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*पर्यावरण संरक्षण का भारतीय दर्शन: सनातन परंपरा ही है ग्लोबल वार्मिंग का स्थायी समाधान*जितेंद्र कुमार सिंहा /पटना/ 07 जू...
07/06/2026

*पर्यावरण संरक्षण का भारतीय दर्शन: सनातन परंपरा ही है ग्लोबल वार्मिंग का स्थायी समाधान*

जितेंद्र कुमार सिंहा /पटना/ 07 जून 2026 :: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहाँ पूरी दुनिया तकनीकी समाधान और सरकारी नीतियों पर मंथन कर रही है, वहीं भारतीय सनातन संस्कृति का पर्यावरणीय दर्शन एक नई और स्थायी दिशा प्रदान कर रहा है। पटना के वरिष्ठ लेखक जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने अपने लेख के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की रक्षा केवल पौधों के रोपण से नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर प्रकृति के प्रति सम्मान जागृत करने से होगी।

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:
*​पर्यावरण प्रदूषण का असली कारण 'आंतरिक मन' का प्रदूषण है।*
*​ऋग्वेद का भूमि सूक्त*: पृथ्वी संसाधनों का भंडार नहीं, माता है।

*​तकनीकी समाधान के साथ नैतिक और आध्यात्मिक चेतना का विकास अनिवार्य।*
*​भारतीय पर्व और संस्कृति*: प्रकृति के संरक्षण की वैज्ञानिक व्यवस्था।
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*​प्रकृति*: संसाधन नहीं, देवत्व का स्वरूप*

लेखक जितेंद्र कुमार सिंहा ने इस बात पर जोर दिया गया है कि आधुनिक विज्ञान जिस जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जूझ रहा है, उसका समाधान हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही ढूंढ लिया था। सनातन संस्कृति में पृथ्वी को 'माता' (माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः), नदियों को मातृस्वरूप और वृक्षों को देवताओं का निवास मानकर उनके प्रति श्रद्धा का भाव विकसित किया गया है। यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के साथ सह-अस्तित्व की एक वैज्ञानिक जीवन पद्धति है।

*​मन का प्रदूषण ही पर्यावरण असंतुलन का मूल*

​लेख का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 'आंतरिक पर्यावरण' की अवधारणा है। जितेन्द्र कुमार सिन्हा का तर्क है कि बाह्य प्रदूषण (वायु, जल, मृदा) का मूल कारण मानव मन का प्रदूषण है। लालच, अहंकार, स्वार्थ और अत्यधिक उपभोग की मानसिकता ने ही प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है। जब तक मनुष्य का मन सात्विक और निर्मल नहीं होगा, तब तक बाहरी तौर पर किए गए कोई भी अभियान स्थाई परिणाम नहीं दे पाएंगे।

*​संस्कृति और जीवनशैली का संबंध*

​भारतीय संस्कृति के पर्व—जैसे छठ, वट सावित्री, तुलसी विवाह और गोवर्धन पूजा—को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने वाला बताया गया है। लेखक का मानना है कि:

*​संयमित जीवन*: अनावश्यक उपभोग पर अंकुश लगाना ही प्रकृति का सबसे बड़ा संरक्षण है।
*​आध्यात्मिक चेतना*: 'ईशावास्यमिदं सर्वम्' (इस जगत में कण-कण में ईश्वर व्याप्त है) का भाव मन में आने पर हिंसा और शोषण स्वतः समाप्त हो जाता है।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी: तकनीकी समाधान से परे, आत्मिक चेतना का जागरण*🌹

​पर्यावरण आज एक गंभीर संकट है, लेकिन इस संकट का कारण केवल उद्योग या मशीनें नहीं हैं, बल्कि वे विचार हैं जिन्होंने प्रकृति को 'भोग की वस्तु' बना दिया है। जितेन्द्र कुमार सिन्हा का यह लेख हमें पुनः अपनी जड़ों की ओर लौटने का आह्वान करता है। तकनीकी समाधान हमें कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं, लेकिन पृथ्वी का भविष्य केवल उसी समय सुरक्षित होगा जब हम पुनः प्रकृति को 'माता' मानकर उसके प्रति कृतज्ञता का भाव अपनाएंगे। यह लेख 'पर्यावरण दिवस' को केवल एक औपचारिकता से ऊपर उठाकर 'जीवन दर्शन' बनाने की प्रेरणा देता है।

