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नीतीश कुमार जी को बिहार की बदहाली करने के लिए ही याद किया जाएगा .."नीतीश कुमार जी को याद किया जाएगा" कल से ही ठकुरसुहाती...
31/03/2026

नीतीश कुमार जी को बिहार की बदहाली करने के लिए ही याद किया जाएगा ..

"नीतीश कुमार जी को याद किया जाएगा" कल से ही ठकुरसुहाती करने वाले कई लोग इस बात की रट लगाए बैठे हैं , मगर ये बताना भूल रहे हैं कि " नीतीश कुमार जी को सृजन घोटाले , जहरीले मिड - डे मील से हुई मासूम बच्चों की मौतों , मुजफ्फरपुर महापाप , सीएजी के द्वारा उजागर 72 हजार करोड़ के घोटाले , सत्ता संरक्षण में फल - फूल रहे अवैध शराब के कारोबार की वजह से पूर्णतः विफल शराबबंदी , जहरीली शराब से हुई हजारों मौतों , विधानसभा परिसर में मिलीं शराब की बोतलों , अनगिनत हुई बलात्कार की घटनाओं को रोक पाने की विफलता , गद्दी बचाने के लिए आपराधिक पृष्ठ्भूमि वालों के समक्ष बेउर जेल में हाजिरी बजाने जाने , कुर्सी मोह में अपने ही कहे से बार - बार पलटने , विचारधारा - नैतिकता ताख पर रख समझौता करने , महिलाओं के संदर्भ में बार - बार की गयी अमर्यादित - अश्लील टिप्पणियों, सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं को असहज कर देने वाले आचरण , व्यवहार एवं हरकतों , बेलगाम भ्रष्टाचारी अधिकारियों को संरक्षण व् प्रश्रय देने, मुख्यमंत्री पद की गरिमा के प्रतिकूल अपने से छोटों व् अपने मातहत अधिकारियों के बार - बार पैर छूने , विधानसभा परिसर में पुलिस की भेष में गुंडों को बुलवा कर विपक्षी दलों के माननीय विधायकों पर हमला करवाने , 'किसी' को भोज का न्योता दे कर ऐन वक्त पर थाली खींच लेने, पूर्व महिला मुख्यमंत्री के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने , सरकारी खजाने को खाली कर देने, युवाओं व् छात्रों पर दमनात्मक कार्रवाई करवाने , पलायन रोकने और रोजगार सृजन में पूरी तरह से विफल रहने , बिहार को सबसे कुपोषित राज्य एवं प्रति व्यक्ति सबसे कम सालाना आय वाले राज्य का तमगा दिलाने के लिए ही जाना और याद जाएगा" ...

श्रद्धेय लालमुनी चौबे पिता हरवंश चौबे, जिला कैमुर, प्रखंड चैनपुर, ग्राम कुरई। यह नाम पता उस व्यक्ति का है जिनकी आज पुण्य...
26/03/2026

श्रद्धेय लालमुनी चौबे पिता हरवंश चौबे, जिला कैमुर, प्रखंड चैनपुर, ग्राम कुरई। यह नाम पता उस व्यक्ति का है जिनकी आज पुण्यतिथि है। उनको दिवंगत हुवे धीरे धीरे कई वर्ष ब्यतीत हो गया। कभी उन्होंने 1969 में जनसंघ पार्टी से उम्मीदवार के रुप में पहली बार दीपक छाप से चुनाव जीत बिहार की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी थी। इनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस विधानसभा से यह चार बार विधायक चुने गए। वर्ष 1995 में वे यहां से चुनाव हार गए। क्योंकि वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उनके क्षेत्र के मुसलमान नाराज थे। चैनपुर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा है। जिसका खामियाजा इनको भुगतना पड़ा। इसके बाद वे वर्ष 1996 में बक्सर लोकसभा से चुनाव लड़े। जहां से उनकी जीत का सफर प्रारंभ हुआ। अपनी इमानदारी के लिए वे हमेशा चर्चा में रहे।

सौ रुपये लेकर उतरे थे चुनाव मैदान में राजनीति में इमानदारी की मिसाल पेश करने वाले लालमुनी चौबे किसान के बेटे थे। उनके पास चुनाव लडऩे के लिए रुपये नहीं थे। पिता ने उन्हें राजनीति करने से मना किया। पर मां ने उन्हें सौ रुपये दिए। वे विधायक बने तो अपनी मां को दर्शन कराने मंदिर ले गए। यहां से उनकी राजनीति का सफल दौर प्रारंभ हुआ। अपने राजनीतिक जीवन में वे हमेशा कम खर्च में चुनाव जीतने वाले नेता के रुप में भी जाने जाते रहे।

1974 के आंदोलन में दिया था इस्तीफा वर्ष 1974 में जेपी का आंदोलन चरम पर था। लालमुनी चौबे पहले नेता थे। जिन्होंने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर आंदोलन में हिस्सा लिया। 1975 में जब देश में आपात काल लागू हुआ तो उन्हें वाराणसी से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने गंगा में छलांग लगा दी। तैर कर दूसरे घाट पर निकल गए। पर पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर चौका घाट जेल में रखा।

