगलोर किला केवल एक इमारत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता और संघर्ष की कहानी कहता है। यह किला आज भी टीपू सुल्तान और हैदर अली के साहस और रणनीति की याद दिलाता है।
S Khan Meo