​ 🌹 #सूचनाएवंजनसंपर्कविभागबिहार

*साहिबगंज जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप: सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद ने NALSA और मानवाधिकार आयोग का खटखटाया दरवाजा* रविंद्र...
07/06/2026

*साहिबगंज जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप: सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद ने NALSA और मानवाधिकार आयोग का खटखटाया दरवाजा*

रविंद्र कुमार संपादक/​साहिबगंज/07जून 2026 :: चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण-पशु प्रेमी सैयद अरशद नसर ने साहिबगंज जेल प्रशासन के विरुद्ध एक बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। अरशद ने जेल प्रशासन द्वारा सामान वापस न करने, दुर्व्यवहार और शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्षों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:
*जेल गेट पर जमा सामान वापस न करने का आरोप।*
*​15 मई को हुए दुर्व्यवहार की जांच और सीसीटीवी फुटेज की मांग।*
*​झारखंड के जेलों में व्याप्त कुव्यवस्था के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू।*
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*​प्रमुख मांगें और आरोप*

​सैयद अरशद ने शुक्रवार को भेजे गए पत्र में साहिबगंज जेल प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया है:

*​सामान की वापसी*: 13 दिसंबर 2025 को मधुपुर जेल स्थानांतरण के दौरान साहिबगंज जेल गेट पर जमा की गई उनकी नगद राशि, मुलाकाती सामान, मेडिकल रिपोर्ट और बंदी आवेदन पत्र अभी तक वापस नहीं किए गए हैं।
*​सीसीटीवी फुटेज की मांग*: 15 मई 2026 को जेल गेट पर कारा कर्मियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार और बदसलूकी की घटना का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि भविष्य में इसे साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
*​उच्चस्तरीय जांच*: मामले में दोषी कारा पदाधिकारी, कर्मी और कक्षपालों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग मुख्यमंत्री, डीजीपी, लोकायुक्त और गृह विभाग के उच्चाधिकारियों से की गई है।

*​जेल प्रशासन में हलचल, बंदियों में उम्मीद*

​अरशद द्वारा लगातार दूसरी बार (इससे पूर्व 23 मई को) पत्राचार करने और इसे एक बड़े 'अभियान' के रूप में पेश करने से साहिबगंज और मधुपुर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। दूसरी ओर, जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से पीड़ित अन्य बंदियों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं में इस कदम से न्याय की उम्मीद जगी है। अरशद ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें उनका सामान वापस नहीं मिल जाता और उत्पीड़न के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​जेल सुधारों पर देश भर में बहस जारी है, लेकिन झारखंड की कई जेलों से आ रही ऐसी खबरें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करती हैं। एक नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता के साथ जेल गेट पर सामान का जब्त होना और दुर्व्यवहार की घटनाएं कारागार नियमावली का सीधा उल्लंघन हैं। यह मामला मात्र एक व्यक्तिगत सामान की वापसी का नहीं है, बल्कि 'मानवीय गरिमा' और 'कानूनी अधिकारों' की रक्षा का है। यदि न्यायिक हिरासत में रहने वाले बंदियों के साथ इस तरह का व्यवहार होता है, तो यह सुशासन के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। उच्चाधिकारियों को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लें और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई कर जेल की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाएं।
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*बिहार के शिल्पी डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को क्यों मिला उपेक्षा का इनाम? राष्ट्र-निर्माताओं के सम्मान पर साहित्यकार रविंद्र...
07/06/2026

*बिहार के शिल्पी डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को क्यों मिला उपेक्षा का इनाम? राष्ट्र-निर्माताओं के सम्मान पर साहित्यकार रविंद्र कुमार रतन ने अपनी लेखनी से किये तीखे सवाल*