1977 में बने स्वास्थ्य मंत्री

जब बिहार में अगली सरकार बनी तो उन्हें राज्य का स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था। उस समय कर्पूरी ठाकुर सीएम थे। बाद में दलगत असंतोष के कारण उनकी जगह रामसुंदर दास बिहार के सीएम बने। इस दौर के राजनेतओं में लालमुनी चौबे सबसे स्वच्छ छवि के युवा नेता माने जाते थे।

अख्खड व फक्कड़ स्वभाव के थे चौबे लालमुनी चौबे का जन्म सरकारी दस्तावेजों के अनुसार 6 सितम्बर 1942 में हुआ था। छात्र राजनीति के दौरान ही उनका संपर्क अटल बिहारी वाजपेयी से हुआ। वे उनके काफी नजदीक रहे। उनको जानने वाले लोग बताते हैं कि स्व: चौबे स्वभाव से अख्खड़ थे। जिसका परिणाम रहा कि उनके राजनीतिक जीवन में कभी रुपये की लेनदेन आरोप नहीं लगा। वे कहीं भी, किसी के यहां रहने खाने में गुरेज नहीं करते थे। अर्श पर जाकर भी वे हमेशा फर्श पर सोते थे। चुनाव अभियान के दौरान वे हमेशा शहर के स्टेशन के पास स्थित चौरसिया लाज में ठहरते थे। छोटे कमरे में पलंग का बिस्तर हटा कंबल बिछा बेड़ पर सो जाते थे। फक्कड़ का यह उनका स्वभाव आजीवन बना रहा।

अपनों को भी नहीं दी तरजीह

बिहार भाजपा की राजनीति में वे कद्दावर नेता थे। बावजूद इसके उन्होंने कभी भी अपनों को राजनीतिक लाभ नहीं दिलाया। जिसका नतीजा यह है कि आज उनके दौर या उनके बाद राजनीति में आए हर बड़े नेता के परिवार से लेकर बेटे तक राजनीति में सक्रिय हैं। पर उन्होंने कभी भी इसकी वकालत नहीं की। उनके बड़े पुत्र हेमंत चौबे जो पिछले तीन विधानसभा चुनाव से पार्टी का टिकट लेने के लिए लगे हैं। आजतक पिता ने उनकी पैरवी पार्टी से नहीं की। उनके बारे में एक आम धारणा थी। वे न तो किसी की पैरवी करते थे न किसी का विरोध। अपनी चुनावी सभा में भी उनके भाषण की शुरुआत इन वाक्यों से करते थे। जो वोट दे उसका भी भला, जाे न दे उसका भी भला।

जीत का दंभ व हार का नहीं होना चाहिए मलाल

वर्ष 2009 में जब वे लोकसभा चुनाव हार गए। मतगणना के अगले दिन शहर चर्चा चल रही थी। मतगणना में धांधली की बात उठ रही थी। राजद उम्मीदवार जगतानंद सिंह चुनाव जीत गए थे। दो हजार से भी कम मतों के अंतर से उनकी जीत हुई थी। जिसको लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रहीं थी। तब उन्होंने कहा था। राजनीति करने वाले व्यक्ति को कभी जीत का दंभ व हार का मलाल नहीं करना चाहिए। साथ ही परमात्मा में अपना विश्वास बनाए रखना चाहिए। आज जब लालमुनी चौबे हमारे बीच नहीं हैं। ऐसे में उनके साथ गुजरे कुछ पल हमारे सामने हैं। उनका जन्म 6 सितम्बर 1942 को हुआ था। मृत्यु 25 मार्च 2016 को। उनकी मौत पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी ने भी दुख जताया था। यह उनके राजनीतिक कद को दर्शाता है।
स्व लाल मुनी चौबे जी के पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन।
#जनसंघ

बिहार कैडर के 2017 बैच के एक अत्यंत ऊर्जावान और 'फील्ड-ओरिएंटेड' आईएएस (IAS) अधिकारी—तने सुल्तानिया (Tanai Sultania)। मू...
25/03/2026

बिहार कैडर के 2017 बैच के एक अत्यंत ऊर्जावान और 'फील्ड-ओरिएंटेड' आईएएस (IAS) अधिकारी—तने सुल्तानिया (Tanai Sultania)। मूल रूप से लखनऊ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले तने जी अपनी सादगी, तकनीकी दक्षता और जनता के बीच जाकर समस्याओं को हल करने की अपनी अनूठी शैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बिहार के विभिन्न पदों पर रहते हुए शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तने सुल्तानिया जी को एक ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाना जाता है, जो 'नवाचार' (Innovation) और 'त्वरित कार्रवाई' में विश्वास रखते हैं। विशेष रूप से दरभंगा और पटना में उनके द्वारा किए गए कार्यों की काफी चर्चा रही है।

