Radhakrishna

Radhakrishna तत्त्वं के तत्व जगजीवन श्रीकृष्णचन्द्र और कृष्ण कोहू तत्व वृषभानु की किशोरी है।

🌅 वृंदावन की साँझ में कान्हा 🦚💙साँझ उतर आई वृंदावन में,सूरज ने जब रंग बिखेरा,पीली धूप की चादर ओढ़े,धरती ने जैसे रूप निखा...
20/08/2026

🌅 वृंदावन की साँझ में कान्हा 🦚💙

साँझ उतर आई वृंदावन में,
सूरज ने जब रंग बिखेरा,
पीली धूप की चादर ओढ़े,
धरती ने जैसे रूप निखारा। 🌅✨

ऊँची छत पर खड़े कन्हैया,
नयनों में संसार समेटे,
मोरपंख सिर पर मुस्काता,
हृदय में मधुर बाँसुरी खेले। 🦚🎶

नीचे गलियों में गायें चलतीं,
घुँघरुओं की धुन बजती जाती,
मिट्टी की उन प्यारी राहों पर,
ब्रज की खुशबू मन महकाती। 🐄🌸

कहीं गोपियाँ दीप जलाएँ,
कहीं कोई मटकी भर लाए,
कहीं नन्हे-नन्हे ब्रजवासी,
“कान्हा-कान्हा” गीत सुनाएँ। 🙏💙

आकाश में बादल सुनहरे,
पक्षी लौटें अपने घर को,
जैसे दिन भी शीश झुकाकर,
नमन करे नंद के ललना को। 🕊️🌄

कृष्ण की आँखों में जैसे,
पूरा गोकुल बसता हो,
उनकी एक मधुर मुस्कान से,
हर दुःख पल में हँसता हो। 🌺

न सिंहासन की चाह उन्हें है,
न महलों का कोई मान,
मिट्टी की खुशबू, गायों का संग,
यही तो है उनका जहान। 🐄❤️

हे श्याम, तुम्हारी इस छवि में,
मन को मिलता अद्भुत चैन,
तुम सामने न भी हो कान्हा,
फिर भी धड़कन बोले “श्याम”। 🦚🙏

जब जीवन की राहें थक जाएँ,
जब मन पर छा जाए अँधियारा,
बस एक बार तुम्हें याद करूँ,
तो मिल जाए उजियारा सारा। ✨

वृंदावन की हर साँझ कहे,
हर धूल कण में तेरा नाम,
जिस हृदय में बस जाए कान्हा,
वही हृदय बन जाए वृंदावन धाम। 💙🦚🙏

🌸 राधा-कृष्ण : बाँसुरी में बसा प्रेम 🦚💙वृंदावन की उस शांत गली में,जहाँ फूल भी मुस्कुराते हैं,जहाँ यमुना की लहरें धीरे-धी...
20/08/2026

🌸 राधा-कृष्ण : बाँसुरी में बसा प्रेम 🦚💙

वृंदावन की उस शांत गली में,
जहाँ फूल भी मुस्कुराते हैं,
जहाँ यमुना की लहरें धीरे-धीरे
कृष्ण का नाम गुनगुनाती हैं…
वहीं एक वृक्ष की छाँव तले
श्याम खड़े थे, हाथों में बाँसुरी लिए। 🎶🌿

माथे पर मोरपंख सजा था,
अधरों पर मधुर मुस्कान थी,
पीताम्बर हवा में लहरा रहा था,
और आँखों में प्रेम की अनंत कहानी थी। 💙🦚

तभी राधा आईं धीरे-धीरे,
पायल ने प्रेम का गीत सुनाया,
कृष्ण ने बाँसुरी को होंठों से लगाया,
और पूरा वृंदावन जैसे ठहर गया। 🌸✨

बाँसुरी की हर धुन में
राधा का नाम छिपा था,
हर सुर में एक एहसास था,
हर खामोशी में प्रेम लिखा था। ❤️

राधा ने जब बाँसुरी थामी,
तो कृष्ण बस मुस्कुराते रहे,
जैसे कह रहे हों,
“मेरी धुन तुम हो राधे,
मैं तो बस तुम्हें सुनाता हूँ।” 🥹💙

न कोई वचन,
न कोई शिकायत,
न मिलने की कोई शर्त,
बस आँखों से आँखों तक
चलता रहा प्रेम का वह पवित्र संवाद। 🌺

