30/08/2026
दिव्या मित्तल ने यूं ही नहीं दिया इस्तीफा!
2013 बैच की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे की खबर ने स्वाभाविक तौर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक अधिकारी, जिसने अपनी कार्यशैली और फैसलों से जनता के बीच अलग पहचान बनाई, उसे भारतीय प्रशासनिक सेवा छोड़ने का फैसला लेना पड़ा?
दिव्या मित्तल को करीब से काम करते देखने वालों के लिए उनका इस्तीफा महज एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल है। अधिकारी के तौर पर उनकी कुछ कमियां रही होंगी, आखिर अधिकारी भी इंसान हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली में स्पष्टता, तेज निर्णय लेने की क्षमता और काम के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा चर्चा में रही।
मिर्जापुर से लेकर देवरिया तक उनकी तैनातियों को लेकर अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। देवरिया में उनके कार्यकाल और वहां के प्रशासनिक माहौल को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। कुछ चर्चाएं राजनीतिक दबाव से जुड़ी हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। लेकिन इतना सवाल जरूर उठता है कि अगर किसी ईमानदार और काम करने वाले अधिकारी को लगातार ऐसा माहौल मिले, जहां उसे अपने विवेक और नियमों के बजाय बाहरी दबावों के बीच काम करना पड़े, तो उसका मनोबल आखिर कब तक बना रह सकता है?
किसी अधिकारी का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का फैसला नहीं होता। कई बार उसके पीछे लंबे समय का मानसिक द्वंद्व, व्यवस्था से असहमति और काम करने के माहौल को लेकर निराशा छिपी होती है। कोई यूं ही आईएएस जैसी प्रतिष्ठित सेवा छोड़ने का फैसला नहीं करता।
दिव्या मित्तल के मामले में भी यही सबसे बड़ा सवाल है—क्या उन्होंने सिर्फ नौकरी छोड़ी है, या फिर उनके इस्तीफे के पीछे व्यवस्था से जुड़े कुछ ऐसे सवाल हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है?
देवरिया जैसे जिले में अधिकारियों के काम करने के माहौल को लेकर भी सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए। यदि जनहित में निर्णय लेने वाले अधिकारियों पर किसी भी स्तर से अनुचित दबाव पड़ता है, तो इसका सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था और जनता के भरोसे पर पड़ता है। यह किसी एक अधिकारी का नहीं, पूरी व्यवस्था का सवाल है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ऐसे मामलों को गंभीरता से देखना चाहिए। अफसरों से जवाबदेही जरूर होनी चाहिए, लेकिन उन्हें नियम-कानून और अपने विवेक के साथ निष्पक्ष होकर काम करने का वातावरण भी मिलना चाहिए। अधिकारी का मनोबल टूटेगा तो अंततः नुकसान जनता का ही होगा।
दिव्या मित्तल के पति गगनदीप भी अपनी प्रशासनिक कार्यशैली और व्यक्तित्व के लिए जाने जाते रहे हैं। ऐसे परिवार से आने वाली और स्वयं प्रशासन में उल्लेखनीय पहचान बनाने वाली अधिकारी का इस्तीफा निश्चित रूप से सामान्य घटना नहीं माना जा सकता।
इसलिए दिव्या मित्तल के इस्तीफे को सिर्फ एक खबर की तरह नहीं, बल्कि एक सवाल की तरह देखना चाहिए, आखिर वह कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिन्होंने एक सक्षम अधिकारी को इस मुकाम तक पहुंचाया?