प्रमुख गौरवपूर्ण उपलब्धियाँ और योगदान:
* 2017 बैच के मेधावी आईएएस: तने जी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की और उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ। अपनी पहली पोस्टिंग से ही उन्होंने अपनी कार्यकुशलता से विभाग में अपनी पहचान बना ली थी।
* नगर आयुक्त, दरभंगा (Municipal Commissioner): दरभंगा नगर निगम के नगर आयुक्त के रूप में उनके कार्यकाल को शहर की सफाई व्यवस्था और अतिक्रमण मुक्त अभियान के लिए याद किया जाता है। उन्होंने 'स्मार्ट सिटी' की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए और निगम की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाया।
* पटना में सहायक समाहर्ता और महत्वपूर्ण भूमिका: पटना में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने राजस्व, भूमि सुधार और विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में गहरी रुचि दिखाई। वे अक्सर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) के लिए जाने जाते हैं, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचे।
* शिक्षा और आंगनवाड़ी सुधार: वे बच्चों की शिक्षा और पोषण के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। उन्होंने स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने के लिए कई बार सीधे फील्ड में जाकर शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद किया है।
* सोशल मीडिया और जन-जुड़ाव: तने सुल्तानिया जी तकनीक प्रेमी हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से भी जनता की शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने का प्रयास करते हैं। उनकी छवि एक 'यूथ आइकॉन' और एक 'सुलभ प्रशासक' की है।
"प्रशासन की असली सफलता फाइलों के निस्तारण में नहीं, बल्कि जनता के चेहरे पर आई मुस्कान और उनके जीवन में हुए वास्तविक सुधार में है।" — तने सुल्तानिया जी की कार्यशैली इसी दर्शन का प्रतिबिंब है।

संक्षिप्त आंकड़े (Quick Glance):
* पहचान: 2017 बैच के आईएएस अधिकारी (बिहार कैडर)।
* मूल निवास: लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
* विशेषता: नवाचारी नेतृत्व, तकनीकी कौशल, जन-सुलभ छवि, स्पष्टवादिता।
* योगदान: दरभंगा और पटना में शहरी विकास एवं प्रशासनिक सुधारों का सफल प्रबंधन।
* विरासत: एक ऐसे युवा प्रशासक के रूप में जिन्होंने 'प्रोफेशनलिज्म' को सरकारी सेवा का अभिन्न हिस्सा बनाया है।
तने सुल्तानिया जी बिहार की नौकरशाही के उन चमकते सितारों में से हैं, जिनसे राज्य के भविष्य की उज्ज्वल उम्मीदें जुड़ी हैं। उनकी निष्ठा और प्रशासनिक सूझबूझ को हमारा सादर नमन!

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अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा था—भारत के बैंकों में हमारे ₹60,000 करोड़ पड़े हैं और यदि वे भारत के काम आ रहे हैं तो हमें ख...
07/03/2026

अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा था—
भारत के बैंकों में हमारे ₹60,000 करोड़ पड़े हैं और यदि वे भारत के काम आ रहे हैं तो हमें खुशी है। भारत हमारा करीबी मित्र है।

यह बात डॉ. Manmohan Singh की सरकार के कार्यकाल की है।

ईरान के भारत के पास “₹60,000 करोड़” — मामला क्या था? (पृष्ठभूमि)

भारत, Iran से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदता था।

भारत ने ईरान से तेल खरीदा, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों (US Sanctions) के कारण डॉलर में भुगतान करना संभव नहीं था।

फिर भुगतान कैसे हुआ?
एक विशेष व्यवस्था की गई — भुगतान भारतीय रुपये (₹) में किया जाने लगा।

ये रुपये भारतीय बैंकों में जमा किए जाते थे, जैसे:
• UCO Bank
• IDBI Bank

इन खातों में ईरान के हजारों करोड़ रुपये जमा हो गए थे।

₹60,000 करोड़ का मतलब क्या था?

ये पैसे भारत ने रोके नहीं थे, बल्कि ईरान के नाम पर भारतीय बैंकों में जमा थे।

उस समय ये दोनों बैंक आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में थे, और कहा जाता है कि ईरान के इन जमा रुपयों से उन्हें कुछ हद तक स्थिरता मिली।

अनुमानित राशि: लगभग ₹50,000 से ₹60,000 करोड़।

बाद में ईरान इन रुपयों का क्या करता था?

ईरान इन रुपयों का उपयोग भारत से वस्तुएँ खरीदने के लिए करता था, जैसे:
• दवाइयाँ
• चावल
• चाय
• खाद्यान्न
• औद्योगिक सामान

आज भी इस रकम का कुछ हिस्सा व्यापार के माध्यम से धीरे-धीरे उपयोग में लाया जा रहा है।

इस प्रकार, अयातुल्ला खामनेई का भारत के प्रति सकारात्मक रुख इसी आर्थिक सहयोग पर आधारित था, जिसकी पृष्ठभूमि में भारत-ईरान संबंध और ऐतिहासिक मैत्री (जिसकी जड़ें Jawaharlal Nehru के समय से मानी जाती हैं) शामिल रही है।

🚨 बड़ी खबर: भोजपुर के 20 निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा, गिरेगी गाज! 🚨भोजपुर (आरा): शिक्षा विभाग ने जिले क...
26/02/2026

