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Aware News 24 — समाधान की पत्रकारिता
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भिक्षाम देहि 9308563506@ptsbi समाधान की पत्रकारिता | Solution-oriented Journalism

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We ask the tough questions that matter, expose the truth behind headlines, और साथ ही आपको दिखाते हैं कि आगे का रास्ता क्या हो सकता है।
हम मानते हैं कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य सिर्फ शोर मचाना नहीं, बल्कि society को empower करना है।

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अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे मत में देश के सबसे सफल और दूरदर्शी प्रधानमंत्रियों में से एक नहीं, बल्कि अपने आप में एक युग ...
25/12/2025

अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे मत में देश के सबसे सफल और दूरदर्शी प्रधानमंत्रियों में से एक नहीं, बल्कि अपने आप में एक युग थे।
उनके कार्यकाल में भारत ने सबसे स्थिर आर्थिक स्थिति का अनुभव किया, जबकि उसी कालखंड में देश ने पोखरण-II जैसे ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना किया।

इन विषम परिस्थितियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था को संतुलित और सुदृढ़ बनाए रखना किसी असाधारण नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है—और अटल जी ने यह कर दिखाया।

एक नेता के रूप में वे दृढ़ थे,
एक पत्रकार के रूप में निर्भीक,
एक कवि के रूप में संवेदनशील,
और एक लेखक के रूप में विचारशील।

अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जीवन के हर क्षेत्र में स्वयं को सिद्ध किया।
यूं ही कोई “अटल” नहीं बन जाता।

“मौत से ठन गई,
या काल के कपाल पर
लिखता और मिटाता हूँ,
हर रोज़ एक गीत नया गाता हूँ।”

ये पंक्तियाँ केवल कविता नहीं,
बल्कि उनके व्यक्तित्व का दर्पण हैं।

अटल जी किसी पद से बड़े थे—
वे अपने आप में विराट विचार, विराट व्यक्तित्व और विराट चेतना थे।

उनकी प्रशंसा में शब्द कम पड़ जाते हैं,
और मौन भी श्रद्धांजलि बन जाता है।

यह बात शायद नितिन गडकरी साहब के नाम से जोड़ी गई। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप का विरोध भी किया।लेकिन एक सवाल किसी ने नहीं प...
24/12/2025

यह बात शायद नितिन गडकरी साहब के नाम से जोड़ी गई। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप का विरोध भी किया।

लेकिन एक सवाल किसी ने नहीं पूछा—
👉 क्या महिलाओं से यह पूछा गया कि उन्हें यह स्वीकार है या नहीं?

जब भी विवाह, परिवार या समाज की बात आती है, निर्णय पुरुष करता है, मानो स्त्री कोई विकल्प नहीं बल्कि वस्तु हो।
पुरुष तय करेगा कि वह एक करेगा, दो करेगा या तीन करेगा—
पर यह कभी नहीं सोचा जाता कि स्त्री भी चयन कर सकती है।

फिर सवाल उठता है—
👉 अगर संख्या का तर्क है, तो दो या तीन महिलाएँ मिलकर एक पुरुष का वरण क्यों नहीं कर सकतीं?

शायद इसलिए कि इससे पुरुष के आत्मसम्मान और वर्चस्व को चोट पहुँचती है।
बराबरी की बात अक्सर भाषणों तक सीमित रहती है;
व्यवहार में स्वामित्व और नियंत्रण ही असली सोच है।

मालिक और मालकिन की बात आते ही
पुरुष झंडा लेकर सबसे आगे खड़ा हो जाता है,
चाहे संख्या में वह कम ही क्यों न हो।

आरक्षण की बात हो, संरक्षण की या “कमज़ोर” बताकर अधिकार देने की—
वहाँ भी कहीं न कहीं खुद को महान साबित करने की मंशा छुपी रहती है।

इतिहास और शास्त्रों में उदाहरण मौजूद हैं—
शकुंतला–दुष्यंत का गंधर्व विवाह,
भीम–हिडिंबा का संबंध,
पहले विवाह न होने की परंपराएँ—