रविंद्र कुमार,संपादक/​हाजीपुर /07 मई 2026 ::​ भारत की सभ्यता, संस्कृति और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा बिहार आज एक बार फिर अपने उन 'महान नायकों' को याद कर रहा है, जिन्होंने राज्य के अस्तित्व और विकास के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। रवीन्द्र कुमार रतन (सेनानी-सदन, हाजीपुर) द्वारा रचित लेख बिहार की गौरवगाथा के साथ-साथ उन कड़वे सवालों को भी रेखांकित करता है, जो राज्य की कृतघ्नता पर चोट करते हैं।
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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:
*बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की पुनरावृत्ति।*
*​राज्य के गठन और विकास में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का अतुलनीय व्यक्तिगत योगदान।*
*​भारत रत्न से वंचित रखना बिहार की राजनीति और समाज पर प्रश्नचिह्न।*
*​नई पीढ़ी को पूर्वजों के त्याग से प्रेरणा लेने का आह्वान।*

*​विकास का आधार और गौरवशाली अतीत*
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रविंद्र कुमार रतन के ​लेख में उल्लेख है कि 22 मार्च 1912 को अस्तित्व में आया बिहार केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि ज्ञान और करुणा की जन्मस्थली है। प्राचीन मगध की राजनीति, मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक दक्षता, बुद्ध का मध्यम मार्ग, महावीर की अहिंसा और नालंदा-विक्रमशिला की ज्ञान परंपरा ने बिहार को वैश्विक पहचान दिलाई। आधुनिक बिहार भी वीर कुंवर सिंह, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और जयप्रकाश नारायण जैसे दिग्गजों की विरासत पर खड़ा है।

*​डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा का बलिदान और राज्य की कृतघ्नता*

​इस रिपोर्ट का सबसे मार्मिक पहलू डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा के योगदान की विवेचना है। लेख के अनुसार:
*​स्वयं की भूमि का दान*: राज्य निर्माण के समय जब जमीन सबसे बड़ी चुनौती थी, डॉ. सिन्हा ने अपनी निजी संपत्ति दान कर बिहार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया।
*​आधारभूत संरचना*: पटना में सिन्हा लाइब्रेरी और हवाई अड्डे के लिए जमीन और भवन उपलब्ध कराकर उन्होंने बिहार के आधुनिक विकास की नींव रखी।
*​कृतघ्नता का प्रश्न*: लेख में तीखा सवाल उठाया गया है कि देश के संविधान निर्माता डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और बिहार के जनक डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा जैसे महापुरुषों को 'भारत रत्न' से विभूषित न करना, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गलत संदेश है। जाति और वोट की राजनीति में उलझे समाज ने विकास पुरुष को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी : क्या हम अपने महापुरुषों के प्रति
कृतज्ञ हैं?*🌹

​इतिहास केवल पन्नों में दर्ज घटनाओं का नाम नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला आईना होता है। बिहार का इतिहास गौरवशाली है, लेकिन वर्तमान में महापुरुषों की अनदेखी करना एक वैचारिक पतन का संकेत है। डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने अपना घर-बार राज्य के निर्माण में लगा दिया, लेकिन आज उनकी स्मृति केवल कागजों तक सीमित दिखती है। लेख लेखक रवीन्द्र कुमार रतन की यह चिंता जायज है कि यदि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों को मरणोपरांत भी उचित सम्मान नहीं मिला, तो भविष्य में समाज सेवा के लिए कौन प्रेरित होगा? यह समय केवल विकास का संकल्प लेने का नहीं, बल्कि अपने उन 'शिल्पकारों' को पुनर्जीवित करने का है, जिन्होंने हमें यह गौरवशाली बिहार दिया है।

#सूचनाएवंजनसंपर्कविभागबिहार

*प्रकृति-राग के अमर गायक आचार्य कलक्टर सिंह 'केसरी' को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि*विजय सिंह /​पटना:: बिहार हिन्दी साहित्य...
07/06/2026

*प्रकृति-राग के अमर गायक आचार्य कलक्टर सिंह 'केसरी' को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि*

विजय सिंह /​पटना:: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में शुक्रवार को आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में 'प्रकृति-राग' के पुरोधा कवि और प्रख्यात शिक्षाविद आचार्य कलक्टर सिंह 'केसरी' को उनकी जयंती पर स्मरण किया गया। वक्ताओं ने उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य का 'स्वर्ण-कलश' बताते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की।