🚨 बड़ी खबर: भोजपुर के 20 निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा, गिरेगी गाज! 🚨
भोजपुर (आरा): शिक्षा विभाग ने जिले के 20 निजी विद्यालयों के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई शुरू कर दी है। छात्रों की APAAR ID (अपार आईडी) बनाने में घोर लापरवाही बरतने और 'शून्य' रिपोर्ट देने के कारण इन स्कूलों की प्रस्वीकृति (Recognition) और U-DISE कोड रद्द करने के लिए राज्य कार्यालय को अनुशंसा भेज दी गई है। 🚫🏫
📉 राज्य में भोजपुर का पिछड़ा प्रदर्शन
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा में यह सामने आया कि APAAR ID निर्माण के मामले में बिहार के सभी जिलों में भोजपुर 35वें स्थान पर है। जिले की इस खराब रैंकिंग का मुख्य कारण निजी स्कूलों की लापरवाही मानी जा रही है।
📋 इन 20 स्कूलों पर गिरी गाज (ब्लॉकवार सूची):
शिक्षा विभाग ने कंडिका-1 सी के तहत निम्नलिखित स्कूलों पर कार्रवाई की अनुशंसा की है:
📍 आरा सदर:
देव पब्लिक स्कूल
दी नोबिली स्कूल
फ्लावर किड्स पब्लिक स्कूल
शांति निकेतन रेसिडेंटल स्कूल
लोटस इंटरनेशनल स्कूल
स्मार्ट किड्स प्री-स्कूल
सनराइज कॉन्वेंट इंटरनेशनल स्कूल
📍 पीरो प्रखंड:
डीएवी प्राइमरी स्कूल
डीएवी जीडी अनिल पांडेय पब्लिक स्कूल
जेडी पब्लिक स्कूल
टीएलएसएम वर्ल्ड स्कूल
आवासीय बाल उत्कर्ष प्रतियोगिता निकेतन स्कूल
📍 कोईलवर प्रखंड:
लक्ष्मी नारायण पब्लिक स्कूल
एसके सेंट्रल पब्लिक स्कूल
📍 उदवंतनगर प्रखंड:
एनडीएसवी पब्लिक स्कूल (मारुति नगर पियनिया)
आरबीएस स्कूल
📍 अन्य प्रखंड:
बिहिया: न्यू यूनिक पब्लिक स्कूल
गड़हनी: आवासीय बाल शिक्षा निकेतन
जगदीशपुर: अल्फा इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल
अगिआंव: रेजिडेंशियल स्काईलार्क पब्लिक स्कूल
🔍 क्यों जरूरी है APAAR ID?
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) चंदन प्रभाकर ने बताया कि:
✅ यह छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए अनिवार्य है।
✅ इससे फर्जी मार्कशीट पर पूरी तरह रोक लगेगी।
✅ सभी सर्टिफिकेट और क्रेडिट 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स' में सुरक्षित रहेंगे।
✅ दस्तावेज खोने का डर नहीं रहेगा और सत्यापन (Verification) आसान होगा।
⚠️ अंतिम चेतावनी!
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब या कार्य में प्रगति नहीं दिखी, तो बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के माध्यम से इन स्कूलों का यू-डाइस कोड और मान्यता समाप्त कर दी जाएगी।
अभिभावक ध्यान दें: यदि आपका बच्चा इनमें से किसी स्कूल में पढ़ता है, तो स्कूल प्रबंधन से तुरंत संपर्क करें। ✋📑
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आदित्यनाथ का चरित्र प्रमाण पत्र,यह मोदी के उत्तराधिकारी माने जा रहे(वैसे तो लोकतंत्र में कोई उत्तराधिकारी नहीं होता )धार...
26/02/2026

आदित्यनाथ का चरित्र प्रमाण पत्र,
यह मोदी के उत्तराधिकारी माने जा रहे(वैसे तो लोकतंत्र में कोई उत्तराधिकारी नहीं होता )

धारा 147, धारा 148, धारा 295, धारा 297,धारा 153A, धारा 307, धारा 506, धारा 302, धारा 427,धारा 504,धारा 149,धारा 307,धारा 336, धारा 427, धारा 147, धारा 148, धारा 133A, धारा 285, धारा 297, धारा 133A, धारा 147, धारा 295, धारा 297, धारा 506 ।

दुनिया का पहला और आखरी इंसान होगा जो अपनी ऊपर चले मुकदमा को खुद Power में आकर Face नहीं किया बल्कि वापस लेने लगा।

शंकराचार्य अवमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का मुकदमा लिखवाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महराज का मूल नाम आशुतोष पांडेय है। ये श...
24/02/2026

शंकराचार्य अवमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का मुकदमा लिखवाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महराज का मूल नाम आशुतोष पांडेय है। ये शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनके ऊपर 21 केस दर्ज है। इसमें यूपी गोवध अधिनियम, एंटी करप्शन एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, आईटी एक्ट, रेप, धोखाधड़ी, धमकी के केस हैं। सभी मामलों में चार्जशीट भी लगाई जा चुकी है। आशुतोष हिस्ट्रीशीटर हैं, हिस्ट्रीशीट नंबर 76 A है।

आशुतोष से जुड़े इन रिकॉर्ड को शंकराचार्य के शिष्य योगीराज ने पब्लिक और मीडिया के सामने रखा है। शंकराचार्य ने भी मीडिया से बात करते हुए आशुतोष को हिस्ट्रीशीटर बताया था।

पुलिस उन्हें हिस्ट्रीशीटर बनाती है जो बार-बार अपराध करता है। सुधरने की संभावना नहीं दिखती। गैंग बनाकर अपराध करते हैं।

आशुतोष के बारे में एक जानकारी यह है कि वह 2022 में जगतगुरू रामभद्राचार्य से दीक्षा ली। फिर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष बन गए।

फिलहाल प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद व 2-3 अन्य लोगों पर यौन शोषण की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

प्रातः स्मरणीय आदरणीय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से प्रेम की वजह सिर्फ एक यह तस्वीर भी हो सकती है। उनकी गोद में उनके श...
24/02/2026