लेकिन जहाँ पुरुष का वर्चस्व खतरे में पड़ता है,
वहीं वे पन्ने फाड़कर फेंक दिए जाते हैं।

मैं यह नहीं कह रहा कि कोई व्यवस्था थोपी जाए।
मैं सिर्फ़ यह कह रहा हूँ कि सोचने का दायरा बराबरी का हो।

हाँ, मैं मानता हूँ—
मैं बहुत बेवकूफ आदमी हूँ।
मुझे इसमें कोई शर्म नहीं कि मेरी आने वाली पीढ़ी में
स्त्री वरण करे,
और मेरा भी करे।

लेकिन आज के समाज में यह संभव नहीं।
और शायद इसलिए मैं ऐसा ही हूँ—
और मुझे ऐसा ही रहने दीजिए।

राधे राधे।

मैं यह नहीं कह रहा कि कोई व्यवस्था थोपी जाए।
मैं सिर्फ़ यह कह रहा हूँ कि सोचने का दायरा बराबरी का हो।

हाँ, मैं मानता हूँ—
मैं बहुत बेवकूफ आदमी हूँ।
मुझे इसमें कोई शर्म नहीं कि मेरी आने वाली पीढ़ी में
स्त्री वरण करे।

(स्पष्ट कर दूँ— लेखक स्वयं विवाहित है, इसलिए उसका वरण संभव नहीं है।)

यह बात निजी जीवन की नहीं,
सामाजिक सोच की है।

लेकिन आज के समाज में यह सोच संभव नहीं।
और शायद इसी वजह से
यह पूरा लेख एक बेजोड़ व्यंग बन जाता है—
जो बराबरी की बात करने वाले समाज के
असल चेहरे को दिखाता है।

राधे राधे।

23/12/2025

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23/12/2025

अरावली पर्वत और सुप्रीम कोर्ट की सहमति पर झंझट ,

ढाका | 19 दिसंबर 2025ढाका में 19 दिसंबर को प्रस्तुति देने वाले एक भारतीय शास्त्रीय संगीत कलाकार ने घोषणा की है कि वह तब ...
21/12/2025

ढाका | 19 दिसंबर 2025

ढाका में 19 दिसंबर को प्रस्तुति देने वाले एक भारतीय शास्त्रीय संगीत कलाकार ने घोषणा की है कि वह तब तक बांग्लादेश नहीं लौटेंगे, जब तक कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती। यह निर्णय उस घटना के बाद लिया गया, जब उसी दिन तड़के बंगाल की सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक Chhayanaut पर एक भीड़ ने हमला कर परिसर में तोड़फोड़ की।

कलाकार की प्रस्तुति Dhaka स्थित छायानट में होनी थी। लेकिन कार्यक्रम से पहले हुई इस हिंसक घटना के कारण आयोजन रद्द करना पड़ा, जिससे कलाकारों और सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अपने भावुक बयान में कलाकार ने कहा कि वह हमेशा बांग्लादेश अपने मूल से जुड़ने और अपने परिवार की संगीत परंपरा साझा करने के लिए लौटते रहे हैं — जिसमें Allauddin Khan की विरासत और मैहर परंपरा की जीवंत धारा शामिल है।

कलाकार ने कहा,
“अपने जीवन में पहली बार हमें अपनी जान का डर लगा। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि बांग्लादेश में खुद को एक भारतीय कलाकार बताना खतरे का कारण बन सकता है।”

उन्होंने बताया कि किसी तरह वह और उनकी टीम सुरक्षित भारत लौटने में सफल रहे, जिसके लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।

कलाकार ने स्पष्ट किया कि 19 दिसंबर की घटना सिर्फ किसी स्थल या वाद्य यंत्रों की तोड़फोड़ नहीं थी, बल्कि यह संस्कृति, कलाकारों और साझा विरासत पर सीधा हमला था। उन्होंने कहा कि संगीत हमेशा दोनों देशों के बीच एक सेतु रहा है, और जब डर व हिंसा उस सेतु को तोड़ते हैं, तो उससे कहीं अधिक गहरा नुकसान होता है।