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:
*​प्रकृति के चितेरे*: केसरी जी को प्रकृति की सुषमा और सौंदर्य को काव्य में उतारने वाला 'अमर गायक' बताया गया।
*​युग-सेतु*: उन्हें छायावाद और उत्तर-छायावाद के काव्य-संसार का 'मिलन-बिन्दु' करार दिया गया।
*​बहुआयामी प्रतिभा*: केवल कवि ही नहीं, बल्कि समस्तीपुर महाविद्यालय के संस्थापक-प्राचार्य और विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनकी प्रशासनिक दक्षता को नमन किया गया।
*​साहित्यिक योगदान*: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो बार अध्यक्ष रहे केसरी जी के छंदोबद्ध गीतों को युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बताया गया।
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*​विस्तृत रिपोर्ट*

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि आचार्य कलक्टर सिंह 'केसरी' का व्यक्तित्व विशाल था। उन्होंने साहित्य, शिक्षा और प्रशासन—तीनों क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित किए। वे हिंदी साहित्य के मंदिर के ऐसे 'स्वर्ण-कलश' थे, जिस पर बिहार को सदैव गर्व रहेगा।
​राँची विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष (पूर्व) प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि केसरी जी का साहित्यिक अवदान कालजयी है। उनके मर्मस्पर्शी गीत आज भी पाठकों को प्रकृति के सौंदर्य से जोड़ते हैं। जयंती के अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, सदानन्द प्रसाद, बाँके बिहारी साव, डॉ. रणजीत कुमार, इंदु भूषण सहाय, चंदा मिश्र, सुनीता रंजन, प्रवीर कुमार पंकज और मनोज रंजन कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​आचार्य कलक्टर सिंह 'केसरी' का स्मरण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि साहित्य की उस समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जहाँ प्रकृति और संवेदना का संगम होता था। आज के मशीनी दौर में, जब हिंदी साहित्य अपनी जड़ों से दूर हो रहा है, केसरी जी का साहित्य नई पीढ़ी के लिए न केवल एक सीख है, बल्कि एक प्रेरणा भी है। उनकी जयंती का आयोजन इस बात को रेखांकित करता है कि साहित्य के प्रति समर्पित व्यक्तित्व कभी काल के गाल में विलीन नहीं होते, वे अपनी कृतियों के माध्यम से सदैव जीवंत रहते हैं।
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*पटना में 'राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग' की अहम बैठक: पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बनी ठोस रणनीति* जितेंद्...
07/06/2026

*पटना में 'राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग' की अहम बैठक: पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बनी ठोस रणनीति*

जितेंद्र कुमार सिंहा /​पटना | 06 जून, 2026​ :: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा, मान-सम्मान और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग' की एक उच्च स्तरीय बैठक पटना स्थित सर्किट हाउस में संपन्न हुई। आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक निशिकांत राय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संगठन के विस्तार और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर मंथन किया गया।

*​बैठक की मुख्य विशेषताएं*

*रणनीतिक समीक्षा*: संगठन की कार्यप्रणाली और वर्तमान गतिविधियों की गहन समीक्षा की गई। वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव साझा किए।
*​सुरक्षा का संकल्प*: बदलते दौर में पत्रकारों को मिल रही सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की गई। पत्रकारों के लिए विशेष 'सुरक्षा कानून' की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।

*​परिचय पत्र वितरण: कार्यक्रम के दौरान संगठन के प्रमुख
पदाधिकारियों को आधिकारिक परिचय पत्र प्रदान किए गए, जिसे संगठन के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का प्रतीक बताया गया।
*​सशक्तीकरण की पहल*: पत्रकारों को कानूनी सहायता, प्रशिक्षण और कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए आयोग ने नई योजनाओं पर काम करने का निर्णय लिया है।
*​प्रमुख उपस्थिति*: बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस बिपिन कुमार सिंह (राष्ट्रीय सलाहकार), रिटायर्ड आईपीएस वरुण कुमार सिन्हा (बिहार सलाहकार सह उत्तर प्रदेश प्रभारी), डॉ. प्रो. निशा कुमारी (राष्ट्रीय महासचिव) सहित आयोग के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

