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19/08/2026

आपके बक्सर में खुलने जा रहा है महिलाओं के लिए सबसे बेस्ट सलोन। और उसके साथ एकेडमी भी। जहाँ आज की युवतियों को सजने के साथ साथ अपने जीवन को संवारने का भी अवसर मिलेगा।

जिसका Grand Opening - 23 अगस्त दिन रविवार को 11 बजे होने जा रहा है।

पूरा पता: Anshu Makeup Studio

Thatheri Bazar, Near momomia resturent, Buxar.

तो आइए इस भव्य उद्घाटन समारोह का हिस्सा बने।

14/08/2026

बक्सर के दलसागर में एयर इंडिया का विमान लैंड हुआ। हवाई चप्पल वाले लोगों का सपना हुआ साकार।

बक्सर में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के लोगों ने विद्रोह का बिगुल फुक दिया हैं। मामला जिलाध्यक्ष को लेकर हैं। दशकों पुरा...
07/08/2026

बक्सर में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के लोगों ने विद्रोह का बिगुल फुक दिया हैं। मामला जिलाध्यक्ष को लेकर हैं। दशकों पुराने कार्यकर्ता उनके इस चुनावी प्रक्रिया से नाराज हो गए हैं। और इनमे शामिल जो नेता है वो उपेन्द्र कुशवाहा के पार्टी की नीव माने जाते है।

आपको बता दें कि उपेन्द्र कुशवाहा बिहार की राजनीति में उस धुरी पर खड़े है जहा हर दो महीने में उनकी पार्टी किसी ना किसी कारण से चर्चा में बनी रहती है। काराकाट लोकसभा से चुनाव हारने के बाद ये कयास लग रहे थे कि पार्टी कि सदस्यता खत्म हो जाएगी, मगर ऐन वक्त पर वो राज्यसभा भेज दीए गए।

साल 2025 विधानसभा चुनाव में जब उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से चार विधायक चुने गए। उसके बाद उन्मे भी विद्रोह की खबर फैल गई। हालांकि इसके बाद वह फिर से पार्टी के डैमज को कंट्रोल करने में कामयाब हो जाते हैं।

फिर जब बिहार कैबिनेट में अपने बेटे दीपक प्रकाश को वो मंत्री बनाते हैं, तब उनपर परिवरवाद का एक धब्बा लग जाता हैं। दूसरी कैबिनेट जगह मिलेगी या नहीं इस पर कई सवाल खड़े हुवे। अंततः फिर से दीपक मंत्री बनाए गए।

मगर मामला फिर से तूल पकड़ लिया कि ना वो विधायक है ना एमएलसी है आखिर किस आधार पर वह मंत्री बने हैं। इन सभी मुसीबतों का सामना करते हुवे उपेन्द्र कुशवाहा ने दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाकर सारी अटकलों पर विराम लगा दिया।

मगर मुसीबत अभी टली नहीं है। चुकी राष्ट्रीय लोक मोर्चा यदि किसी क्षेत्र में मजबूत है तो वह है शाहबाद का क्षेत्र। और उसमे भी सबसे ज्यादा धरातल पर उनका मास वोटर कहीं है तो वह है बक्सर। और आज की तारीख में बक्सर की पूरी कमिटी उनकी चुनावी प्रक्रिया से नाराज होकर सामूहिक इस्तीफा देने की तैयारी में हैं। अब देखना यह है कि इस डैमज को उपेन्द्र कुशवाहा कैसे कंट्रोल करते हैं।

चुनावी आंकड़ों से देखें तो जवाब है- बिल्कुल नहीं। क्योंकि बांकीपुर BJP की 1995 से परंपरागत सीट रही है। यहां BJP तब भी जी...
07/08/2026

चुनावी आंकड़ों से देखें तो जवाब है- बिल्कुल नहीं। क्योंकि बांकीपुर BJP की 1995 से परंपरागत सीट रही है। यहां BJP तब भी जीती जब उसके साथ नीतीश कुमार नहीं थे।

2015 विधानसभा चुनाव में तो बांकीपुर के वोटरों ने नीतीश कुमार को CM पद से हटाने के लिए वोट किया था। इसे ऐसे समझिए…

बांकीपुर (पटना पश्चिम) में BJP पहली बार 1995 में चुनाव जीती। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा जीते थे। उस वक्त नीतीश कुमार समता पार्टी के नेता हुआ करते थे।

1995 में समता पार्टी भाजपा से अलग लड़ी थी। 310 सीटों पर लड़कर सिर्फ 7 सीटें जीती थी। 1996 लोकसभा चुनाव के समय नीतीश कुमार और भाजपा ने गठबंधन किया, जो 2013 तक चला।

2015 बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार और BJP आमने-सामने थी। BJP ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। उनके कथित DNA पर सवाल उठे। प्रशांत किशोर तब नीतीश कुमार के रणनीतिकार थे।

2015 विधानसभा चुनाव में लालू-नीतीश और कांग्रेस को पूरी ताकत लगाने के बाद भी बांकीपुर में महागठबंधन को सिर्फ 46,992 वोट मिले। यानी सिर्फ 32.6% वोट। BJP ने महागठबंधन प्रत्याशी को 39,767 वोटों से हरा दिया था।