तालाब में कमल खिलते रहे,
मोर पंख फैलाकर नाचते रहे,
यमुना की लहरें गुनगुनाती रहीं,
और वृक्षों की डालियाँ
इस दिव्य मिलन की साक्षी बनती रहीं। 🦚🌿

राधा का प्रेम कृष्ण की भक्ति बना,
कृष्ण की बाँसुरी राधा की पहचान बनी,
दो शरीर होकर भी
एक ही आत्मा की कहानी बनी। ❤️🙏

कहते हैं प्रेम वह नहीं
जो हर पल साथ रहने की माँग करे,
प्रेम तो वह है
जो दूरी में भी धड़कता रहे,
खामोशी में भी सुनाई दे,
और स्मरण मात्र से
मन को वृंदावन बना दे। 🌸

राधा बिना कृष्ण अधूरे,
कृष्ण बिना राधा अधूरे,
दोनों मिले तो प्रेम पूर्ण हुआ,
और संसार ने उसे
“राधे-कृष्ण” कहकर पूजा। 🙏💙🦚

जहाँ कृष्ण की बाँसुरी बजे,
वहाँ राधा का प्रेम महसूस हो,
जहाँ राधा का नाम लिया जाए,
वहाँ श्याम की मुस्कान खिल उठे… 🌺

यही तो राधा-कृष्ण का प्रेम है,
जिसे शब्दों की नहीं,
सिर्फ़ हृदय की आवश्यकता है। ❤️🦚🙏

#बाँसुरी #भक्ति

🌸 कमलवन में कान्हा 🌸कमल की पंखुड़ियों पर जैसे,सूरज ने मुस्कान सजाई है,यमुना की निर्मल लहरों ने,आज कोई धुन गुनगुनाई है। 🪷...
20/08/2026

🌸 कमलवन में कान्हा 🌸

कमल की पंखुड़ियों पर जैसे,
सूरज ने मुस्कान सजाई है,
यमुना की निर्मल लहरों ने,
आज कोई धुन गुनगुनाई है। 🪷💙

नन्हे कान्हा जल में उतरे,
संग सखा सब खिलखिलाए,
हाथों में गुलाबी कमल लिए,
वृंदावन के रंग सजाए। 🌸🦚

मोरपंख मुकुट सिर पर शोभे,
अधरों पर प्यारी मुस्कान,
नीले-नीले तन पर जैसे,
उतर आया हो स्वयं आसमान। 💙✨

कहीं गायें धीरे-धीरे चरतीं,
कहीं बछड़े दौड़ लगाते,
कहीं कदंब की छाँव तले,
पक्षी मधुर गीत सुनाते। 🐄🌿

सखा कहें, “कान्हा यह कमल
सबसे सुंदर किसके लिए?”
कान्हा हँसकर बोले धीरे,
“जिसके मन में प्रेम भरे।” ❤️

ताल में खिले कमल हजारों,
पर कान्हा सबसे प्यारे हैं,
जिनकी एक झलक मिल जाए,
भाग्य हमारे न्यारे हैं। 🙏🦚

माखन से भी मीठी बोली,
नैनों में करुणा अपार,
बाल रूप में प्रेम लुटाते,
श्याम हमारे नंदकुमार। 💙

जल की लहरें चरण छुएँ,
फूल करें उनका अभिनंदन,
वृंदावन की पावन धरती,
गाए कान्हा का ही वंदन। 🌺🙏

जहाँ खड़े हों नंदलाला,
वहाँ प्रकृति भी झुक जाती,
सूखी डाली फूलों से भरकर,
प्रेम की खुशबू बरसाती। 🌿🌸

हे राधे के प्रिय श्याम हमारे,
मन में अपना धाम बसाना,
कमल-सा निर्मल हृदय बनाकर,
हर पल अपना प्रेम बरसाना। 🦚💙

“कमल खिले हों जल के भीतर,
और बीच खड़े हों घनश्याम,
जिस हृदय में बस जाए कान्हा,
वही हृदय बन जाए वृंदावन धाम।” 🙏🌸🦚

19/08/2026

Banjara Jogi 🤣🤪🤔

🦚 जब कृष्ण ने गर्भ में बचाया परीक्षित को 🦚महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ,पर अधर्म का क्रोध अभी शांत न हुआ।अश्वत्थामा के हृद...
19/08/2026

