Nandan Mishra

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निक जोनस शादी के बाद पत्नी प्रियंका चोपड़ा और साली परिणीति चोपड़ा के साथ गर्मी की छुट्टियों में एक साथ एंजॉय कर रहे हैं।...
17/07/2026

निक जोनस शादी के बाद पत्नी प्रियंका चोपड़ा और साली परिणीति चोपड़ा के साथ गर्मी की छुट्टियों में एक साथ एंजॉय कर रहे हैं। क्या आप विदेश में शादी करने के बारे में सोचते हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में साझा करें।

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17/07/2026

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निक्की पढ़ी लिखी खूबसूरत थीं. वे इस बेमेल शादी के लिए बिलकुल तैयार नहीं थीं, लेकिन मांबाप की गरीबी और उन के आंसुओं ने उन...
08/07/2026

निक्की पढ़ी लिखी खूबसूरत थीं. वे इस बेमेल शादी के लिए बिलकुल तैयार नहीं थीं, लेकिन मांबाप की गरीबी और उन के आंसुओं ने उन्हें समझौता करने को मजबूर कर दिया था.

शादी के कई महीनों तक निक्की बिलकुल गुमसुम बनी रहीं. उन की जिंदगी सोने के पिंजरे में कैद तोते की तरह हो गई थी.

हालांकि बाबू बंका सिंह निक्की की सुखसुविधा का काफी ध्यान रखते थे, इस के बावजूद उम्र का फासला निक्की को खुलने नहीं दे रहा था.

मनोहरा घर का नौकर था. हमउम्र मनोहरा से बतियाने में निक्की को अच्छा लगता था. समय गुजरने के साथसाथ निक्की का जख्म भरता गया और वे खुल कर मनोहरा से हंसीठिठोली करने लगीं.

उस दिन बाबू बंका सिंह गांव की पंचायत में गए हुए थे. निक्की गपशप के मूड में थीं. सो, उन्होंने मनोहरा को अंदर बुला लिया.

निक्की मनोहरा की आंखों में आंखें डाल कर बोलीं, ‘‘अच्छा, बता उस दिन मोबाइल फोन पर मेरी मां से क्या बातें हुई थीं?’’

मनोहरा मन ही मन मुसकराया, फिर अनजान बनते हुए कहने लगा, ‘‘कह रही थीं कि मैं आप का जरा भी खयाल नहीं रखता.’’

‘‘हांहां, मेरी मां ठीक ही कह रही थीं. मेरे सामने तुम शरमाए से खड़े रहते हो. तुम्हीं बताओ, मैं किस से बातें करूं? बाबू बंका सिंह की मूंछें और लाललाल आंखें देख कर ही मैं डर जाती हूं. उन की कदकाठी देख कर मुझे अपने काका की याद आने लगती है. एक तुम्हीं हो, जो मुझे हमदर्द लगते हो…’’

इस बेमेल शादी पर गांव वाले तो थूथू कर ही रहे थे. खुद मनोहरा को भी नहीं सुहाया था, पर उस की हैसियत हमदर्दी जताने की नहीं थी. सो, वह चुपचाप निक्की की बात सुनता रहा...आगे की कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट बॉक्स मे दिए लिंक पर क्लिक करें 👇

सब्र का फल मीठा होता है , पर कुछ फल तोड़ने का मज़ा ही अलग है ..... .....🤣🤣🫶😌 , ख़ुश रहा करो फल की इच्छा मत करो , कर्म करो...
07/07/2026

सब्र का फल मीठा होता है , पर कुछ फल तोड़ने का मज़ा ही अलग है ..... .....🤣🤣🫶😌 ,
ख़ुश रहा करो फल की इच्छा मत करो , कर्म करोगे तो फल मिलेगा ......आज नहीं तो कल ............ 😊

आज पूरे दफ्तर में अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी. कई हफ्तों से चल रही चटपटी गपशप को अचानक विराम लग गया था. सुबह दफ्तर में आत...
07/07/2026

आज पूरे दफ्तर में अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी. कई हफ्तों से चल रही चटपटी गपशप को अचानक विराम लग गया था. सुबह दफ्तर में आते ही एकदूसरे से मिलने पर हाय, हैलो, नमस्ते की जगह हर किसी की जबान पर निदेशक, महेश पुरी का ही नाम था. हर एक के हाथ में अखबार था जिस में महेश पुरी की आत्महत्या की खबर छपी थी. महेश पुरी अचानक ऐसा कदम उठा लेंगे, ऐसा न उन के घर वालों ने सोचा था न ही दफ्तर वालों ने.