प्रातः स्मरणीय आदरणीय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से प्रेम की वजह सिर्फ एक यह तस्वीर भी हो सकती है। उनकी गोद में उनके शिष्य और गंगा के लिए अपनी जीवन लीला समाप्त कर देने वाले प्रो जी डी अग्रवाल हैं।

उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय से स्नातक और अमेरिका के बर्कले स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी। वो आईआईटी कानपुर में सिविल इंजीनियरिंग और इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग के एचओडी थे। अपना पूरा जीवन उन्होंने मां गंगा की स्वच्छता के लिए समर्पित कर दिया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जी.डी. अग्रवाल के आध्यात्मिक गुरु थे। जब प्रोफेसर डॉ. जी.डी. अग्रवाल ने संन्यास लिया, तो उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से ही संन्यास की दीक्षा ली थी, जिसके बाद उनका नाम स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद रखा गया। जब अग्रवाल सर ने अपना जीवन छोड़ा अपनी वसीयत में अपने गुरु से अपेक्षा करी कि वह गंगा मां की स्वच्छता के लिए अपना अभियान जारी रखेंगे।

नफरती, सत्ता लोभी कभी एक संत के तप को नहीं समझेंगें। धिक्कार है उस हिन्दू पर जो अपने निरपराध संत के ऊपर दोषारोपण के बावजूद खामोश है।

जीडी अग्रवाल का देहांत 11 अक्टूबर 2018 को ऋषिकेश के एम्स अस्पताल में हुआ था। उनकी मौत का कारण हृदय अटैक बताया गया था, जो उनके 111 दिनों के अनशन के कारण हुआ था। अग्रवाल जी गंगा नदी को बचाने के लिए अनशन पर बैठे थे और उनकी मांग थी कि सरकार गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कानून बनाए !

अग्रवाल जी को 10 अक्टूबर को पुलिस ने जबरन उठाकर एम्स अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उनकी तबीयत बिगड़ गई और अगले दिन उनकी मौत हो गई। उनके गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उनकी मौत को हत्या बताया था और आरोप लगाया था कि खनन माफिया के इशारे पर उनकी हत्या की गई है ।

तलाक के सालों बाद DM बनी पत्नी पहुंची बैद्यनाथ धाम, सामने भीख मांग रहा था अपाहिज पति; फिर जो हुआ...!!महादेव के दरबार में...
23/02/2026

तलाक के सालों बाद DM बनी पत्नी पहुंची बैद्यनाथ धाम, सामने भीख मांग रहा था अपाहिज पति; फिर जो हुआ...!!

महादेव के दरबार में न्याय: जब DM पत्नी को सालों बाद मिला अपना अपाहिज पति
प्रस्तावना: नियति का लेखा-जोखा कहते हैं कि बैद्यनाथ धाम में महादेव के दर्शन के लिए वही आता है जिसे बाबा बुलाते हैं। लेकिन कभी-कभी बाबा सिर्फ दर्शन देने के लिए नहीं, बल्कि कर्मों का हिसाब चुकता करने के लिए बुलाते हैं। यह कहानी है “शालिनी” और “राघव” की। 10 साल पहले एक गलतफहमी और गरीबी ने इन्हें अलग कर दिया था। आज शालिनी उस जिले की DM (District Magistrate) है, और राघव उसी मंदिर की चौखट पर एक ऐसी हालत में है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती...!!

10 साल पहले राघव और शालिनी एक छोटे से कस्बे में रहते थे। राघव एक फैक्ट्री में काम करता था और शालिनी का सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का था। राघव ने अपनी पूरी जमा-पूंजी और रातों की नींद शालिनी की पढ़ाई पर कुर्बान कर दी। लेकिन एक दिन फैक्ट्री में हुए एक भीषण हादसे में राघव ने अपने दोनों पैर खो दिए...!!

अपाहिज होने के बाद राघव को लगा कि वह अब शालिनी के लिए सिर्फ एक बोझ बन जाएगा। उसी समय शालिनी के परिवार ने उस पर दबाव डाला कि वह एक ‘अपाहिज’ के साथ अपनी जिंदगी बर्बाद न करे। राघव ने एक कठोर फैसला लिया। उसने शालिनी से कहा कि वह अब उससे प्यार नहीं करता और उसे किसी अमीर लड़की के साथ रहना है। शालिनी ने राघव को पत्थर दिल समझा और नफरत के साथ घर छोड़ दिया। तलाक के बाद शालिनी ने खुद को पढ़ाई में झोंक दिया और अंततः DM बन गई...!!

सावन का महीना था। बैद्यनाथ धाम (Deoghar) में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी। शालिनी, जो अब उस क्षेत्र की कद्दावर DM थी, सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए मंदिर परिसर पहुँची। लाल बत्ती की गाड़ी, पुलिस का काफिला और चारों तरफ “मैडम साहिबा” के नारे। शालिनी का रुतबा देखकर कोई नहीं कह सकता था कि इस सख्त अधिकारी के अंदर एक टूटा हुआ दिल भी धड़कता है...!!

शालिनी मंदिर की सीढ़ियों की तरफ बढ़ रही थी कि अचानक उसकी नजर मंदिर के एक कोने में पड़े एक शख्स पर पड़ी। वह शख्स एक पुरानी लकड़ी की रेहड़ी (skate-board) पर बैठा था और अपने हाथों के सहारे घिसट रहा था...!!