🦚 जब कृष्ण ने गर्भ में बचाया परीक्षित को 🦚

महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ,
पर अधर्म का क्रोध अभी शांत न हुआ।
अश्वत्थामा के हृदय में प्रतिशोध की ज्वाला थी,
पांडव वंश मिटाने की उसने ठानी थी। 🔥

ब्रह्मास्त्र की अग्नि जब गर्भ की ओर चली,
उत्तरा की आँखों से अश्रुधारा बह चली।
हाथ जोड़कर बोली, “हे नाथ, अब आप ही सहारा,
मेरे अजन्मे बालक को बचा लो, हे कृष्ण मुरारी हमारा।” 🙏

न कोई अस्त्र रोक सका, न कोई ढाल बनी,
जब मृत्यु की छाया गर्भ के द्वार पर खड़ी हुई।
तभी करुणा बनकर श्रीकृष्ण वहाँ आए,
अपने दिव्य तेज से बालक के चारों ओर सुरक्षा-कवच बनाए। ✨

नन्हा-सा जीवन भय से अनजान था,
पर उसके ऊपर स्वयं नारायण का हाथ था।
ब्रह्मास्त्र की ज्वाला भी जहाँ ठहर न सकी,
वहाँ कृष्ण-कृपा की दिव्य ज्योति जल उठी। 🦚💙

जिस बालक को संसार ने अभी देखा भी नहीं था,
उसका रक्षक स्वयं जगदीश्वर खड़ा था।
मृत्यु ने जिसे छूना चाहा था एक क्षण,
कृष्ण ने उसे दे दिया जीवन का अमर वचन। 🙏

वही बालक आगे चलकर परीक्षित कहलाया,
जिसने कृष्ण-तत्व को जीवन में अपनाया।
पांडव वंश की अंतिम कड़ी बच गई,
कृष्ण-कृपा से वंश की ज्योति फिर जगमगा गई। 🕉️

जहाँ मनुष्य की शक्ति समाप्त हो जाती है,
वहीं से प्रभु की कृपा शुरू हो जाती है।
जहाँ सारे द्वार बंद दिखाई देते हैं,
वहीं कृष्ण अपने भक्त के लिए मार्ग खोल देते हैं। 💙

न धन चाहिए, न कोई अभिमान चाहिए,
बस हृदय में कृष्ण का नाम चाहिए।
जिसके जीवन में माधव का विश्वास रहता है,
उसके सिर पर सदैव गोविंद का हाथ रहता है। 🦚✨

“जब संसार की कोई शक्ति साथ न दे,
तब भी कृष्ण की कृपा साथ रहती है।” 🙏

राधे राधे 🌸
हरे कृष्ण 🦚🙏
जय श्रीकृष्ण 💙✨

Big shout out to my newest top fans! 💎 Sandeep Sachdeva, Manoj Surti, Vinod Bhrambhatt, Bharat Tadpada, Vikram Nandaniya...
19/08/2026

Big shout out to my newest top fans! 💎 Sandeep Sachdeva, Manoj Surti, Vinod Bhrambhatt, Bharat Tadpada, Vikram Nandaniya, Nitesh Kesharwani, Kamal Kayasth, Sameer Vij, Bharatraj Ameta, Suresh Kumawat, Rajesh Raikwar, Dilipsinh Parmar, Suresh Suresh Kumar, Madhan Singh, Susanta Borah, SurendraSingh Raghuvanshi, Zile Singh Saini, Puran Tiwari, सुरेन्द्र राजा राजा, D. Prabir Kumar Mukherjee, Mukesh Gupta, Sukanya Raj, Elen Patel, Shantilal Vithalbhai Jasani, Rajiv Mishra, Jignesh Sorthiya, Deepak Soni, Mladen Belic, Priti Mallik, Mahima Mahi, Sonkar Sonkar

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🌸 वृंदावन की गलियों में कान्हा 🌸वृंदावन की उस पावन धरती पर,जहाँ हर पत्ता भी कृष्ण का नाम सुनाता है,जहाँ यमुना की लहरों म...
19/08/2026

🌸 वृंदावन की गलियों में कान्हा 🌸

वृंदावन की उस पावन धरती पर,
जहाँ हर पत्ता भी कृष्ण का नाम सुनाता है,
जहाँ यमुना की लहरों में
मुरली की मधुर तान समा जाती है,
वहीं एक दिन नटखट कान्हा
वटवृक्ष की विशाल छाँव में विश्राम कर रहे थे। 🦚💙