वैसे तो इस दुनिया से जाने वालोें की कभी कोई बुराई नहीं करता, लेकिन महेश पुरी तो वास्तव में एक सज्जन व्यक्ति थे. उन के साथ काम करने वालों के दिल में उन के लिए इज्जत और सम्मान था. 30 वर्षों के कार्यकाल में उन से कभी किसी को कोई शिकायत नहीं रही. महेश पुरी बहुत ही सुलझे हुए, सभ्य तथा सुसंस्कृत व्यक्ति थे. कम बोलना, अपने मातहत काम करने वालों की मदद करना, सब के सुखदुख में शामिल होना तथा दफ्तर में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना उन के व्यक्तित्व के विशेष गुण थे.

लगभग 6 महीने पहले उन की ब्रांच में कविता तबादला हो कर आई थी. कविता ज्यादा दिनों तक एक जगह टिक कर काम कर ही नहीं सकती थी. वह अपने आसपास किस्से, कहानियों, दोस्तों और संबंधों का इतना मजबूत जाल बुन लेती कि साथ काम करने वाले कर्मचारी दफ्तर और घर को भूल कर उसी में उलझ जाते. लेकिन जब विभाग के काम और अनुशासन की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती तो कविता का वहां से तबादला कर दिया जाता. कविता जिस भी विभाग में जाती, वहां काम करने वाले पुरुष मानो हवा में उड़ने लगते. हंसहंस कर सब से बातें करना, चायपार्टियां करते रहना, अपनी कुरसी छोड़ कर किसी भी सीट पर जा बैठना कविता के स्वभाव में शामिल था. ऐसे में दिन का पता ही नहीं लगता कब पंख लगा कर उड़ जाता. कविता चीज ही ऐसी थी, खूबसूरत, जवान, पढ़ीलिखी तथा आधुनिक विचारधारा वाली फैशनेबल लड़की.

नित नए फैशन के कपड़े पहन कर आना, भड़कीला मेकअप, ऊंची हील के सैंडिल, कंधों तक झूलते घने काले केश, गोराचिट्टा रंग, गठा शरीर और 5 फुट 3 इंच का कद, ऐसी मोहक छवि और ऐसा व्यवहार भला किसे आकर्षित नहीं करेगा? सहकर्मी भी दिनभर उस से रस लेले कर बातें करते. कोई कितना भी कम बोलने वाला हो, कविता उसे कुछ ही दिनों में रास्ते पर ले आती और वह भी दिनभर बतियाने लगता. वह जिस की भी सीट पर जाती, उस सहकर्मी की गरदन तन जाती लेकिन शेष सहकर्मियों की गरदनें भले ही फाइलों पर झुकी हों परंतु उन के कान उन दोनों की बातों पर ही लगे रहते.

इतना ही नहीं, कविता जिस सैक्शन में होती वहां के काम की रिपोर्ट खराब होने लगती क्योंकि उस के रहते दफ्तर में काम करने का माहौल ही नहीं बन पाता. बस पुरुष कर्मचारियों में एक होड़ सी लगी रहती कि कौन कविता को पहले चाय क औफर करता है और कौन लंच का. किस का निमंत्रण वह स्वीकार करती है और किस का ठुकरा देती है. हालांकि कविता को उस के इस खुले व्यवहार के बारे में समझाने की कोशिश बेकार ही साबित होती फिर भी उस की खास सहेली, रमा उसे अकसर समझाने की कोशिश करती रहती. लेकिन कविता ने कभी उस की एक नहीं सुनी. कविता का मानना था कि यह 21वीं सदी है, औरत और मर्द दोनों के बराबर अधिकार हैं. ऐसे में मर्दों से बात करना, उन के साथ चाय पीने, कहीं आनेजाने में क्या हर्ज है? आदमी कोई खा थोड़े ही जाते हैं? वह उन से बात ही तो करती है, प्यार या शादी के वादे थोड़े करती है जो मुश्किल हो जाएगी. रमा का कहना था कि यदि ऐसी बात है तो फिर वह आएदिन किसी न किसी की शिकायत कर के अपना तबादला क्यों करवाती रहती है? कविता सफाई देते हुए कहती कि इस में उस का क्या कुसूर, पुरुषों की सोच ही इतनी संकुचित है, कोई सुंदर लड़की हंस कर बात कर ले या उस के साथ चाय पी ले तो उन की कल्पना को पंख लग जाते हैं फिर न उन्हें अपनी उम्र का खयाल रहता है न समाज का...आगे की कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट बॉक्स मे दिए लिंक पर क्लिक करें 👇