*​विस्तृत विवरण*

​बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय ने स्पष्ट किया कि आयोग का लक्ष्य केवल समस्याओं को उठाना नहीं, बल्कि उनका समाधान सुनिश्चित करना है। बैठक में इस बात पर सर्वसम्मति बनी कि पत्रकारों को निर्भीक होकर कार्य करने हेतु संगठनात्मक मजबूती आवश्यक है। सेवानिवृत्त अधिकारियों (आईएएस/आईपीएस) की उपस्थिति ने इस आयोग की गंभीरता को और अधिक प्रामाणिक बनाया है। वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में सदस्यता अभियान के साथ-साथ पत्रकारों के लिए कानूनी सुरक्षा घेरा और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

*​संपादकीय टिप्पणी*

​लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक स्वतंत्र और सुरक्षित पत्रकारिता अपरिहार्य है। 'राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग' द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है, क्योंकि आज के दौर में पत्रकारिता करना जोखिम भरा हो गया है। हालांकि, केवल परिचय पत्र या संगठन बनाना पर्याप्त नहीं है; आयोग की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह जमीनी स्तर पर पत्रकारों को प्रशासनिक और कानूनी संरक्षण दिलाने में कितनी प्रभावी भूमिका निभाता है। यदि यह आयोग पत्रकारों के लिए एक वास्तविक सुरक्षा कवच बन पाता है, तो यह लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा।
#लोकतंत्र_का_चौथा_स्तंभ #पत्रकार_सुरक्षा
#सूचनाएवंजनसंपर्कविभागबिहार

*"हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा बनकर रहेगी": बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार*विजय सिंह /​पटना, 6 जून 2026 :: बिहार हिन्द...
06/06/2026

*"हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा बनकर रहेगी": बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार*

विजय सिंह /​पटना, 6 जून 2026 :: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने एक स्वर में न्यायपालिका में हिन्दी के प्रयोग और राष्ट्रभाषा के रूप में इसकी प्रतिष्ठा पर जोर दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार ने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनने से कोई रोक नहीं सकता, इसके लिए चल रहे आंदोलनों को व्यापक जनसमर्थन की आवश्यकता है।
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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

*​न्यायिक आदेश पर जोर*: उच्च न्यायालय में हिन्दी के प्रयोग के लिए वर्ष 2019 में पारित पूर्ण पीठ के न्यायिक आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग।
*​अधिवक्ता-रत्न सम्मान*: विधि क्षेत्र में 50 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले 19 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को 'अधिवक्ता-रत्न' से अलंकृत किया गया।
*​साहित्य लोकार्पण*: विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सत्यप्रकाश तिवारी की पुस्तक 'मोमबत्ती से मशाल तक' का लोकार्पण।
*​प्रमुख मांग*: जनता की भाषा में न्याय की उपलब्धता, ताकि आम जनमानस का न्यायपालिका पर विश्वास अटूट बना रहे।
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​विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने लोकतंत्र की मजबूती में अधिवक्ता समाज के योगदान को याद करते हुए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सरदार पटेल और डॉ. भीमराव अंबेडकर का उदाहरण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद-348) और राजभाषा अधिनियम के तहत बिहार के राज्यपाल द्वारा 1972 में जारी अधिसूचना का पालन करना एक अनिवार्य कर्तव्य है।
​साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने चिंता जताते हुए कहा कि संवैधानिक शक्तियों के बावजूद हिन्दी को न्यायालय में अपना स्थान बनाने के लिए दशकों का संघर्ष करना पड़ रहा है। कार्यक्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता धर्मनाथ प्रसाद यादव ने कहा कि जब तक न्याय की भाषा 'जनभाषा' नहीं होगी, तब तक आम आदमी को न्याय का पूर्ण बोध नहीं हो सकता। समारोह में न्याय जगत के कई पूर्व न्यायाधीशों और प्रबुद्ध अधिवक्ताओं ने अपने विचार रखे। अंत में, 19 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को उनके दीर्घकालीन सेवा के लिए सम्मानित कर कार्यक्रम का समापन किया गया।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के लिए उसकी अपनी भाषा में न्याय का मिलना न केवल अधिकार है, बल्कि उसकी गरिमा का प्रतीक भी है। जब तक अदालती कार्यवाही एक ऐसी भाषा में होगी जिसे आम जनता न समझ सके, तब तक 'न्याय' की अवधारणा अधूरी रहेगी। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन और अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति का यह प्रयास सराहनीय है। यह मांग केवल भाषा प्रेम तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक सशक्त कदम है। अब समय आ गया है कि संवैधानिक आदेशों के व्यावहारिक कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर कर हिन्दी को न्याय की भाषा बनाया जाए।
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#सूचनाएवंजनसंपर्कविभागबिहार