शालिनी के कदम वहीं रुक गए। पुलिस वाले उसे आगे बढ़ने के लिए कह रहे थे, लेकिन शालिनी की नजरें उस ‘अपाहिज’ शख्स पर जमी थीं। वह शख्स फटे-पुराने कपड़ों में था, चेहरा धूल से भरा था, लेकिन उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी जो कभी शालिनी की दुनिया हुआ करती थी...!!

वह राघव था। शालिनी का पूर्व पति। वह शख्स जिसने शालिनी को ऑफिसर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था, आज मंदिर के बाहर भक्तों द्वारा फेंके गए सिक्कों को इकट्ठा कर रहा था...!!

शालिनी के हाथ कांपने लगे। उसने अपना चश्मा हटाया और धीरे से पुकारा— “राघव?...??

राघव ने जैसे ही वह आवाज सुनी, उसका शरीर सुन्न हो गया। उसने सिर उठाकर देखा—सामने जिले की सबसे बड़ी अधिकारी खड़ी थी। राघव ने अपनी नजरें झुका लीं और अपनी रेहड़ी को तेजी से पीछे धकेलने लगा। वह नहीं चाहता था कि उसकी ‘अफसर’ पत्नी उसे इस हाल में देखे...!!

शालिनी दौड़कर उसके पास गई और उसके सामने सड़क पर ही घुटनों के बल बैठ गई। “मैडम, आप नीचे मत बैठिए, कपड़े खराब हो जाएंगे,” राघव ने धीमी आवाज में कहा...!!

शालिनी चीख पड़ी— “ये क्या हाल बना रखा है तुमने? और वह सब झूठ क्यों बोला था कि तुम किसी और के साथ रहना चाहते हो?...??

तभी पास ही खड़ा एक पुजारी बोला— “मैडम, आप इस गरीब को जानती हैं? ये पिछले 5 सालों से यहाँ है। जितना भी पैसा इसे भीख में मिलता है, वह सब ये चुपचाप उन लड़कियों की पढ़ाई के लिए दान कर देता है जिनके पास पैसे नहीं होते। ये कहता है कि इसकी पत्नी भी एक बहुत बड़ी अफसर है और उसे उस पर गर्व है...!!

शालिनी को अपनी नफरत पर पछतावा होने लगा। उसे समझ आया कि राघव ने 10 साल पहले वह नाटक सिर्फ इसलिए किया था ताकि शालिनी एक अपाहिज पति की सेवा में अपनी जिंदगी बर्बाद न करे और अपना सपना पूरा कर सके। उसने अपनी खुशियाँ कुर्बान कर दीं ताकि शालिनी एक बड़ी अधिकारी बन सके...!!

शालिनी ने वहीं महादेव के मंदिर के सामने सबके सामने राघव का हाथ पकड़ा। उसने अपने सुरक्षाकर्मियों से कहा— “गाड़ी लाओ...!!

राघव ने मना किया— “शालिनी, तुम एक DM हो। तुम्हारा रुतबा, तुम्हारी इज्जत… समाज क्या कहेगा कि एक ऑफिसर का पति एक भिखारी है?...??

शालिनी ने पलट कर जवाब दिया— “समाज ने मुझे ऑफिसर नहीं बनाया, तुमने बनाया है। और आज से यह DM तुम्हारी पत्नी बाद में है, तुम्हारी कर्जदार पहले है...!!

शालिनी राघव को अपनी सरकारी गाड़ी में बिठाकर अपने बंगले पर ले गई। उसने उसी दिन सबके सामने घोषणा की कि वह अपनी जिंदगी के सबसे बड़े नायक को वापस पा चुकी है। उसने राघव का इलाज करवाया और उसे वह सम्मान दिया जिसका वह हकदार था...!!

गाँव के लोग और मंदिर के श्रद्धालु यह मंजर देखकर रो पड़े। लोगों को यकीन हो गया कि बैद्यनाथ धाम में सिर्फ बीमारियाँ ठीक नहीं होतीं, बल्कि टूटे हुए रिश्ते और बिखरी हुई जिंदगियाँ भी फिर से जुड़ जाती हैं...!!

सच्चा प्यार और त्याग यह कहानी हमें सिखाती है कि:
दिखावा और पद क्षणभंगुर हैं, लेकिन त्याग और प्रेम अमर हैं...!!

किसी के खामोश फैसले के पीछे अक्सर बहुत बड़ा बलिदान छिपा होता है...!!

सफलता का असली स्वाद तब आता है जब आप उस इंसान के साथ हों जिसने आपको उस मुकाम तक पहुँचाने के लिए खुद को मिटा दिया...!!

आज बैद्यनाथ धाम की उन सीढ़ियों पर एक बोर्ड लगा है, जो लड़कियों की शिक्षा में मदद करता है। उस बोर्ड को शालिनी ने अपने पति राघव के नाम पर लगवाया है। महादेव के दरबार में न्याय हुआ था...!!