सुगम बिस्तर पर नहीं था तो अनुभा बाहर की तरफ जाने वाले दरवाजे पर गई तो उस ने पाया दरवाजे की सांकल खुली हुई है. सुगम को अच...
07/07/2026

सुगम बिस्तर पर नहीं था तो अनुभा बाहर की तरफ जाने वाले दरवाजे पर गई तो उस ने पाया दरवाजे की सांकल खुली हुई है. सुगम को अचानक बाहर जाने की क्या जरूरत आ पड़ी. अनुभा यह सोच ही रही थी कि पास के कमरे से खुसुरफुसुर की आवाजें आईं. संभवतया सुलभा की बच्ची को कोई परेशानी हुई होगी. आशंकाओं से भरी अनुभा ने कुछ झिझकते हुए दरवाजा खोल दिया.

आंखों के सामने का दृश्य अविश्वसनीय था. सुगम और सुलभा अंतरंग प्रणय की अवस्था में थे. अनुभा को कुछ समझ में नहीं आया की वह क्या करे. उसे चक्कर सा आ गया, वह गिरने लगी. ‘सुगम…’ अनुभा गिरने से पहले पूरी ताकत लगा कर चीखी. अनुभा की चीख में इतनी तेजी तो थी ही कि वह प्रगत प्रताप और जैविका की नींद खोल सके.

‘‘यह तो अनुभा की आवाज है. पेट से है. कहीं कुछ गड़बड़,’’ कहते हुए आशंकित जैविका उठ बैठी.

‘‘चलो,चल कर कर देखते हैं,’’ प्रगत प्रताप बिस्तर छोड़ते हुए बोले.

तेज कदमों से दोनों सुगम के कमरे की तरफ चल दिए. चूंकि आगे वाले दरवाजे का सांकल खुला हुआ ही था, इसलिए ढकेलते ही खुल गया. कमरे में सुगम व अनुभा दोनों को न पा कर वे भी कमरों को जोड़ने वाले दरवाजे की तरफ दौड़े.

फर्श पर अनुभा को लगभग बेहोश व सुगम और सुलभा को साथ खड़ा देख कर प्रगत प्रताप और जैविका को माजरा समझते देर न लगी.

‘‘यह क्या सुगम? कितना नीचे गिर गए हो तुम? अपने बड़े भाई की पत्नी के साथ इस तरह के संबंध रखते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती,’’ प्रगत प्रताप सुगम को डांटते हुए बोले.

‘‘सुलभा तुम? तुम तो सुगम से बड़ी हो, उम्र में भी और ओहदे व मानमर्यादा में भी,’’ जैविका सुलभा को डांटते हुए बोली, ‘‘डायन भी सात घर छोड़ कर बच्चे खाती है.’’

‘‘वाह, सुगम, खूब नाम रोशन किया है हमारा. इंग्लिश स्कूल में तुम को शिक्षा दिलवाई थी परंतु देशी सभ्यता और संस्कृति को भूलने को नहीं कहा था. दुनिया को अब क्या मुंह दिखाऊंगा,’’ प्रगत प्रताप की आंखों में आंसू आ गए. आवाज भर्रा गई.

सुगम व सुलभा मुजरिमों की तरह सिर झुकाए खड़े थे. अब तक अनुभा भी कुछकुछ होश में आ गई थी.

प्रगत प्रताप इस शहर के जानेमाने उद्योगपति हैं. इन्होंने अपनी काबिलीयत के दम पर अपने पुरखों से विरासत में मिले ब्याजबट्टे के धंधे को छोड़ कर कारखाना डालने की हिम्मत की. और आज सफलता के उस मुकाम पर हैं जहां पहुंचने की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है. परिवार में पत्नी जैविका और 3 बच्चे हैं. सब से बड़ी लड़की सरला की शादी हो चुकी है जो अपनी ससुराल में सुखी है. उस से छोटा लड़का अगम है. अगम की उम्र 34 साल है. अगम की पत्नी का नाम सुलभा है और दोनों की शादी 5 साल पहले हुई है. इन दोनों की एक बेटी है जिस का नाम विधा है. सब से छोटा बेटा सुगम है जो लगभग 27 साल का है जो यह नई वाली फैक्टरी को संभालता है. सुगम भी शादीशुदा है और अभी पिछले महीने ही शादी की पहली सालगिरह बड़ी धूमधाम से मनाई है. इस की पत्नी अनुभा अभी एक माह की गर्भवती है...आगे की कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट बॉक्स मे दिए लिंक पर क्लिक करें 👇

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30/06/2026

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29/06/2026

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29/06/2026

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