माथे पर मोरपंख सजा था,
अधरों पर मंद मुस्कान थी,
पीतांबर धूप में स्वर्ण-सा चमक रहा था,
गले में फूलों की माला थी,
और आँखों में ऐसी शरारत,
कि पूरा ब्रज उनके आगे हार जाता था। 🌿✨

पेड़ की डाल पर लेटे कान्हा
आकाश को निहार रहे थे,
कभी पत्तों से छनकर आती किरणों को देखते,
कभी दूर उड़ते पंछियों को निहारते,
और कभी अपनी मुरली को हाथ में लेकर
मन ही मन कोई धुन सजाते थे। 🎶🦚

उधर वृंदावन की पगडंडी पर
सखियों की टोली चली आ रही थी,
किसी के हाथ में माखन की मटकी,
किसी के हाथ में दही से भरा मटका,
तो किसी के चेहरे पर
कान्हा को देखकर खिलती मुस्कान थी। 🌸

रंग-बिरंगी साड़ियों में सजी वे सखियाँ,
फूलों से सजे केश,
माथे पर बिंदी,
गले में प्रेम की माला,
और आँखों में बस एक ही नाम,
“श्याम…” 💛💙

राधा आगे-आगे चलीं,
उनकी आँखों में वृंदावन की सारी सुंदरता थी,
उनके अधरों पर हल्की मुस्कान,
और हृदय में कृष्ण की अनकही छवि। 🌼

अचानक एक सखी ने ऊपर देखा,
तो पेड़ की डाल पर कान्हा को पाया।

वह बोली,
“देखो सखियों!
आज तो हमारे नंदलाल
पेड़ की छाँव में छिपकर
हमारी राह देख रहे हैं!” 😄🦚

सबकी नजरें ऊपर उठीं,
कान्हा मुस्कुराए,
और आँखों ही आँखों में बोले,
“मैं छिपा कहाँ था राधे,
तुम्हारे आने की राह तो
कब से देख रहा था…” 💙

राधा ने मुस्कुराकर पूछा,
“कान्हा!
हमारे मटकों की खबर तुम्हें कैसे मिली?”

कृष्ण ने हँसते हुए कहा,
“जहाँ माखन की खुशबू हो,
जहाँ प्रेम की आहट हो,
जहाँ राधा के कदम पड़ें,
वहाँ कान्हा को आने के लिए
किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती।” 🌸🙏

सखियाँ हँस पड़ीं,
वृंदावन की गलियाँ खिल उठीं,
पेड़ों पर बैठे पंछी चहकने लगे,
और हवा भी जैसे
मुरली की धुन सुनने को ठहर गई। 🎶🌿

राधा ने मटकी सँभाली,
कान्हा ने मुस्कुराकर देखा,
और उस क्षण में
न कोई शिकायत थी,
न कोई दूरी,
न कोई वादा,
बस प्रेम था…
निष्कलंक, निस्वार्थ और अनंत। ❤️

कान्हा का प्रेम
किसी एक दिन की कहानी नहीं,
वह तो वृंदावन की मिट्टी में बसा है,
कदंब की डालियों में झूलता है,
यमुना की लहरों में बहता है,
और हर भक्त के हृदय में
राधे-श्याम बनकर धड़कता है। 🦚💙

कभी कान्हा माखन चुराते हैं,
कभी सखियों की राह रोकते हैं,
कभी मुरली बजाकर
पूरे ब्रज को अपने पास बुलाते हैं,
पर वास्तव में वे चुराते हैं तो
सिर्फ भक्तों का मन चुराते हैं। 💕🙏

जिस मन में कृष्ण बस जाएँ,
उसे फिर संसार की दौलत क्या चाहिए?
जिस हृदय में राधा का प्रेम उतर जाए,
उसे फिर किसी और सहारे की क्या आवश्यकता? 🌺

वृंदावन की उस पावन धूल में
आज भी एक कहानी साँस लेती है,
राधा की आँखों में कृष्ण हैं,
कृष्ण की मुस्कान में राधा हैं,
और दोनों के प्रेम में
पूरा ब्रह्मांड समाया है। ✨