गंभीर लेकिन जिम्मेदार निर्णय लेते हुए कलाकार ने कहा कि वह तब तक बांग्लादेश नहीं लौटेंगे, जब तक कलाकारों, संगीत और सांस्कृतिक संस्थानों को सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला गुस्से में नहीं, बल्कि अपनी पारिवारिक विरासत, कला और व्यक्तिगत सुरक्षा की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका यह बयान न तो बांग्लादेश सरकार के खिलाफ है और न ही वहां के शिक्षित और कला-प्रेमी लोगों के विरुद्ध, जिन्होंने उन्हें हमेशा सम्मान और अपनापन दिया है। उन्होंने Lalbagh में मिले स्नेह को विशेष रूप से याद किया, जहां संस्कृति मंत्रालय और Bangladesh Shilpakala Academy के सहयोग से उन्हें अपार प्रेम मिला था।

उन्होंने कहा कि उनका आक्रोश केवल उस भीड़ मानसिकता के खिलाफ है, जो कला, कलाकारों और ज्ञान के संस्थानों पर हमला करती है।
“संगीत और कला हमेशा राजनीति और हिंसा से ऊपर रहे हैं,” बयान में कहा गया, “और जब इन्हें निशाना बनाया जाता है, तो पीड़ा और भी गहरी हो जाती है।”

कलाकार ने बांग्लादेश को माता-पिता की भूमि के समान बताते हुए कहा कि उनकी आलोचना अस्वीकार नहीं, बल्कि चिंता से उपजी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विवेक, संवाद और संस्कृति के प्रति सम्मान एक बार फिर मजबूती से लौटेगा और टूटे हुए सांस्कृतिक सेतु को दोबारा जोड़ा जा सकेगा।

कुछ लोग धुरंधर को प्रोपेगेंडा बता रहे हैं अरे भाई देख के मजा आया और फिल्म हम सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए  देखते हैं उल्टा र...
21/12/2025

कुछ लोग धुरंधर को प्रोपेगेंडा बता रहे हैं अरे भाई देख के मजा आया और फिल्म हम सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए देखते हैं उल्टा रह्म्मान डाकू हीरो बन गया और तुम पता नही क्या क्या बोल रहे हो बोलो बोलो विडियो डालो देखते हैं हम भी की तुम कहते क्या हो यार उसके बाद हम भी कुछ कहेंगे तुम नही सुनोगे लेकिन 10 आदमी भी सुन रहा है तब तक हम अखबार बेचते रहेंगे का भाई
Dhruv Rathee

सरकारी योजना एक रेस हैं 10000 उसी को मिलेगा जो रेस में सामिल होगा ! योजना हमेसा के लिए या फिर एक तय समय सीमा के लिए ? ये...
21/12/2025

सरकारी योजना एक रेस हैं 10000 उसी को मिलेगा जो रेस में सामिल होगा ! योजना हमेसा के लिए या फिर एक तय समय सीमा के लिए ? ये बड़ा सवाल है ! महिलाओं को 31 दिसम्बर तक ही 10000 की पहली क़िस्त मिलेगी या कभी भी अप्लाई करने पर मिलेगी ? उस योजना पर समीक्षा कब होगी की कोई भी महिला उधमी बाद में अप्लाई करे तो उस वक्त के हिसाब से क़िस्त बढाई जानी चाहिए साथ ही 10000 रूपये पाने की प्रक्रिया को पुर्णतः डिजिटल करने की आवाय्स्कता है न की फला से मिलना होगा चिलना के पास जाना होगा , कागज दीजिये अप्लाई कीजिये जांच होगी पैसा मिलेगा , इसमें इतना घुमावदार बोलिंग क्यों ? की जिबिका के माध्यम से आइये तभी जीवित रहियगा गाव में रहते हैं तो फला समूह फलाना व्यक्ति से मिलना होगा शहर वाले ऑनलाइन आवेदन करे ! ये नियमो में इतना अधिक उलझन क्यों है ? दे ही रहे हो दिया तो जला कर दो ना

