29/05/2026
फर्जी जख्म कांड में दो साल से न्याय का इंतजार, उप मुखिया ने दी आत्मदाह की चेतावनी।
जांच में चिकित्सक द्वारा बनाए गए गलत ज़ख्म प्रतिवेदन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, उल्टा मिला प्रमोशन; मशरक स्वास्थ्य विभाग पर उठे बड़े सवाल
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सारण जिले के मशरक में फर्जी जख्म प्रतिवेदन मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंगरा पंचायत के उप मुखिया शिव कुमार यादव पिछले दो वर्षों से इंसाफ के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला। लगातार अनदेखी और कार्रवाई नहीं होने से नाराज उप मुखिया ने अब बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक के मुख्य गेट पर आत्मदाह करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इस घटना की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होगी। उप मुखिया शिव कुमार यादव ने कहा कि जिस चिकित्सक पर फर्जी जख्म प्रतिवेदन बनाने का आरोप था, उसे सिविल सर्जन द्वारा गठित जांच टीम ने जख्म प्रतिवेदन रिपोर्ट में गलत करार दिया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि दोषी चिकित्सक पर विभागीय कार्रवाई होगी, लेकिन हुआ ठीक इसके उल्टा। कार्रवाई करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित चिकित्सक को प्रमोशन देकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक का प्रभारी बना दिया। इस फैसले ने पूरे इलाके में गुस्सा पैदा कर दिया है। शिव कुमार यादव ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने कई बार अधिकारियों को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक हर स्तर पर उन्होंने अपनी बात रखी, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। उप मुखिया ने कहा कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है और दोषियों को बचाने का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जांच रिपोर्ट में चिकित्सक की गलती साबित हो चुकी है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर किसके दबाव में स्वास्थ्य विभाग चुप बैठा है? उप मुखिया ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक के प्रभारी डॉ अनंत नारायण कश्यप के खिलाफ कांड संख्या 31/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज है, इसके बावजूद अब तक कोई विशेष कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्वास्थ्य विभाग में कानून और नियम केवल आम लोगों के लिए हैं? यदि किसी सामान्य व्यक्ति पर प्राथमिकी दर्ज हो जाए तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन यहां मामला विभागीय अधिकारियों और चिकित्सकों से जुड़ा है, इसलिए सब कुछ दबा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार न्याय नहीं मिलने से वे मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान हो चुके हैं। एक जनप्रतिनिधि होकर भी जब उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, तो आम जनता की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उप मुखिया ने कहा कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य रहा। इससे साफ है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जांच में किसी चिकित्सक को दोषी पाया गया है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन कार्रवाई के बजाय प्रमोशन देना यह साबित करता है कि स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं बची है। लोगों का कहना है कि इससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सख्ती की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है। जब जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तब लोगों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठने लगता है। उप मुखिया शिव कुमार यादव ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि अब उनके पास आत्मदाह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि वे दो वर्षों से न्याय की भीख मांग रहे हैं, लेकिन हर जगह केवल निराशा हाथ लगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, नहीं तो वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक के मुख्य गेट पर आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। अब यह मामला केवल एक फर्जी जख्म प्रतिवेदन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता, प्रशासनिक निष्क्रियता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है। पूरे मशरक की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर दो वर्षों से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे उप मुखिया को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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