कहते हैं,
प्रेम वह नहीं जो हमेशा पास रहे,
प्रेम तो वह है
जो दूरी में भी दिल के सबसे करीब रहे।

राधा ने कृष्ण को बाँधा नहीं,
कृष्ण ने राधा को अपना कहा नहीं,
फिर भी दोनों का नाम
आज तक अलग नहीं हुआ। ❤️

यही तो राधा-कृष्ण के प्रेम की महिमा है,
जहाँ अधिकार से अधिक समर्पण है,
जहाँ पाने से अधिक महसूस करना है,
जहाँ शब्दों से अधिक मौन बोलता है,
और जहाँ दो नाम मिलकर
एक ही प्रेम बन जाते हैं…

“राधे… कृष्ण…” 🦚🙏

वृंदावन की हर सुबह कहती है,
श्याम आज भी यहीं हैं…
किसी पेड़ की छाँव में,
किसी मुरली की धुन में,
किसी फूल की खुशबू में,
किसी भक्त की आँखों के आँसू में,
और सबसे बढ़कर
उस हृदय में,
जहाँ प्रेम बिना किसी स्वार्थ के जीवित है। 🌸

हे कान्हा,
हमारे जीवन में भी ऐसी ही मधुरता भर देना,
हमारे मन से अहंकार मिटा देना,
हमारे हृदय में प्रेम जगा देना,
और जब जीवन की राह कठिन हो जाए,
तो बस अपनी मुरली की एक धुन सुनाकर
हमें अपनी ओर बुला लेना। 💙🙏

राधे राधे…
जय श्रीकृष्ण…
जय वृंदावन बिहारी लाल… 🦚🌸💙

🕉️🌺 शिव-पार्वती का दिव्य प्रेम 🌺🕉️कैलाश की शीतल वादियों से,जब प्रेम की कोई धुन उतरती है,तो वह केवल गीत नहीं होती,वह शिव ...
19/08/2026

🕉️🌺 शिव-पार्वती का दिव्य प्रेम 🌺🕉️

कैलाश की शीतल वादियों से,
जब प्रेम की कोई धुन उतरती है,
तो वह केवल गीत नहीं होती,
वह शिव और शक्ति की
अनंत कहानी बन जाती है। 💙🙏

एक ओर हैं महादेव,
जिनकी जटाओं में गंगा बहती है,
मस्तक पर चंद्रमा सजता है,
कंठ में विष का नीलापन है,
और हृदय में समाया है
समस्त सृष्टि का कल्याण। 🔱✨

दूसरी ओर हैं माता पार्वती,
जिनकी मुस्कान में ममता है,
जिनकी आँखों में समर्पण है,
जिनके चरणों में भक्ति है,
और जिनके प्रेम में
पूरी प्रकृति की शक्ति समाई है। 🌺❤️

जब शिव ने पार्वती का हाथ थामा,
तो वह केवल एक स्पर्श नहीं था,
वह प्रकृति और पुरुष का मिलन था,
वह शक्ति और शिव का संगम था,
वह दो आत्माओं का नहीं,
दो अनंत तत्वों का मिलन था। 🙏

पार्वती की आँखों में शिव थे,
और शिव की मौन मुस्कान में पार्वती।
न कोई बड़ा था, न कोई छोटा,
न कोई आगे, न कोई पीछे,
दोनों साथ थे,
क्योंकि सच्चा प्रेम
बराबरी से जन्म लेता है। ❤️

कभी पार्वती रूठती हैं,
तो महादेव की गंभीरता भी पिघल जाती है,
कभी शिव मौन होते हैं,
तो पार्वती उस मौन को पढ़ लेती हैं।
जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं,
वहीं से उनका प्रेम
अपनी भाषा बोलना शुरू करता है। 🌙

उनके प्रेम में दिखावा नहीं,
बस विश्वास है।
उनके रिश्ते में शोर नहीं,
बस एहसास है।
उनके साथ में कोई बंधन नहीं,
बस आत्माओं का अपनापन है।

महादेव ने सिखाया,
प्रेम में स्वतंत्रता भी होनी चाहिए,
और माता पार्वती ने बताया,
समर्पण में अपनी पहचान खोना नहीं,
बल्कि प्रेम के भीतर
अपने अस्तित्व को और उज्ज्वल करना चाहिए। ✨