*मुजफ्फरपुर प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड: राजीव रंजन प्रसाद ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की कार्यशैली की प्रशंसा की*रवि...
06/06/2026

*मुजफ्फरपुर प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड: राजीव रंजन प्रसाद ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की कार्यशैली की प्रशंसा की*

रविंद्र कुमार,संपादक/पटना/मुजफ्फरपुर/06 जून 2026 :: मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस दुखद हादसे के उपरांत बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार द्वारा मामले में संज्ञान लेने और घायलों के उपचार हेतु उठाए गए कदमों की वरिष्ठ नेता राजीव रंजन प्रसाद ने सराहना की है।
​राजीव रंजन प्रसाद ने मंत्री की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि, "संकट की इस घड़ी में स्वास्थ्य मंत्री का घायलों और उनके परिजनों के बीच पहुंचना जनसेवा के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक जनप्रतिनिधि की असली पहचान उनकी संवेदनशीलता और विपरीत परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता से ही होती है।"
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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:
*​प्रशासनिक तत्परता*: स्वास्थ्य मंत्री ने मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और सिविल सर्जन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
*​पीड़ितों को सहायता*: मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का प्रावधान।
​जांच का वादा: घटना के कारणों का पता लगाने के लिए व्यापक जांच के निर्देश, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई।
*​सहानुभूति और समर्थन*: घायलों के बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष निगरानी।
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🌹*​अग्निकांड के बाद राहत और बचाव के प्रयास:*🌹

हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने घायलों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं अस्पतालों में जाकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग ने मृतकों के परिजनों के लिए चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा के साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के भी आदेश दिए हैं।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​मुजफ्फरपुर अग्निकांड जैसे हादसे राज्य की स्वास्थ्य अवसंरचना और निजी अस्पतालों के सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का घटनास्थल पर पहुंचना और पीड़ित परिवारों को सांत्वना देना एक सकारात्मक कदम है, परंतु जनमानस की अपेक्षा अब इस बात पर टिकी है कि जांच के उपरांत दोषियों पर कैसी कार्रवाई होती है। साथ ही, भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा ऑडिट और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक चुनौती होगी। नेतृत्व की परीक्षा केवल संकट के समय पहुँचने में नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाने में है।
​ #सूचनाएवंजनसंपर्कविभागबिहार

*बिहार में 'स्वास्थ्य व्यवस्था' पर सियासत गरमाई: मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बहाने राजद का सरकार पर हमला*रविंद्र कुमार,संपाद...
06/06/2026

*बिहार में 'स्वास्थ्य व्यवस्था' पर सियासत गरमाई: मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बहाने राजद का सरकार पर हमला*

रविंद्र कुमार,संपादक/​पटना /06 जून 2026 ::​ ​बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक निजी अस्पताल में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इस घटना के बाद बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार को 'संवेदनहीन' करार देते हुए आरोप लगाया कि निजी अस्पतालों को फलने-फूलने का संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों की स्थिति बदहाल है।
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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

