13/12/2025
विनोद कुमार शुक्ल समकालीन हिंदी कविता के उन विरले कवियों में हैं जिन्होंने उसकी दिशा और संवेदना को गहराई से प्रभावित किया है। उनकी कविता अपने समय में रची-बसी होते हुए भी समयातीत लगती है और वैचारिक ढाँचों के बजाय अनुभव के सहारे आगे बढ़ती है। प्रचलित मुहावरों से अलग उन्होंने एक संयमित, पारदर्शी और अनोखी काव्य-भाषा विकसित की है। यह संकलन उनकी उसी विशिष्ट काव्य-दृष्टि की प्रतिनिधि कविताएँ प्रस्तुत करता है।