जब शिव नृत्य करते हैं,
तो पार्वती उस लय की शक्ति बनती हैं।
जब शिव ध्यान में बैठते हैं,
तो पार्वती उनकी साधना का भाव बनती हैं।
जब संसार संकट में होता है,
तो दोनों मिलकर
सृष्टि की रक्षा का संकल्प लेते हैं। 🔱🌍

यही तो है शिव-पार्वती का प्रेम,
जिसमें मिलन भी तपस्या है,
विरह भी साधना है,
मौन भी संवाद है,
और साथ होना भी
एक दिव्य उत्सव है। 🌸

कहा जाता है,
जहाँ शिव हैं वहाँ शक्ति है,
और जहाँ शक्ति है वहाँ शिव।
एक के बिना दूसरा अधूरा नहीं,
बल्कि दोनों मिलकर
पूर्णता का अर्थ समझाते हैं।

शिव बिना शक्ति के
निष्क्रिय चेतना हैं,
और शक्ति बिना शिव के
दिशाहीन ऊर्जा।
जब दोनों एक होते हैं,
तभी सृष्टि में संतुलन आता है,
तभी जीवन में प्रकाश आता है। 🕉️

हे महादेव,
ऐसा प्रेम देना
जिसमें अहंकार न हो,
ऐसा साथ देना
जिसमें स्वार्थ न हो,
ऐसा विश्वास देना
जिसे समय भी न तोड़ सके,
और ऐसा हृदय देना
जो हर परिस्थिति में
सत्य और प्रेम के साथ खड़ा रहे। 🙏

हे माता पार्वती,
ऐसी शक्ति देना
कि कठिन रास्तों पर भी
हम मुस्कुराते हुए चल सकें,
रिश्तों में सम्मान रख सकें,
मन में करुणा रख सकें,
और अपने प्रियजनों के लिए
सच्चे मन से समर्पित रह सकें। 🌺

कैलाश की उस दिव्य भूमि पर,
जहाँ हवाएँ भी मंत्र जपती हैं,
जहाँ हिमालय की चोटियाँ
शिव का नाम दोहराती हैं,
वहीं आज भी
एक अमर प्रेम की कथा
समय के पन्नों पर लिखी है।

वह कथा कहती है...

प्रेम केवल साथ चलने का नाम नहीं,
प्रेम तो वह शक्ति है
जो दो आत्माओं को
एक ही सत्य की ओर ले जाए।

शिव की आँखों में पार्वती रहें,
पार्वती के हृदय में शिव रहें,
और संसार के हर घर में
उनके प्रेम की शांति रहे। 🕉️❤️

जहाँ पति-पत्नी में
शिव-पार्वती जैसा सम्मान हो,
जहाँ रिश्तों में
विश्वास का दीप जलता हो,
जहाँ रूठने के बाद
मनाने की सच्ची इच्छा हो,
जहाँ जीत से अधिक
रिश्ता महत्वपूर्ण हो,
वहीं घर सच में
एक छोटा-सा कैलाश बन जाता है। 🏔️🌺

न धन चाहिए,
न वैभव चाहिए,
न संसार की सारी खुशियाँ चाहिए...

बस इतना आशीर्वाद चाहिए
कि जीवन की हर राह पर
विश्वास साथ चले,
प्रेम साथ चले,
सम्मान साथ चले,
और हृदय में
“हर हर महादेव” की गूँज
सदा बनी रहे। 🔱🙏

शिव हैं तो शक्ति हैं,
शक्ति हैं तो सृष्टि है,
सृष्टि है तो जीवन है,
और जीवन है तो प्रेम है।

इसीलिए शिव-पार्वती का प्रेम
केवल एक पौराणिक कथा नहीं,
बल्कि जीवन का वह संदेश है
जो हमें सिखाता है—

प्रेम में अधिकार से पहले सम्मान रखो,
साथ से पहले विश्वास रखो,
शब्दों से पहले भाव समझो,
और रिश्ते में स्वयं से पहले
एक-दूसरे के हृदय को रखो। ❤️

🌺 ॐ नमः शिवाय 🌺
🔱 हर हर महादेव 🔱
🙏 जय माँ पार्वती 🙏

#शिवपार्वती #माँपार्वती #हरहरमहादेव #ॐनमःशिवाय #शिवशक्ति #दिव्यप्रेम #सनातनधर्म #महादेव #भोलेनाथ

Address

वृंदावनेश्वरी/Nand Bunglows Part-II
Palanpur
385001

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