03/06/2026
तहसीलों में एमआरसी, रजिस्ट्री और लाइसेंस क्लर्क की सीटों पर ही ड्रा क्यों? उठने लगे सवाल
कोसली,(रेवाड़ी)ओमप्रकाश डाबला
रेवाड़ी जिला प्रशासन द्वारा कुछ समय पहले तहसीलों और उप-तहसीलों में रजिस्ट्री क्लर्कों की नियुक्ति के लिए लॉटरी (ड्रा) प्रणाली लागू की गई थी। प्रशासन का तर्क था कि इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और राजस्व विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। हालांकि अब यह व्यवस्था कई सवालों को जन्म दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ड्रा प्रणाली केवल एमआरसी, रजिस्ट्री क्लर्क और लाइसेंस क्लर्क जैसी चुनिंदा सीटों पर ही क्यों लागू की गई। राजस्व विभाग में इन पदों को लंबे समय से महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता रहा है। विभागीय कर्मचारियों के बीच भी इन सीटों पर नियुक्ति को लेकर विशेष रुचि देखी जाती है।
चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इन पदों पर नियुक्ति को लेकर अक्सर कर्मचारियों की प्रशासनिक अधिकारियों अथवा स्थानीय राजनीतिक नेताओं तक पहुंच अहम भूमिका निभाती रही है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं राजनीतिक दबाव और सिफारिशों से बचने के लिए प्रशासन ने लॉटरी प्रणाली का सहारा तो नहीं लिया।
दूसरी ओर, यह भी माना जा रहा है कि जिला प्रशासन ने सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा राजस्व विभाग में निष्पक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। हालांकि इसके वास्तविक कारणों को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश कर्मचारी अपेक्षाकृत कम कार्यभार वाली सीटों पर नियुक्ति चाहते हैं, लेकिन राजस्व विभाग की इन सीटों को लेकर जिस प्रकार प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, उससे इनके महत्व का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार लॉटरी प्रणाली लागू करने का उद्देश्य नियुक्तियों में पारदर्शिता लाना और किसी भी प्रकार के पक्षपात की संभावना को समाप्त करना है। जिला प्रशासन का दावा है कि इससे स्वच्छ और जवाबदेह शासन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि लॉटरी प्रक्रिया का संचालन सार्वजनिक रूप से किया गया, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा भाजपा जिला अध्यक्ष की मौजूदगी भी रही।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह व्यवस्था भविष्य में कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे वास्तव में भ्रष्टाचार तथा सिफारिश संस्कृति पर अंकुश लग पाता है। फिलहाल यह मुद्दा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।