इसका मतलब बांकीपुर में नीतीश कुमार कोई फैक्टर नहीं हैं। जब उनके लिए पूरे बिहार में लहर थी, तब भी इस सीट पर भाजपा जीती थी।

पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी समेत अन्य दलों ने अब खुलकर आत्ममंथन शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां...
07/08/2026

पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी समेत अन्य दलों ने अब खुलकर आत्ममंथन शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अचानक भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे और करीब दो घंटे तक समीक्षा बैठक की। वही राजद ने अपने पूरे इकाई को भंग कर दिया है। जेडीयू के तरफ से अभी कोई चुनावी मंथन नहीं किया गया, और उपेन्द्र कुशवाहा फिलहाल अपने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटे हुवे हैं।

मगर एक बात जो खुलकर सामने आई है, वो ये है कि ना कोई बूथ कमिटी, ना कोई जमीनी नेता और ना ही कोई धरातल पर मजबूत कार्यकर्ता फिर भी कैसे बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने उपरोक्त सभी दलों को हराकर अपनी जीत सुनिश्चित की है। तो आइए जानते है कैसे...

बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार बिहार के तारणहार जरूर बने, मगर अपनी ब्रांडिंग नहीं कर सके। वे बहुत अच्छा बोलते हैं मगर उनकी विडिओ क्लिप लोगों के पास पहुँच ही नहीं पाती हैं। और इसका सबसे बड़ा कारण हैं उनकी सोशल मीडिया मैनेजमेंट का सुस्त होना।

वही तेजस्वी यादव विपक्ष पर उस तरह हावी नहीं दिखते, जिससे उनकी बातें लोगों तक पहुँच सके और ना ही उनकी सोशल मीडिया टीम वैसे मुद्दे ढूंढ पाती है जिससे उनका विडिओ क्लिप उनके समर्थकों के पास पहुँच सके।

उपेन्द्र कुशवाहा बहुत ही सधे हुवे और नाप-तोल वाले अंदाज में बोलते हैं। हालांकि वे देश की गंभीर मुद्दे बहुत जल्द भाप लेते है। इनमे क्लॉजीयम सिस्टम, शिक्षा सुधार जैसे कई मुद्दे थे जिन्हे उनकी टीम नैशनल लेवल पर लोगों के पास पहुँचा सकती थी, मगर उनकी विडिओ फुटेज केवल सभाओ तक ही सीमित होकर रह गईं हैं।

जिसका नतीजा यह है कि उपेन्द्र कुशवाहा को तो लोग जानते है मगर इतने साल राजनीति में सक्रिय होने के बाद भी बिहार के सुदूर इलाकों में इनकी पार्टी का नाम भी लोग सही से नहीं ले पाते हैं।

वही अगर प्रशांत किशोर की बात करें तों इन्होंने धरातल से पहले आपनी पार्टी को सोशल मीडिया पर ज्यादा प्रचार किया, इसके बाद पद यात्रा की जिसमे पार्टी का नाम ही सबसे आगे रखा। जैसे 2025 चुनाव में "जन सुराज आएगा, पाँच चीज हो जाएगा"। पीके ने अपनी पार्टी का नाम गाँव की हर गली में वाल पेंटिंग के जरिये दिखाया और उसकी ब्रांडिंग की।

उसके बाद उन्होंने बिहार में अपनी मजबूत सोशल मीडिया टीम बनाई और बिहार की जरूरी मुद्दे को टारगेट कर उसकी एक एक क्लिप बिहार के हर युवा के मोबाईल में दिखाने काम किए। जिसका नतीजा ये निकला कि लोग उनकी बातों से सहमत दिखे, ये अलग बात हैं उनकी स्ट्रेटजी 2025 चुनाव में कारगर नहीं रही। मगर उसका परिणाम अब आने लगा हैं।

आज अगर फेसबूक पर देंखे तो सर्च मोड में नीतीश कुमार के 11 मिलियन हैं, उपेन्द्र कुशवाहा के 1 लाख 45 हजार, सम्राट चौधरी के 1.1 मिलियन, तेजस्वी यादव 4.8 मिलियन और प्रशांत किशोर के 26 मिलियन लोगों ने सर्च किया और उनके कंटेन्ट देंखे हैं।

मोहन भागवत के जाति-आधारित आरक्षण को लेकर दिए गए नए बयान से फिर से घमासान मच सकता है। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को...
07/08/2026

मोहन भागवत के जाति-आधारित आरक्षण को लेकर दिए गए नए बयान से फिर से घमासान मच सकता है। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि आरक्षण का मकसद सामाजिक समानता लाना था और जब तक असमानता बनी रहेगी, तब तक यह जारी रहेगा। मोहन भागवत मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

हालांकि, उन्होंने एक ऐसा बयान भी दिया जिसपर घमासान मच सकता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आरक्षण का लाभ उठाकर सामाजिक और आर्थिक तरक्की कर ली है, उन्हें उदारता दिखाते हुए खुद पीछे हट जाना चाहिए ताकि उनके समुदाय के दूसरे लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

तेजस्वी यादव की सलाह के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की सभी कमेटियां भंग कर दी हैं. बिहार विधानस...
07/08/2026

तेजस्वी यादव की सलाह के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की सभी कमेटियां भंग कर दी हैं. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और बांकीपुर उपचुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद राजद अब नए सिरे से संगठन तैयार करेगा और कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां दी जाएंगी.