कहानी पसंद आई हो तो like comment share और follow जरूर करें जी 🙏🙏🙏

एपस्टीन फाइल्स में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के मालिक और बिल गेट्स एंड मिलिंडा फाउंडेशन के अध्यक्ष बिल गेट्स का भी नाम सामने आय...
19/02/2026

एपस्टीन फाइल्स में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के मालिक और बिल गेट्स एंड मिलिंडा फाउंडेशन के अध्यक्ष बिल गेट्स का भी नाम सामने आया है। अमेरिकी सरकार के जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी दस्तावेजों में बिल गेट्स और यौन शोषक तथा अपराधी जेफरी एपस्टीन के संबंधों का उल्लेख है। कुछ ईमेल में यह जिक्र है कि बिल गेट्स ने महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया था और इस संदर्भ में उनकी पूर्व पत्नी तथा गेट्स फाउंडेशन की पूर्व संयोजक मेलिंडा गेट्स ने भी शर्मिंदगी जताते हुए खेद प्रकट किया है।

जेफरी एपस्टीन से संबंधित लोगों के विरुद्ध पूरी दुनिया में आपत्ति दर्ज कराई जा रही है और उन्हें सार्वजनिक हित से जुड़े संस्थानों और कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है।

हैरानी की बात है कि अमेरिका जैसे देश में जहां नैतिकता पर काफ़ी बल दिया जाता है वहाँ पर बिल गेट्स अभी भी गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन हैं और उनके निर्देशन में यह संस्थान चलाया जा रहा है।

बिहार राज्य के सांसद के तौर पर मुझे यह जानकर काफ़ी आश्चर्य हुआ है कि बिल गेट्स की संस्था गेट्स फाउंडेशन बिहार सरकार के साथ कई नीतिगत पहलुओं पर अधिकृत तथा कुछ मामलों में गैर-अधिकृत तौर पर काम कर रही है।

यह बात भी सामने आई है कि गेट्स फाउंडेशन द्वारा नियुक्त किए गए लोग बिहार सरकार के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और विभागों के सहायक के तौर पर कार्यरत हैं। इन्हें गेट्स फाउंडेशन द्वारा लाखों रुपये प्रति माह वेतन दिया जा रहा है और इन्हें बिहार सरकार के कई विभागों से जुड़े अहम नीतिगत फैसलों और योजनाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है।

किसी विदेशी संस्था द्वारा नियुक्त लोगों की वरिष्ठ संवेदनशील अधिकारियों के कार्यालयों और विभागों में तैनाती, बिहार समेत देश की नीतिगत संप्रभुता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

गेट्स फाउंडेशन की बिहार सरकार के साथ कई नीतिगत पहलुओं पर साझेदारी है, किंतु इसकी मूल भावना को लेकर स्पष्टता नहीं है। पटना में गेट्स फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित सेंटर फॉर हेल्थ एवम एग्रीकल्चर पॉलिसी किस उद्देश्य से चलाया जा रहा है और राज्य के नीतिगत मामलों तथा योजनाओं की जानकारी गेट्स फाउंडेशन से क्यों साझा की जा रही है, यह एक बड़ा प्रश्न है।

अब जब गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन ही एपस्टाइन फाइल्स और यौन शोषण से संबंधित सवालों के घेरे में हैं, ऐसे में यह उचित होगा कि बिहार सरकार तत्काल प्रभाव से बिल गेट्स की संस्था गेट्स फाउंडेशन से दूरी बनाए और उनके द्वारा संचालित सेंटर फॉर हेल्थ एवम एग्रीकल्चर पॉलिसी से भी दूरी बनाए।

साथ ही, जिन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के साथ कार्य करने के लिए बिल गेट्स फाउंडेशन ने लाखों रुपये के वेतन पर सहायकों की नियुक्ति की है, उसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए।

यदि बिहार में गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधि वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के साथ कार्यरत हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि:

• उनकी नियुक्ति का वैधानिक आधार क्या है?
• क्या यह MoU (समझौता ज्ञापन) के तहत पारदर्शी प्रक्रिया से हुआ है?
• क्या संवेदनशील नीतिगत सूचनाओं की साझेदारी के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान हैं?
• क्या राज्य सरकार की संप्रभु नीति-निर्माण प्रक्रिया पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है?

मैं राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से माँग करता हूँ की तत्काल प्रभाव से बिल गेट्स और उसकी संस्थान गेट्स फाउंडेशन से बिहार सरकार सभी तरह के संबंधों को तत्काल प्रभाव से दूरी बनाते हुए ख़त्म करे।

बिहार की बेटियों से संबंधित नीतिगत निर्णयों में एक यौन शोषक की संस्था की सहभागिता को कभी भी स्वीकारा नहीं जा सकता।

सौजन्य से:-सुधाकर सिंह
सांसद: बक्सर लोकसभा

शास्त्रों में एक ऐसी भी विद्या है जिससे आप अपने (PIN)पिन को सुरक्षित और गोपनीय रख सकते हैं,  उस विद्या का नाम है "कटपयाद...
19/02/2026

शास्त्रों में एक ऐसी भी विद्या है जिससे आप अपने (PIN)पिन को सुरक्षित और गोपनीय रख सकते हैं, उस विद्या का नाम है "कटपयादी सन्ख्या विद्या"

●कटपयादि संख्या

हम में से बहुत से लोग अपना Password, या ATM PIN भूल जाते हैं इस कारण हम उसे कहीं पर लिख कर रखते हैं पर अगर वो कागज का टुकड़ा किसी के हाथ लग जाए या खो जाए तो परेशानी हो जाती
पर अपने Password या Pin No. को हम लोग “कटपयादि संख्या” से आसानी से याद रख सकते है।
“कटपयादि”( क ट प य आदि) संख्याओं को शब्द या श्लोक के रूप में आसानी से याद रखने की प्राचीन भारतीय पद्धति है

