20/05/2026
6 महीने बीत गए, वादे कहाँ गए?........................................
बिहार में NDA की नई सरकार को बने 6 महीने (आधे साल) का वक्त पूरा हो चुका है। सत्ता के गलियारों में चेहरे बदले, राजनीतिक समीकरण बदले, लेकिन क्या आम बिहारियों की तकदीर बदली? क्या शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, पलायन की स्थिति बदली?
चुनाव के समय बड़े-बड़े संकल्प पत्र जारी किए गए थे, बड़े-बड़े दावे और वादे हुए थे। लेकिन आज 6 महीने बाद धरातल पर सन्नाटा क्यों है? जनता पूछ रही है कि वादों की जो फाइलें बंद कमरों में धूल फांक रही हैं, वे बाहर कब आएंगी?
1 करोड़ रोजगार और 50 लाख पक्के मकानों का क्या हुआ?
चुनाव में वादा था कि 5 साल में 1 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा होंगे और गरीबों को 50 लाख नए पक्के मकान मिलेंगे। इन 6 महीनों में कितने युवाओं को नए सरकारी रोजगार मिले और कितने पक्के मकानों की नींव रखी गई? इसका डेटा कहाँ है? उल्टा एईडीओ परीक्षा से जो नौकरी मिलनी थी वो परीक्षा भी पेपर लीक के चलते रद्द हो गई।
125 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा सिर्फ कागजी?
गरीब परिवारों को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की गई लेकिन उससे ऊपर की खपत पर बिजली की दर बढ़ा दी गई और पीक टाइम में दरों को और अधिक बढ़ा दिया गया।
'कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि' पर चुप्पी क्यों?
किसानों की सालाना राशि को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये करने का वादा था। इस 6 महीने के कार्यकाल में कितने किसानों के खातों में यह बढ़ी हुई राशि पहुंची?
'सीतापुरम' और पर्यटन के बड़े वादों का स्टेटस क्या है?
पुनौरा धाम को 'सीतापुरम' के रूप में विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी बनाने और मुजफ्फरपुर, गया, सहरसा, पूर्णिया जैसे शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी का वादा करने वाली सरकार ने इन 6 महीनों में इसके लिए कितना बजट जारी किया और कितना काम शुरू हुआ?
"चेहरे बदलने से नहीं, काम बदलने से राज्य बदलता है!"
शुरुआत के 6 महीने ही तो सरकार के काम की दिशा तय करते हैं। अगर शुरुआती 6 महीनों में ही नीति और नीयत सुस्त है, तो 5 साल का रोडमैप कैसे पूरा होगा?
हमारी मांग: 'रिपोर्ट कार्ड' जारी करे सरकार!
हम बिहार की जनता की तरफ से सरकार और सत्ता में बैठे नीति-नियंताओं से मांग करते हैं कि वे इधर-उधर की राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय:
इन 6 महीनों में किए गए कार्यों की एक आधिकारिक सूची (White Paper/Report Card) जनता के सामने जारी करें।
जनता को बताएं कि संकल्प पत्र के वादों को पूरा करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
बिहार के युवाओं, किसानों और महिलाओं को खोखले आश्वासनों की नहीं, धरातल पर दिखने वाले 'काम' की जरूरत है!
आप क्या सोचते हैं? क्या आपके क्षेत्र में इन 6 महीनों में कोई बड़ा बदलाव दिखा है? अपनी राय कमेंट में जरूर दें और इस आवाज़ को बुलंद करने के लिए शेयर करें।