*​सुरक्षा मानकों का घोर अभाव*: राजद प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि राज्य में संचालित 200 से अधिक निजी अस्पतालों में से केवल 80 के पास फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानक उपलब्ध हैं। शेष 120 अस्पताल बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मरीजों की जान जोखिम में डालकर चलाए जा रहे हैं।
*​स्वास्थ्य मंत्री की 'गंभीरता' पर सवाल*: श्री मंडल ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुजफ्फरपुर में मरीज आग में झुलस रहे थे, तब स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली में थे। उन्होंने इस घटना पर संवेदना जताना भी जरूरी नहीं समझा। विपक्ष और मीडिया के दबाव के बाद ही वे पटना लौटे, लेकिन पीड़ितों से मिलने नहीं गए।
*​मुआवजे की मांग*: राजद ने मृतकों के आश्रितों को अविलंब 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है।
*​सरकारी अस्पतालों की बदहाली*: पार्टी ने सरकार से सरकारी अस्पतालों में आईसीयू, जांच (एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड) और अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को अनिवार्य रूप से बहाल करने की मांग की है।
*​सत्ता संरक्षण का आरोप*: राजद का आरोप है कि निजी अस्पतालों से 'लाभ' लेने के कारण ही सरकार उन पर लगाम नहीं लगा रही है।
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🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹
​मुजफ्फरपुर की यह घटना केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि बिहार की लचर स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था का प्रतिबिंब है। एक तरफ जहां राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का दावा करती है, वहीं निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी यह दर्शाती है कि आम जनता की जान को कितना तुच्छ समझा जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभालने के शुरुआती दिनों में ही यह घटना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है। केवल मुआवजे की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है; राज्य के हर निजी अस्पताल का फायर और सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करना और सरकारी चिकित्सा ढांचे को सुदृढ़ करना ही भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने का एकमात्र मार्ग है।
​ #सूचनाएवंजनसंपर्कविभागबिहार

*भारत-म्यांमार साझेदारी का नया युग: सामरिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर बनी सहमति*जितेंद्र कुमार सिन्हा /पटना/​नई दिल्ली/0...
06/06/2026

*भारत-म्यांमार साझेदारी का नया युग: सामरिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर बनी सहमति*

जितेंद्र कुमार सिन्हा /पटना/​नई दिल्ली/06 :: भारत और म्यांमार के द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित हुआ है। म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की हालिया भारत यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई विस्तृत वार्ता ने दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा प्रदान की है। व्यापार, रक्षा, और सुरक्षा के साथ-साथ एआई (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग का निर्णय दोनों देशों की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:
*​रणनीतिक वार्ता*: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग के बीच रक्षा, निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य पर गहन चर्चा।
*​सुरक्षा का संकल्प*: म्यांमार ने भारत को आश्वस्त किया कि उनकी धरती का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के विरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा।
*​एक्ट ईस्ट नीति का आधार*: म्यांमार के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंच को और सुदृढ़ करने की योजना।
*​तकनीकी सहयोग*: एआई, साइबर सुरक्षा और डिजिटल शासन में भारत म्यांमार की तकनीकी क्षमता बढ़ाएगा।
*​कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स*: कलादान मल्टी-मॉडल परियोजना और त्रिपक्षीय राजमार्ग को गति देने पर सहमति।
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🌹*​प्रमुख सहयोग क्षेत्र*🌹

*​सीमा सुरक्षा*: संयुक्त गश्त और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान से अवैध तस्करी और सीमा पार अपराधों पर नकेल कसी जाएगी।
*​व्यापार और अर्थव्यवस्था*: भारत का उपभोक्ता बाजार और म्यांमार के खनिज संसाधनों का समन्वय दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी होगा।
*​स्वास्थ्य और शिक्षा*: भारतीय विशेषज्ञता से म्यांमार के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ किया जाएगा, साथ ही उच्च शिक्षा में संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम शुरू होंगे।
*​डिजिटल भविष्य*: एआई (AI) का उपयोग स्मार्ट कृषि, ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान को सरल बनाने में किया जाएगा।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​भारत और म्यांमार का जुड़ाव केवल भूगोल की समानता नहीं, बल्कि साझा इतिहास और भविष्य की आकांक्षाओं का मेल है। म्यांमार का 'एक्ट ईस्ट नीति' का केंद्रीय स्तंभ होना भारत के लिए भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुरक्षा के मोर्चे पर म्यांमार का स्पष्ट आश्वासन और आर्थिक विकास के लिए साझा दृष्टिकोण दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में एक नए आर्थिक गलियारे के द्वार खोल सकता है। हालांकि, आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, यदि दोनों देश तय समय-सीमा में इन परियोजनाओं को क्रियान्वित करते हैं, तो यह न केवल पूर्वोत्तर भारत के विकास को पंख देगा, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का एक नया मॉडल पेश करेगा।