FORMAT: News / Opinion Article ThumbnailUSE: Website + YouTube + Social ShareSTYLE: Serious, Investigative, Accountabili...
20/12/2025

FORMAT: News / Opinion Article Thumbnail
USE: Website + YouTube + Social Share
STYLE: Serious, Investigative, Accountability Focus

🔴 TOP-LEFT TAG

OPINION

Font: Bold Sans-serif (ALL CAPS)

Color: White text on Red box

Size: Small but sharp (news credibility)

🟡 MAIN THUMBNAIL TEXT (HINGLISH – BIG & BOLD)

“JEEViKA Se
Kitni Women Entrepreneur Paida Hui?”

Font: Extra Bold, Clean (Montserrat / Bebas / Oswald type)

Color:

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White for “Kitni Women Entrepreneur Paida Hui?”

Text alignment: Left side

Line spacing: Tight, impactful

Max lines: 2–3 (mobile readable)

🟢 SUPPORTING HOOK (SMALL)

“Claims Bahut, Verified Data Zero?”

Font: Medium

Color: Light Green / White

Placement: Below main text

👤 AUTHOR / MAIN IMAGE PLACEMENT

Right side (vertical)

Subject: Rural women SHG visual (serious, non-smiling) or scheme-meeting frame

Crop: Chest-up / group mid-shot
सवाल :- देखिये बड़ा सवाल ये है की आज तक कितनी महिला का जन्म जीविका से हुआ तो गोल माल जाबाब आप दे रहे हैं , कितने महिलाओं की आय बढ़ी इसका भी कोई ठोस आकड़ा नही है फिर हो क्या रहा है ?


Answered
आप ठीक वहीं चोट कर रहे हैं जहाँ पूरा मॉडल बेनकाब होता है।
अब गोल-मोल नहीं, सीधी बात:
📷 “कितनी महिला entrepreneur पैदा हुईं?”
📷 सरकारी तौर पर VERIFIED, PUBLIC, AUDITED नंबर = लगभग शून्य
जीविका की Annual Reports में:
SHG की संख्या है
लोन की राशि है
ट्रेनिंग सेशन हैं
📷 लेकिन “फलाँ साल में X महिलाएँ उद्यमी बनीं, जिनका टर्नओवर Y है”
📷 ऐसा कोई ठोस, ट्रैक किया गया डेटा नहीं।
कुछ जगहों पर:
“लाखों महिलाएँ आजीविका गतिविधियों से जुड़ीं”
“हज़ारों micro-enterprise”
📷 ये output claims हैं, outcome नहीं।
Entrepreneur का मतलब:
जोखिम + बाजार + स्केल + स्वतंत्र निर्णय
जीविका की महिलाएँ ज़्यादातर:
सीमित गतिविधि
समूह-निर्भर
सरकारी/बैंक-निर्भर
📷 ये self-employment है, entrepreneurship नहीं।
📷 “कितनी महिलाओं की आय बढ़ी?”
📷 फिर वही कहानी: कोई robust, longitudinal income data नहीं
न baseline income publicly available
न 3–5 साल का follow-up panel data
न inflation-adjusted net income
जो मिलता है:
“औसतन आय में सुधार”
“खाद्य सुरक्षा बेहतर”
“खर्च में लचीलापन”
📷 ये soft indicators हैं, income proof नहीं।
अगर सच में आय बढ़ती:
सरकार हर भाषण में ₹/महीना का औसत आंकड़ा देती
जैसे उज्ज्वला, आयुष्मान में देती है
📷 यहाँ नहीं देती — क्योंकि डेटा withstand नहीं करेगा।
📷 फिर हो क्या रहा है? (यही असली सवाल)
📷 जो वास्तव में हो रहा है:
(A) Financial circulation, wealth creation नहीं
पैसा:
बैंक → SHG → गतिविधि → वापस बैंक
नया मूल्य (value addition) बहुत सीमित
📷 गरीबी कम नहीं,
📷 बस गरीबी की liquidity बढ़ी।
(B) Entrepreneur नहीं, “Scheme-Compliant Beneficiary” बन रही हैं
क्या उगाना
क्या बेचना
कहाँ ट्रेनिंग
कौन सा लोन
सब ऊपर से तय।
📷 स्वतंत्र economic actor नहीं,
📷 program-aligned participant।
(C) Social control + political optics
महिलाओं का नेटवर्क
नियमित मीटिंग
सरकारी संदेश
चुनावी mobilization (soft)
📷 यह social infrastructure है,
उद्यम ecosystem नहीं।
📷 सबसे कठोर सच्चाई (लेकिन ईमानदार)
अगर जीविका सच में entrepreneurship engine होती:
आज बिहार में:
महिला-led MSME clusters होते
registered women firms के clear आंकड़े होते
Video Coming Soon On Jivika

