30/03/2026
“हम अपनी ज़मीन और अपनी ज़िंदगी को थामे खड़े हैं…
ताकि यहीं… अपनी कहानी लिखते रहें…”
ये शब्द थे… फातिमा फतूनी के…
अल मायादीन की एक जर्नलिस्ट…
लेकिन आज… उनकी आवाज़ खामोश कर दी गई…
दक्षिण लेबनान में…
एक डबल स्ट्राइक में…
उन्हें मार दिया गया…
वो सिर्फ रिपोर्टिंग कर रही थीं…
सच दिखा रही थीं…
उन आवाज़ों को दुनिया तक पहुंचा रही थीं…
जो अक्सर दबा दी जाती हैं…
लेकिन शायद… सच कहना ही उनका “जुर्म” बन गया…
एक सवाल रह जाता है…
क्या सच दिखाना इतना बड़ा खतरा है…
कि उसे मिटा दिया जाए?
आज… एक और कलम खामोश हो गई…
लेकिन उसकी लिखी कहानी…
हमेशा ज़िंदा रहेगी…