चूँकि भारत में वैज्ञानिक/तकनीकी/खगोलीय ग्रंथ पद्य रूप में लिखे जाते थे, इसलिये संख्याओं को शब्दों के रूप में अभिव्यक्त करने हेतु भारतीय चिन्तकों ने इसका समाधान 'कटपयादि' के रूप में निकाला।

कटपयादि प्रणाली के उपयोग का सबसे पुराना उपलब्ध प्रमाण, 869 AD में “शंकरनारायण” द्वारा लिखित “लघुभास्कर्य” विवरण में मिलता है

तथा “शंकरवर्मन” द्वारा रचित “सद्रत्नमाला” का निम्नलिखित श्लोक इस पद्धति को स्पष्ट करता है -
इसका शास्त्रीय प्रमाण -

नज्ञावचश्च शून्यानि संख्या: कटपयादय:।
मिश्रे तूपान्त्यहल् संख्या न च चिन्त्यो हलस्वर: ॥

[अर्थ: न, ञ तथा अ शून्य को निरूपित करते हैं। (स्वरों का मान शून्य है) शेष नौ अंक क, ट, प और य से आरम्भ होने वाले व्यंजन वर्णों द्वारा निरूपित होते हैं।
किसी संयुक्त व्यंजन में केवल बाद वाला व्यंजन ही लिया जायेगा। बिना स्वर का व्यंजन छोड़ दिया जायेगा।]

अब चर्चा करते हैं कि आधुनिक काल में इस की उपयोगिता क्या है और कैसे की जाए ?
कटपयादि – अक्षरों के द्वारा संख्या को बताकर संक्षेपीकरण करने का एक शास्त्रोक्त विधि है, हर संख्या का प्रतिनिधित्व कुछ अक्षर करते हैं जैसे

1 – क,ट,प,य
2 – ख,ठ,फ,र
3 – ग,ड,ब,ल
4 – घ,ढ,भ,व
5 – ङ,ण,म,श
6 – च,त,ष
7 – छ,थ,स
8 – ज,द,ह
9 – झ,ध
0-ञ,न,अ,आ,इ,ई,उ,ऊ,ऋ,ॠ,लृ,ए,ऐ, ओ,औ
【 नीचे कमेंट में दूसरा चित्र देखें】
हमारे आचार्यों ने संस्कृत के अर्थवत् वाक्यों में इन का प्रयोग किया, जैसे गौः = 3, श्रीः = 2 इत्यादि ।

इस के लिए बीच में विद्यमान मात्रा को छोड देते हैं । स्वर अक्षर ( vowel) यदि शब्द के आदि (starting) मे हो तो ग्राह्य ( acceptable) है, अन्यथा अग्राह्य (unacceptable) होता

जैसे समझिए कि मेरा ATM PIN 0278 है- पर कभी कभी संख्या को याद रखते हुए ATM में जाकर हम Confuse हो जातें हैं कि 0728 था कि 0278 ? यह भी अक्सर बहुत लोगों के साथ होता है, ये इन से बचने के उपाय हैं

जैसे ATM PIN के लिए कोई भी चार अक्षर वाले संस्कृत शब्द को उस के कटपयादि मे परिवर्तन करें ( उस शब्द को सिर्फ अपने ही मन मे रखें, किसी को न बताएं )

उदाहरण के लिए –

इभस्तुत्यः = 0461

गणपतिः = 3516

गजेशानः = 3850

नरसिंहः = 0278

जनार्दनः = 8080

सुध्युपास्यः = 7111

शकुन्तला = 5163

सीतारामः = 7625

इत्यादि ( अपने से किसी भी शब्द को चुन लें )
ऐसे किसी भी शब्द को याद रखें और तत्काल “कटपयादि संख्या” मे परिवर्तन कर के अपना ATM PIN आदि में प्रयोग करें ।

सत्य #सनातन धर्म की जय हो, यदि जानकारी अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करे 🚩🙏

"दीवारें टूट सकती हैं, लेकिन हौसले नहीं।" 🔥इतिहास गवाह है कि जैसलमेर का 'सोनार किला' सिर्फ पत्थरों से नहीं, बल्कि वीरों ...
19/02/2026

"दीवारें टूट सकती हैं, लेकिन हौसले नहीं।" 🔥
इतिहास गवाह है कि जैसलमेर का 'सोनार किला' सिर्फ पत्थरों से नहीं, बल्कि वीरों के खून और पसीने से बना है।
13वीं सदी (1290-1298) का वो दौर, जब अलाउद्दीन खिलजी के अहंकार को जैसलमेर के दरवाजे पर 8 साल तक इंतजार करना पड़ा।

भाटी शासक रावल जैतसी ने दिखा दिया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए समय और संसाधन मायने नहीं रखते, सिर्फ जिगर चाहिए।

जब अन्न का आखिरी दाना भी खत्म हो गया, तब भी किले का दरवाजा दुश्मन के लिए नहीं खुला। यह 8 साल का घेरा भारतीय इतिहास के सबसे कठिन और गौरवशाली अध्यायों में से एक है।

नमन है उन वीरों को जिन्होंने झुकने से बेहतर लड़कर अमर होना चुना। ⚔️

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