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*पटना हाईकोर्ट को मिली पहली महिला चीफ जस्टिस: जस्टिस मीनाक्षी मदन राय को राज्यपाल ने दिलाई शपथ*रविंद्र कुमार,संपादक/​पटन...
06/06/2026

*पटना हाईकोर्ट को मिली पहली महिला चीफ जस्टिस: जस्टिस मीनाक्षी मदन राय को राज्यपाल ने दिलाई शपथ*

रविंद्र कुमार,संपादक/​पटना /06जून 2026 ::​ न्यायपालिका के इतिहास में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। सिक्किम हाईकोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस मीनाक्षी मदन राय ने आज, 5 जून 2026 को पटना हाईकोर्ट के 48वें मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। बिहार लोक भवन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में राज्य के माननीय राज्यपाल ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।
​जस्टिस मीनाक्षी मदन राय का पटना हाईकोर्ट की कमान संभालना न केवल बिहार के लिए, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक गौरवमयी क्षण है। वे सिक्किम से आकर किसी अन्य राज्य के हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला हैं।
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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:
​*​ऐतिहासिक नियुक्ति*: जस्टिस मीनाक्षी मदन राय पटना हाईकोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं।
*​शपथ ग्रहण*: बिहार लोक भवन में राज्यपाल की उपस्थिति में 48वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली।
*​सिक्किम का गौरव*: पूर्वोत्तर भारत से देश के प्रमुख उच्च न्यायालयों में प्रतिनिधित्व करने वाली विशिष्ट महिला न्यायाधीश।
*​समृद्ध अनुभव*: सिक्किम ज्यूडिशियल सर्विस से लेकर सिक्किम हाईकोर्ट की पहली महिला जज और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तक का लंबा सफर।
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🌹*​जीवन और शिक्षा: एक प्रेरणादायक यात्रा*🌹

​जस्टिस मीनाक्षी मदन राय का जन्म 12 जुलाई 1964 को हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गंगटोक के तथानगचेन स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने दार्जिलिंग के प्रतिष्ठित 'डाउहिल स्कूल' और 'ताशी नामग्याल एकेडमी' से अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण की। उच्च शिक्षा के लिए वे दिल्ली आईं, जहाँ उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के 'लेडी श्रीराम कॉलेज' से राजनीति विज्ञान (ऑनर्स) में स्नातक किया और 'कैंपस लॉ सेंटर' से कानून (LLB) की डिग्री हासिल की।

🌹*​करियर के मुख्य पड़ाव*🌹

​1990: सिक्किम ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुईं।
​प्रशासनिक भूमिका: सिक्किम हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल के रूप में अपनी प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया।
​15 अप्रैल 2015: सिक्किम हाईकोर्ट की पहली महिला जज के रूप में पदोन्नत हुईं।
​नेतृत्व: अपने कार्यकाल के दौरान कई बार सिक्किम हाईकोर्ट की कार्यवाहक (एक्टिंग) मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी निभाई।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की पटना हाईकोर्ट में नियुक्ति महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश की न्यायिक प्रणाली में समावेशिता और लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। बिहार जैसे बड़े राज्य के हाईकोर्ट में एक ऐसी न्यायाधीश का आना, जिन्होंने अपनी कार्यक्षमता और निष्पक्षता से सिक्किम में पहचान बनाई है, न्यायपालिका में आम जनता का भरोसा और बढ़ाएगा। कानून के प्रति उनकी गहरी समझ और प्रशासनिक अनुभव निश्चित रूप से पटना हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली को नई गति और दृष्टि प्रदान करेंगे। हम उनके सफल कार्यकाल की कामना करते हैं।

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