04/05/2026
रातें चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हों… सुबह होना तय है.....उस रात भी मैं ठीक यही सोच रहा था। आसमान काला था, हवा भारी थी और भीतर जमा हुआ दुःख मानो साँसों पर बोझ बनकर बैठ गया था। ऐसा लग रहा था जैसे यह अँधेरा कभी खत्म नहीं होगा। पर तभी, जाने क्यों, दिल में एक हल्की-सी आवाज उठी— “कभी कोई रात ऐसी नहीं रही जो बीती न हो।”
मैंने इस आवाज को सुना, जैसे कोई पुराना दोस्त समझा रहा हो। जीवन के पन्ने खुद-ब-खुद खुलने लगे। याद आया, पहली बार जब दिल टूटा था, लगा था दुनिया खत्म हो गई है। वो लंबी सिसकियों वाली रातें, वो चुप्पी, वो अकेलापन सब अनंत जैसा लगता था। लेकिन आज? वही दुःख एक धुंधली स्मृति है, जैसे किसी पुराने फोटो पर समय की धूल जमी हो।
कभी पढ़ाई का दबाव भीतर तूफ़ान की तरह घूमता रहता था। लगता था कि यह संघर्ष कभी नहीं बीतेगा। लेकिन एक दिन वही किताबें बंद हो गईं, परिणाम आ गए, और जीवन आगे बढ़ गया। तब पता चला कि वक़्त कभी ठहरता नहीं… हम ही ठहर जाते हैं।
एक और पल याद आता है जब घर के किसी अपने को खो दिया था। वो शोक इतना गहरा था कि जैसे दिल का एक हिस्सा हमेशा के लिए टूट गया हो। लगता था यह दर्द उम्रभर साथ चलेगा। मगर धीरे-धीरे, उसी दर्द के आसपास नए अनुभव उग आए। मुस्कुराने के कारण लौटे, साँसें हल्की हुईं। दुःख गया नहीं, पर शांत हो गया। जैसे बारिश के बाद मिट्टी में रह जाने वाली नमी दिखती नहीं, पर रहती है।
जीवन ने मुझे बार-बार बताया कि कोई ऐसा दुःख नहीं जिसे समय शांत न कर दे।
समय कठोर नहीं है बस धैर्यवान है।
और स्मृतियाँ?
वे भी हमेशा चमकती नहीं रहतीं। समय उन पर धूल डाल देता है, ताकि हम आगे बढ़ सकें। वरना हम अतीत के बोझ में ही दबे रह जाते।
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो हर कठिन रात, हर भारी क्षण, हर आँसू मुझे एक ही बात सिखाता है
सबकुछ अस्थायी है।
हमारे सुख, हमारे दुःख, हमारे लोग, हमारी इच्छाएँ सब बदलते हैं, रूप बदलते हैं, और फिर आगे बढ़ जाते हैं।
तो फिर हम क्यों अटक जाते हैं?
क्यों सोचते हैं कि यह दर्द, यह मुश्किल, यह अकेलापन आख़िरी है?
जीवन का सच इतना सीधा है कि कभी-कभी हम उसे समझ ही नहीं पाते
जो भी है, वह बीत जाएगा।
जो बीत गया, वह लौटेगा नहीं।
और जो आने वाला है, वह अपने समय पर ही आएगा।
बस चलते रहना है, साँस लेते रहना है, स्वीकार करते रहना है।
क्योंकि दुनिया की किसी भी रात के पास इतनी ताक़त नहीं कि वह सुबह को रोक सके।
और यही जीवन का सबसे बड़ा जादू है—
कि चाहे जितनी भी अँधेरी रात हो…
सुबह होना तय है।