02/09/2026
एक तरफ एक 10 साल का बच्चा है, जिसके हाथ में किताब होनी चाहिए थी, उसके हाथ में बाबा बनने की जिम्मेदारी थमा दी गई है। उसे देश में क्या हो रहा है इससे मतलब नहीं क्योंकि उसे हर सुविधा के साथ सम्मान मिल रहा है और तो और GICA जैसे बड़े इवेंट में बुलाकर सम्मानित भी किया जा रहा है।
ऐसा नहीं है कि बच्चों को धर्म का ज्ञान नहीं होना चाहिए, जरूर होना चाहिए। लेकिन धर्म को बिजनेस बना दिया गया है। इन बच्चों को धर्म के साथ-साथ पढ़ाई का ज्ञान भी होना चाहिए, स्कूल जाना चाहिए, खेलना चाहिए, लेकिन इन्हें बचपन में ही बाबा बनाकर कैमरे के सामने खड़ा कर दिया जाता है।
वहीं दूसरी तरफ बिहार का एक 6 साल का बच्चा है, जो अपने भविष्य के लिए, अपनी पढ़ाई के लिए, अपने हक के लिए सत्ता से ऐसे-ऐसे सवाल पूछ रहा है कि बड़े-बड़े नेता भी जवाब नहीं दे पाते। और उस बच्चे को सम्मान देने की जगह पुलिस पकड़ कर ले जाती है।
सोचिए, एक बच्चे को धर्म के नाम पर बिजनेस बनाकर सम्मान मिल रहा है और दूसरा बच्चा जो अपने हक के लिए आवाज उठा रहा है उसे थाने ले जाया जा रहा है।
जो बच्चा सवाल पूछ रहा है वो देश का भविष्य है, जो बच्चा बाबा बना है वो बिजनेस का चेहरा है। देश को सवाल पूछने वाले बच्चे चाहिए, माला बेचने वाले बाबा नहीं।