राजद अब बिहार में अपना संगठन फिर से बनाएगा. पार्टी की ओर से कहा गया है कि प्रदेश के सभी स्तरों पर नई कमेटियों के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. नए संगठन में पुराने नेताओं के साथ नए चेहरों को भी जिम्मेदारी मिलने की संभावना है.

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बिहार के पंचायती राज मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश MLC बन गए हैं। राज्यपाल ने उन्हें BJP नेता देवेश कुमा...
06/08/2026

बिहार के पंचायती राज मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश MLC बन गए हैं। राज्यपाल ने उन्हें BJP नेता देवेश कुमार की जगह मनोनीत किया है। जानकारी के मुताबिक, दीपक गुरुवार को MLC पद की शपथ ले सकते हैं।

गुरुवार (30 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था, ‘मंत्री दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के, लेकिन वह मंत्री पद पर हैं।’

जिसके बाद देवेश कुमार ने पिछले शुक्रवार (31 जुलाई) को विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंपा था। देवेश कुमार 17 मार्च 2021 को राज्यपाल मनोनीत कोटे से MLC बने थे।

02/08/2026

डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के ईओ विमल कुमार की हत्या के मामले में उनकी पत्नी बबिता कुमारी ने रविवार को बारुण थाना में लिखित आवेदन देकर गाड़ी चालक मिथिलेश कुमार को मुख्य आरोपी बनाया है। हालांकि वीडियो फुटेज में कई बार यह देखा जा रहा है कि द्विंगत अधिकारी की पत्नी विधायक पर सीधा सीधा आरोप मढ़ रही है।

पुलिस ने IPC की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बबिता कुमारी ने आवेदन में बताया कि 1 अगस्त 2026 की रात करीब 9:19 बजे चालक मिथिलेश कुमार ने उन्हें फोन कर सूचना दी कि उनके पति अब नहीं रहे। पहले लगा कि छोटी-मोटी चोट लगी होगी, लेकिन बाद में पता चला कि उनकी सांस नहीं चल रही थी। पत्नी ने आरोप लगाया कि मिथिलेश पहले भी उनके पति से गाली-गलौज करता था और उसे प्रताड़ित करता था।

हाल में विमल कुमार ने उसकी नौकरी से हटाने की बात भी कही थी। इसी कारण उसने साजिश के तहत हत्या की। चालक डेहरी थाना क्षेत्र के कऊआ सोनप गांव निवासी मिथिलेश कुमार है।पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर लिया है। मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने बताया कि पूछताछ में चालक ने कई बार अपना बयान बदला फिर कड़ाई से पूछताछ में अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है।

उसने बताया कि रास्ते में तनाव के बाद लोहे के रॉड से वार कर हत्या की और सबूत मिटाने के लिए पहले दुर्घटना की कहानी रचने को सोची। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए है। गोताखोरों की मदद से हत्या में इस्तेमाल रॉड को नहर से बरामद किया गया है। पुलिस मामले की हर बिंदु पर जांच कर रही है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ई-20 नीति को बनाने या लागू करवाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। गडकरी ने ...
29/07/2026

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ई-20 नीति को बनाने या लागू करवाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। गडकरी ने मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ दायर की गई याचिका में यह बात कही है। गडकरी ने कोर्ट से मांग की है कि उनके खिलाफ की गईं अभद्र पोस्ट और एआई से बने डीपफेक्स हटाए जाएं। इनमें वे पोस्ट भी शामिल हैं, जिनमें उन्हें और उनके परिवार को सरकार के ई-20 कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

ई-20 कार्यक्रम के तहत, देश में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल वाला ईंधन बेचा जा रहा है। यह भारत सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार क्रूड ऑयल का आयात कम करना चाहती है, उत्सर्जन घटाना चाहती है और घरेलू बायोफ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है। हालांकि, इस नीति की बड़े स्तर पर आलोचना हुई है और कई सोशल मीडिया पोस्टों में इसके लिए गडकरी को जिम्मेदार ठहराया गया।

गडकरी ने तर्क दिया है कि ई-20 नीति में उनकी कोई भूमिका नहीं है और इस नीति के लिए उनका परिवहन मंत्रालय नहीं बल्कि पेट्रोलियम मंत्रालय जिम्मेदार है। सोशल मीडिया पर यह आरोप भी लगे हैं कि ई-20 नीति से गडकरी के बेटे निखिल गडकरी की कंपनी को फायदा हुआ है। गडकरी ने इन आरोपों को खारिज किया है और मानहानि के मुआवजे के तौर पर 11 करोड़ रुपये की मांग की है।

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