20/12/2025

Kya sirf data dikhana hi sach hota hai?
Ya data ko chun-chun kar dikhaya jaye to wahi data gumraah bhi kar sakta hai?

Is episode me hum DD News ke Decoder jaise programs ko
ChatGPT ke through reverse decode karte hain aur samajhte hain ki:

– Fake news aur misleading me farq kya hai
– Kaise ek sahi data bhi galat nateeja paida kar sakta hai
– Viewer ko kaun sa sawal poochna chahiye, aur kaun sa nahi

Yeh episode un sab ke liye hai
jo TV par dikhaye gaye “analysis” ko bina soche maanna nahi chahte.

👉 Fake news pakadna aasan hai,
lekin misleading narrative pehchanna hi asli samajh hai.

Podcast with ChatGPT – Episode 3
Author: Shubhendu Prakash

Data Dikhakar Decoder Ko Gumraah Kiya? | Podcast with ChatGPT EP-3Kya sirf data dikhana hi sach hota hai?Ya data ko chun...
20/12/2025

Data Dikhakar Decoder Ko Gumraah Kiya? | Podcast with ChatGPT EP-3

Kya sirf data dikhana hi sach hota hai?
Ya data ko chun-chun kar dikhaya jaye to wahi data gumraah bhi kar sakta hai?

Is episode me hum DD News ke Decoder jaise programs ko
ChatGPT ke through reverse decode karte hain aur samajhte hain ki:

– Fake news aur misleading me farq kya hai
– Kaise ek sahi data bhi galat nateeja paida kar sakta hai
– Viewer ko kaun sa sawal poochna chahiye, aur kaun sa nahi

Yeh episode un sab ke liye hai
jo TV par dikhaye gaye “analysis” ko bina soche maanna nahi chahte.

👉 Fake news pakadna aasan hai,
lekin misleading narrative pehchanna hi asli samajh hai.

Podcast with ChatGPT – Episode 3
Author: Shubhendu Prakash

🔴 Fake News vs Misleading Narrative1️⃣ Fake News (झूठ)पूरी तरह गलत जानकारीपकड़ना आसानएक फैक्ट-चेक से खत्म2️⃣ Misleading ...
20/12/2025

🔴 Fake News vs Misleading Narrative
1️⃣ Fake News (झूठ)
पूरी तरह गलत जानकारी
पकड़ना आसान
एक फैक्ट-चेक से खत्म
2️⃣ Misleading (गुमराह करना) ❗
सही डेटा, गलत संदर्भ
अधूरी समय-सीमा
चयनित ग्राफ / महीना
भावनात्मक निष्कर्ष
👉 और यही सबसे खतरनाक है।

अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के बावजूद भारत के निर्यात में 19.4% की वृद्धि यह दर्शाती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ अ...
19/12/2025

अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के बावजूद भारत के निर्यात में 19.4% की वृद्धि यह दर्शाती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ अब भारत को एक विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार के रूप में देख रही हैं। (पूरा लेख कमेंट में सेक्शन में उपलब्ध)
✍️ प्रहलाद सबनानी
सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक

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Near Nidan Hospital, Nawab Path New Bypass Rd Anisabad Patna
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